स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के अनावरण पर बोले PM मोदी, पटेल ना होते देश देखने के लिए भी लेना पड़ता वीजा

NewsCode | 31 October, 2018 1:49 PM
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नई दिल्ली। आजाद भारत के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की आज 143वीं जयंती है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को सरदार पटेल की दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ को देश को समर्पित किया।  गुजरात में नर्मदा नदी के तट पर स्थित सरदार पटेल की इस मूर्ति की ऊंचाई 182 मीटर है, जो दुनिया में सबसे ऊंची है।

देश को एक सूत्र में बांधने वाले सरदार पटेल की जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के तौर पर मनाया जाता है। इस अवसर पर स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के अलावा आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘वैली ऑफ फ्लोवर्स’, टेंट सिटी का भी उद्घाटन किया। इस दौरान गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह समेत कई बड़े नेता भी मौजूद रहे।

मूर्ति का अनावरण करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज पूरा देश राष्ट्रीय एकता दिवस मना रहा है। किसी भी देश के इतिहास में ऐसे अवसर आते हैं, जब वो पूर्णता का अहसास कराते हैं। आज वही पल है जो देश के इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो जाता है, जिसे मिटा पाना मुश्किल है।

PM मोदी ने कहा कि हम आजादी के इतने साल तक एक अधूरापन लेकर चल रहे थे, लेकिन आज भारत के वर्तमान ने सरदार के विराट व्यक्तित्व को उजागर करने का काम किया है। आज जब धरती से लेकर आसमान तक सरदार साहब का अभिषेक हो रहा है, तो ये काम भविष्य के लिए प्रेरणा का आधार है।

गुजरात के मुख्यमंत्री रहते की प्रोजेक्ट की कल्पना

उन्होंने कहा कि ये मेरा सौभाग्य है कि मुझे सरदार साहब की इस विशाल प्रतिमा को देश को समर्पित करने का अवसर किया है। जब मैंने गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर इसकी कल्पना की थी, तो कभी अहसास नहीं था कि प्रधानमंत्री के तौर पर मुझे ये पुण्य काम करने का मौका मिलेगा। इस काम में जो गुजरात की जनता ने मेरा साथ दिया है, उसके लिए मैं बहुत आभारी हूं।

कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मैं जिस मिट्टी में पला बढ़ा, जिनके बीच में मैं बढ़ा हुआ उन्होंने ने ही मुझे सम्मान पत्र दिया। ये वैसा ही जैसे कोई मां अपने बेटे की सिर पर हाथ रखती है। उन्होंने कहा कि मुझे लोहा अभियान के दौरान मिले, लोहे का पहला टुकड़ा भी दिया गया है। हमने इस अभियान में लोगों से मिट्टी भी मांगी थी। देश के लाखों किसानों ने खुद आगे बढ़कर इस शुभ काम के लिए लोहा और मिट्टी दी।

पहाड़ को तराशकर मूर्ति बनाना चाहता था

प्रधानमंत्री बोले कि आज मुझे वो पुराने दिन याद आ रहे हैं, जी भरकर बहुत कुछ कहने का मन भी कर रहा है। किसानों ने इन प्रतिमा के निर्माण को आंदोलन बना दिया। जब मैंने ये विचार आगे रखा था, तो शंकाओं का वातावरण बना था। जब ये कल्पना मन में चल रही थी, तब मैं सोच रहा था कि यहां कोई ऐसा पहाड़ मिल जाए जिसे तराशकर मूर्ति बना दी जाए। लेकिन वो संभव नहीं हो पाया, फिर इस रूप की कल्पना की गई।

सिर्फ सरदार में दिखती थी आशा

उन्होंने कहा कि सरदार पटेल ने उस समय खंडित पड़े देश को एक सूत्र में बांधा, तब मां भारती 550 से अधिक विरासतों में बंटी हुई थी। दुनिया में भारत के भविष्य के प्रति बहुत निराशा था, तब भी कई निराशावादी थे। उन्हें लगता था कि भारत अपनी विविधताओं की वजह से बिखर जाएगा। तब सभी को सिर्फ एक ही किरण दिखती थी, ये किरण थी सरदार वल्लभभाई पटेल।

सभी रजवाड़ों को एक साथ लाए थे पटेल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 5 जुलाई 1947 में रियासतों को कहा था कि विदेशी आक्रांताओं के सामने हमारे आपसी झगड़े, आपसी दुश्मनी, बैर का भाव हमारी हार की बड़ी वजह थी। अब हमें इस गलती को नहीं दोहराना है और ना ही किसी का गुलाम होना है। देखते ही देखते भारत एक हो गया, सरदार साहब के कहने पर सभी रजवाड़े एक साथ आए।

