मोदी सरकार का बड़ा बदलाव, बिना UPSC पास किए ही बन सकेंगे IAS ऑफिसर

NewsCode | 11 June, 2018 1:43 PM
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नई दिल्ली। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने नौकरशाही में बड़ा फेरबदल करने का फैसला किया है। अब इसमें पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर के विशेषज्ञों को भी महत्व दिया जाएगा। सरकार के इस फैसले के बाद प्राइवेट कंपनियों में काम करने वाले भी UPSC परीक्षा पास किए बिना वरिष्ठ अधिकारी बन सकते हैं।

दरअसल, सरकार ने एक नई नीति के तहत लैटरल एंट्री के माध्यम से 10 अलग-अलग विभागों में संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारियों की नियुक्ति के लिए अधिसूचना जारी करते हुए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इन पदों पर आमतौर पर उन्हीं की नियुक्ति होती थी, जिन्होंने यूपीएससी परीक्षा पास की हो, लेकिन सरकार ने इन पदों के लिए लैटरल वैकेन्सी निकाली है।

सरकार की ओर से इस बारे में कहा गया कि इससे मंत्रालय देश के ज्यादा से ज्यादा अनुभवी लोगों की सेवाएं ले पाएगा। कार्मिक विभाग की ओर जारी विज्ञप्ति के अनुसार, भारत सरकार में वरिष्ठ प्रबंधन स्तर पर शामिल होने और राष्ट्र निर्माण की दिशा में योगदान देने के लिए इच्छुक प्रतिभाशाली और प्रेरित भारतीय नागरिकों से आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं। सरकार ने कुल 10 अलग-अलग विभागों के लिए दक्षता प्राप्त लोगों से आवेदन मंगाए हैं।

कौन कर सकता है आवेदन ?

एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार की ओर से जारी की गई अधिसूचना के अनुसार इन पदों के लिए वो लोग आवेदन कर सकते हैं, जिनकी उम्र 1 जुलाई तक 40 साल हो गई है और उम्मीदवार का किसी भी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट होना आवश्यक है। उम्मीदवार को किसी सरकारी, पब्लिक सेक्टर यूनिट, यूनिवर्सिटी के अलावा किसी प्राइवेट कंपनी में 15 साल काम का अनुभव होना भी आवश्यक है। आवेदन करने की आखिरी तारीख- 30 जुलाई 2018 है।

कितने दिनों के लिए होगी नियुक्ति

इन पदों पर चयनित होने वाले उम्मीदवारों की नियुक्ति तीन साल तक के लिए की जाएगी और सरकार इस कॉन्ट्रेक्ट को पांच साल तक बढ़ा भी सकती है। बता दें कि इन पदों के लिए प्रोफेशनल उम्मीदवार ही अप्लाई कर सकते हैं।

कितनी होगी सैलरी

मोदी सरकार इन पदों पर चयनित होने वाले उम्मीदवारों को 1.44 लाख से 2.18 रुपये प्रति महीना सैलरी देगी और इस सैलरी के साथ उम्मीदवारों को कई भत्ते और सुविधाएं भी सरकार की ओर से दी जाएंगी।

किन विभागों में होगी नियुक्ति

सरकार ने जिन पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं, उनकी नियुक्ति 10 मंत्रालयों में होनी है। इनमें वित्तीय सेवा, इकोनॉमिक अफेयर, कृषि, सड़क परिवहन, शिपिंग, पर्यावरण और वन, नागरिक उड्डयन और वाणिज्य क्षेत्र शामिल हैं।

मालूम हो कि सरकार अब इसके लिए सर्विस रूल में जरूरी बदलाव भी करेगी। पीएमओ में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने 10 विभागों में बतौर जॉइंट सेक्रेटरी 10 पदों के लैटरल एंट्री से जुड़ी अधिसूचना पर कहा कि इससे उपलब्ध स्रोतों में से सर्वश्रेष्ठ को चुनने का मौका मिलेगा। गौरतलब है कि किसी मंत्रालय या विभाग में जॉइंट सेक्रेटरी का पद काफी अहम होता है और तमाम बड़ी नीतियों को अंतिम रूप देने में या उसके अमल में इनका अहम योगदान होता है।

