यूपी: कानून-व्यवस्था का बना मजाक, इलाहाबाद में रिटायर्ड दारोगा की पीट-पीटकर हत्या

NewsCode | 4 September, 2018 11:54 AM
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नई दिल्ली। यूपी के इलाहाबाद में एक रिटायर्ड दारोगा की सरेआम पीट-पीटकर हत्या करने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि जमीन विवाद में पड़ोसियों ने रिटायर्ड दारोगा अब्दुल समद खान पर जमकर लाठी-डंडे बरसाए। इस दौरान लोग वहां से आते-जाते रहे, लेकिन किसी ने दारोगा को बचाने की कोशिश नहीं की। इसके बाद घायल अवस्‍था में दारोगा को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

दारोगा को जिस वक्‍त सभी लोग मिलकर पीट रहे थे उस वक्‍त ये पूरी वारदात सीसीटीवी कैमरे में क़ैद हो गई है। बताया जा रहा है कि आरोपी पड़ोसी जुनैद अपराधिक प्रवृति का है और उसने रिटायर्ड दारोगा को जान से मारने की धमकी दी थी। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। पुलिस ने जुनैद और उसके दो साथियों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की है और आरोपियों की तलाश में जुट गई है। हालांकि अभी कोई भी आरोपी पुलिस की पकड़ में नहीं आया है।

आपको बता दें कि कुछ दिनों पहले आंध्र प्रदेश के नेल्लोर जिले में एक पुलिस स्टेशन पर बाहरी लोगों ने अचानक हमला बोल दिया था और सब इंस्पेक्टर और पुलिस कॉन्स्टेबल को पुलिस थाने के भीतर बुरी तरह से पीटा। बताया जा रहा है कि वे लोग इसलिए नाराज और गुस्से में थे क्योंकि सब इंस्पेक्टर ने तीन लोगों को रापुरु पुलिस स्टेशन पूछताछ के लिए बुलाया था और उन्हें पीटा था। हालांकि, पुलिस स्टेशन के भीतर पुलिसकर्मी को पीटने की घटना मोबाइल फोन में कैद हो गई।

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, नेल्लौर पुलिस थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक स्थानीय व्यक्ति को शराब पीकर गाड़ी चलाने के आरोप में गिरफ्तार किया था, जिसके बाद देर शाम इन लोगों ने पुलिस थाने पर हमला कर दिया। इस हमले में चार जवान घायल हो गए, जिसमे कांस्टेबल से लेकर इंस्पेक्टर भी शामिल हैं। घटना के बाद चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है।


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लातेहार : माओवादियों ने निर्माण कार्य में लगे मशीनों व वाहनों को किया आग के हवाले

NewsCode Jharkhand | 14 November, 2018 3:23 PM
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लातेहार। महुआडांड थाना क्षेत्र में नक्सली संगठन भाकपा-माओवादियों के एक हथियारबंद दस्ते ने बीती रात लोध गांव में पुल निर्माण कार्य में लगी मशीनों और वाहनों को आग के हवाले कर दिया।
मजदूरों ने बताया कि पचास-साठ की संख्या में आये अत्याधुनिक हथियारों से लैस माओवादियों ने मजदूरों को काम न करने की चेतावनी दी और मशीनों में आग लगा दी।
दरअसल महुआडांड शास्त्री चौक से लोध फॉल तक पथ निर्माण विभाग द्वारा चौवालीस करोड़ रूपये की लागत से सड़क चौड़ीकरण और पुलिया का निर्माण कराया जा रहा है।
पुलिस अनुमंडल पदाधिकारी ने इस घटना की पुष्टि करते हुए कहा है कि नक्सलियों ने लेवी वसूलने की नियत से इस घटना को अंजाम दिया है। यह इलाका छत्तीसगढ़ की सीमा से लगा हुआ है।

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पलामू : अर्घ्य देने के लिए नहाने के क्रम में पानी में डूबने से अधेड़ की मौत

NewsCode Jharkhand | 14 November, 2018 8:24 PM
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पलामू। लेस्लीगंज तालाब में छठ पर्व पर अर्ध्य देने के लिए नहाने के दौरान डूबने से अधेड़ की मौत हो गयी। तीन से चार घंटे की मशक्कत के बाद तालाब से शव बाहर निकाला जा सका। शव की पहचान लेस्लीगंज निवासी कुंज बिहारी भुइयां (58वर्ष) के रूप में हुई है।

कुंज बिहारी भुइयां की पत्नी छठ व्रत की थी। सुबह करीब पांच बजे उदीयमान सूर्य के अर्ध्य लेने के लिए कुंज बिहारी तालाब में नहा रहा था। तालाब में इस पार से उस पार जाने के क्रम में कुंजबिहारी पानी की गहराई में समा गया। काफी देर तक जब उसका कुछ अता-पता नहीं चला तो उसकी खोजबीन शुरू की गयी। पूर्वाहन में उसका शव तालाब से बरामद किया जा सका।

