बड़ा सवाल : रांची में डेंगू व चिकनगुनिया ने खोला स्वास्थ्य विभाग व नगर निगम की पोल

NewsCode Jharkhand | 10 August, 2018 7:38 PM
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पहले से तैयारी नहीं किए जाने से फैली बीमारी, जिम्मेदार कौन ?

रांचीझारखंड स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ नगर निगम का इस बात का दावा फेल होता नजर आ रहा है कि दोनों विभागों के क्रियाकलाप सही तरीके से चल रहे हैं। सूबे की राजधानी के हिंदपीढ़ी और आसपास के इलाकों में डेंगू और चिकनगुनिया के मरीजों की संख्या में लगातार हो रहे इजाफे ने दोनों ही विभागों के पोल खोल दिए हैं।

एक तरफ स्वास्थ्य विभाग लगातार इस बात का दावा करता रहा है कि राज्य में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य के लिए तत्पर है, वहीं नगर निगम राजधानी के अपनी सफाई व्यवस्था को लेकर लाखों रूपए खर्च करने की बात कह रहा है लेकिन जहां डेंगू और चिकनगुनिया की बीमारी तेजी से फैल रही है, उसका सबसे बड़ा कारण बना है गंदगी।

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300 से अधिक लोग हैं बीमार

एक अगस्त को राजधानी के हिंदपीढ़ी इलाके में डेंगू और चिकनगुनिया फैलने का मामला  सामने आया था। उसके बाद लगातार मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। पिछले दो हफ्तों लगभग 500  मरीजों के ब्लड सैंपल की जांच रिम्स के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में की जा चुकी है। इसमें लगभग 300 लोगों में डेंगू या चिकनगुनिया के लक्षण पाए गए हैं। अभी दो सौ से अधिक लोगों का ब्लड सैंपल की रिपोर्ट आनी बाकी है। कई ऐसे भी मरीज पाए गए हैं, जिन्हें डेंगू और चिकनगुनिया दोनों ही बीमारी है।

कितना कारगर सिद्ध होगा स्वास्थ्य मंत्री का दौरा

सूबे के स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी के साथ-साथ कई अधिकारियों ने पूरे इलाके में जाकर वस्तुस्थिति का जायजा जरुर लिया है लेकिन सरकारी मशीनरी की तरफ से कोई ऐसा ठोस इंतजाम होता नजर नहीं आ रहा है, जिससे इस बीमारी को बढ़ने से रोका जा सके। अब मंत्री का दौरा कितना कारगर सिद्ध हो पाता है।

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मीडिया रिपोर्ट और स्थानीय स्वयंसेवी संगठनों की पहल के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच के लिए कई शिविर तो लगाने का काम शुरू किया है लेकिन सवाल यह भी खड़ा हो रहा है कि आखिर पहले से सफाई व्यवस्था को दुरुस्त क्यों नहीं रखा गया। क्या डॉक्टर इलाके के लोगों के घरों तक पहुंच पाएंगे जहां मरीज बिस्तर पर हैं। क्योंकि कई ऐसे गरीब तबके के लोग हैं, जिनके पास कैंप तक आने के उपाय नहीं है।

बरसात के पहले क्यों नहीं की गई तैयारी ?

क्या बरसात के मौसम में जहां बारिश के कारण कई इलाकों में पानी का जमाव हो रहा है ऐसे में इन बीमारियों से लड़ने के लिए नगर निगम को पहले इंतजाम नहीं करने चाहिए थे।

फॉगिंग मशीन का क्या हो रहा है ?

मच्छरों को मारने के लिए फॉगिंग मशीन और अन्य इंतजाम पहले से क्यों नहीं हो पा रहा है। अब तक जो जानकारी मिल रही है उससे पता चल रहा है कि फॉगिंग को लेकर जो कार्य करने हैं, उसमें कोताही बरती जा रही है, जिसके कारण आज ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। बड़ा सवाल यह है कि इन बीमारियों को कैसे रोका जाए, जिससे महामारी का रूप धारण नहीं हो।