कैसे होगा चयन

इनके चयन के लिए उम्मीदवारों का इंटरव्यू लिया जाएगा और कैबिनेट सेक्रेटरी के नेतृत्व में बनने वाली कमिटी इनका इंटरव्यू लेगी।

तेजस्वी ने सरकार के इस फैसले पर उठाए सवाल

हालाँकि, मोदी सरकार के इस बड़े बदलाव को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी आनी शुरू हो गई हैं। बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राजद नेता तेजस्वी यादव ने मोदी सरकार के फैसले पर सवाल उठाया है।


तेजस्वी ने ट्वीट कर कहा, ‘यह मनुवादी सरकार UPSC को दरकिनार कर बिना परीक्षा के नीतिगत व संयुक्त सचिव के महत्वपूर्ण पदों पर मनपसंद व्यक्तियों को कैसे नियुक्त कर सकती है? यह संविधान और आरक्षण का घोर उल्लंघन है। कल को ये बिना चुनाव के प्रधानमंत्री और कैबिनेट बना लेंगे। इन्होंने संविधान का मजाक बना दिया है।’

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बिहार में 25 अक्टूबर से पॉलीथीन बैन, प्रयोग करने पर 1 लाख तक लगेगा जुर्माना

NewsCode | 23 October, 2018 1:14 PM
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पटना। बिहार में प्लास्टिक कैरी बैग के प्रयोग को प्रतिबंधित करने के लिए अधिसूचना जारी कर दी गई है। 25 अक्टूबर से हर प्रकार के कैरी बैग के प्रयोग पर प्रतिबंध रहेगा। पटना हाई कोर्ट के आदेश पर बिहार सरकार ने ये फैसला लिया है।

आपको बता दें कि पहले पटना हाई कोर्ट के निर्देश पर प्रतिबंध 24 सितंबर से लगने वाला था लेकिन सरकार ने तैयारियों के लिए एक महीने का समय लिया था। पर्यावरण और वन मंत्रालय ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। अधिसूचना के मुताबिक, पॉलीथीन के उत्पादन या बार-बार प्रयोग पर पांच साल की जेल और 1 लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान है। हालांकि सरकार ने अबतक के स्टॉक को खपाने के लिए 60 दिनों की मोहलत भी दी है। इसके बाद 15 दिसंबर से पॉलीथीन के प्रयोग पर दंड की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

बैन में सिर्फ प्लास्टिक कैरी बैग को प्रतिबंधित किया गया है जबकि बायो वेस्ट के संग्रहण और भंडारण के लिए प्रयोग होने वाले 50 माइक्रोन से अधिक के कैरी बैग पर प्रतिबंध लागू नहीं होगा। साथ ही सभी प्रकार के खाद्य और अन्य पदार्थ की पैकेजिंग, दूध और पौधे उगाने के प्रयोग में आने वाले बैग भी इस बैन से मुक्त रहेंगे।

इससे पहले राज्य सरकार ने कोर्ट का भरोसा दिलाया था कि जरूरी नियमावली बनाने के बाद पूर्ण प्रतिबंध के लिए अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। इसके अलावा बिहार सरकार ने कोर्ट में यह भी बताया कि 25 अक्टूबर से शहरों में पॉलिथीन के पूर्ण प्रतिबंध के बाद 25 नवंबर को राज्य के ग्रामीण इलाकों में भी इस पर पूर्ण प्रतिबंध लग जाएगा। यानी शहरों के एक महीना बाद गांवों में पॉलिथीन का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।

पहले 24 सितंबर से बिहार में पॉलीथीन पर पूर्ण प्रतिबंध का डेडलाईन पटना हाईकोर्ट की तरफ से दिया गया था लेकिन उस समय राज्य सरकार ने कहा था कि अभी इसके लिए पूरी तरह से तैयार नहीं है। इसलिए अब खुद राज्य सरकार ने बिहार के शहरी क्षेत्रों को पॉलिथीन रहित करने के लिए 25 अक्टूबर की तारीख तय की है।


