हज़ारीबाग : नशे की जकड़ में ओकनी भुईयांटोली, असमय हो रही है लोगों की मौत

NewsCode Jharkhand | 18 May, 2018 5:42 PM
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ओकनी भुईयांटोली सुबह से देर रात तक मयखाने में हो जाता है तब्दील

हजारीबाग। शहर के वार्ड संख्या 19 स्थित ओकनी का भुईयांटोली मोहल्ला अहले सुबह से देर रात तक मयखाने में तब्दील हो जाता है। यहाँ के कई परिवार जहाँ खुद नशा के शिकार हैं, वहीं यहाँ बाहरी लोगों का भी जमावड़ा लगता है। कई लोग यहाँ के इस शराब के जकड़ में फंसे हैं। शराब पीने के कारण यहाँ के निवासी बबलू राम उर्फ़ चरका का विगत दिन सदर अस्पताल में ईलाज के क्रम में मौत हो गई। मृतक के दो मासूम बच्चे के सर से पिता का साया उठ गया। इनका मौत शराब के अत्यधिक सेवन के कारण किडनी खराब होने से हुयी थी।

क्या कहना है वार्ड पार्षद सहित अन्य स्थानीय लोगों का

स्थानीय वार्ड पार्षद विश्वनाथ विश्वकर्मा सहित अन्य स्थानीय लोगों ने बताया कि इस मोहल्ले के लिए असमय मौत आम बात हो गई है। यहां विगत 15 माह में 10 लोग असमय शराब के अत्यधिक सेवन के कारण लीवर, किडनी जैसी जानलेवा बीमारी से ग्रसित होकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर चुके हैं।

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शराब पीने के लत का खामियाजा पूरे परिवार को उठाना पड़ता है। यहां शराब पीना अनुवांशिक बीमारी की तरह है  जो लोगों को आर्थिक रुप से खोखला बनाने के साथ-साथ आंतरिक और रूहानी तौर पर भी दिवालिया बना देती है। यहां गैरकानूनी तरीके से देशी शराब कई घरों में बिकता है।  इसका दुष्परिणाम मोहल्ले के सभी लोगों को मानसिक और समाजिक रूप से झेलना पड़ता है। वहीं इस कार्य से जुड़े परिवार स्वास्थ्य समस्या और गरीबी के जकड़ में है।

शराब के सेवन से कई लोग असमय मौत के गाल में समां चुके

वर्तमान में यहां के निवासी मनोज भुइयां, विनोद पासवान भी सदर अस्पताल में ईलाजरत है जहाँ जीवन और मौत से जूझ रहे हैं। वहीं प्राप्त जानकारी के मुताबिक विगत करीब डेढ़ वर्ष में यहां के दो सगे भाई अरुन राम, पप्पु राम, महेश राम, सिकंदर भुइयां, जिन्दर भुइयां, दुमका भुइयां, सिताराम, तार्ज़न भुइयां सहित इससे पूर्व भी कई लोग असमय मौत के गाल समां चुके हैं।

स्थानीय वार्ड पार्षद विश्वनाथ विश्वकर्मा ने इस संबंध में सदर अनुमंडल पदाधिकारी को आवेदन लिखकर इस बाबत सूचित करते हुए कार्यवाही करने की मांग की है। समाज और शहर को मिलकर यहां शराब के खिलाफ जागरूकता लाने की आवश्यकता है। यहां चारों ओर फैले निराशा, बर्बादी के मंजर और असमय मौत को रोकने के लिए नशा के खिलाफ जंग छेड़ना होगा, तभी लोगों का कल्याण और जीवन उत्थान संभव हो सकता है।

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रांची : नागपंचमी के साथ-साथ स्वतंत्रता दिवस की रंग में रंगा पहाड़ी मंदिर

NewsCode Jharkhand | 15 August, 2018 10:31 AM
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रांची । नागपंचमी पर पूरे देश में श्रद्धालु भोलेनाथ के साथ नाग देव की पूजा कर रहे हैं। दूध-लावा का भोग चढ़ा रहे हैं। इस मौके पर रांची के पहाड़ी मंदिर स्थित नाग देवता मंदिर में भी श्रद्धालुओं का तांता लगा है। लोग नाग-नागिन को दूध और धान का लावा चढ़ाकर परिवार के लिए दुआ मांग रहे हैं।

कई सपेरों ने अपने सापों के साथ यहां पर डेरा भी डाल रखा है। सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी को महादेव ने गले में नाग देवता वासुकी को धारण किया था तब से इस दिन का विशेष  महत्व है। भक्त नाग राज के साथ राजा तक्षक की भी पूजा कर रहे हैं।

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धार्मिक मान्यता एवं परम्परा के मुताबिक सनातनी श्रद्धालु घरों में कटहल के पत्ते पर दूध-लावा रखकर पूजा करते हैं। कई घरों में सरसों मिले गाय के गोबर से दीवारों पर नाग देवता की आकृति बनायी जाती है। शास्त्रीय दृष्टिकोण से समस्त दुर्गुणों का त्याग कर सदगुण के साथ भोलेनाथ के गले में विराजमान होनेवाले नाग देवता नागपंचमी के दिन सगुण से युक्त होकर अभिष्ट सिद्धि देते हैं। नागपंचमी पर नमका-चमका के महामंत्रों से शिव की आराधना फलदायी होती है ।

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71 साल पहले ऐसे मना था देश का पहला स्‍वतंत्रता दिवस, देखें 15 अगस्‍त 1947 की दुर्लभ तस्‍वीरें

