दुनिया की वो सबसे बड़ी रसोई जहां हर घंटे बनती हैं 25 हजार रोटियां, लाखों लोग खाते हैं मुफ्त खाना

NewsCode | 23 April, 2018 6:28 PM

सामुदायिक रसोई के तौर पर अमृतसर के स्वर्ण मंदिर स्थित गुरु रामदासजी लंगर भवन कई मायने में बेमिसाल है।

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अमृतसर। जाति, वर्ग, लिंग व धर्म के दायरे से ऊपर उठकर समता की मिसाल देखनी हो तो अमृतसर के हरमंदिर साहिब का लंगर वाकई दुनिया में एक अनूठा उदाहरण होगा। दुनिया में सबसे बड़ी सामुदायिक रसोई के तौर पर अमृतसर के स्वर्ण मंदिर स्थित गुरु रामदासजी लंगर भवन कई मायने में बेमिसाल है।

आमतौर पर यहां एक लाख लोगों का भोजन तैयार होता है और सभी धर्मो, जातियों, क्षेत्रों, देशों सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक वर्ग के लोग यहां भोजन करते हैं, जिनमें बच्चों से लेकर बूढ़े शामिल होते हैं।

लंगर के वरिष्ठ प्रभारी वजीर सिंह ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “यहां पूरे साल अहर्निश यानी दिन-रात चौबीसों घंटे लंगर जारी रहता है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। लंगर की शुरुआत सिख धर्म के प्रवर्तक गुरु नानक देव ने की थी। नानक देव ही सिख धर्म के प्रथम गुरु थे। उनके बाद के गुरुओं ने लंगर की पंरपरा को आगे बढ़ाया।”

नानक देव का जन्म 1469 ईसवी में ननकाना (पाकिस्तान) में हुआ था।

दिन हो या रात यहां हर समय श्रद्धालुओं का जमघट लगा रहता है, जो स्वेच्छा से लंगर में सेवा करने को तत्पर रहते हैं। यहां सेवा कार्य को गुरु का आशीर्वाद समझा जाता है। लंगर में हाथ बंटाने को सैकड़ों स्वयंसेवी तैयार रहते हैं।

Amritsar Golden Temple kitchen is World's largest community kitchen | NewsCode - Hindi News

लंगर में तैयार भोजन रोजाना तीन बार अमृतसर में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) द्वारा संचालित दो अस्पतालों में भेजा जाता है। खासतौर से उस वार्ड में भोजन जरूर भेजा जाता है, जहां मानसिक रोगों के मरीजों और नशीली दवाओं के आदी लोग उपचाराधीन अस्पताल में भर्ती होते हैं। एसपीजीसी के पास सभी सिख गुरुद्वारों के संचालन का दायित्व है।

वजीर सिंह ने कहा, “हमारे पास करीब 500 स्वयंसेवी कार्यकर्ता हैं। लोग यहां अत्यंत श्रद्धा के साथ रोज संगत में शामिल होते हैं। पूरे पंजाब से ट्रकों व ट्रैक्टर ट्रॉलियों में लोग यहां पहुंचते हैं। इसके अलावा विभिन्न प्रांतों व देशों के लोग भी यहां लंगर में सेवा प्रदान करने के लिए आते हैं। स्थानीय निवासी वर्षों से इस सेवा कार्य में हिस्सा ले रहे हैं। महिलाएं व पुरुष सभी अपनी सरकारी व निजी नौकरियों से समय निकालकर यहां अपनी सेवा देने आते हैं, उनमें सभी धर्मो व जातियों के लोग शामिल होते हैं। हम स्नेह से सबका स्वागत करते हैं।”

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लंगर की पूरी सामग्री शाकाहारियों के लिए होती है। लंगर के भोजन में दाल, चावल, चपाती, अचार और एक सब्जी शामिल होते हैं। इसके साथ मिष्ठान्न के तौर पर खीर होती है। सुबह में चाय लंगर होता है, जिसमें चाय के साथ मठरी होती है।

