सरिया : अनुमंडल को जिला बनाने की मांग, 12 जून को झामुमो करेगा सरिया बंद

NewsCode Jharkhand | 26 May, 2018 7:30 PM
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विकास के लिए सरिया को करे जिला घोषित : त्रिभुवन मंडल

सरिया (गिरिडीह)। जिले के सबसे अधिक दूरी पर स्थित सरिया अनुमंडल को झारखंड सरकार नवसृजित (सरिया) जिला घोषित करे। झामुमो इसके लिए लगातार शुरू के दिनों से आंदोलन करती रही है। जिसमें स्थानीय लोगों ने भी बढ़-चढ़कर साथ दिया है।

उक्त बातें शनिवार को सरिया रेलवे कॉलोनी कॉलोनी में प्रेस वार्ता आयोजित कर झारखंड मुक्ति मोर्चा गिरिडीह जिला उपाध्यक्ष त्रिभुवन मंडल ने कहा। उन्होंने कहा कि आज सरिया प्रखंड के कई पंचायत के लोगों को जिला मुख्यालय से छोटी-से-छोटी काम कराने के लिए लगभग 100 से 105 किलोमीटर की दूरी तय करना पड़ता है। जिससे लोगों को अक्सर कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

वहीं झारखंड सरकार की कई महत्वाकांक्षी योजनाएं कई सुदूर पंचायतों के गांव तक पहुंच नहीं पाती है। इसलिए क्षेत्र के संपूर्ण विकास के लिए सरिया को अविलंब जिला घोषित किया जाना चाहिए।

उन्होंने बताया कि सरिया जिला बनने के लिए सारी जरूरतों को पूरा बताते हुए कहा कि भौगोलिक दृष्टिकोण से यह बगोदर, बिरनी, राजधनवार प्रखंड के मध्य स्थित है।

सरिया में हावड़ा-नई दिल्ली ग्रैंड कार्ड रेल मार्ग सरिया होकर गुजरती है। धनबाद रेल मंडल का महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन हजारीबाग रोड सरिया में स्थित है। जीटी रोड की दूरी सरिया से मात्र 13 किलोमीटर है।

रांची-देवघर-दुमका मुख्य मार्ग भी सरिया बाजार होकर गुजरती है। यहां महाविद्यालय, इंटर विद्यालय, प्लस टू स्कूल, हाई स्कूल, रेलवे के कई वरीय अधिकारियों के कार्यालय, पथ निर्माण विभाग कार्यालय, अनुमंडल मुख्यालय, प्रखंड मुख्यालय, कोनार सिंचाई विभाग के कई आवासीय क्वार्टर, सरिया में विद्युत स्टेशन, झारखंड सरकार के द्वारा प्रस्तावित पावर ग्रिड, रेलवे का पावर ग्रिड, दामोदर वैली कारपोरेशन विभाग का कार्यालय,  अंचल पुलिस मुख्यालय है।

यहां अनुमंडल पुलिस कार्यालय, भारतीय खाद्य निगम का गोदाम, हजारीबाग रोड रेलवे स्टेशन पर बड़े-बड़े स्टेशनों से सामान, मालवाहक ट्रेन के माध्यम से उतारने को लेकर रेक पॉइंट, हजारीबाग रोड रेलवे स्टेशन पर आरक्षित टिकट काउंटर की व्यवस्था होना, पेयजल आपूर्ति के लिए जलमीनार का होना, अनुमंडल स्तरीय विद्युत विभाग का कार्यालय जो कि विभाग के द्वारा अनुमोदित है, वन विभाग के रेंजर और फोरेस्टर कार्यालय है। इनके अलावा कई ऐसे संस्थान हैं जो सरिया को सुशोभित करते हुए नया जिला बनाने की सारी अहर्ताओं को पूरा करती है।

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उन्‍होंने कहा कि सरिया को जिला बनाने के लिए झामुमो के द्वारा सूबे के मुख्यमंत्री, राज्यपाल, मुख्य सचिव, संबंधित विभाग के मंत्री, उत्तरी छोटानागपुर आयुक्त, गिरिडीह उपायुक्त के नाम मांग पत्र भी सौंपा जाएगा। साथ ही सरिया को अविलंब जिला घोषित करने की मांग को लेकर आगामी 12 जून को सरिया में सांकेतिक बाजार बंद व सड़क जाम आंदोलन भी किया जाएगा।

