अमेरिका: एयरपोर्ट से एयरलाइन कर्मचारी ने चुराया विमान, उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद दुर्घटनाग्रस्‍त

NewsCode | 11 August, 2018 12:36 PM
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वाशिंगटन। अमेरिका के सिएटल एयरपोर्ट पर एयरलाइन का एक कर्मचारी प्लेन चोरी के बाद उसे ले उड़ा जिससे वहां अफ़रातफरी मच गई। चोरी किए गए विमान के उड़ान भरते ही एयरपोर्ट से सारी उड़ानें रोक दी गईं।

चोर एयरपोर्ट पहुंचे, विमान में घुसे और विमान को रनवे पर दौड़ाकर उड़ाकर ले गए। इस पर तत्काल बयान जारी करते हुए अलास्का एयरलाइन्स ने यह बयान जारी किया कि चोरी किया गए विमान में कोई भी यात्री सवार नहीं था।

इस विमान के पीछे एक एफ-15 फ़ाइटर प्लेन को लगाया गया। थोड़ी ही देर बाद चोरी किए गए विमान के क्रैश होने की खबर आई। अब एयरपोर्ट पर विमानों की आवाजाही फिर से शुरू हो गई है।

शेरफ के अधिकारियों का कहना है कि जिस शख्स ने वाशिंगटन में अलास्का एयरलाइन की विमान को एयरपोर्ट से चुराया, वह आत्मघाती था। उसका आतंकवाद से कोई लेना देना नहीं है।

उन्होंने बताया कि सी-टैक एयरपोर्ट से उड़ान भरने के कुछ देर बाद डायवर्ट होकर यह विमान केट्रोन आइलैंड में क्रैश हो गया। होराइजन एयर क्‍यू400 विमान में कोई भी अन्य यात्री सवार नहीं था। यह 76 सीटों वाला टर्बोप्रोप एयरक्रॉफ्ट था।

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गौरतलब है कि सिएटल एयरपोर्ट की यह घटना सुरक्षा में बड़े चूक का परिणाम है। हालांकि, अभी तक इसमें आगे विस्तृत जानकारी नहीं मिल पाई है।

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भारत के साथ ये तीन देश भी आज मना रहे हैं आजादी का जश्न

NewsCode | 15 August, 2018 2:10 PM
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नई दिल्ली। देश आजादी के 71वें साल का जश्न मना रहा है। साल 1947 में 15 अगस्त के दिन भारत अंग्रेजों की करीब 200 साल की दासता से आजाद हुआ। गूगल ने भी स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर एक ख़ास डूडल बनाया है। लेकिन क्या आप जानते हैं भारत के साथ ही तीन ऐसे देश और हैं, जो इसी दिन अपनी आजादी का जश्न मनाते हैं, क्योंकि 15 अगस्त के ही दिन इन देशों ने भी परतंत्रता से स्वतंत्रता की ओर कदम रखा था। आइए जानते हैं उन देशों के बारे में…

15 अगस्त भारत के अलावा तीन अन्य देशों का भी स्वतंत्रता दिवस है, जिसमें दक्षिण कोरिया, बहरीन और कांगो का नाम शामिल है। बता दें कि दक्षिण कोरिया ने जापान से 15 अगस्त, 1945 को, बहरीन ने ब्रिटेन से 15 अगस्त, 1971 को और कांगो ने फ्रांस से 15 अगस्त, 1960 को आजादी हासिल की थी। इन देशों में भी हर साल 15 अगस्त को जश्न मनाया जाता है।

इतिहासकारों के मुताबिक ब्रिटेन भारत को 1947 में नहीं बल्‍कि साल 1948 में आजाद करना चाहता था, लेकिन महात्‍मा गांधी के ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ से परेशान होकर अंग्रजों ने भारत को एक साल पहले ही यानी 15 अगस्‍त 1947 को ही आजाद करने के विचार पर फैसला ले लिया। भारत में आजादी की पहली लड़ाई 1857 से शुरू हुई और 1919 के बाद से तेज हो गई थी।

इसके अलावा भारत में आजादी को लेकर आर-पार की कोशिश सन् 1930 से ही शुरू हो गई जब 1929 लाहौर सत्र में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज घोषणा, या “भारत की आजादी की घोषणा” का प्रचार किया।

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बोकारो : तिरंगे का घोर अपमान, माननीयों ने जूते-चप्‍पल पहनकर फहराया तिरंगा

NewsCode Jharkhand | 15 August, 2018 4:17 PM
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बोकारो। झारखंड सरकार के मंत्री अमर बाउरी ने स्‍वाधीनता दिवस के मौके पर बोकारो में तिरंगा फहराया लेकिन उन्‍होंने इस दौरान पैरों में चप्‍पलें पहन रखी थी। मान्‍य परंपरा के अनुसार जूते और चप्‍पलें पहन कर तिरंगा फहराना मर्यादा के प्रतिकूल है और राष्‍ट्र ध्‍वज का अपमान है। राज्‍य सरकार के मंत्रियों से कम से कम, राष्‍ट्र ध्‍वज के सम्‍मान में इस प्रकार की लापरवाही की उम्‍मीद नहीं की जा सकती।