कल तक छठ व्रत पर खुशी-खुशी भगवान सूर्य को अर्ध्य देने की तैयार में जुटा कुंजबिहारी के परिवार के सदस्यों को उसकी मौत की सूचना जैसे ही मिली, उनके बीच चीख-पुकार मच गयी। पत्नी और बच्चे दहाड़ मारकर रोने लगे।

सूचना मिलने पर लेस्लीगंज बीडीओ विजय प्रकाश मरांडी और थाना प्रभारी वीरेन मिंज मौके पर पहुंचे। बाद में गोताखोरों को बुलाकर तालाब में छानबीन की गयी। शव मिलने के बाद पुलिस ने उसे कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम सदर अस्पताल में कराया। कुंजबिहारी भुईयां के तीन लड़के व दो लड़कियां हैं, सभी शादीशुदा हैं।

मौके पर भाजपा नेता अमित उपाध्याय, लेस्लीगंज मुखिया धर्मेंद्र सोनी, कोट पंचायत मुखिया संतोष मिश्रा, तारकेश्वर पासवान सहित कई लोगों ने शव को निकलवाने में पहल की।

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कहीं समारोह तक ही सीमित न रह जाये स्थापना दिवस- योगेन्द्र प्रताप

NewsCode Jharkhand | 14 November, 2018 8:05 PM
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रांची। झाविमो के केन्द्रीय प्रवक्ता योगेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि भगवान बिरसा की धरती माने जाने वाला झारखंड आज अपनी 18वीं सालगिरह मना रहा है। कह सकते हैं कि आज हमारा झारखंड बालिग हो गया। झाविमो की ओर से सर्वप्रथम भगवान बिरसा को नमन।

हर साल सरकार स्थापना दिवस तो धूमधाम से मनाती है परंतु अफसोस यह आयोजन महज एक समारोह तक ही सीमित होकर रह जाता है। सरकार जो संकल्प लेती है, जिन योजनाओं की घोषनाएं या शिलान्यास करती है वह धरातल पर कितनी उतर पाती हैं, पूर्व की घोषनाओं का कितना लाभ जनमानस को मिला है, सरकार को कभी उसकी भी समीक्षा कर लेनी चाहिए।

2014 के बाद के भाजपा सरकार द्वारा 2015 से लेकर 2017 यानि तीन स्थापना दिवस के मौके पर की गयी घोषनाओं पर गौर डाला जाय तो उनमें से अधिकांशतः घोषनाएं हवा-हवाई ही साबित हुई है, कुछ धरातल पर उतरी भी तो बाद में उसका हश्र भी बुरा ही हुआ।

मुख्यमंत्री तो घोषणा इतनी कर चुके हैं कि अगर आधी भी सरजमीं पर उतर गई होती तो अब तक झारखंड समृद्ध हो गया होता। 2015 के समारोह में सीएम ने कहा था कि जनता राम-सीता है और वे हनुमान हैं। वे जनता के सेवक हैं तथा जनता और उनके बीच दूरी नहीं होगी।

अब जो सरकार अपने ही गृहनगर के दूसरे पायदान का दर्जा रखने वाले एक मंत्री से चार वर्षो में दूरी नहीं पाट सके, जनता की दूरी भला क्या पाटेंगे। पिछले तीन स्थापना दिवस के दौरान और भी कई बातें हुई।

झारखंड को निवेशकों की पहली पसंद बनाने, औद्योगिक घरानों के लिए एक लाख हेक्टेयर भूमि चिन्ह्ति करने की बात हुई। सरकार को श्वेत पत्र जारी कर बतानी चाहिए कि किन निवेशकों ने राज्य में कितने का निवेश किया है और किस उद्योग को कितनी जमीन आवंटित की गई तथा इससे जनता को क्या लाभ हो रहा है।

एयरपोर्ट से बिरसा चौक तक स्मार्ट सड़क, केन्द्र से 10000 करोड़ की सड़क निर्माण, जोहार योजना, मुख्यमंत्री विद्या लक्ष्मी योजना, जनता के लिए लांच किये 15 मोबाईल एप, कृषि रथ, बेरोजगारी व पलायन रोकने के लिए कौशल विकास योजना, 25 डाइविंग ट्रेनिंग सेंटर, 2017 गरीब कल्याण वर्ष, 37 नदियां जलमार्ग में विकसित की योजना, 108 एंबुलेंस, मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना, हरमू फ्लाईओवर आदि तमाम योजनाओं का आज क्या हश्र है।

मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा में 50 हजार से लेकर दो लाख तक निःशुल्क इलाज की बात है परंतु यहां रिम्स में महज 50 रूपये के लिए मौत हो रही है। एंबुलेंस के बिना मरीज मर रहे हैं। किसान आत्महत्या कर रहे हैं।

तमाम योजनाएं महज कागजी हैं परंतु सरकार केवल अपनी पीठ खुद थपथपाने की आदी हो चुकी है। झाविमो का मानना है कि राज्य अलग होने की सार्थकता तभी होगी जब राज्य की जनता वास्तव में खुशहाल होगी न कि केवल घोषनाओं से।

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