जामताड़ा : हाथियों के झुंड ने ली एक की जान, ग्रामीणों ने की मुआवजे की मांग

NewsCode Jharkhand | 21 April, 2018 8:29 PM

हाथियों ने तीन घरों को भी पहुंचाया नुकसान

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जामताड़ा। हाथियों के झुंड ने नारायणपुर थाना क्षेत्र के कठडाबर गांव निवासी पच्चीस वर्षीय जियाउद्दीन अंसारी की जान पटक-पटक कर ले ली। घटना के विरोध में आक्रोशित लोगों ने मृतक के शव के साथ लोहारंगी मध्य विद्यालय के समीप गोविंदपुर-साहिबगंज हाइवे को जाम कर दिया। वे मुआवजे की मांग कर रहे थे।

विधायक डॉ. इरफान अंसारी व वन प्रमंडल पदाधिकारी राजकुमार साह ने मुआवजा का आश्वासन देकर आधे घंटे बाद हाइवे को जाम से मुक्त कराया। विधायक ने मृतक के परिजन को नगद 25,000 रुपये दिए। इसके अलावा चार लाख रुपए सरकार की तरफ से दिलाने का भरोसा दिया।

जंगली वन्य प्राणी से जान को नुकसान को लेकर यह लाभ दिया जाएगा। पारिवारिक लाभ, प्रधानमंत्री आवास देने का भी आश्वासन दिया गया। इसके पूर्व ग्रामीण युवक की मौत की घटना की सूचना पाकर प्रखंड विकास पदाधिकारी मो. जहीर आलम, थाना प्रभारी अजय कुमार सिंह वन क्षेत्र पदाधिकारी जितेंद्र हाजरा घटनास्थल पर पहुंच चुके थे।

जियाउद्दीन के साथ रहे लोगों ने बताया कि वे तीनों हाथी देखने के लिए लोहारंगी के परसबानियां जंगल गए थे। इसी क्रम में पीछे से हाथियों के झुंड में से एक हाथी ने उसे लपक लिया। अन्य दोनों युवक जान बचाकर भागे। बताया कि काफी दूर निकलने के बाद जयाउद्दीन को देखे तो आसपास था ही नहीं। आंधी और पानी से बचने के लिए हाथियों ने जब जगह बदला तो ग्रामीण जियाउद्दीन को ढूंढ़ने जंगल की तरफ गए तो उसका शव जंगल में मिला।

गांव में खबर मिलते ही जियाउद्दीन के घर में कोहराम मच गया। उसकी पत्नी समीना बीबी दहाड़ मार कर रोने लगी। समीना गर्भ से है व गोद में दो वर्ष की बच्ची है। परिवार की माली स्थिति भी काफी दयनीय है।

हाथियों ने मचाया तांडव

हाथियों का झुंड शुक्रवार की रात्रि करीब 10:00 बजे धनबाद के टुंडी जंगल से नारायणपुर थाना क्षेत्र के बुटबेरिया पंचायत के विराजपुर गांव पहुंचा। झुंड में कुल 22 हाथी थे। इन हाथियों के झुंड ने बिराजपुर गांव के तीन आदिवासी घरों को तोड़ दिया और आर्थिक क्षति पहुंचाई। पूर्व में भी हाथियों के झुंड ने इस गांव में तांडव मचाया था।

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क्या कहते हैं डीएफओ

जिला वन क्षेत्र पदाधिकारी राजकुमार साह ने कहा कि जंगली हाथियों से बचाव के लिए सरकार को प्रसताव भेजा गया है। सरकार के आदेश आने के बाद कार्य किया जाएगा। हाथियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए हाथी बचाव दस्ता को बुला लिया गया है। यह दस्ता इन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाएगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि हाथी के पास ना जाएं और हाथी की गतिविधि की सूचना वन प्रशासन को दे।

मृतक के आश्रितों को मिलेगा सरकारी लाभ : विधायक

विधायक डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि जान जाने की भरपाई कदापि नहीं की जा सकती। मृतक के आश्रितों को अधिक से अधिक सरकारी लाभ दिलाने का वे प्रयास करेंगे।

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रांची : जेल में मारपीट करने के मामले में पूर्व सीएम को मिली राहत

NewsCode Jharkhand | 12 October, 2018 1:05 PM
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रांची। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा को रांची की निचली अदालत ने जेल में मारपीट करने से जुड़े एक पुराने मामले में राहत दी है। रांची व्यवहार न्यायालय के न्यायिक दंडाधिकारी मनीष कुमार की अदालत ने मधु कोड़ा को साक्ष्य के अभाव में बरी करने का फैसला सुनाया।