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Paytm के मालिक को ब्लैकमेल कर मांगे 20 करोड़, महिला सेक्रेटरी समेत तीन गिरफ्तार

NewsCode | 23 October, 2018 12:13 PM
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नई दिल्ली। मशहूर मोबाइल वॉलेट कंपनी पेटीएम (Paytm) के कुछ खास कर्मचारियों द्वारा कंपनी के सीईओ विजय शेखर का पर्सनल डाटा चुराकर 20 करोड़ रुपए उगाही करने का मामला सामने आया है। मामले में नोएडा की थाना सेक्टर-20 पुलिस ने कंपनी की महिला वाइस प्रेसिडेंट, उसके पति और एक कर्मचारी को गिरफ्तार किया है।

नोएडा के एसएसपी अजय पाल शर्मा के मुताबिक विजय शर्मा ने उनसे शिकायत की थी कि कोई उन्हें ब्लैकमेल कर रहा है। विजय शर्मा ने बताया कि 20 सितंबर को जब वे जापान में थे, उसी समय उनके पास थाइलैंड के एक नंबर से ब्लैकमेलर का फोन आया। उसने दावा किया कि विजय शर्मा के निजी डाटा उसके पास हैं। इसके एवज में ब्लैकमेलर ने 20 करोड़ की मांग की। साथ ही उसने कहा कि अगर उसे पैसे नहीं दिए गए तो वे पर्सनल डाटा सार्वजनिक कर देगा, जिससे विजय शेखर की छवि खराब हो जाएगी।

ब्लैकमेलर ने कहा कि उसके पास ये डाटा कंपनी के ही एडमिन डिपार्टमेंट में काम करने वाले राहुल और देवेंद्र से मिली है। इन दोनों कर्मचारियों को विजय शर्मा के पर्सनल डाटा कंपनी में सेक्रेटरी सोनिया धवन से मिली है। ब्लैकमेलर ने ये भी बताया कि उगाही की रकम का 10 प्रतिशत राहुल और देवेंद्र को दिया जाएगा। विजय शेखर के मुताबिक अपने ही कर्मचारियों की इस कारगुजारी पर उन्हें पहले तो विश्वास ही नहीं हुआ। इससे वे तनाव में आ गए।

दो महीने से चल रही थी ब्लैकमेलिंग

विजय शेखर के भाई अजय शेखर शर्मा ने पुलिस को दी गई शिकायत में लिखा कि उनकी कंपनी में सोनिया धवन और देवेंद्र कुमार काम करते हैं। सोनिया के पति का नाम रूपक जैन है। वह नोएडा में ही प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करता है। सोनिया धवन विजय शेखर की निजी सचिव के रूप में कंपनी में काम करती थीं।

सोनिया, रूपक और देवेंद्र कुमार ने ही साजिश करके विजय के निजी कम्प्यूटर से तमाम महत्वपूर्ण जानकारियां चोरी कर लीं। डेटा चोरी करने के बाद इन लोगों को कोई ऐसा आदमी चाहिए था जो इनसे पैसे निकाल सके। इसके लिए कोलकाता में रोहित चोमल को खोजा गया। उसके बाद देवेंद्र ने कोलकाता जाकर रोहित को डेटा दिया।

सच्चाई जांचने के लिए जमा किए 2 लाख रुपये

डेटा मिल जाने के बाद 10 सितंबर 2018 को रोहित चोमल ने विजय शेखर को फोन किया। एक बार फोन करने के बाद फिर उन्हें वॉट्सऐप कॉल की। पहले 10 करोड़ रुपये मांगे। रोहित ने इन पैसों को बैंक में जमा कराने के लिए आईसीआईसीआई बैंक का खाता नंबर भी दिया।

