हरफनमौला सदाबहार किशोर कुमार: जन्मदिन पर सुनिए कुछ चुनिंदा और नायब नगमे

NewsCode | 4 August, 2018 12:30 AM
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हर दिल अजीज, हरफ़नमौला, सदाबहार किशोर कुमार।  जीवन से भरे किशोर कुमार। अक्खड़, अनोखे, अलबेले, मनमौजी, मजाकिया, मलंग, मौशिकीकार, फिल्मकार, अदाकार, गायक किशोर कुमार। जी हाँ, देवानंद, राजेश खन्ना और बच्चन अमिताभ जैसे सुपरस्टार सहित स्क्रीन पर गाते-गुनगुनाते कई नामचीन अदाकारों की असली आवाज रहे ‘आभास कुमार गंगोपाध्याय’ उर्फ़ किशोर कुमार। दशकों से करोड़ों संगीतप्रेमी के दिलों पर राज करने वाले किशोर कुमार ने हर मूड के गाने गाये और ऐसे गाये कि बस छा गए। आज इस आला दर्जे के फ़नकार का बड्डे है। उनके गाये हजारों गानों में से कुछ नायाब नग़मों को हमने चुना है ख़ास आपके लिए, तो लुत्फ़ उठाइये।

1. बाबू समझो इशारे:  फिल्म – चलती का नाम गाड़ी. तीन रियल लाइफ भाई- अशोक कुमार, किशोर कुमार और अनूप कुमार, इसमें एकसाथ रील पर नजर आये। इस मस्ती भरे गीत को मन्ना डे के साथ गया है किशोर दा ने अपने अनूठे अंदाज में।

2. मैं हूँ झुम झुम झुम झुमरू : फिल्म – झुमरू. किशोर दा की पर्सनालिटी से मैच करता हुआ गाना और इसमें उनकी गायकी का करतब देखिये.

3. दो और दो पांच: फिल्म- दो और दो पांच  का ये टाइटल सांग। तब हिंदी गानों में रैप की ‘रफ़्तार’ नहीं हुआ करती थी। पर सुनिये कितनी आसानी से, अपने सिग्नेचर स्टाइल में किशोर दा ने ये गाना गाया।

4. हजार राहें मुड़ के देखी: फिल्म- थोड़ी सी बेवफाई. गुलज़ार के लिखे इस बेहतरीन गाने को किशोर दा और लता दीदी ने गाया है। आँखें बंद करिये और गाने में खो जाइये।

5. प्रिय प्राणेश्वरी: फिल्म- हम तुम और वो. किशोर कुमार की खनकती आवाज के फ्लेवर को फील करिये, शुद्ध हिंदी में लिखे हुए इस गाने को।

6. फूलों के रंग से: फिल्म- प्रेम पुजारी.  कवि गोपालदास नीरज के लिखे इस गीत को किशोर दा की जीवंत आवाज में सुनने के बाद आप यही कहेंगे कि ‘इतने मदिर, इतने मधुर गीत’ अब शायद ही सुनने को मिलते हैं यार!

7. एक चतुर नार: फिल्म- पड़ोसन. किशोर दा की बहुमुखी प्रतिभा को रेखांकित करता है ये गाना। गाने में किशोर दा की ऊर्जा और मस्ती देखते ही बनती है।

 

8.  जय जय शिवशंकर:  फिल्म- आपकी कसम . किशोर कुमार के ह्यूमर का पुट है इस गाने में। अंत तक ध्यान से सुनियेगा।

9.  आके सीधी लगी दिल पे: फिल्म- हाफ टिकट. इस गाने की खासियत ये है कि इसमें फीमेल वॉइस भी किशोर दा की ही है। है न कमाल ?

10.मेरे महबूब क़यामत होगी: फिल्म- मि. एक्स इन बॉम्बे.  आशिकी में बेवफ़ाई के शिकार हुए हर आशिक का अपना आख्यान सा है ये गाना।

11.  चला जाता हूँ किसी की धुन में: फिल्म- मेरे जीवनसाथी . अपनी ही धुन में धुनी रमाने के लिए मशहूर किशोर कुमार के गाये इस गाने को लूप में लगाइये और निकल जाइये लॉन्ग ड्राइव पर।

12. इस मोड़ से जाते हैं: फिल्म- आँधी. गुलज़ार साब के बुने हुए इस दिलक़श गाने को स्वर में पिरोया है स्वर-सम्राट किशोर कुमार और स्वर-कोकिला लता मंगेशकर ने।

‘ट्रैजडी क्वीन’ मीना कुमारी की जयंती पर गूगल ने डूडल बनाकर दी श्रद्धांजलि

Tags : किशोर कुमार जन्मदिन,किशोर कुमार के गाने, Kishore Kumar Birthday, Kishore Kumar Songs, Kishore Kumar, Bollywood

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भारत के साथ ये तीन देश भी आज मना रहे हैं आजादी का जश्न

NewsCode | 15 August, 2018 2:10 PM
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नई दिल्ली। देश आजादी के 71वें साल का जश्न मना रहा है। साल 1947 में 15 अगस्त के दिन भारत अंग्रेजों की करीब 200 साल की दासता से आजाद हुआ। गूगल ने भी स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर एक ख़ास डूडल बनाया है। लेकिन क्या आप जानते हैं भारत के साथ ही तीन ऐसे देश और हैं, जो इसी दिन अपनी आजादी का जश्न मनाते हैं, क्योंकि 15 अगस्त के ही दिन इन देशों ने भी परतंत्रता से स्वतंत्रता की ओर कदम रखा था। आइए जानते हैं उन देशों के बारे में…

