जमशेदपुर : धतकीडीह इलाके में जॉन्डिस ने लिया महामारी का रूप, लोग दहशत में

Avijit Adharjee | 8 August, 2018 7:28 PM
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वाटर सप्लाई को मान रहे लोग दोषी,  सैंपल की हो रही  जांच

  65 घरों में मिले जॉन्डिस के मरीज

जमशेदपुर। जमशेदपुर के धतकीडीह इलाके में जॉन्डिस ने महामारी का रुप ले लिया है। महामारी रोग विशेषज्ञ लगातार बीमारी का जायजा ले रहे हैं और पानी के सैंपल को जांच की जा रही है। इस महामारी से इलाके के लोग दहशत में हैं।

जॉन्डिस के इस महामारी को लेकर मेडिकल टीम ने तक़रीबन 80 घरों का जायजा लिया गया और जांच में करीब 65 घरों में जॉन्डिस के मरीज मिले। हलांकि अभी और भी जगह सर्वे होना बाकी है।कुछ लोग इस का जिम्मेदार वाटर सप्लाई को मान रहे हैं।

दरअसल इलाके में जुसको कंपनी की पानी सप्लाई की जाती लोग इस बीमारी को लेकर आश्चर्यचकित हैं।

इलाके के कई लोग इस बीमारी से ग्रसित हैं जो अपना इलाज भी विभिन्न अस्पतालों में करवा रहे हैं। वहीं कई लोग अस्पताल के साथ-साथ झाड़-फूंक वाले बाबाओं का भी सहारा ले रहे हैं जिसे लेकर इलाके के खान बाबा के नाम से प्रसिद्ध बाबा के द्वार पर मरीजों की कतार लगी हुई है।

मदरसे में भी 30 से ज्यादा लोग  जॉन्‍डिस की गिरफ्त में

बाबा के मुताबिक पिछले 1 महीने से हर रोज तकरीबन 20 से 25 लोग उनके पास आकर इलाज करवा रहे हैं यानी हर दिन लगभग कितने ही लोग जॉन्डिस की बीमारी से ग्रसित हो रहे हैं। इलाके के मदरसे में भी 30 से ज्यादा लोग इस जॉन्‍डिस की गिरफ्त में हैं जिसकी वजह से उनकी छुट्टी कर दी गई है।

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इस मामले में जिला प्रशासन द्वारा मेडिकल बोर्ड का गठन कर लिया गया है, और उपयुक्त ने जुस्को को निर्देश भी दिया है कि अपने पानी के सैंपल की जांच जल्द कराये और लोगों से उपयुक्त ने अपील की है कि पानी को उबाल कर पियें।

बहरहाल एक खास इलाके के लोग जिस तरीके से पीलिया की बीमारी से ग्रसित हैं यह एक चिंता का विषय है।(

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जामताड़ा : लाखों की लागत से बना मुर्दाघर पड़ा है बेकार, नहीं हो पाया चालू

NewsCode Jharkhand | 14 August, 2018 8:28 PM
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अज्ञात शव मिलते ही उसे सुरक्षित रखने में होती है परेशानी

जामताड़ा। जिला अस्पताल में शव रखने के लिए फ्रीजर की सुविधा न होने से अज्ञात शव को रखने में समस्‍या हो रही है। नियम के मुताबिक शव बरामदगी होने के बाद पुलिस व स्वास्थ्य महकमा को उसकी पहचान नहीं होने तक सुरक्षित रखना पड़ता है।

मुर्दाघर में नहीं है व्यवस्था

स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता के कारण जिले में सरकारी मुर्दाघर का संचालन शुरू नहीं हो पाया है। जामताड़ा को जिला बने हुए लगभग 18 वर्ष बीत चुके हैं लेकिन अभी भी मुर्दा घर नहीं है। इससे अज्ञात शव मिलने के साथ ही परेशानी बढ़ जाती है। अज्ञात शव मिलने पर उसे प्रशासन मजबूरन सदर अस्पताल भिजवा देता है।

बिना बिजली के बीस लाख की लागत बेकार

अज्ञात शवों को सुरक्षित रखने के लिए जिला प्रशासन ने एक साल पूर्व पोस्टमार्टम हाउस के समीप करीब 20 लाख रुपये की लागत से मुर्दा घर का निर्माण कराया था। ठेकेदार इसे स्वास्थ्य विभाग को सौंप भी चुका है। मुर्दाघर के संचालन में थ्री फेज बिजली आवश्यक है, लेकिन आजतक बिजली कनेक्‍शन नहीं हो पाया है। इसी वजह से निर्माण कार्य पूरा होने के बाद भी मुर्दाघर का संचालन शुरू नहीं हो पाया है।

हाल में परिस्थिति हुई विकट

बीते 24 जुलाई को मिहिजाम स्थित हिल रोड मोहल्ले में तीहरे हत्या का शव जब परिजनों ने लेने से इन्कार कर दिया तो शव को रखने में जिला प्रशासन के सामने परेशानी खड़ी हो गई। फिर उसे धनबाद पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। मालूम हो कि अज्ञात लाश की शिनाख्‍त के लिए कम से कम 72 घंटे तक सुरक्षित रखना अनिवार्य है। 72 घंटे बाद शव की स्थिति बदतर हो जाती है। उसे पहचान करने में परिजनों को परेशानी होती है।