लहू बोलेगाके सदस्यों ने की पहल

शहर की सामाजिक संस्था ‘लहू बोलेगा’ के सदस्यों ने स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी से मुलाकात की। सदस्यों ने मांग की कि हिंदपीढ़ी एवं रांची  की शहरी स्लम बस्तियों व मोहल्लों में पीएचसी खोले  जायें। चिकनगुनिया, डेंगू व मलेरिया के अत्यंत  गंभीर मरीज स्वास्थ्य जांच शिविर में नहीं आ पा रहे हैं। ऐसे  लाचार मरीजों के घर चिकित्सकों की टीम जाकर इलाज, ब्लड टेस्ट एवं दवा दें।

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रांची : भारत का एक मात्र पहाड़ी मंदिर जहां राष्ट्रीय पर्व पर फहराया जाता है तिरंगा

NewsCode Jharkhand | 15 August, 2018 9:55 AM
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रांची । झारखंड की राजधानी रांची के पहाड़ी मंदिर की कहानी बेहद ही रोचक है। पहाड़ पर स्थित भगवान शिव का यह मंदिर देश की आजादी के पहले अंग्रेजों के कब्जें में था। हिंदुस्तान को दुनिया में मंदिरों का देश कहा जाता है। इनमें कुछ मंदिर अपनी खास वास्तुकला, मान्यता और पूजा के नियमों में अलग ही मायने रखते हैं। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर हम आपको ऐसे ही मंदिर के बारे में बता रहे हैं। जहां भगवान की भक्ति और धार्मिक झंडे के साथ राष्ट्रीय झंडे को भी फहराया जाता है।

पहाड़ी बाबा मंदिर का पुराना नाम टिरीबुरू था जो आगे चलकर ब्रिटिश हुकूमत के समय फांसी टुंगरी में परिवर्तित हो गया। क्योंकि अंग्रेजो के राज में देश भक्तों और  क्रांतिकारियों को यहां फांसी पर लटकाया जाता था। आजादी के बाद रांची में पहला तिरंगा धवज यही पर फहराया गया था। जिसे रांची के ही एक स्वतंत्रता सेनानी कृष्ण चन्द्र दास से फहराया था।

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उन्होंने यहां पर शहीद हुए देश भक्तों की याद व सम्मान में तिरंगा फहराया था, तभी से यह परम्परा बन गई की स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस को यहां पर तिरंगा फहराया जाता है। राष्ट्र ध्वज को धर्म ध्वज से ज्यादा सम्मान देते हुए उसे मंदिर के ध्वज से ज्यादा ऊंचाई पर फहराया जाता है। पहाड़ी बाबा मंदिर में एक शिलालेख लगा है जिसमें 14 अगस्त, 1947 को देश की आजादी संबंधी घोषणा भी अंकित है।

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71 साल पहले ऐसे मना था देश का पहला स्‍वतंत्रता दिवस, देखें 15 अगस्‍त 1947 की दुर्लभ तस्‍वीरें

NewsCode | 15 August, 2018 10:14 AM
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नई दिल्ली। इस वर्ष हम 72वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं। आजादी के 71 साल पूरे हो रहे हैं तो मन में यह विचार भी आना स्वाभाविक है कि पहला स्वतंत्रता दिवस कैसे मनाया गया होगा और उस वक्त कैसा रहा होगा अपना देश? तस्वीरों में देखें 1947 में आजाद भारत की कुछ चुनिंदा तस्वीरें।

पहले स्वतंत्रता दिवस का आगाज पं जवाहरलाल नेहरू के 14 अगस्त की आधी रात की उद्घोषणा के साथ हुआ। लेकिन यह भी सच है कि इस बात की खबर मिलने के बाद देश के लोगों ने 15 अगस्त की सुबह ही जश्न मनाया था। यह तस्वीर 15 अगस्त की सुबह की कोलकाता की है जहां लोग गलियों चौराहों में निकलकर आजादी का जश्न मनाते दिख रहे हैं।


पहले स्वतंत्रता दिवस का संबोधन प्र‌थम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने आधी रात को किया लेकिन उनके प्रथम संबोधन के नाम से यह जो तस्वीर उपलब्‍ध है वह 14 अगस्त की शाम संविधान सभा को संबोधन करने की है।


