नारायणपुर : अमजोरा में आयोजित हुआ श्री श्री 108 रामचरित मानस महायज्ञ

NewsCode Jharkhand | 20 February, 2018 12:26 PM

सत्य परेशान हो सकता, परंतु पराजित नहीं-सौदागर जी महाराज

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नारायणपुर (जामताड़ा)। अमजोरा में श्री श्री 108 रामचरित मानस महायज्ञ के प्रवचन में अयोध्या से पधारे सौदागर जी महाराज ने कहा कि असत्य पर सत्य की तथा अधर्म पर धर्म की विजय हुई है। सत्य परेशान हो सकता है परंतु पराजित नहीं।

उन्होंने कहा कि बड़े भाग्य से हमें मानव जीवन मिला है, इसलिए जब समय मिले 24 घंटे में एक घंटा प्रभु का स्मरण जरूर करना चाहिए। भगवान राम को मर्यादा पुरूषोत्तम कहा गया है। उन्होंने मर्यादा की जो लकीर खींची है, उसका अक्षरश: अनुपालन भी किया। पिता की विवशता को समझकर स्वयं वन जाने को तैयार हो गए और आयोध्या का राजपाट भरत को सौंप दिया।

भरत ने भी अपना भाई धर्म निभाया और वनवासी की ही भांति रहे और भगवान राम की पादुका को सिंहासन पर रखकर राजपाट चलाया। जब तक धरा रहेगी तब तक भरत के बलिदान को भुलाया नहीं जा सकेगा। भारतीय सभ्यता संस्कृति अक्षुण्ण रहे, इसके लिए यज्ञ, सत्संग आवश्यक है। उन्होंने कहा कि रामकथा जहां भी अवसर मिले सुनना चाहिए। रामकथा सुनने से जीवन धन्य हो जाता है।

आयोजन को सफल बनाने में टिकैतमणि सिंह, राणा प्रताप सिंह, राजकुमार साह, राजकुमार सिंह, जयमंगल सिंह आदि की अहम भूमिका रही।

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देवघर : आयुषी ने बहायी देश-प्रेम की गंगा, संस्‍कृत में गाया “ऐ मेरे वतन के लोगों”   

NewsCode Jharkhand | 15 August, 2018 2:25 PM
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देवघर। एक ओर जहां युवाओं का रुझान पश्चिमी रहन-सहन, खान-पान और व्यवहार की ओर केंद्रित होता जा रहा है तो वहीं दूसरी ओर देश प्रेम की भावना से ओत-प्रोत, कुछ ऐसे भी बच्‍चे-बच्चियां हैं जिनके भीतर अपने देश की सभ्यता, संस्कृति और मातृभाषा की जननी संस्कृत के प्रति अगाध श्रद्धा और समर्पण देखने को मिलती है। देवघर की आयुषी अनन्‍या भी ऐसे ही लोगों में से एक है। आयुषी डीएवी स्कूल में 9वीं क्लास की छात्रा है।

देवघर : आयुषी ने बहायी देश-प्रेम की गंगा, संस्‍कृत में गाया "ऐ मेरे वतन के लोगों" 

संस्कृत को लोकप्रिय बनाने का प्रयास

विलक्षण प्रतिभा की धनी ये बालिका, बॉलीवुड हो या फिर कोई पाश्‍चात्‍य गीत, सभी का न सिर्फ संस्कृत में अनुवाद करती है बल्कि उसे सस्‍वर खुद गाती भी है। आयुषी ने स्‍वतंत्रता दिवस के मौके पर लता मांगेशकर के गए गीत ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ का संस्कृत में अनुवाद किया और खुद ही गाया भी। आयुषी को इस बात का गर्व है कि वह अपनी मातृभाषा की जननि संस्कृत को, गीतों के माध्‍यम से और भी ज्यादा लोकप्रिय बनाने की न सिर्फ एक छोटी से कोशिश कर रही है बल्कि संस्कृत से दूर हो रहे युवाओं को भी अपनी सभ्यता, संस्‍कृति और भाषा की ओर  वापस लौटने के लिए प्रेरित कर रही है।

स्कूल कैंप से मिली संस्‍कृत भाषा में गाने की प्रेरणा

आयुषी को संस्कृत भाषा में गीत गाने की प्रेरणा उसके स्कूल कैंप के दौरान मिली। जहां आयोजित की गई प्रतियोगिता को संस्कृत भाषा में ही पूरा करना था। जब इस प्रतियोगिता में आयुषी ने खुद को संस्कृत के करीब पाया तो फिर उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा। फिर एक के बाद एक हिंदी गानों को संस्कृत में अनुवाद करना शुरू कर दिया। आयुषी ने कई कठिन गीतों का सरल संस्कृत में अनुवाद कर उसे अपनी स्‍वर में गाया भी है।

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बोकारो : तिरंगे का घोर अपमान, माननीयों ने जूते-चप्‍पल पहनकर फहराया तिरंगा