प्रेस वार्ता के माध्यम से सरिया के सभी राजनीतिक दलों को एक मंच पर आकर “सरिया को जिला बनाओ” की मांग के आंदोलन में समर्थन भी मांगा गया है। प्रेस वार्ता में झामुमो नेता शिव शंकर मंडल, कृष्ण मुरारी पांडेय, मोतीलाल मंडल, रामचंद्र राम, विकास मंडल, साकिर अंसारी, दस्तगीर अंसारी सहित अन्य कई लोग उपस्थित थे।

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71 साल पहले ऐसे मना था देश का पहला स्‍वतंत्रता दिवस, देखें 15 अगस्‍त 1947 की दुर्लभ तस्‍वीरें

NewsCode | 15 August, 2018 10:14 AM
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नई दिल्ली। इस वर्ष हम 72वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं। आजादी के 71 साल पूरे हो रहे हैं तो मन में यह विचार भी आना स्वाभाविक है कि पहला स्वतंत्रता दिवस कैसे मनाया गया होगा और उस वक्त कैसा रहा होगा अपना देश? तस्वीरों में देखें 1947 में आजाद भारत की कुछ चुनिंदा तस्वीरें।

पहले स्वतंत्रता दिवस का आगाज पं जवाहरलाल नेहरू के 14 अगस्त की आधी रात की उद्घोषणा के साथ हुआ। लेकिन यह भी सच है कि इस बात की खबर मिलने के बाद देश के लोगों ने 15 अगस्त की सुबह ही जश्न मनाया था। यह तस्वीर 15 अगस्त की सुबह की कोलकाता की है जहां लोग गलियों चौराहों में निकलकर आजादी का जश्न मनाते दिख रहे हैं।


पहले स्वतंत्रता दिवस का संबोधन प्र‌थम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने आधी रात को किया लेकिन उनके प्रथम संबोधन के नाम से यह जो तस्वीर उपलब्‍ध है वह 14 अगस्त की शाम संविधान सभा को संबोधन करने की है।


तत्‍कालीन ब्रिटिश गवर्नर जर्नल लॉर्ड माउंटबेटन और भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू। 15 अगस्त 1947 को नई दिल्‍ली के इंडिया गेट पर तिरंगे को सेल्‍यूट करते हुए।


स्‍वतंत्रता दिवस सम्‍मेलन में भाग लेने पहुंचे हजारों लोग। ये सभी लोग नई दिल्‍ली के रासीना हिल पर एकत्रित हुए थे।


यह तस्वीर आजादी के 11 दिन पहले की है जिसमें भारत के अंतिम वॉयसराय लॉर्ड माउंटबेटन भारतीय नेताओं को सत्ता हस्तांतरण की तैयारी में लगे हैं।


सभी देशवासियों के लिए वो गर्व का पल था जब भारत की शान तिरंगा झंडा फहराया गया।


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शहीद जवान अौरंगजेब और मेजर आदित्य समेत इन जांबाजों को वीरता पुरस्कार

NewsCode | 15 August, 2018 10:01 AM
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नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में आतंकियों द्वारा अगवा कर हत्या किए गए राष्ट्रीय रायफल्स के शहीद जवान औरंगजेब को उनके शौर्य और बलिदान के लिए शांति काल का तीसरा सबसे बड़ा शौर्य पुरस्कार दिया जाएगा। मेजर आदित्य कुमार और राइफलमैन औरंगजेब समेत सशस्त्र बलों के 20 जवानों को स्वतंत्रता दिवस पर सम्मानित किया गया है।

गौरतलब है कि इसी साल 15 जून को ईद मनाने घर जा रहे औरंगजेब को आतंकवादियों ने अगवा करके उनकी बर्बरता से हत्या कर दी थी। गोलियों से छलनी औरंगजेब का शव पुलवामा जिले के गुस्सू इलाके में मिला था।