तत्‍कालीन ब्रिटिश गवर्नर जर्नल लॉर्ड माउंटबेटन और भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू। 15 अगस्त 1947 को नई दिल्‍ली के इंडिया गेट पर तिरंगे को सेल्‍यूट करते हुए।


स्‍वतंत्रता दिवस सम्‍मेलन में भाग लेने पहुंचे हजारों लोग। ये सभी लोग नई दिल्‍ली के रासीना हिल पर एकत्रित हुए थे।


यह तस्वीर आजादी के 11 दिन पहले की है जिसमें भारत के अंतिम वॉयसराय लॉर्ड माउंटबेटन भारतीय नेताओं को सत्ता हस्तांतरण की तैयारी में लगे हैं।


सभी देशवासियों के लिए वो गर्व का पल था जब भारत की शान तिरंगा झंडा फहराया गया।


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शहीद जवान अौरंगजेब और मेजर आदित्य समेत इन जांबाजों को वीरता पुरस्कार

NewsCode | 15 August, 2018 10:01 AM
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नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में आतंकियों द्वारा अगवा कर हत्या किए गए राष्ट्रीय रायफल्स के शहीद जवान औरंगजेब को उनके शौर्य और बलिदान के लिए शांति काल का तीसरा सबसे बड़ा शौर्य पुरस्कार दिया जाएगा। मेजर आदित्य कुमार और राइफलमैन औरंगजेब समेत सशस्त्र बलों के 20 जवानों को स्वतंत्रता दिवस पर सम्मानित किया गया है।

गौरतलब है कि इसी साल 15 जून को ईद मनाने घर जा रहे औरंगजेब को आतंकवादियों ने अगवा करके उनकी बर्बरता से हत्या कर दी थी। गोलियों से छलनी औरंगजेब का शव पुलवामा जिले के गुस्सू इलाके में मिला था।

बता दें कि ईद की छुट्टी मनाने जा रहे औरंगजेब ने कैंप के बाहर से दक्षिण कश्मीर के शोपियां जाने के लिए टैक्सी ली थी। लेकिन रास्ते में कालम्पोरा गांव के पास आतंकवादियों ने उन्हें अगवा कर लिया था। टैक्सी ड्राइवर के सूचना देने के बाद पुलिस और सेना के संयुक्त दल को औरंगजेब का गोलियों से छलनी शव कालम्पोरा से करीब 10 किलोमीटर दूर गुस्सु गांव में मिला था। जम्मू-कश्मीर के पुंछ के रहने वाले औरंगजेब 4-जम्मू-कश्मीर लाइट इन्फेंटरी के शादीमार्ग (शोपियां) स्थित 44 राष्ट्रीय राइफल में तैनात थे।

वो हिज्बुल आतंकी समीर को 30 अप्रैल 2018 को ढेर करने वाले मेजर रोहित शुक्ला की टीम में शामिल थे। जांबाज औरंगजेब ने कई बड़े ऑपरेशनों को अंजाम दिया था. सेना के ऑपरेशनों में हिस्सा लेने के चलते आतंकियों ने उनको निशाना बनाया था।

वहीं, शौर्य चक्र पाने वाले मेजर आदित्य को 2017 में कश्मीर के बडगाम में एक आतंकवाद रोधी अभियान के दौरान ‘सावधानीपूर्वक योजना बनाने और बहादुर से कार्रवाई करने के लिए सम्मानित किया जाएगा। इसके अलावा सिपाही वी पाल सिंह को मरणोपरांत कीर्ति चक्र के लिए नामित किया गया है। दक्षिण कश्मीर के अलगर गांव में नवंबर 2017 में आतंकवाद रोधी अभियान में उनकी मौत हो गई थी।

इसके अलावा जम्मू कश्मीर के रहने वाले हेड कांस्टेबल शरीफ उद्दीन गैनी और मोहम्मद तफैल को प्रेसिडेंट पुलिस मैडल फॉर गैलेंट्री अवार्ड से सम्मानित किया गया है। इसके अलवा आठ सीआरपीएफ के जवानों को भी गैलेंट्री मेडल दिया जाएगा।

इसके साथ ही पानी के जहाज़ से दुनिया का चक्कर लगाने वाले अभियान में शामिल रही भारतीय नौसेना की छह महिला अधिकारियों को नौसेना मेडल दिया जाएगा।

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