वैकल्पिक व्यवस्था में रखा जाता है शव

पुलिस पदाधिकारी व परिजनों के आग्रह पर स्वास्थ्य विभाग प्लास्टिक में बर्फ डालकर उसमें शव को रखकर बांध देता है तथा पोस्टमार्टम हाउस में रखवा देता है।

क्या कहते हैं सीएस

सीएस डॉ. बीके साहा ने बताया कि पोस्टमार्टम परिसर में मुर्दा घर का निर्माण हो चुका है। इसके संचालन के के लिए थ्री फेज विद्युत कनेक्शन आवश्यक है। जमीन संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के कारण कनेक्शन नहीं हो पाया है। इस निमित अंचल कार्यालय से जमीन संबंधित दस्तावेज प्राप्त करने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। दस्तावेज प्राप्त होते ही कनेक्शन का काम हो जाएगा, उसके बाद शव मुर्दाघर में ही रखा जाएगा।

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रांची : नागपंचमी के साथ-साथ स्वतंत्रता दिवस की रंग में रंगा पहाड़ी मंदिर

NewsCode Jharkhand | 15 August, 2018 10:31 AM
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रांची । नागपंचमी पर पूरे देश में श्रद्धालु भोलेनाथ के साथ नाग देव की पूजा कर रहे हैं। दूध-लावा का भोग चढ़ा रहे हैं। इस मौके पर रांची के पहाड़ी मंदिर स्थित नाग देवता मंदिर में भी श्रद्धालुओं का तांता लगा है। लोग नाग-नागिन को दूध और धान का लावा चढ़ाकर परिवार के लिए दुआ मांग रहे हैं।

कई सपेरों ने अपने सापों के साथ यहां पर डेरा भी डाल रखा है। सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी को महादेव ने गले में नाग देवता वासुकी को धारण किया था तब से इस दिन का विशेष  महत्व है। भक्त नाग राज के साथ राजा तक्षक की भी पूजा कर रहे हैं।

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धार्मिक मान्यता एवं परम्परा के मुताबिक सनातनी श्रद्धालु घरों में कटहल के पत्ते पर दूध-लावा रखकर पूजा करते हैं। कई घरों में सरसों मिले गाय के गोबर से दीवारों पर नाग देवता की आकृति बनायी जाती है। शास्त्रीय दृष्टिकोण से समस्त दुर्गुणों का त्याग कर सदगुण के साथ भोलेनाथ के गले में विराजमान होनेवाले नाग देवता नागपंचमी के दिन सगुण से युक्त होकर अभिष्ट सिद्धि देते हैं। नागपंचमी पर नमका-चमका के महामंत्रों से शिव की आराधना फलदायी होती है ।

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71 साल पहले ऐसे मना था देश का पहला स्‍वतंत्रता दिवस, देखें 15 अगस्‍त 1947 की दुर्लभ तस्‍वीरें

NewsCode | 15 August, 2018 10:14 AM
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नई दिल्ली। इस वर्ष हम 72वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं। आजादी के 71 साल पूरे हो रहे हैं तो मन में यह विचार भी आना स्वाभाविक है कि पहला स्वतंत्रता दिवस कैसे मनाया गया होगा और उस वक्त कैसा रहा होगा अपना देश? तस्वीरों में देखें 1947 में आजाद भारत की कुछ चुनिंदा तस्वीरें।

पहले स्वतंत्रता दिवस का आगाज पं जवाहरलाल नेहरू के 14 अगस्त की आधी रात की उद्घोषणा के साथ हुआ। लेकिन यह भी सच है कि इस बात की खबर मिलने के बाद देश के लोगों ने 15 अगस्त की सुबह ही जश्न मनाया था। यह तस्वीर 15 अगस्त की सुबह की कोलकाता की है जहां लोग गलियों चौराहों में निकलकर आजादी का जश्न मनाते दिख रहे हैं।


पहले स्वतंत्रता दिवस का संबोधन प्र‌थम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने आधी रात को किया लेकिन उनके प्रथम संबोधन के नाम से यह जो तस्वीर उपलब्‍ध है वह 14 अगस्त की शाम संविधान सभा को संबोधन करने की है।


तत्‍कालीन ब्रिटिश गवर्नर जर्नल लॉर्ड माउंटबेटन और भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू। 15 अगस्त 1947 को नई दिल्‍ली के इंडिया गेट पर तिरंगे को सेल्‍यूट करते हुए।


स्‍वतंत्रता दिवस सम्‍मेलन में भाग लेने पहुंचे हजारों लोग। ये सभी लोग नई दिल्‍ली के रासीना हिल पर एकत्रित हुए थे।


यह तस्वीर आजादी के 11 दिन पहले की है जिसमें भारत के अंतिम वॉयसराय लॉर्ड माउंटबेटन भारतीय नेताओं को सत्ता हस्तांतरण की तैयारी में लगे हैं।


सभी देशवासियों के लिए वो गर्व का पल था जब भारत की शान तिरंगा झंडा फहराया गया।


LIVE: 72वें स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर पीएम मोदी का राष्ट्र के नाम सन्देश, यहाँ देखें

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