आय से अधिक संपत्ति मामले में जब वर्ष 2011 में मधु कोड़ा जेल में बंद थे, तो उन पर जेल में मारपीट करने और जेल प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करने का आरोप लगा था।

पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा अक्टूबर 2011 में आय से अधिक संपत्ति मामले में रांची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में बंद थे। उस दौरान मधु कोड़ा ने जेल में मिल रहे खाने को खराब बताते हुए जेल के अंदर ही विरोध किया था।

उन पर आरोप लगा था कि उन्होंने जेल में सुरक्षा घेरा को तोड़ा और जेल में बंद कैदियों के साथ मारपीट की, इसके साथ ही जेल प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की। इस मामले में जेल में बंद अन्य कैदियों की ओर से रांची के सदर थाना में मामला दर्ज कराया गया था।

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इस मामले में पांच साल में मात्र तीन गवाहों के बयान दर्ज कराये गये थे, मामले से जुड़े अन्य गवाहों को कोर्ट में हाजिर कराने के लिए न्यायिक दंडाधिकारी ने रांची एसएसपी और अन्य पुलिस अधिकारियों को कई बार पत्र लिखा, लेकिन गवाह नहीं आये।

इस घटना को लेकर सजायाफ्ता बंदी राजू तांती ने मधु कोड़ा के साथ-साथ जेल में बंद पूर्व मंत्री एनोस एक्का, हरिनारायण राय, सावना लकड़ा और आईएएस अधिकारी प्रदीप कुमार के खिलाफ थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी थी, मामले में जांच कर कार्रवाई करते हुए सब इंस्पेक्टर कमलेश कुमार ने सिर्फ मधु कोड़ा के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था।

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बिहार में 25 अक्टूबर से पॉलीथीन बैन, प्रयोग करने पर 1 लाख तक लगेगा जुर्माना

NewsCode | 23 October, 2018 1:14 PM
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पटना। बिहार में प्लास्टिक कैरी बैग के प्रयोग को प्रतिबंधित करने के लिए अधिसूचना जारी कर दी गई है। 25 अक्टूबर से हर प्रकार के कैरी बैग के प्रयोग पर प्रतिबंध रहेगा। पटना हाई कोर्ट के आदेश पर बिहार सरकार ने ये फैसला लिया है।

आपको बता दें कि पहले पटना हाई कोर्ट के निर्देश पर प्रतिबंध 24 सितंबर से लगने वाला था लेकिन सरकार ने तैयारियों के लिए एक महीने का समय लिया था। पर्यावरण और वन मंत्रालय ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। अधिसूचना के मुताबिक, पॉलीथीन के उत्पादन या बार-बार प्रयोग पर पांच साल की जेल और 1 लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान है। हालांकि सरकार ने अबतक के स्टॉक को खपाने के लिए 60 दिनों की मोहलत भी दी है। इसके बाद 15 दिसंबर से पॉलीथीन के प्रयोग पर दंड की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

बैन में सिर्फ प्लास्टिक कैरी बैग को प्रतिबंधित किया गया है जबकि बायो वेस्ट के संग्रहण और भंडारण के लिए प्रयोग होने वाले 50 माइक्रोन से अधिक के कैरी बैग पर प्रतिबंध लागू नहीं होगा। साथ ही सभी प्रकार के खाद्य और अन्य पदार्थ की पैकेजिंग, दूध और पौधे उगाने के प्रयोग में आने वाले बैग भी इस बैन से मुक्त रहेंगे।

इससे पहले राज्य सरकार ने कोर्ट का भरोसा दिलाया था कि जरूरी नियमावली बनाने के बाद पूर्ण प्रतिबंध के लिए अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। इसके अलावा बिहार सरकार ने कोर्ट में यह भी बताया कि 25 अक्टूबर से शहरों में पॉलिथीन के पूर्ण प्रतिबंध के बाद 25 नवंबर को राज्य के ग्रामीण इलाकों में भी इस पर पूर्ण प्रतिबंध लग जाएगा। यानी शहरों के एक महीना बाद गांवों में पॉलिथीन का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।

पहले 24 सितंबर से बिहार में पॉलीथीन पर पूर्ण प्रतिबंध का डेडलाईन पटना हाईकोर्ट की तरफ से दिया गया था लेकिन उस समय राज्य सरकार ने कहा था कि अभी इसके लिए पूरी तरह से तैयार नहीं है। इसलिए अब खुद राज्य सरकार ने बिहार के शहरी क्षेत्रों को पॉलिथीन रहित करने के लिए 25 अक्टूबर की तारीख तय की है।


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Paytm के मालिक को ब्लैकमेल कर मांगे 20 करोड़, महिला सेक्रेटरी समेत तीन गिरफ्तार