बोकारो : तिरंगे का घोर अपमान, माननीयों ने जूते-चप्‍पल पहनकर फहराया तिरंगा

वहीं दूसरी ओर स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर गिरिडीह जिले के बीजेपी सांसद रविन्द्र कुमार पांडेय ने भी बोकारो में चप्पल पहनकर ही राष्ट्रीय ध्वज फहराया।

बोकारो : तिरंगे का घोर अपमान, माननीयों ने जूते-चप्‍पल पहनकर फहराया तिरंगा

तिरंगे के सम्‍मान की अनदेखी की रही-सही कमी बोकारो में कांग्रेस पार्टी के नेता डॉ पी नैय्यर ने पूरी कर दी। बीजेपी के मंत्री और सांसद ने तो चप्‍पलें पहन कर तिरंगा फहराया था लेकिन कांग्रेस के नेता डॉ पी नैय्यर ने जूते पहनकर ही तिरंगा फहराया।

बोकारो : तिरंगे का घोर अपमान, माननीयों ने जूते-चप्‍पल पहनकर फहराया तिरंगा

मतलब साफ है कि तिरंगे का अपमान करने में कोई किसी से कम नहीं रहा। इन माननीयों को उस मिट्टी पर भी, थोड़ी दूर नंगे पैर चलने में कष्‍ट का अनुभव होता है जिस मिट्टी को अमर शहीदों ने अपने खून से सींचा है। जो तिरंगे को फहराने से पहले अपने पैरों से जूते-चप्‍पल नहीं उतार सकते, उनसे ये उम्‍मीद करना बेकार है कि कभी वे इस मिट्टी को अपने माथे से लगाएंगे। कहने को तो ये सभी माननीय जन प्रतिनिधि हैं लेकिन इनके कृत्‍यों से जनता क्‍या सीख लेगी ये विचारणीय है। शायद इन्‍हें ये पता नहीं है कि चाहे राष्‍ट्र ध्‍वज हो या धर्म ध्‍वज, इन्‍हें नंगे पैर फहराया जाता है। ध्‍वज के प्रति सम्‍मान प्रकट करने की ये परंपरा है।

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सरायकेला : ड्यूटी से लौट रहे दो रेलकर्मी सगे भाई की करंट लगने से दर्दनाक मौत

NewsCode Jharkhand | 15 August, 2018 4:05 PM
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सरायकेला। सरायकेला थाना के सीनी ओपी अंतर्गत आज  ड्यूटी खत्म कर घर लौट रहे मोटरसाईकिल सवार रेलवे के दो चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों की बिजली की नंगी तार की चपेट में आने से मौत हो गयी। मृतक 40 वर्षीय भोला महतो तथा 28 वर्षीय ईश्वर महतो दोनों ही सगे  भाई थे तथा रेलवे में चतुर्थवर्गीय कर्मचारी थे।

ड्यूटी खत्म कर लौट रहे थे

बताया जा रहा है, कि आज सुबह दोनों भाई अपनी ड्यूटी खत्म कर मोटरसाईकिल से अपने घर उलीडीह लौट रहे थे, तभी सिंदरी गांव के पास नंगी लटकी बिजली के तार के चपेट में वे दोनों आ गये। जिससे करंट लगने से दोनों की मौत हो गयी।

वहीं तत्काल दोनों  को स्थानीय लोग और पुलिस की मदद से सदर अस्पताल लाया गया। जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

उधर इस घटना की सूचना पाकर मृतक के परिजनों के अलावा रेलवे के अधिकारी व कर्मचारी तथा खरसांवा विधायक दशरथ गागराई सदर अस्पताल पहुंचे और घटना की जानकारी ली। इधर रेलवे अधिकारियों ने भरोसा दिलाया  है कि रेलवे के प्रावधानों के अनुरुप मृतक के परिजनों को सभी लाभ दिये जायेंगे।

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पांच हजार की तत्काल आर्थिक सहायता मिली

वहीं मृत कर्मचारियों के दाह संस्कार व अन्य कार्य के लिए रेलवे वेलफेयर एसोसिएशन ने बीस हजार रुपये तथा इंडियन रेलवे सिग्नल व टेलिकॉम विभाग की ओर से पांच हजार की तत्काल आर्थिक सहायता दी गयी है।  उधर बिजली की नंगी तार सड़क किनारे झूलने तथा इस घटना के होने से लोगों में बिजली विभाग के खिलाफ गहरा आक्रोश देखा जा रहा है।

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