रांची : चैम्बर चुनाव में दोनों गुट के अपने-अपने दावे, अपना–अपना एजेंडा

NewsCode Jharkhand | 30 August, 2018 9:18 PM
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रांची। फेडरेशन ऑफ चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के चुनावों की तारीखों के एलान के साथ ही दोनों गुट अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिये जी-तोड़ मेहनत कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि जिसकी व्यापारियों पर अधिक पकड़ के साथ लॉबी मजबूत होगी, जीत उसकी ही होगी। अगर गौर किया जाए तो दावेदारों अपनी जगह वहां तलाश रहे है  जहां उनकी जीत की गारंटी ज्यादा से ज्यादा हो।

उम्मीदवारों पर उठ रहे सवाल 

आरडी सिंह गुट का सीधा मुकाबला दीपक कुमार मारू गुट से है। उन्होंने कहा कि इतिहास को अगर देखा जाए तो पिछले पांच सालों में वही टीम चुनाव जीतती रही है जिसे अप्रत्यक्ष रूप से सत्तासीन कमेटी का समर्थन प्राप्‍त होता है। उन्होंने निर्वाचन पदाधिकारी ललित केडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि बीते कई साल से वे निर्वाचन अधिकारी बने हुए हैं। उन्‍होंने आरोप लगाया कि आखिरी दौर में ही बकाया फीस जमा करवा कर वोटिंग का खेल होता है।

रांची : चैम्बर चुनाव में दोनों गुट के अपने-अपने दावे, अपना–अपना एजेंडा

दीपक मारू टीम का एजेंडा 

सिंगल विंडो सिंस्टम करेंगे मजबूत 

राज्य में सिंगल विंडो सिस्टम तो है, लेकिन वह कारगर नहीं है। एक काम के लिए कई विभागों के चक्कर काटने और भ्रष्टाचार से आजीज होकर उद्यमी अपने प्रोजेक्ट से हाथ खींच रहे हैं। यह कहना है चेंबर चुनाव में अध्यक्ष पद के दावेदार दीपक कुमार मारू का। ईज ऑफ डूंईग बिजनेस के तहत उद्यमियों को प्रोत्साहित करने वाली सरकार की नीतियों में कई खामियां हैं जिसे दूर करवाना है। परिवहन विभाग की भी कई समस्याएं हैं वहां भी सिंगल विंडो सिस्टम लागू होना चाहिए।

चैंबर को सरकार से दिलाएंगे जमीन

सरकार स्मार्ट सिटी बना रही है, वहां चैंबर को भी जमीन उपलब्ध कराने की मांग करेंगे ताकि वहां स्टेप ऑफ आर्ट के रूप में एग्जीबिशन सेंटर की स्थापना की जा सके। वहां 4-5 कांफ्रेंस हॉल का निर्माण कराया जाए ताकि स्किल डेवलपमेंट के कार्यक्रमों को दिशा दी जा सके। यूथ ब्रेन को पलायन से रोकना होगा नहीं तो आने वाले सालों में झारखंड से युवा अन्य प्रदेशों में शिफ्ट हो जाएंगे।

रांची : चैम्बर चुनाव में दोनों गुट के अपने-अपने दावे, अपना–अपना एजेंडा

आरडी सिंह टीम का एजेंडा

औद्योगिक-वाणिज्यिक विकास प्राथमिकता

आरडी सिंह चेंबर चुनाव में एक ऐसी शख्सियत हैं जो बीते कई चुनावों में जीतते रहे हैं। उनकी सोच झारखंड में मोबाईल सेक्टर की स्थापना करना है। आरडी सिंह कहते हैं कि मोबाईल सेक्टर अगर झारखंड में आ जाता है तो बड़े पैमाने पर रोजगार की संभावनाएं पैदा होंगी। साथ ही औद्योगिक विकास भी होगा। उन्होंने कहा कि झारखंड को अलग हुए करीब 19 साल होने को हैं लेकिन व्यवसायियों की समस्याएं मुंह बाए खड़ी हैं।