NewsCode | 23 October, 2018 12:13 PM
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नई दिल्ली। मशहूर मोबाइल वॉलेट कंपनी पेटीएम (Paytm) के कुछ खास कर्मचारियों द्वारा कंपनी के सीईओ विजय शेखर का पर्सनल डाटा चुराकर 20 करोड़ रुपए उगाही करने का मामला सामने आया है। मामले में नोएडा की थाना सेक्टर-20 पुलिस ने कंपनी की महिला वाइस प्रेसिडेंट, उसके पति और एक कर्मचारी को गिरफ्तार किया है।

नोएडा के एसएसपी अजय पाल शर्मा के मुताबिक विजय शर्मा ने उनसे शिकायत की थी कि कोई उन्हें ब्लैकमेल कर रहा है। विजय शर्मा ने बताया कि 20 सितंबर को जब वे जापान में थे, उसी समय उनके पास थाइलैंड के एक नंबर से ब्लैकमेलर का फोन आया। उसने दावा किया कि विजय शर्मा के निजी डाटा उसके पास हैं। इसके एवज में ब्लैकमेलर ने 20 करोड़ की मांग की। साथ ही उसने कहा कि अगर उसे पैसे नहीं दिए गए तो वे पर्सनल डाटा सार्वजनिक कर देगा, जिससे विजय शेखर की छवि खराब हो जाएगी।

ब्लैकमेलर ने कहा कि उसके पास ये डाटा कंपनी के ही एडमिन डिपार्टमेंट में काम करने वाले राहुल और देवेंद्र से मिली है। इन दोनों कर्मचारियों को विजय शर्मा के पर्सनल डाटा कंपनी में सेक्रेटरी सोनिया धवन से मिली है। ब्लैकमेलर ने ये भी बताया कि उगाही की रकम का 10 प्रतिशत राहुल और देवेंद्र को दिया जाएगा। विजय शेखर के मुताबिक अपने ही कर्मचारियों की इस कारगुजारी पर उन्हें पहले तो विश्वास ही नहीं हुआ। इससे वे तनाव में आ गए।

दो महीने से चल रही थी ब्लैकमेलिंग

विजय शेखर के भाई अजय शेखर शर्मा ने पुलिस को दी गई शिकायत में लिखा कि उनकी कंपनी में सोनिया धवन और देवेंद्र कुमार काम करते हैं। सोनिया के पति का नाम रूपक जैन है। वह नोएडा में ही प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करता है। सोनिया धवन विजय शेखर की निजी सचिव के रूप में कंपनी में काम करती थीं।

सोनिया, रूपक और देवेंद्र कुमार ने ही साजिश करके विजय के निजी कम्प्यूटर से तमाम महत्वपूर्ण जानकारियां चोरी कर लीं। डेटा चोरी करने के बाद इन लोगों को कोई ऐसा आदमी चाहिए था जो इनसे पैसे निकाल सके। इसके लिए कोलकाता में रोहित चोमल को खोजा गया। उसके बाद देवेंद्र ने कोलकाता जाकर रोहित को डेटा दिया।

सच्चाई जांचने के लिए जमा किए 2 लाख रुपये

डेटा मिल जाने के बाद 10 सितंबर 2018 को रोहित चोमल ने विजय शेखर को फोन किया। एक बार फोन करने के बाद फिर उन्हें वॉट्सऐप कॉल की। पहले 10 करोड़ रुपये मांगे। रोहित ने इन पैसों को बैंक में जमा कराने के लिए आईसीआईसीआई बैंक का खाता नंबर भी दिया।

पुलिस को दी शिकायत में अजय शेखर ने बताया कि 10 अक्टूबर को पहले 67 रुपये और फिर 15 अक्टूबर को 2 लाख रुपये इस खाते में ट्रांसफर भी कर दिए गए। पैसे ट्रांसफर हो जाने के बाद रोहित ने फिर 10 करोड़ रुपये की मांग शुरू कर दी। जब रोहित ने फिर से पैसे जमा करने के लिए प्रेशर बनाना शुरू किया तो उसके बाद अजय शेखर ने पुलिस में शिकायत कर दी।

शिकायत मिलने पर नोएडा पुलिस Paytm के सेक्टर पांच स्थित ऑफिस पहुंची और तीनों आरोपियों- सेक्रेटरी सोनिया, राहुल और देवेंद्र को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक इस पूरी साजिश की मास्टरमाइंड सोनिया है। उसे इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की मदद से दबोचा गया।

बता दें कि पेटीएम साल 2012 में अस्तित्व में आई। आज 7 मिलियन लोग इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। नोटबंदी के बाद अधिकतर लोग Paytm मोबाइल ऐप के जरिये इसी ई-वॉलेट से भुगतान कर रहे थे। साल 2017 में कंपनी का करोड़ों का कारोबार रहा है।


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