पुलिस को दी शिकायत में अजय शेखर ने बताया कि 10 अक्टूबर को पहले 67 रुपये और फिर 15 अक्टूबर को 2 लाख रुपये इस खाते में ट्रांसफर भी कर दिए गए। पैसे ट्रांसफर हो जाने के बाद रोहित ने फिर 10 करोड़ रुपये की मांग शुरू कर दी। जब रोहित ने फिर से पैसे जमा करने के लिए प्रेशर बनाना शुरू किया तो उसके बाद अजय शेखर ने पुलिस में शिकायत कर दी।

शिकायत मिलने पर नोएडा पुलिस Paytm के सेक्टर पांच स्थित ऑफिस पहुंची और तीनों आरोपियों- सेक्रेटरी सोनिया, राहुल और देवेंद्र को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक इस पूरी साजिश की मास्टरमाइंड सोनिया है। उसे इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की मदद से दबोचा गया।

बता दें कि पेटीएम साल 2012 में अस्तित्व में आई। आज 7 मिलियन लोग इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। नोटबंदी के बाद अधिकतर लोग Paytm मोबाइल ऐप के जरिये इसी ई-वॉलेट से भुगतान कर रहे थे। साल 2017 में कंपनी का करोड़ों का कारोबार रहा है।


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सुप्रीम कोर्ट का फैसला – दिवाली पर सिर्फ 2 घंटे के लिए जलाएं पटाखे

NewsCode | 23 October, 2018 11:35 AM
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नई दिल्ली। दिवाली के मौके पर पटाखों की बिक्री को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया। सर्वोच्च अदालत ने कुछ शर्तों के साथ देश में पटाखा बिक्री को स्वीकृति दे दी है। कोर्ट ने कहा है कि कोशिश की जाए कि कम प्रदूषण वाले पटाखों का इस्तेमाल हो ताकि पर्यावरण को कोई नुकसान ना पहुंच पाए। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद इस दिवाली पर देश में पटाखे की गूंज जरूर सुनाई देगी और लोग धमाकेदार अंदाज में दिवाली मना पाएंगे।

हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने पटाखा फोड़ने के लिए समयसारिणी जारी कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, दिवाली पर लोग रात 8 बजे से 10 बजे तक, क्रिसमस और न्यू ईयर पर रात 11.45 बजे से 12.15 बजे तक ही पटाखे फोड़ पाएंगे। इसके अलावा कोई भी विक्रेता ऑनलाइन पटाखे नहीं बेच पाएगा।

बता दें कि जस्टिस एके सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण की बेंच ने बीते 28 अगस्त को इस मसले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। कोर्ट ने इस मामले में याचिकाकर्ताओं के अलावा पटाखा व्यापारी, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड समेत एनजीओ के पक्ष जाने थे। बेंच ने सुनवाई के दौरान अपनी टिप्पणी में कहा था कि स्वास्थ्य के अधिकार और व्यापार में सामंजस्य बैठाने की जरुरत है।

पिछले साल कोर्ट ने लगाया था बैन

इससे पहले पिछले साल कोर्ट ने प्रदूषण के मद्देनजर दिवाली से पहले दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर रोक लगा दी थी। दिवाली से ठीक पहले 9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिबंध लगाते हुए अपने आदेश में यह भी कहा था कि कुछ शर्तों के साथ पटाखों की बिक्री एक नवंबर, 2017 यानी दिवाली गुजर जाने के बाद फिर से की जा सकेगी।

2016 में दीवाली के बाद बढ़े प्रदूषण के मुद्दे पर दाखिल एक याचिका की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में दिल्ली-एनसीआर में पटाखे की बिक्री पर बैन लगा दिया था। हालांकि 12 सितंबर 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों की बिक्री पर पाबंदी वाले आदेश में संशोधन कर दिया और कुछ शर्तों के साथ पटाखा विक्रेताओं के अस्थायी लाइसेंस की संख्या में 50 फीसदी कटौती करने का आदेश दिया था।

साथ ही कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में दूसरे राज्यों से पटाखे लाने पर भी प्रतिबंध लगा दिया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के उक्त फैसले ने एक बार फिर नवंबर 2016 के पुराने आदेश को बहाल करते हुए दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाने का आदेश दे दिया था।


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