दूर करेंगे कारोबारियों की परेशानी

उद्यमियों के साथ एमओयू हो रहा है लेकिन उसका क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है। सरकार की नीतियों में बदलाव तो होता है लेकिन वह कारगर नहीं है। एनर्जी सेक्टर में कई एमओयू हुए लेकिन काम अब तक लटका हुआ है। आरडी सिंह का कहना है कि मुश्किलें बहुत हैं एक ही काम के लिए फाइलें बाबूओं के टेबल का चक्कर काटती रहती हैं। सिंगल विंडो सिस्टम ध्वस्त हैं। ट्रांसपोर्ट नगर की स्थापना को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

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रांची : बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी के साथ जीएसटी को लेकर चैंबर की सदस्य ने की मंत्रणा

NewsCode Jharkhand | 8 October, 2018 9:34 PM
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रांची। बिहार के उपमुख्यंत्री सह जीएसटी नेटवर्क पैनल के प्रमुख सुशील मोदी सोमवार को चैंबर ऑफ कॉमर्स के साथ बैठक किये । इस दौरान चैंबर के पूर्व अध्यक्ष सह राज्यसभा सांसद महेश  पोद्दार उपस्थित थे। परिचर्चा में चैंबर द्वारा जीएसटी संबंधित समस्याएं विस्तृत रूप से रखी गई।

बैठक के दौरान चैंबर द्वारा ज्ञापन समर्पित किया गया। साथ ही जीएसटीआर-3 बी फाईलिंग की निर्धारित तिथि में विस्तार का आग्रह किया गया। यह भी कहा गया कि झारखण्ड में अपीलेट ट्रिब्यूनल का गठन अब तक नहीं हुआ है। अपील के लिए उचित प्लेटफॉर्म नहीं होने के कारण व्यापारियों को कठिनाई होती है, अतः इसका शीघ्र गठन किया जाय।

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बैठक में यह भी कहा गया कि जीएसटी टीडीएस 1.10.2018 से लागू है जिससे सरकारी विभाग आपूर्तिकर्ताओं के बिलों से लागू दर पर कटौती करेगा। सरकारी विभागों के साथ आपूर्तिकर्ताओं के पिछले अनुभव से पता चलता है कि वे समय पर अपने सांविधिक रिटर्न दर्ज नहीं करते हैं। केंद्र सरकार और जीएसटी परिषद को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सरकारी विभाग और एजेंसियां अपनी जीएसटी टीडीएस वापसी की देय तिथि के अंदर दाखिल करें, ताकि आपूर्तिकर्ता बिना किसी समस्या के टीडीएस का क्रेडिट प्राप्त कर सके।

बैठक में यह भी कहा गया कि केंद्र/राज्य जीएसटी अधिकारी फॉर्म जीएसटीआर-2 ए मेंप्र दर्शित आंकडों पर आधारित इनपुट टैक्स में मिसमैच के लिए नोटिस जारी कर रहे हैं। जबकि फॉर्म जीएसटीआर-2 को आगे की सूचना तक निलंबित कर दिया गया है। यह आग्रह किया गया कि विभाग को इस प्रकार की नोटिस जारी नहीं करनी चाहिए। यह भी कहा गया कि झारखण्ड विद्युत शुल्क,प्रोफेशनल टैक्स अभी भी संबंधित अधिनियमों के अनुसार चार्ज किया जा रहा है।

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जीएसटी में विद्युत शुल्क और व्यवसायिक कर को कम किया जाना चाहिए। यह भी कहा गया कि डीएसएसी के माध्यम से आवेदन रिटर्न जमा करना वैकल्पिक बनाया जाना चाहिए और सभी प्रकार के आकलनों के लिए अनिवार्य नहीं होना चाहिए, क्योंकि ईवीसी सत्यापित ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर के माध्यम से भी किया जाता है।

यह भी कहा गया कि आईएमएफएल, पेट्रोल-डीजल जीएसटी के दायरे में लाया जाना चाहिए। निर्माता जो उर्जा के वैकल्पिक स्रोतों पर हैं, उन्हें इनपुट करों का लाभ मिलेगा। इससे न केवल कुल करों को कम किया जायेगा, बल्कि वैट सीएसटी कानूनों के तहत अनुपालन से भी राहत मिलेगी। यह भी बताया गया कि राज्य एवं केंद्र दोनों जीएसटी विभाग से डीलरों को नोटिसें निर्गत की जा रही है।

