लोहरदगा : मां का स्तनपान, शिशु के लिए अमृत समान, स्तनपान कराने पर जोर

NewsCode Jharkhand | 7 August, 2018 5:37 PM
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लोहरदगा। विश्व स्तनपान सप्ताह के समापन अवसर पर नगर भवन में आयोजित कार्यक्रम में सभी ने समाज को कुपोषण मुक्त बनाने और इसके लिए अपने दायित्वों का निर्वहन करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में कहा गया कि मां का स्तनपान, शिशु के लिए अमृत के समान होता है। वह शिशु को कई बीमारियों से बचाता है। आज भी ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरी क्षेत्र में भी स्तनपान को लेकर लोगों में झिझक देखी जाती है। मां अपने बच्चे को स्तनपान कराने से परहेज करती है जिसका परिणाम होता है कि मां को कई बीमारियों का सामना करना पड़ता है। साथ ही शिशु का भी सर्वांगीण विकास नहीं हो पाता है। शिशु कुपोषण का शिकार होकर रह जाता है। ऐसे में महिलाओं को जागरुक करने की जरूरत है।

कार्यक्रम में मधुसूदन लाल अग्रवाल महिला महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर शमीमा खातून ने कहा कि सभी धर्मों में स्तनपान को महत्व दिया गया है। यह शर्मिंदगी नहीं बल्कि एक मां के लिए उसका कतर्व्य है। डीसी विनोद कुमार ने कहा कि जिले के तमाम अधिकारियों ने 1000 से ज्यादा कुपोषित बच्चों को गोद लेकर अपने दायित्व का परिचय दिया है। हम आगे भी इस अभियान को जारी रखेंगे। कार्यक्रम में आधा दर्जन महिलाओं की गोद भराई की रस्म पूरी की गई। साथ ही कई बच्चों कि मुँह-जूठी भी कराई गई।

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जामताड़ा : लाखों की लागत से बना मुर्दाघर पड़ा है बेकार, नहीं हो पाया चालू

NewsCode Jharkhand | 14 August, 2018 8:28 PM
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अज्ञात शव मिलते ही उसे सुरक्षित रखने में होती है परेशानी

जामताड़ा। जिला अस्पताल में शव रखने के लिए फ्रीजर की सुविधा न होने से अज्ञात शव को रखने में समस्‍या हो रही है। नियम के मुताबिक शव बरामदगी होने के बाद पुलिस व स्वास्थ्य महकमा को उसकी पहचान नहीं होने तक सुरक्षित रखना पड़ता है।

मुर्दाघर में नहीं है व्यवस्था

स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता के कारण जिले में सरकारी मुर्दाघर का संचालन शुरू नहीं हो पाया है। जामताड़ा को जिला बने हुए लगभग 18 वर्ष बीत चुके हैं लेकिन अभी भी मुर्दा घर नहीं है। इससे अज्ञात शव मिलने के साथ ही परेशानी बढ़ जाती है। अज्ञात शव मिलने पर उसे प्रशासन मजबूरन सदर अस्पताल भिजवा देता है।

बिना बिजली के बीस लाख की लागत बेकार

अज्ञात शवों को सुरक्षित रखने के लिए जिला प्रशासन ने एक साल पूर्व पोस्टमार्टम हाउस के समीप करीब 20 लाख रुपये की लागत से मुर्दा घर का निर्माण कराया था। ठेकेदार इसे स्वास्थ्य विभाग को सौंप भी चुका है। मुर्दाघर के संचालन में थ्री फेज बिजली आवश्यक है, लेकिन आजतक बिजली कनेक्‍शन नहीं हो पाया है। इसी वजह से निर्माण कार्य पूरा होने के बाद भी मुर्दाघर का संचालन शुरू नहीं हो पाया है।

हाल में परिस्थिति हुई विकट

बीते 24 जुलाई को मिहिजाम स्थित हिल रोड मोहल्ले में तीहरे हत्या का शव जब परिजनों ने लेने से इन्कार कर दिया तो शव को रखने में जिला प्रशासन के सामने परेशानी खड़ी हो गई। फिर उसे धनबाद पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। मालूम हो कि अज्ञात लाश की शिनाख्‍त के लिए कम से कम 72 घंटे तक सुरक्षित रखना अनिवार्य है। 72 घंटे बाद शव की स्थिति बदतर हो जाती है। उसे पहचान करने में परिजनों को परेशानी होती है।

वैकल्पिक व्यवस्था में रखा जाता है शव

पुलिस पदाधिकारी व परिजनों के आग्रह पर स्वास्थ्य विभाग प्लास्टिक में बर्फ डालकर उसमें शव को रखकर बांध देता है तथा पोस्टमार्टम हाउस में रखवा देता है।

क्या कहते हैं सीएस

सीएस डॉ. बीके साहा ने बताया कि पोस्टमार्टम परिसर में मुर्दा घर का निर्माण हो चुका है। इसके संचालन के के लिए थ्री फेज विद्युत कनेक्शन आवश्यक है। जमीन संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के कारण कनेक्शन नहीं हो पाया है। इस निमित अंचल कार्यालय से जमीन संबंधित दस्तावेज प्राप्त करने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। दस्तावेज प्राप्त होते ही कनेक्शन का काम हो जाएगा, उसके बाद शव मुर्दाघर में ही रखा जाएगा।