15 अगस्त भारत के अलावा तीन अन्य देशों का भी स्वतंत्रता दिवस है, जिसमें दक्षिण कोरिया, बहरीन और कांगो का नाम शामिल है। बता दें कि दक्षिण कोरिया ने जापान से 15 अगस्त, 1945 को, बहरीन ने ब्रिटेन से 15 अगस्त, 1971 को और कांगो ने फ्रांस से 15 अगस्त, 1960 को आजादी हासिल की थी। इन देशों में भी हर साल 15 अगस्त को जश्न मनाया जाता है।

इतिहासकारों के मुताबिक ब्रिटेन भारत को 1947 में नहीं बल्‍कि साल 1948 में आजाद करना चाहता था, लेकिन महात्‍मा गांधी के ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ से परेशान होकर अंग्रजों ने भारत को एक साल पहले ही यानी 15 अगस्‍त 1947 को ही आजाद करने के विचार पर फैसला ले लिया। भारत में आजादी की पहली लड़ाई 1857 से शुरू हुई और 1919 के बाद से तेज हो गई थी।

इसके अलावा भारत में आजादी को लेकर आर-पार की कोशिश सन् 1930 से ही शुरू हो गई जब 1929 लाहौर सत्र में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज घोषणा, या “भारत की आजादी की घोषणा” का प्रचार किया।

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जमशेदपुर : पक्षी प्रेमियों ने दिखायी संवेदना, सैकड़ों पक्षियों को पिंजरे से किया आजाद

NewsCode Jharkhand | 15 August, 2018 2:46 PM
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बेजुबानों को भी होती हैै आजादी प्यारी

जमशेदपुर। आजादी किसे प्यारी नहीं होती… चाहे इंसान हो या जानवर, हर कोई आजाद रहना चाहता है। आज एक ओर जहां पूरा देश  आजादी के जश्न मे डूबा हुआ है, वहीं जमशेदपुर के कुछ पक्षी प्रेमियों ने सौ से भी अधिक विदेशी पक्षियों को पिंजरा से आजाद किया और एक संदेश देने का प्रयास किया कि बेजुबानों को भी आजादी प्यारी होती है।

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टाटा जू ने भी लंगूरों को खुले बाड़े में रखने का लिया निर्णय

वहीं इस कड़ी में टाटा जू ने भी एक कदम बढ़ा दिया है और आज से जू के लंगूरों को छोटे बाड़े से निकालकर बड़े और खुले बाड़े में आजाद रखने का निर्णय लिया गया। वहीं लंगूर खुले बाड़े में काफी खुश नजर आए। खुले बाड़े में छोड़े जाने के बाद सभी लंगूर इधर उधर धमा- चौकड़ी करते हुए काफी खुश दिखे।

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देवघर : आयुषी ने बहायी देश-प्रेम की गंगा, संस्‍कृत में गाया “ऐ मेरे वतन के लोगों”   

NewsCode Jharkhand | 15 August, 2018 2:25 PM
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देवघर। एक ओर जहां युवाओं का रुझान पश्चिमी रहन-सहन, खान-पान और व्यवहार की ओर केंद्रित होता जा रहा है तो वहीं दूसरी ओर देश प्रेम की भावना से ओत-प्रोत, कुछ ऐसे भी बच्‍चे-बच्चियां हैं जिनके भीतर अपने देश की सभ्यता, संस्कृति और मातृभाषा की जननी संस्कृत के प्रति अगाध श्रद्धा और समर्पण देखने को मिलती है। देवघर की आयुषी अनन्‍या भी ऐसे ही लोगों में से एक है। आयुषी डीएवी स्कूल में 9वीं क्लास की छात्रा है।

देवघर : आयुषी ने बहायी देश-प्रेम की गंगा, संस्‍कृत में गाया "ऐ मेरे वतन के लोगों" 

संस्कृत को लोकप्रिय बनाने का प्रयास

विलक्षण प्रतिभा की धनी ये बालिका, बॉलीवुड हो या फिर कोई पाश्‍चात्‍य गीत, सभी का न सिर्फ संस्कृत में अनुवाद करती है बल्कि उसे सस्‍वर खुद गाती भी है। आयुषी ने स्‍वतंत्रता दिवस के मौके पर लता मांगेशकर के गए गीत ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ का संस्कृत में अनुवाद किया और खुद ही गाया भी। आयुषी को इस बात का गर्व है कि वह अपनी मातृभाषा की जननि संस्कृत को, गीतों के माध्‍यम से और भी ज्यादा लोकप्रिय बनाने की न सिर्फ एक छोटी से कोशिश कर रही है बल्कि संस्कृत से दूर हो रहे युवाओं को भी अपनी सभ्यता, संस्‍कृति और भाषा की ओर  वापस लौटने के लिए प्रेरित कर रही है।

स्कूल कैंप से मिली संस्‍कृत भाषा में गाने की प्रेरणा

आयुषी को संस्कृत भाषा में गीत गाने की प्रेरणा उसके स्कूल कैंप के दौरान मिली। जहां आयोजित की गई प्रतियोगिता को संस्कृत भाषा में ही पूरा करना था। जब इस प्रतियोगिता में आयुषी ने खुद को संस्कृत के करीब पाया तो फिर उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा। फिर एक के बाद एक हिंदी गानों को संस्कृत में अनुवाद करना शुरू कर दिया। आयुषी ने कई कठिन गीतों का सरल संस्कृत में अनुवाद कर उसे अपनी स्‍वर में गाया भी है।

रांची : नन्‍हे देशभक्‍तों ने देश के लिए बलिदान देने का लिया संकल्‍प

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