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जिससे व्यवसायियों के बीच कठिनाईयां हो रही हैं। इसी प्रकार दो पहिया वाहनों और मोटर के स्पेयर पार्ट्स पर वर्तमान में निर्धारित 28 फीसदी जीएसटी दर को 12 प्रतिशत करने, ई वे बिल की निर्धारित सीमा को सभी प्रदेशों में एक ही रखने की व्यवस्था करने सहित अन्य मांगे रखीं गई। यह भी कहा गया कि रिटर्न दाखिल में देरी होने पर लगनेवाले विलंब शुल्क को कम से कम दो वित्तिय वर्षों के लिए माफ कर दिया जाना चाहिए।

राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ने कहा कि सुशील  मोदी निरंतर व्यापारियों के साथ संवाद में रहते आये हैं जिससे व्यापार जगत की कठिनाईयों का समाधान संभव हो पाता है। सुखद है कि वे जीएसटी परिषद में प्रमुख के तौर पर पदस्थापित है, जिसका लाभ झारखण्ड और बिहार के व्यापारियों को मिल पाता है। उन्होंने भी माना कि एक ही व्यापारी को दो विभागों से नोटिस भेजना अनुचित है और इसपर कार्रवाई होनी चाहिए।

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बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने प्रदेश व्यापारियों व उद्यमियों को संबोधित करते हुए कहा कि मेरा झारखण्ड से प्रगाढ संबंध रहा है। मैं नियमित रूप से रांची और जमशेदपुर का दौरा करता रहा हूं। झारखण्ड जब बिहार से अलग हो रहा था उस समय कई लोग इसके विरोध में थे किंतु मैं व्यक्तिगत तौर पर इसके पक्ष में था।

आज झारखण्ड और बिहार दोनों ही राज्य प्रगति की दिशा में अग्रसर हैं। व्यपारियों के सुझाव पर जीएसटी में निहित समस्याओं पर नियमित रूप से संसोधन किये जाते रहे हैं। जीएसटी से राज्यों का राजस्व भी बढा है। उम्मीद है अगले तीन वर्षों के बाद राज्यों को किसी कम्पनसेशन की आवश्यकता नहीं पडेगी। यह भी कहा कि दो विभागों से नोटिसें आना अनुचित है।

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एक डीलर को एक ही एजेंसी डील करेगी। यदि कहीं परेशानी है तो उसका समाधान किया जायेगा। जीएसटी काउंसिल के सारे निर्णय सर्वसम्मति से किये जाते रहे हैं। आनेवाले दिनों में बी टू सी के लिए सहज और बी टू बी के लिए सुगम लाया जा रहा है। रिटर्न दाखिल करने में लगनेवाले विलंब शुल्क को माफ करने के आग्रह पर उन्होंने कहा कि कहना यह सभी की सहमति से ही संभव है।

यह भी कहा कि यह मिथ्य है कि पेट्रोलियम पदार्थ को जीएसटी के दायरे में लाने पर टैक्स घटेंगी। ऐसा नहीं है। राज्यों के राजस्व का 40 फीसदी राजस्व पेट्रोलियम पदार्थ से ही प्राप्त होता है। विकास के सारे कार्य टैक्स से ही होते हैं, यदि सरकार के पास टैक्स ही नहीं आयेगा, तब विकास के कार्य कैसे होंगे। फायदा सिर्फ पेट्रोलियम कंपनियों को होगा जो इन्वेस्ट कर रही हैं। इसका निर्णय जीएसटी परिषद को करना है किंतु साल डेढ साल इसपर फैसला नहीं होने की संभावना है।

चैंबर द्वारा दिये गये समस्त सुझावों पर उन्होंने बारीकी से जवाब दिया। तकनीकी पहलुओं के प्रश्नों पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों से वार्ता कर चैंबर को सूचित करने का आश्वासन दिया। यह भी कहा कि जीएसटी संबंधित समस्याओं को मुझतक निर्गत करते रहें, उनपर विचार अवश्य होगा।