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बोकारो : तिरंगे का घोर अपमान, माननीयों ने जूते-चप्‍पल पहनकर फहराया तिरंगा

NewsCode Jharkhand | 15 August, 2018 4:17 PM
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बोकारो। झारखंड सरकार के मंत्री अमर बाउरी ने स्‍वाधीनता दिवस के मौके पर बोकारो में तिरंगा फहराया लेकिन उन्‍होंने इस दौरान पैरों में चप्‍पलें पहन रखी थी। मान्‍य परंपरा के अनुसार जूते और चप्‍पलें पहन कर तिरंगा फहराना मर्यादा के प्रतिकूल है और राष्‍ट्र ध्‍वज का अपमान है। राज्‍य सरकार के मंत्रियों से कम से कम, राष्‍ट्र ध्‍वज के सम्‍मान में इस प्रकार की लापरवाही की उम्‍मीद नहीं की जा सकती।

बोकारो : तिरंगे का घोर अपमान, माननीयों ने जूते-चप्‍पल पहनकर फहराया तिरंगा

वहीं दूसरी ओर स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर गिरिडीह जिले के बीजेपी सांसद रविन्द्र कुमार पांडेय ने भी बोकारो में चप्पल पहनकर ही राष्ट्रीय ध्वज फहराया।

बोकारो : तिरंगे का घोर अपमान, माननीयों ने जूते-चप्‍पल पहनकर फहराया तिरंगा

तिरंगे के सम्‍मान की अनदेखी की रही-सही कमी बोकारो में कांग्रेस पार्टी के नेता डॉ पी नैय्यर ने पूरी कर दी। बीजेपी के मंत्री और सांसद ने तो चप्‍पलें पहन कर तिरंगा फहराया था लेकिन कांग्रेस के नेता डॉ पी नैय्यर ने जूते पहनकर ही तिरंगा फहराया।

बोकारो : तिरंगे का घोर अपमान, माननीयों ने जूते-चप्‍पल पहनकर फहराया तिरंगा

मतलब साफ है कि तिरंगे का अपमान करने में कोई किसी से कम नहीं रहा। इन माननीयों को उस मिट्टी पर भी, थोड़ी दूर नंगे पैर चलने में कष्‍ट का अनुभव होता है जिस मिट्टी को अमर शहीदों ने अपने खून से सींचा है। जो तिरंगे को फहराने से पहले अपने पैरों से जूते-चप्‍पल नहीं उतार सकते, उनसे ये उम्‍मीद करना बेकार है कि कभी वे इस मिट्टी को अपने माथे से लगाएंगे। कहने को तो ये सभी माननीय जन प्रतिनिधि हैं लेकिन इनके कृत्‍यों से जनता क्‍या सीख लेगी ये विचारणीय है। शायद इन्‍हें ये पता नहीं है कि चाहे राष्‍ट्र ध्‍वज हो या धर्म ध्‍वज, इन्‍हें नंगे पैर फहराया जाता है। ध्‍वज के प्रति सम्‍मान प्रकट करने की ये परंपरा है।

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सरायकेला : ड्यूटी से लौट रहे दो रेलकर्मी सगे भाई की करंट लगने से दर्दनाक मौत

NewsCode Jharkhand | 15 August, 2018 4:05 PM
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सरायकेला। सरायकेला थाना के सीनी ओपी अंतर्गत आज  ड्यूटी खत्म कर घर लौट रहे मोटरसाईकिल सवार रेलवे के दो चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों की बिजली की नंगी तार की चपेट में आने से मौत हो गयी। मृतक 40 वर्षीय भोला महतो तथा 28 वर्षीय ईश्वर महतो दोनों ही सगे  भाई थे तथा रेलवे में चतुर्थवर्गीय कर्मचारी थे।

ड्यूटी खत्म कर लौट रहे थे

बताया जा रहा है, कि आज सुबह दोनों भाई अपनी ड्यूटी खत्म कर मोटरसाईकिल से अपने घर उलीडीह लौट रहे थे, तभी सिंदरी गांव के पास नंगी लटकी बिजली के तार के चपेट में वे दोनों आ गये। जिससे करंट लगने से दोनों की मौत हो गयी।

वहीं तत्काल दोनों  को स्थानीय लोग और पुलिस की मदद से सदर अस्पताल लाया गया। जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

उधर इस घटना की सूचना पाकर मृतक के परिजनों के अलावा रेलवे के अधिकारी व कर्मचारी तथा खरसांवा विधायक दशरथ गागराई सदर अस्पताल पहुंचे और घटना की जानकारी ली। इधर रेलवे अधिकारियों ने भरोसा दिलाया  है कि रेलवे के प्रावधानों के अनुरुप मृतक के परिजनों को सभी लाभ दिये जायेंगे।

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पांच हजार की तत्काल आर्थिक सहायता मिली

वहीं मृत कर्मचारियों के दाह संस्कार व अन्य कार्य के लिए रेलवे वेलफेयर एसोसिएशन ने बीस हजार रुपये तथा इंडियन रेलवे सिग्नल व टेलिकॉम विभाग की ओर से पांच हजार की तत्काल आर्थिक सहायता दी गयी है।  उधर बिजली की नंगी तार सड़क किनारे झूलने तथा इस घटना के होने से लोगों में बिजली विभाग के खिलाफ गहरा आक्रोश देखा जा रहा है।

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