जमशेदपुर : मीजल्स-रूबेला टीकाकरण अभियान के पहले दिन 1965 बच्चों का टीकाकरण

Avijit Adharjee | 7 August, 2018 7:57 PM
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जमशेदपुर। मीजल्स-रूबेला टीकाकरण अभियान के प्रथम दिन 1965 बच्चों का टीकाकरण किया गया। 4 सेसन हेतु योजना बनाई गई थी और सभी जगह यह सेसन संपन्न किए गए। 26 से 6 अगस्त तक कुल 1,52,708 बच्चों का मीजल्स-रुबेला कैंपेन के तहत् टीकाकरण किया गया।

यह जानकारी जिले के स्वास्थ्य विभाग के द्वारा प्रदान की गई। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा खसरा और रूबेला के टीकाकरण के लिए देशव्यापी अभियान के तहत् झारखंड में विगत 26 जुलाई को मीजल्स-रूबेला टीकाकरण अभियान की शुरुआत की गई थी।

पूर्वी सिंहभूम जिले में मीजल्स-रूबेला टीकाकरण अभियान का विधिवत उद्घाटन माइकल जॉन सभागार में खसरा और रूबेला सूचना कार्ड जारी कर उपायुक्त अमित कुमार द्वारा किया गया था।

26 जुलाई से प्रारंभ होने वाला यह अभियान 5 सप्ताह तक चलाया जाएगा। प्रथम 2 सप्ताह में सभी विद्यालयों में बच्चों के टीकाकरण का लक्ष्य है। अगले 2 सप्ताह तक स्वास्थ्य केंद्रों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को टीका दिया जाएगा और अंतिम सप्ताह में छूटे हुए बच्चों को टीकाकरण के लिए लक्षित किया जाएगा।

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यह टीका 9 माह से लेकर 15 वर्ष तक के सभी बच्चों को निशुल्क दिया जाएगा। जिले में कुल 7,73,686 बच्चों को इस मुहिम के तहत जोड़ना है और उनका टीकाकरण किया जाना है।

मुख्य रूप से 1750 विद्यालयों में कैंप लगाकर यह टीका दिया जा रहा है। 244 हेल्थ सेंटरों में वैक्सीनेशन साइट बनाई गई हैं और 172 आंगनबाड़ी केंद्रों में वैक्सीनेशन का काम किया जाएगा।

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जामताड़ा : लाखों की लागत से बना मुर्दाघर पड़ा है बेकार, नहीं हो पाया चालू

NewsCode Jharkhand | 14 August, 2018 8:28 PM
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अज्ञात शव मिलते ही उसे सुरक्षित रखने में होती है परेशानी

जामताड़ा। जिला अस्पताल में शव रखने के लिए फ्रीजर की सुविधा न होने से अज्ञात शव को रखने में समस्‍या हो रही है। नियम के मुताबिक शव बरामदगी होने के बाद पुलिस व स्वास्थ्य महकमा को उसकी पहचान नहीं होने तक सुरक्षित रखना पड़ता है।

मुर्दाघर में नहीं है व्यवस्था

स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता के कारण जिले में सरकारी मुर्दाघर का संचालन शुरू नहीं हो पाया है। जामताड़ा को जिला बने हुए लगभग 18 वर्ष बीत चुके हैं लेकिन अभी भी मुर्दा घर नहीं है। इससे अज्ञात शव मिलने के साथ ही परेशानी बढ़ जाती है। अज्ञात शव मिलने पर उसे प्रशासन मजबूरन सदर अस्पताल भिजवा देता है।

बिना बिजली के बीस लाख की लागत बेकार

अज्ञात शवों को सुरक्षित रखने के लिए जिला प्रशासन ने एक साल पूर्व पोस्टमार्टम हाउस के समीप करीब 20 लाख रुपये की लागत से मुर्दा घर का निर्माण कराया था। ठेकेदार इसे स्वास्थ्य विभाग को सौंप भी चुका है। मुर्दाघर के संचालन में थ्री फेज बिजली आवश्यक है, लेकिन आजतक बिजली कनेक्‍शन नहीं हो पाया है। इसी वजह से निर्माण कार्य पूरा होने के बाद भी मुर्दाघर का संचालन शुरू नहीं हो पाया है।

हाल में परिस्थिति हुई विकट

बीते 24 जुलाई को मिहिजाम स्थित हिल रोड मोहल्ले में तीहरे हत्या का शव जब परिजनों ने लेने से इन्कार कर दिया तो शव को रखने में जिला प्रशासन के सामने परेशानी खड़ी हो गई। फिर उसे धनबाद पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। मालूम हो कि अज्ञात लाश की शिनाख्‍त के लिए कम से कम 72 घंटे तक सुरक्षित रखना अनिवार्य है। 72 घंटे बाद शव की स्थिति बदतर हो जाती है। उसे पहचान करने में परिजनों को परेशानी होती है।

वैकल्पिक व्यवस्था में रखा जाता है शव

पुलिस पदाधिकारी व परिजनों के आग्रह पर स्वास्थ्य विभाग प्लास्टिक में बर्फ डालकर उसमें शव को रखकर बांध देता है तथा पोस्टमार्टम हाउस में रखवा देता है।