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चैंबर अध्यक्ष दीपक मारू ने उपमुख्यमंत्री का अभिनंदन करते हुए चैंबर द्वारा दिये गये समस्याओं व सुझावों पर उचित विचार का आग्रह किया। यह भी कहा कि रिटर्न दाखिल करने में यदि व्यापारियों से कुछ गलतियां हुई हैं, तो उन्हें सुधार के लिए अपेक्षित समय अवश्य देना चाहिए। समाचार पत्रों से यह पता चला कि झारखण्ड का राजस्व 15 फीसदी गिरा है। हम सरकार के हर प्रयासों में साथ हैं, यदि राज्य का राजस्व घटा है तब इसपर सरकार को खुलकर व्यापारियों से संवाद करना चाहिए।

यह भी कहा कि खुदरा बाजार में एफडीआई लाने की सूचना से व्यापारियों में असमंजसता है। देश  के 11 करोड़  खुदरा व्यापारियों के बीच यह संशय है कि एफडीआई आने के बाद उनका क्या होगा। सरकार यदि समझती है कि यह देश हित से जुडा मुद्दा है और इससे व्यापारियों को कोई हानि नहीं होगी, तब इसपर भी सरकार को ओपन फोरम पर व्यापारियों से संवाद करना चाहिए और उनके संशय को दूर करने का प्रयत्न करना चाहिए।

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बैठक में तकरीबन 15 संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया और अपनी समस्याओं से माननीय मंत्री को अवगत कराया। आज की बैठक में चैंबर महासचिव कुणाल अजमानी, सह सचिव राम बांगड, कोषाध्यक्ष राहुल मारू, कार्यकारिणी सदस्य परेष गट्टानी, धीरज तनेजा, सुमित जैन, विकास विजयवर्गीय, निखिल पोद्दार, नवजाते अलंग, विमल फोगला, काषी कनोई, पूर्व अध्यक्ष पवन शर्मा, रंजीत टिबडेवाल, विनय अग्रवाल, बिकास सिंह मौजूद थे।

इसके अलावे केके पोद्दार, ललित केडिया, सज्जन सर्राफ, सदस्य डॉ रवि भट्ट, किषन अग्रवाल, मनोज बजाज, प्रमोद सारस्वत, फिलिप मैथ्यू, ज्योति पोद्दार, अंजय पचेरिवाल, योगेन्द्र ओझा, संजय अखौरी, श्यामसुंदर अग्रवाल, बिनोद सोनी, साकेत मोदी, रमेश  धरनीधरका, अमित शर्मा, एनके टिकमानी, अंजय सरावगी, दीपक बुबना, संजय डालमिया, पंकज ठक्कर, शंभू चूडिवाला सहित सैकडों व्यापारी व उद्यमी उपस्थित थे।

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रांची: कांठीटांड़-कांके-विकास तक रिंग रोड 10 साल बाद बन कर हुआ तैयार

NewsCode Jharkhand | 13 November, 2018 1:45 PM
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10 साल बाद छह लेन वाले रिंग रोड फेज-7 का काम पूरा

रांची । करीब 10 साल के इंतजार के बाद रांची रिंग रोड सेक्शन सेवन बन कर तैयार हो गया है। छह लेन वाली 23.575 किमी लंबी इस सड़क पर गाड़ियां भी दौड़ने लगी हैं। यह रिंग रोड रांची-डालटनगंज मुख्य मार्ग (एनएच 75) पर कांठीटांड़ से शुरू होकर कांके रोड होते हुए रांची-रामगढ़ मुख्य मार्ग (एनएच 33)  पर विकास (नेवड़ी) से मिलता है। यानी दो महत्वपूर्ण राष्ट्रीय उच्च पथ एनएच 75 व एनएच 33 को यह जोड़ रहा है।

इस सड़क के बन जाने से बड़ी संख्या में गाड़ियां रांची शहर रातू रोड-बरियातू रोड में प्रवेश नहीं करेंगी, बल्कि रिंग रोड के सहारे निकल जायेंगी। इसका औपचारिक उदघाटन जल्द होगा. इस सड़क का निर्माण आइएलएफएस व पथ निर्माण विभाग की ज्वायंट वेंचर कंपनी झारखंड त्वरित पथ विकास कंपनी लिमिटेड (जेएआरडीसीएल) ने कराया है।