उन्होंने कहा कि मेरा एक सपना भी है, इसी स्थान के साथ जोड़कर सभी रजवाड़ों का एक वर्चुअल म्यूज़ियम तैयार हो ,वरना आज तो कोई तहसील का अध्यक्ष भी अपना पद नहीं छोड़ सकता है। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल में कौटिल्य की कूटनीति और शिवाजी के शौर्य का समावेश था।

…तो अपने देश में घूमने के लिए ही लेना पड़ता वीजा

पीएम मोदी ने कहा कि चाहे जितना दबाव, मतभेद क्यों ही ना हो लेकिन प्रशासन में गवर्नेंस को किस तरह स्थापित किया जाता है, ये सरदार साहब ने करके दिखाया है। अगर सरदार साहब ने संकल्प नहीं किया होता तो आज गिर के शेर को देखने के लिए और शिवभक्तों के लिए सोमनाथ की पूजा करने के लिए, हैदराबाद में चारमिनार को देखने के लिए वीजा लेना पड़ता।

उन्होंने कहा कि अगर सरदार साहब ना होते तो सिविल सेवा जैसा प्रशासनिक ढांचा खड़ा करने में हमें बहुत मुश्किल होती। सरदार के संकल्प से ही कश्मीर से कन्याकुमारी तक ट्रेन चल पाती है। प्रधानमंत्री बोले कि ये प्रतिमा भारत के अस्तित्व पर सवाल उठाने वालों को ये याद दिलाने के लिए है कि ये राष्ट्र शाश्वत था, शाश्वत है और शाश्वत रहेगा।

PM मोदी ने कहा कि इस प्रतिमा के निर्माण से जुड़े सभी मजदूरों, शिल्पकारों का मैं धन्यवाद देता हूं। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जो लोग इस काम से जुड़े हैं, वह भी इतिहास का हिस्सा बन गए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि 31 अक्टूबर, 2010 को मैंने इसका विचार दुनिया के सामने रखा था, करोड़ों भारतीयों की तरह मेरे मन में एक ही भावना था कि जिस महापुरुष ने देश को एक करने के लिए इतना बड़ा काम किया उसे वो सम्मान मिलना चाहिए जिसका वो हकदार है।

कांग्रेस ने किया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला

सरदार पटेल की मूर्ति के अनावरण से पहले कांग्रेस का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला। कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा कि सरदार पटेल, कांग्रेस के सबसे बड़े नेता थे। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी की विरासत को खत्म करने की कोशिश की जा रही है।

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के बारे में खास बातें

– मूर्ति की लंबाई 182 मीटर है और यह इतनी बड़ी है कि इसे 7 किलोमीटर की दूरी से भी देखा जा सकता है। बता दें कि ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ ऊंचाई में अमेरिका के ‘स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी’ (93 मीटर) से दोगुना है।

– इस मूर्ति में दो लिफ्ट भी लगी है, जिनके माध्यम से आप सरदार पटेल की छाती पहुंचेंगे और वहां से आप सरदार सरोवर बांध का नजारा देख सकेंगे और खूबसूरत वादियों का लुत्फ़ उठा सकेंगे। सरदार की मूर्ति तक पहुंचने के लिए पर्यटकों के लिए पुल और बोट की व्यवस्था की जाएगी।

– आपको बता दें, यह स्टैच्यू 180 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलने वाली हवा में भी स्थिर खड़ा रहेगा। यह 6.5 तीव्रता के भूकंप को भी सह सकता है। इस मूर्ति के निर्माण में भारतीय मजदूरों के साथ 200 चीन के कर्मचारियों ने भी हाथ बंटाया है। इन लोगों ने सितंबर 2017 से ही दो से तीन महीनों तक अलग-अलग बैचों में काम किया।

– बता दें, इसके लिए मूर्ति के 3 किलोमीटर की दूरी पर एक टेंट सिटी भी बनाई गई है, जो 52 कमरों का श्रेष्ठ भारत भवन 3 स्टार होटल है। जहां आप रात भर रुक भी सकते हैं। वहीं स्टैच्यू के नीचे एक म्यूजियम भी तैयार किया गया है, जहां पर सरदार पटेल की स्मृति से जुड़ी कई चीजें रखी जाएंगी।

– सरदार पटेल की इस मूर्ति को बनाने में करीब 2,989 करोड़ रुपये का खर्च आया। कंपनी के मुताबिक, कांसे की परत चढ़ाने के आशिंक कार्य को छोड़ कर बाकी पूरा निर्माण देश में ही किया गया है।