क्या कहते हैं सीएस

सीएस डॉ. बीके साहा ने बताया कि पोस्टमार्टम परिसर में मुर्दा घर का निर्माण हो चुका है। इसके संचालन के के लिए थ्री फेज विद्युत कनेक्शन आवश्यक है। जमीन संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के कारण कनेक्शन नहीं हो पाया है। इस निमित अंचल कार्यालय से जमीन संबंधित दस्तावेज प्राप्त करने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। दस्तावेज प्राप्त होते ही कनेक्शन का काम हो जाएगा, उसके बाद शव मुर्दाघर में ही रखा जाएगा।

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जमशेदपुर : पक्षी प्रेमियों ने दिखायी संवेदना, सैकड़ों पक्षियों को पिंजरे से किया आजाद

NewsCode Jharkhand | 15 August, 2018 2:46 PM
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बेजुबानों को भी होती हैै आजादी प्यारी

जमशेदपुर। आजादी किसे प्यारी नहीं होती… चाहे इंसान हो या जानवर, हर कोई आजाद रहना चाहता है। आज एक ओर जहां पूरा देश  आजादी के जश्न मे डूबा हुआ है, वहीं जमशेदपुर के कुछ पक्षी प्रेमियों ने सौ से भी अधिक विदेशी पक्षियों को पिंजरा से आजाद किया और एक संदेश देने का प्रयास किया कि बेजुबानों को भी आजादी प्यारी होती है।

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टाटा जू ने भी लंगूरों को खुले बाड़े में रखने का लिया निर्णय

वहीं इस कड़ी में टाटा जू ने भी एक कदम बढ़ा दिया है और आज से जू के लंगूरों को छोटे बाड़े से निकालकर बड़े और खुले बाड़े में आजाद रखने का निर्णय लिया गया। वहीं लंगूर खुले बाड़े में काफी खुश नजर आए। खुले बाड़े में छोड़े जाने के बाद सभी लंगूर इधर उधर धमा- चौकड़ी करते हुए काफी खुश दिखे।

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देवघर : आयुषी ने बहायी देश-प्रेम की गंगा, संस्‍कृत में गाया “ऐ मेरे वतन के लोगों”   

NewsCode Jharkhand | 15 August, 2018 2:25 PM
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देवघर। एक ओर जहां युवाओं का रुझान पश्चिमी रहन-सहन, खान-पान और व्यवहार की ओर केंद्रित होता जा रहा है तो वहीं दूसरी ओर देश प्रेम की भावना से ओत-प्रोत, कुछ ऐसे भी बच्‍चे-बच्चियां हैं जिनके भीतर अपने देश की सभ्यता, संस्कृति और मातृभाषा की जननी संस्कृत के प्रति अगाध श्रद्धा और समर्पण देखने को मिलती है। देवघर की आयुषी अनन्‍या भी ऐसे ही लोगों में से एक है। आयुषी डीएवी स्कूल में 9वीं क्लास की छात्रा है।

देवघर : आयुषी ने बहायी देश-प्रेम की गंगा, संस्‍कृत में गाया "ऐ मेरे वतन के लोगों" 

संस्कृत को लोकप्रिय बनाने का प्रयास

विलक्षण प्रतिभा की धनी ये बालिका, बॉलीवुड हो या फिर कोई पाश्‍चात्‍य गीत, सभी का न सिर्फ संस्कृत में अनुवाद करती है बल्कि उसे सस्‍वर खुद गाती भी है। आयुषी ने स्‍वतंत्रता दिवस के मौके पर लता मांगेशकर के गए गीत ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ का संस्कृत में अनुवाद किया और खुद ही गाया भी। आयुषी को इस बात का गर्व है कि वह अपनी मातृभाषा की जननि संस्कृत को, गीतों के माध्‍यम से और भी ज्यादा लोकप्रिय बनाने की न सिर्फ एक छोटी से कोशिश कर रही है बल्कि संस्कृत से दूर हो रहे युवाओं को भी अपनी सभ्यता, संस्‍कृति और भाषा की ओर  वापस लौटने के लिए प्रेरित कर रही है।

स्कूल कैंप से मिली संस्‍कृत भाषा में गाने की प्रेरणा

आयुषी को संस्कृत भाषा में गीत गाने की प्रेरणा उसके स्कूल कैंप के दौरान मिली। जहां आयोजित की गई प्रतियोगिता को संस्कृत भाषा में ही पूरा करना था। जब इस प्रतियोगिता में आयुषी ने खुद को संस्कृत के करीब पाया तो फिर उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा। फिर एक के बाद एक हिंदी गानों को संस्कृत में अनुवाद करना शुरू कर दिया। आयुषी ने कई कठिन गीतों का सरल संस्कृत में अनुवाद कर उसे अपनी स्‍वर में गाया भी है।

रांची : नन्‍हे देशभक्‍तों ने देश के लिए बलिदान देने का लिया संकल्‍प

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