श्रद्धालु लंगर भवन में लगे गलीचे पर कतार में बैठकर भोजन करते हैं। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए एसजीपीसी के स्वयंसेवी एक बार में सिर्फ 100 लोगों को प्रवेश की अनुमति देते हैं। पूरी सावधानी से रोजाना पूरी व्यवस्था का संचालन किया जाता है।

लंगर के प्रभारी गुरप्रीत सिंह ने आईएएनएस को बताया, “पूरी कवायद बहुत बड़ी है, लेकिन परमात्मा की कृपा से यह कार्य अनवरत चलता रहता है। हम 100 कुंटल चावल और प्रति कुंटल चावल पर 30-30 किलोग्राम से अधिक दाल व सब्जियों का उपयोग रोज करते हैं। रसोई तैयार करने में 100 से अधिक एलपीजी सिलिंडर की खपत रोज होती है। इसके अलावा सैकड़ों किलोग्राम जलावन का भी इस्तेमाल किया जाता है। यही नहीं, 250 किलोग्राम देसी घी की भी खपत है। हमारे पास स्टील की तीन लाख से अधिक थालियां हैं। हम रोजाना 10 लाख लोगों को यहां भोजन परोस सकते हैं।”

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एसजीपीसी के पदाधिकारियों ने बताया कि अमृतसर और आस-पास के 30,000-35,000 लोग रोज गुरुद्वारा पहुंचते हैं और तीन वक्त लंगर में शामिल होते हैं। इनमें ज्यादातर दूसरे प्रदेशों के आप्रवासी और गरीब लोग हैं, जो खुद भोजन का जुगाड़ नहीं कर पाते हैं।

एसजीपीसी के सूचना कार्यालय के पदाधिकारी अमृत पाल सिंह ने कहा, “बिना किसी भेदभाव के हमारे दरवाजे सबके लिए खुले हैं। हम समानता की अवधारणा का अनुपालन करते हैं।”

चपाती बनाने वाली आठ मशीनें हैं, जिनसे हजारों चपाती बनाई जाती है। इसके अलावा महिलाएं व पुरुष स्वयंसेवी हाथ से भी चपाती बनाते हैं। स्टील की लाखों थालियां, ग्लास व चम्मच हैं, जिनका उपयोग यहां श्रद्धालु करते हैं और इनकी सफाई भी श्रद्धालु खुद स्वेच्छा से करते हैं। साथ ही, स्वयंसेवी कार्यकर्ता भी बर्तनों की सफाई में लगे रहते हैं।

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भठिंडा के श्रद्धालु रमेश गोयल ने कहा, “गुरुद्वारे में यह अध्यात्मिक आकर्षण का केंद्र है। यहां लंगर आपको कई तरह से संतुष्टि प्रदान करता है। यहां का अनुभव आपकी आत्मा पर प्रभाव छोड़ता है।”

बिहार के पटना से परिवार के साथ यहां पहुंचे तारिक अहमद ने कहा, “हम अक्सर इस गुरुद्वारे के बारे में सुनते थे, मगर आज मैंने जो अनुभव किया, वह जन्नत के जैसा है। इतनी बड़ी भीड़ के बावजूद ये लोग पूरे समर्पण व मानवता के साथ इस कार्य को अंजाम देते हैं। यह अकल्पनीय है।”

अमृतसर के युवा सिख श्रद्धालु अनूप सिंह अक्सर अपने दादा-दादी और माता-पिता के साथ गुरुद्वारा आते हैं।

उन्होंने कहा, “मुझे लंगर में लोगों को चपाती बांटना अच्छा लगता है। यह बेहद संतोषप्रद अनुभव है।”

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एसजीपीसी के मुख्य सचिव रूप सिंह ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “संपूर्ण कार्य निस्वार्थ रूप से पूरा होता है। यह बड़ा कार्य है, लेकिन सुचारु ढंग से संपन्न होता है। श्रद्धालुओं की आवश्यकताओं के अनुसार हम अपने कार्य में बदलाव भी करते रहते हैं।”