रिंग रोड के सेक्शन थ्री, फोर, फाइव व सिक्स का निर्माण भी इसी कंपनी  के माध्यम से कराया गया है।  रिंग रोड सेक्शन -7 (एक नजर में)  सड़क की लंबाई 23.575 किमी कहां से कहां तक कांठीटांड़ से नेवड़ी सड़क की चौड़ाई  छह लेन (30.5 मीटर) निर्माण पर खर्च 452 करोड़ (लगभग) काम करानेवाली कंपनी आइएलएफएस बड़े पुलों की संख्या 3 छोटे पुलों की संख्या 6 फ्लाइओवर की संख्या 01 अंडर पास की संख्या 7 रेलवे ओवर ब्रिज 01 कलवर्ट की संख्या 53 बस पड़ाव की संख्या 16 इस रोड के बन जाने से खास कर बड़े वाहनों व लंबी दूरी वाली गाड़ियां शहर में नहीं घुसेंगी।

बड़ी गाड़ियां शहर में घुस कर लंबे समय तक जाम में फंसी रहती हैं और ईंधन भी अत्यधिक बर्बाद होता है। अब ऐसा नहीं होगा. शहर की मुख्य सड़कों  पर से थोड़ा ट्रैफिक कम होगा। रिंग रोड के माध्यम से 23.5 किमी की दूरी तय करने में अधिकतम 20 मिनट का ही समय लगेगा, जबकि शहर के अंदर घुस कर इतनी दूरी तय करने में एक घंटे का समय लग रहा था. वहीं बड़े वाहनों के साथ नो इंट्री की भी बाध्यता नहीं रहेगी. वे 24 घंटे चल सकेंगे।

रिंग रोड सेक्शन सेवन का शिलान्यास वर्ष 2008 में हुआ था। इसके बाद इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ। जिस कंपनी को काम मिला था, उसने इसे पूरा नहीं कराया। काम आधा-अधूरा रह गया था। ऐसे में सरकार ने उसका एग्रीमेंट रद्द कर दिया था। इस दौरान लंबे समय तक काम बंद रहा। बाद में इसका काम जेएआरडीसीएल को दिया गया।

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बोकारो : सॉर्ट सर्किट से लगी आग, घर जलकर खाक

NewsCode Jharkhand | 13 November, 2018 1:34 PM
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बोकारो। बिजली के तार में हुए सॉर्ट सर्किट से आग लग गई इस आग की घटना में पूरा घर जलकर खाक हो गया। इस आग लगी से एक लाख से अधिक के नुकसान का अनुमान है। घटना के बाद ग्रामीणों के द्वार आग पर काबू पाने का प्रयास किया गया लेकिन स्थानीय जिला परिषद के प्रतिनिधि की सूचना पर पहुँची  दमकल की गाड़ी ने आग पर काबू पाया।

आज सुबह चास प्रखण्ड के सोनाबाद पंचायत स्थित गांव आमडीहा टोला बंधुडीह के फूलचंद माहतो के कच्चे मकान में सौभाग्य योजना के तहत बिजली का कनेक्सन तार में अचानक के सर्ट सर्किट में आग लग गई।

इस आगलगी की घटना के बाद घर में रखे पुआल में आग लग गई। इसके बाद आग की तेज लपटों ने पूरे घर को पूरी तरह से जलाकर खाक कर दिया। इस घटना के बाद ग्रामीणों ने आग पर काबू करने का प्रयास किया।स्थानीय लोगों की सूचना पर जिला परिषद संजय कुमार के प्रतिनिधि नरेश माहतो ने दमकल विभाग को इसकी जानकारी दी।

मौके पर पहुँची दमकल की एक गाड़ी ने आग पर काबू पाया। इस आग की घटना में घर में  रखा पुआल, कपड़े, अनाज, नकदी समेत अन्य कागजात जल कर खाक हो गया। मौके पर पहुँची पिंडराजोड़ा थाना पुलिस ने घटना स्थल का जायजा लिया।

जिला परिषद संजय कुमार ने इस घटना की जानकारी चास अंचलाधिकारी वन्दन सेजवालकर को दी और पीड़ित को अर्थित सहायता देने की बात कही।सीओ ने कर्मचारी को मौके पर पहुँच नुकसान का आकलन करने का निर्देश दिया है।

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