NewsCode | 15 August, 2018 10:14 AM
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नई दिल्ली। इस वर्ष हम 72वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं। आजादी के 71 साल पूरे हो रहे हैं तो मन में यह विचार भी आना स्वाभाविक है कि पहला स्वतंत्रता दिवस कैसे मनाया गया होगा और उस वक्त कैसा रहा होगा अपना देश? तस्वीरों में देखें 1947 में आजाद भारत की कुछ चुनिंदा तस्वीरें।

पहले स्वतंत्रता दिवस का आगाज पं जवाहरलाल नेहरू के 14 अगस्त की आधी रात की उद्घोषणा के साथ हुआ। लेकिन यह भी सच है कि इस बात की खबर मिलने के बाद देश के लोगों ने 15 अगस्त की सुबह ही जश्न मनाया था। यह तस्वीर 15 अगस्त की सुबह की कोलकाता की है जहां लोग गलियों चौराहों में निकलकर आजादी का जश्न मनाते दिख रहे हैं।


पहले स्वतंत्रता दिवस का संबोधन प्र‌थम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने आधी रात को किया लेकिन उनके प्रथम संबोधन के नाम से यह जो तस्वीर उपलब्‍ध है वह 14 अगस्त की शाम संविधान सभा को संबोधन करने की है।


तत्‍कालीन ब्रिटिश गवर्नर जर्नल लॉर्ड माउंटबेटन और भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू। 15 अगस्त 1947 को नई दिल्‍ली के इंडिया गेट पर तिरंगे को सेल्‍यूट करते हुए।


स्‍वतंत्रता दिवस सम्‍मेलन में भाग लेने पहुंचे हजारों लोग। ये सभी लोग नई दिल्‍ली के रासीना हिल पर एकत्रित हुए थे।


यह तस्वीर आजादी के 11 दिन पहले की है जिसमें भारत के अंतिम वॉयसराय लॉर्ड माउंटबेटन भारतीय नेताओं को सत्ता हस्तांतरण की तैयारी में लगे हैं।


सभी देशवासियों के लिए वो गर्व का पल था जब भारत की शान तिरंगा झंडा फहराया गया।


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शहीद जवान अौरंगजेब और मेजर आदित्य समेत इन जांबाजों को वीरता पुरस्कार

NewsCode | 15 August, 2018 10:01 AM
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नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में आतंकियों द्वारा अगवा कर हत्या किए गए राष्ट्रीय रायफल्स के शहीद जवान औरंगजेब को उनके शौर्य और बलिदान के लिए शांति काल का तीसरा सबसे बड़ा शौर्य पुरस्कार दिया जाएगा। मेजर आदित्य कुमार और राइफलमैन औरंगजेब समेत सशस्त्र बलों के 20 जवानों को स्वतंत्रता दिवस पर सम्मानित किया गया है।

गौरतलब है कि इसी साल 15 जून को ईद मनाने घर जा रहे औरंगजेब को आतंकवादियों ने अगवा करके उनकी बर्बरता से हत्या कर दी थी। गोलियों से छलनी औरंगजेब का शव पुलवामा जिले के गुस्सू इलाके में मिला था।

बता दें कि ईद की छुट्टी मनाने जा रहे औरंगजेब ने कैंप के बाहर से दक्षिण कश्मीर के शोपियां जाने के लिए टैक्सी ली थी। लेकिन रास्ते में कालम्पोरा गांव के पास आतंकवादियों ने उन्हें अगवा कर लिया था। टैक्सी ड्राइवर के सूचना देने के बाद पुलिस और सेना के संयुक्त दल को औरंगजेब का गोलियों से छलनी शव कालम्पोरा से करीब 10 किलोमीटर दूर गुस्सु गांव में मिला था। जम्मू-कश्मीर के पुंछ के रहने वाले औरंगजेब 4-जम्मू-कश्मीर लाइट इन्फेंटरी के शादीमार्ग (शोपियां) स्थित 44 राष्ट्रीय राइफल में तैनात थे।

वो हिज्बुल आतंकी समीर को 30 अप्रैल 2018 को ढेर करने वाले मेजर रोहित शुक्ला की टीम में शामिल थे। जांबाज औरंगजेब ने कई बड़े ऑपरेशनों को अंजाम दिया था. सेना के ऑपरेशनों में हिस्सा लेने के चलते आतंकियों ने उनको निशाना बनाया था।

वहीं, शौर्य चक्र पाने वाले मेजर आदित्य को 2017 में कश्मीर के बडगाम में एक आतंकवाद रोधी अभियान के दौरान ‘सावधानीपूर्वक योजना बनाने और बहादुर से कार्रवाई करने के लिए सम्मानित किया जाएगा। इसके अलावा सिपाही वी पाल सिंह को मरणोपरांत कीर्ति चक्र के लिए नामित किया गया है। दक्षिण कश्मीर के अलगर गांव में नवंबर 2017 में आतंकवाद रोधी अभियान में उनकी मौत हो गई थी।

इसके अलावा जम्मू कश्मीर के रहने वाले हेड कांस्टेबल शरीफ उद्दीन गैनी और मोहम्मद तफैल को प्रेसिडेंट पुलिस मैडल फॉर गैलेंट्री अवार्ड से सम्मानित किया गया है। इसके अलवा आठ सीआरपीएफ के जवानों को भी गैलेंट्री मेडल दिया जाएगा।

इसके साथ ही पानी के जहाज़ से दुनिया का चक्कर लगाने वाले अभियान में शामिल रही भारतीय नौसेना की छह महिला अधिकारियों को नौसेना मेडल दिया जाएगा।

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