NewsCode Jharkhand | 15 August, 2018 4:17 PM
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बोकारो। झारखंड सरकार के मंत्री अमर बाउरी ने स्‍वाधीनता दिवस के मौके पर बोकारो में तिरंगा फहराया लेकिन उन्‍होंने इस दौरान पैरों में चप्‍पलें पहन रखी थी। मान्‍य परंपरा के अनुसार जूते और चप्‍पलें पहन कर तिरंगा फहराना मर्यादा के प्रतिकूल है और राष्‍ट्र ध्‍वज का अपमान है। राज्‍य सरकार के मंत्रियों से कम से कम, राष्‍ट्र ध्‍वज के सम्‍मान में इस प्रकार की लापरवाही की उम्‍मीद नहीं की जा सकती।

बोकारो : तिरंगे का घोर अपमान, माननीयों ने जूते-चप्‍पल पहनकर फहराया तिरंगा

वहीं दूसरी ओर स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर गिरिडीह जिले के बीजेपी सांसद रविन्द्र कुमार पांडेय ने भी बोकारो में चप्पल पहनकर ही राष्ट्रीय ध्वज फहराया।

बोकारो : तिरंगे का घोर अपमान, माननीयों ने जूते-चप्‍पल पहनकर फहराया तिरंगा

तिरंगे के सम्‍मान की अनदेखी की रही-सही कमी बोकारो में कांग्रेस पार्टी के नेता डॉ पी नैय्यर ने पूरी कर दी। बीजेपी के मंत्री और सांसद ने तो चप्‍पलें पहन कर तिरंगा फहराया था लेकिन कांग्रेस के नेता डॉ पी नैय्यर ने जूते पहनकर ही तिरंगा फहराया।

बोकारो : तिरंगे का घोर अपमान, माननीयों ने जूते-चप्‍पल पहनकर फहराया तिरंगा

मतलब साफ है कि तिरंगे का अपमान करने में कोई किसी से कम नहीं रहा। इन माननीयों को उस मिट्टी पर भी, थोड़ी दूर नंगे पैर चलने में कष्‍ट का अनुभव होता है जिस मिट्टी को अमर शहीदों ने अपने खून से सींचा है। जो तिरंगे को फहराने से पहले अपने पैरों से जूते-चप्‍पल नहीं उतार सकते, उनसे ये उम्‍मीद करना बेकार है कि कभी वे इस मिट्टी को अपने माथे से लगाएंगे। कहने को तो ये सभी माननीय जन प्रतिनिधि हैं लेकिन इनके कृत्‍यों से जनता क्‍या सीख लेगी ये विचारणीय है। शायद इन्‍हें ये पता नहीं है कि चाहे राष्‍ट्र ध्‍वज हो या धर्म ध्‍वज, इन्‍हें नंगे पैर फहराया जाता है। ध्‍वज के प्रति सम्‍मान प्रकट करने की ये परंपरा है।

देवघर : आयुषी ने बहायी देश-प्रेम की गंगा, संस्‍कृत में गाया “ऐ मेरे वतन के लोगों”   

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सरायकेला : ड्यूटी से लौट रहे दो रेलकर्मी सगे भाई की करंट लगने से दर्दनाक मौत

NewsCode Jharkhand | 15 August, 2018 4:05 PM
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सरायकेला। सरायकेला थाना के सीनी ओपी अंतर्गत आज  ड्यूटी खत्म कर घर लौट रहे मोटरसाईकिल सवार रेलवे के दो चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों की बिजली की नंगी तार की चपेट में आने से मौत हो गयी। मृतक 40 वर्षीय भोला महतो तथा 28 वर्षीय ईश्वर महतो दोनों ही सगे  भाई थे तथा रेलवे में चतुर्थवर्गीय कर्मचारी थे।

ड्यूटी खत्म कर लौट रहे थे

बताया जा रहा है, कि आज सुबह दोनों भाई अपनी ड्यूटी खत्म कर मोटरसाईकिल से अपने घर उलीडीह लौट रहे थे, तभी सिंदरी गांव के पास नंगी लटकी बिजली के तार के चपेट में वे दोनों आ गये। जिससे करंट लगने से दोनों की मौत हो गयी।

वहीं तत्काल दोनों  को स्थानीय लोग और पुलिस की मदद से सदर अस्पताल लाया गया। जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

उधर इस घटना की सूचना पाकर मृतक के परिजनों के अलावा रेलवे के अधिकारी व कर्मचारी तथा खरसांवा विधायक दशरथ गागराई सदर अस्पताल पहुंचे और घटना की जानकारी ली। इधर रेलवे अधिकारियों ने भरोसा दिलाया  है कि रेलवे के प्रावधानों के अनुरुप मृतक के परिजनों को सभी लाभ दिये जायेंगे।

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पांच हजार की तत्काल आर्थिक सहायता मिली

वहीं मृत कर्मचारियों के दाह संस्कार व अन्य कार्य के लिए रेलवे वेलफेयर एसोसिएशन ने बीस हजार रुपये तथा इंडियन रेलवे सिग्नल व टेलिकॉम विभाग की ओर से पांच हजार की तत्काल आर्थिक सहायता दी गयी है।  उधर बिजली की नंगी तार सड़क किनारे झूलने तथा इस घटना के होने से लोगों में बिजली विभाग के खिलाफ गहरा आक्रोश देखा जा रहा है।

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