– इस स्मारक की आधारशिला  31 अक्तूबर, 2013 को पटेल की 138 वीं वर्षगांठ के मौके पर रखी गई थी, जब पीएम नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। इसके लिये बीजेपी ने पूरे देश में लोहा इकट्ठा करने का अभियान भी चलाया गया।

– सरदार पटेल की मुख्य प्रतिमा बनाने में1,347 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जबकि 235 करोड़ रुपये प्रदर्शनी हॉल और सभागार केंद्र पर खर्च किये गये। वहीं 657 करोड़ रुपये निर्माण कार्य पूरा होने के बाद अगले 15 साल तक ढांचे के रखरखाव पर खर्च किए किए जाएंगे। 83 करोड़ रुपये पुल के निर्माण पर खर्च किये गये।


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रांची: कांठीटांड़-कांके-विकास तक रिंग रोड 10 साल बाद बन कर हुआ तैयार

NewsCode Jharkhand | 13 November, 2018 1:45 PM
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10 साल बाद छह लेन वाले रिंग रोड फेज-7 का काम पूरा

रांची । करीब 10 साल के इंतजार के बाद रांची रिंग रोड सेक्शन सेवन बन कर तैयार हो गया है। छह लेन वाली 23.575 किमी लंबी इस सड़क पर गाड़ियां भी दौड़ने लगी हैं। यह रिंग रोड रांची-डालटनगंज मुख्य मार्ग (एनएच 75) पर कांठीटांड़ से शुरू होकर कांके रोड होते हुए रांची-रामगढ़ मुख्य मार्ग (एनएच 33)  पर विकास (नेवड़ी) से मिलता है। यानी दो महत्वपूर्ण राष्ट्रीय उच्च पथ एनएच 75 व एनएच 33 को यह जोड़ रहा है।

इस सड़क के बन जाने से बड़ी संख्या में गाड़ियां रांची शहर रातू रोड-बरियातू रोड में प्रवेश नहीं करेंगी, बल्कि रिंग रोड के सहारे निकल जायेंगी। इसका औपचारिक उदघाटन जल्द होगा. इस सड़क का निर्माण आइएलएफएस व पथ निर्माण विभाग की ज्वायंट वेंचर कंपनी झारखंड त्वरित पथ विकास कंपनी लिमिटेड (जेएआरडीसीएल) ने कराया है।

रिंग रोड के सेक्शन थ्री, फोर, फाइव व सिक्स का निर्माण भी इसी कंपनी  के माध्यम से कराया गया है।  रिंग रोड सेक्शन -7 (एक नजर में)  सड़क की लंबाई 23.575 किमी कहां से कहां तक कांठीटांड़ से नेवड़ी सड़क की चौड़ाई  छह लेन (30.5 मीटर) निर्माण पर खर्च 452 करोड़ (लगभग) काम करानेवाली कंपनी आइएलएफएस बड़े पुलों की संख्या 3 छोटे पुलों की संख्या 6 फ्लाइओवर की संख्या 01 अंडर पास की संख्या 7 रेलवे ओवर ब्रिज 01 कलवर्ट की संख्या 53 बस पड़ाव की संख्या 16 इस रोड के बन जाने से खास कर बड़े वाहनों व लंबी दूरी वाली गाड़ियां शहर में नहीं घुसेंगी।

बड़ी गाड़ियां शहर में घुस कर लंबे समय तक जाम में फंसी रहती हैं और ईंधन भी अत्यधिक बर्बाद होता है। अब ऐसा नहीं होगा. शहर की मुख्य सड़कों  पर से थोड़ा ट्रैफिक कम होगा। रिंग रोड के माध्यम से 23.5 किमी की दूरी तय करने में अधिकतम 20 मिनट का ही समय लगेगा, जबकि शहर के अंदर घुस कर इतनी दूरी तय करने में एक घंटे का समय लग रहा था. वहीं बड़े वाहनों के साथ नो इंट्री की भी बाध्यता नहीं रहेगी. वे 24 घंटे चल सकेंगे।

रिंग रोड सेक्शन सेवन का शिलान्यास वर्ष 2008 में हुआ था। इसके बाद इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ। जिस कंपनी को काम मिला था, उसने इसे पूरा नहीं कराया। काम आधा-अधूरा रह गया था। ऐसे में सरकार ने उसका एग्रीमेंट रद्द कर दिया था। इस दौरान लंबे समय तक काम बंद रहा। बाद में इसका काम जेएआरडीसीएल को दिया गया।

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बोकारो : सॉर्ट सर्किट से लगी आग, घर जलकर खाक