बता दें कि ईद की छुट्टी मनाने जा रहे औरंगजेब ने कैंप के बाहर से दक्षिण कश्मीर के शोपियां जाने के लिए टैक्सी ली थी। लेकिन रास्ते में कालम्पोरा गांव के पास आतंकवादियों ने उन्हें अगवा कर लिया था। टैक्सी ड्राइवर के सूचना देने के बाद पुलिस और सेना के संयुक्त दल को औरंगजेब का गोलियों से छलनी शव कालम्पोरा से करीब 10 किलोमीटर दूर गुस्सु गांव में मिला था। जम्मू-कश्मीर के पुंछ के रहने वाले औरंगजेब 4-जम्मू-कश्मीर लाइट इन्फेंटरी के शादीमार्ग (शोपियां) स्थित 44 राष्ट्रीय राइफल में तैनात थे।

वो हिज्बुल आतंकी समीर को 30 अप्रैल 2018 को ढेर करने वाले मेजर रोहित शुक्ला की टीम में शामिल थे। जांबाज औरंगजेब ने कई बड़े ऑपरेशनों को अंजाम दिया था. सेना के ऑपरेशनों में हिस्सा लेने के चलते आतंकियों ने उनको निशाना बनाया था।

वहीं, शौर्य चक्र पाने वाले मेजर आदित्य को 2017 में कश्मीर के बडगाम में एक आतंकवाद रोधी अभियान के दौरान ‘सावधानीपूर्वक योजना बनाने और बहादुर से कार्रवाई करने के लिए सम्मानित किया जाएगा। इसके अलावा सिपाही वी पाल सिंह को मरणोपरांत कीर्ति चक्र के लिए नामित किया गया है। दक्षिण कश्मीर के अलगर गांव में नवंबर 2017 में आतंकवाद रोधी अभियान में उनकी मौत हो गई थी।

इसके अलावा जम्मू कश्मीर के रहने वाले हेड कांस्टेबल शरीफ उद्दीन गैनी और मोहम्मद तफैल को प्रेसिडेंट पुलिस मैडल फॉर गैलेंट्री अवार्ड से सम्मानित किया गया है। इसके अलवा आठ सीआरपीएफ के जवानों को भी गैलेंट्री मेडल दिया जाएगा।

इसके साथ ही पानी के जहाज़ से दुनिया का चक्कर लगाने वाले अभियान में शामिल रही भारतीय नौसेना की छह महिला अधिकारियों को नौसेना मेडल दिया जाएगा।

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रांची : भारत का एक मात्र पहाड़ी मंदिर जहां राष्ट्रीय पर्व पर फहराया जाता है तिरंगा

NewsCode Jharkhand | 15 August, 2018 9:55 AM
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रांची । झारखंड की राजधानी रांची के पहाड़ी मंदिर की कहानी बेहद ही रोचक है। पहाड़ पर स्थित भगवान शिव का यह मंदिर देश की आजादी के पहले अंग्रेजों के कब्जें में था। हिंदुस्तान को दुनिया में मंदिरों का देश कहा जाता है। इनमें कुछ मंदिर अपनी खास वास्तुकला, मान्यता और पूजा के नियमों में अलग ही मायने रखते हैं। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर हम आपको ऐसे ही मंदिर के बारे में बता रहे हैं। जहां भगवान की भक्ति और धार्मिक झंडे के साथ राष्ट्रीय झंडे को भी फहराया जाता है।

पहाड़ी बाबा मंदिर का पुराना नाम टिरीबुरू था जो आगे चलकर ब्रिटिश हुकूमत के समय फांसी टुंगरी में परिवर्तित हो गया। क्योंकि अंग्रेजो के राज में देश भक्तों और  क्रांतिकारियों को यहां फांसी पर लटकाया जाता था। आजादी के बाद रांची में पहला तिरंगा धवज यही पर फहराया गया था। जिसे रांची के ही एक स्वतंत्रता सेनानी कृष्ण चन्द्र दास से फहराया था।

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उन्होंने यहां पर शहीद हुए देश भक्तों की याद व सम्मान में तिरंगा फहराया था, तभी से यह परम्परा बन गई की स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस को यहां पर तिरंगा फहराया जाता है। राष्ट्र ध्वज को धर्म ध्वज से ज्यादा सम्मान देते हुए उसे मंदिर के ध्वज से ज्यादा ऊंचाई पर फहराया जाता है। पहाड़ी बाबा मंदिर में एक शिलालेख लगा है जिसमें 14 अगस्त, 1947 को देश की आजादी संबंधी घोषणा भी अंकित है।

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