एसजीपीसी को सिख धर्म की लघु संसद के रूप में जाना जाता है। इसका प्रबंधन स्वर्ण मंदिर और पंजाब, हरियाणा व हिमाचल प्रदेश में संचालित गुरुद्वारों के माध्यम से किया जाता है। इसका सालाना बजट 1,100 करोड़ रुपये का है, जिसकी पूर्ति ज्यादातर गुरुद्वारों के दान से होती है।

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स्वर्ण मंदिर में हर साल देश-विदेश से लाखों पर्यटक व श्रद्धालु पहुंचते हैं। अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा में निवास करने वाले सिख प्रवासी बढ़चढ़ कर अपना योगदान देते हैं।

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(इनपुट : आईएएनएस)

रांची : मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना पर विशेष तीर्थयात्री रेलगाड़ी से जाएंगे अजमेर

NewsCode Jharkhand | 14 November, 2018 2:28 PM
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रांची। मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के तहत बीस नवंबर को हटिया रेलवे स्टेशन से दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल के दो सौ बीस चयनित तीर्थयात्री विशेष रेलगाड़ी से अजमेर शरीफ की यात्रा पर जाएंगे।

मुख्यमंत्री तीर्थ योजना के तहत रांची, खूंटी, लोहरदगा, सिमडेगा और गुमला जिले के मुस्लिम धर्मावलंबी तीर्थ यात्रा पर जा रहे हैं। इस संबंध में झारखंड पर्यटन विकास निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक द्वारा भेजे गये पत्र के आलोक में रांची जिले के उपायुक्त ने सभी जिले के प्रखंड विकास पदाधिकारियों को सुयोग्य, बीपीएल कार्डधारी वरिष्ठ मुस्लिम नागरिकों को चिन्हित कर उनका आवेदन भेजने का आदेश दिया है।

सरकार की महत्वकांक्षी मुख्यमंत्री तीर्थयोजना के तहत रांची जिले के 60, खुटी जिले के 40, लोहरदगा जिले  के 40, सिमडेगा जिले के 40 एवम् गुमला जिले के 40  मुस्लिम धर्मावलंबी तीर्थ दर्शन के लिए अजमेर शरीफ जाएगें।

उपरोक्त विषय को लेकर झारखण्ड टुरिजम डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिडेट राँची के प्रबंध निदेशक द्वारा भेजे गए पत्र के आलोक में उपायुक्त रांची ने सभी प्रखण्ड विकास पदाधिकारीयों को निर्देश जारी किया है। जिसमे  सुयोग्य बीपीएल धारी वरिष्ठ मुस्लिम नागरिकों को चयनित कर विहित प्रपत्र में आवेदन समर्पित करने को कहा है।

निर्देश में ये भी कहा गया है  कि विहित प्रपत्र में आवेदन के साथ भेजे जाने वाले नागरिकों का चिकित्सा  प्रमाण पत्र भी संलग्न करना जरूरी है। विदित हो  कि सूची  के आधार पर चयनित रांची जिले के 60  वरिष्ठ मुस्लिम धर्मावलंबी  नागरिकों को 20 नवम्बर 2018 को हटिया स्टेशन से तीर्थ दर्शन के लिए रवाना किया जाएगा।

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रांची : राजकीय कार्यक्रम में हंगामा करने पर 216 पारा शिक्षक बर्खास्त

NewsCode Jharkhand | 15 November, 2018 7:20 PM
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600 अन्य की बर्खास्तगी को लेकर कार्रवाई, गिरफ्तार कर पारा शिक्षकों को कैंप जेल में रखा गया

रांची। झारखंड राज्य स्थापना दिवस के दिन पूरे राज्य भर से राजधानी रांची में आए पारा शिक्षकों ने सरकारी कार्यक्रम को बाधा पहुंचाने की कोशिश की। साथ ही विधि व्यवस्था को अपने हाथ में लेकर पत्थरबाजी भी की।

विधि व्यवस्था में लगे  पुलिस प्रशासन के पदाधिकारियों, वरीय पुलिस अधीक्षक, सिटी पुलिस अधीक्षक  एवम् ड्यूटी पर तैनात पदाधिकारियों पर  पारा शिक्षकों  ने  हमला किया जिससे कई पुलिसकर्मी और  पदाधिकारी गंभीर रूप से जख्मी हुए।