NewsCode Jharkhand | 13 November, 2018 1:34 PM
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बोकारो। बिजली के तार में हुए सॉर्ट सर्किट से आग लग गई इस आग की घटना में पूरा घर जलकर खाक हो गया। इस आग लगी से एक लाख से अधिक के नुकसान का अनुमान है। घटना के बाद ग्रामीणों के द्वार आग पर काबू पाने का प्रयास किया गया लेकिन स्थानीय जिला परिषद के प्रतिनिधि की सूचना पर पहुँची  दमकल की गाड़ी ने आग पर काबू पाया।

आज सुबह चास प्रखण्ड के सोनाबाद पंचायत स्थित गांव आमडीहा टोला बंधुडीह के फूलचंद माहतो के कच्चे मकान में सौभाग्य योजना के तहत बिजली का कनेक्सन तार में अचानक के सर्ट सर्किट में आग लग गई।

इस आगलगी की घटना के बाद घर में रखे पुआल में आग लग गई। इसके बाद आग की तेज लपटों ने पूरे घर को पूरी तरह से जलाकर खाक कर दिया। इस घटना के बाद ग्रामीणों ने आग पर काबू करने का प्रयास किया।स्थानीय लोगों की सूचना पर जिला परिषद संजय कुमार के प्रतिनिधि नरेश माहतो ने दमकल विभाग को इसकी जानकारी दी।

मौके पर पहुँची दमकल की एक गाड़ी ने आग पर काबू पाया। इस आग की घटना में घर में  रखा पुआल, कपड़े, अनाज, नकदी समेत अन्य कागजात जल कर खाक हो गया। मौके पर पहुँची पिंडराजोड़ा थाना पुलिस ने घटना स्थल का जायजा लिया।

जिला परिषद संजय कुमार ने इस घटना की जानकारी चास अंचलाधिकारी वन्दन सेजवालकर को दी और पीड़ित को अर्थित सहायता देने की बात कही।सीओ ने कर्मचारी को मौके पर पहुँच नुकसान का आकलन करने का निर्देश दिया है।

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रांची : स्थापना दिवस- नव चयनित शिक्षक ड्रेस कोड में होंगे शामिल

NewsCode Jharkhand | 13 November, 2018 1:06 PM
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रांची। राज्य स्थापना दिवस का मुख्य समारोह मोरहाबादी मैदान में होगा। इसमें झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की अनुशंसा के बाद चयनित पोस्ट ग्रेजुएट ट्रेंड टीचर (पीजीटी) शामिल होंगे। राज्य के सभी जिलों में कुल 1235 पीजीटी शिक्षकों का चयन किया गया है।

इनमें रांची जिला के लिए 130 शिक्षक हैं। इन सभी नव चयनित पीजीटी शिक्षकों को ड्रेस कोड में शामिल होने के लिए स्कूली शिक्षा विभाग द्वारा निर्देश दिया गया है।

स्कूली शिक्षा विभाग द्वारा इसके लिए दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल के क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक (आरडीडीई) अशोक कुमार शर्मा, जिला शिक्षा पदाधिकारी रजनीकांत वर्मा और जिला शिक्षा अधीक्षक सी. विजय सिंह को नोडल पदाधिकारी बनाया गया है। सोमवार को जिला स्कूल में रांची जिले के लिए चयनित पीजीटी शिक्षकों के साथ नोडल पदाधिकारी ने बैठक दी।

नोडल पदाधिकारी सह डीएसई रांची सी. विजय सिंह ने नव चयनित पीजीटी शिक्षकों को अनुशासन का पाठ पढ़ाया। निर्धारित ड्रेस कोड में पुरुष शिक्षकों के लिए क्रीम कलर फुल शर्ट, ब्लैक फुल पैंट, मैरून टाई, मैरून स्वेटर या ब्लेजर, पॉकेट नेम प्लेट, ब्लैक शू व डॉ राधाकृष्णन जैसी पिंक कलर की पगड़ी निर्धारित किया गया है। इसी प्रकार महिलाओं के लिए मैरून कलर की साड़ी या पायजामा, ब्लैक जूती या सैंडल और पिंक पगड़ी में आने का निर्देश नोडल पदाधिकारी ने दिया है।

नोडल पदाधिकारी ने समारोह स्थल पर सुबह आठ बजे तक नव चयनित शिक्षकों को रिपोर्टिंग करने का निर्देश दिया। कहा कि समारोह स्थल पर पहुंचने के साथ शिक्षक अपना रजिस्ट्रेशन करा लें। शिक्षकों को मोबाइल साइलेंट मोड में रखने का निर्देश दिया है।

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