पारा शिक्षकों द्वारा सरकारी कार्यक्रम में व्यवधान डालने, विधि व्यवस्था को तोड़ने एवम् सरकारी लोगो पर हमला करने की घटना को बेहद अशोभनीय एवम् गंभीर रूप से लेते हुए  वीडियो रिकॉर्डिंग एवम् कार्यक्रम स्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरा से  लिए फुटेज एवम् अन्य प्रमाणों के आधार पर  16 प्रखंड के कुल 216 पर शिक्षकों को बर्खास्त किया गया।

साथ ही लगभग 600 पारा शिक्षकों को जिला प्रशासन द्वारा बनाई गई खेलगांव एवम् रेड क्रॉस अस्थायी जेल में गिरफ़्तार कर रखा गया है। जिन पर सीसीटीवी कैमरा एवम्  वीडियो रिकॉर्डिंग से मिले प्रमाण के आधार पर बर्खास्त करने की कारवाई चल रही है।

अन्य जिलों के जिलाधिकारियों को भी यहां शामिल पारा शिक्षकों की सूची भेजी जा रही है जिसके आधार पर  चिन्हित कर अनुशासनात्मक कारवाई की प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है।  स्थापना दिवस एक राजकीय दिवस है जी सम्पूर्ण राजवसियो के लिए सम्मान एवम् गौरव  का दिन है।

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रांची : झारखंड स्थापना दिवस- संपूर्ण झारखंड खुले में शौच मुक्त घोषित, करीब 2100 को मिला नियुक्ति पत्र

NewsCode Jharkhand | 15 November, 2018 7:02 PM
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रांची। झारखंड राज्य स्थापना दिवस मना रहा है। राज्य स्थापना दिवस के मौके पर राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान में आयोजित मुख्य समारोह में मुख्यमंत्री ने संपूर्ण झारखंड को खुले में शौच से मुक्त किये जाने की घोषणा की। समारोह में राज्य के तीन जिलों देवघर, हजारीबाग और लोहरदगा को पूर्ण विद्युतीकृत किये जाने की घोषणा की गयी।

इस मौके पर अरबों रुपये की योजनाओं का शिलान्यास और उदघाटन के साथ ही परिसंपत्तियों का वितरण भी किया गया। समारोह में करीब 2100 लोगों को नियुक्ति पत्र का भी वितरण किया गया।

झारखंड स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री रघुवर दास ने राज्य की जनता को कई सौगात दी। रांची में आयोजित मुख्य समारोह में उन्होंने राज्य को खुले में शौच से मुक्त किये जाने की घोषणा की।  उन्होंने कहा कि स्वच्छता को लेकर लोगों की आदतों में भी अब बदलाव आया है।

मुख्यमंत्री ने हर घर तक बिजली पहुंचाने के अपने वायदों को पूरा करते हुए राज्य के तीन जिलों देवघर, लोहरदगा और हजारीबाग को पूर्ण रूप से विद्युतीकृत होने का भी ऐलान किया। इस दौरान श्री दास ने कहा कि वर्तमान सरकार  पूरी तरह से पारदर्शी तरीके से काम कर रही  है और अब तक इस पर एक भी भ्रष्टाचार के आरोप नहीं लगे है।

इस दौरान राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि देश के विकास में झारखंड का अहम योगदान है। उन्होंने कहा कि जनता को चुनी हुई सरकार से आकांक्षाएं होती है , जिसे पूरा करने में सरकार लगी है।

समारोह के दौरान अरबों रुपये की परिसंपत्तियों का वितरण किया गया और कई नई परियोजनाओं का शिलान्यास और उदघाटन भी हुआ। करीब 2100 लोगों के बीच नियुक्ति पत्र का वितरण और झारखंड और देश के विकास में अपनी भूमिका निभाने वाले लोगों को सम्मानित भी किया गया। जिला मुख्यालयों में भी परिसंपत्तियों का वितरण हुआ।

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