अहमदाबाद: बच्ची से रेप के बाद उत्तर भारतीयों पर हमले, गुजरात छोड़कर भाग रहे UP-बिहार के लोग

NewsCode | 7 October, 2018 2:00 PM
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नई दिल्ली। गुजरात के अहमदाबाद में साबरकांठा जिले में पिछले हफ्ते 14 माह की बच्ची से बलात्कार का मामला ऐसा गरमा गया है कि अब वहां से उत्तर प्रदेश और बिहार के सैकड़ों लोग काम-काज छोड़कर गुजरात से भाग रहे हैं। दरअसल, साबरकांठा जिले में पिछले हफ्ते 14 माह की बच्ची से कथित तौर पर बलात्कार करने के आरोप में बिहार के एक व्यक्ति की गिरफ्तारी के बाद राज्य के कई हिस्सों में गैर गुजरातियों को निशाना बनाया जा रहा है। जगह-जगह उत्तर भारतीयों खासकर यूपी-बिहार के लोगों को वहां की स्थानीय नागरिक निशाना बना रही है और मारपीट कर रही है।

पुलिस ने शुक्रवार को बताया कि जिन लोगों को निशाना बनाया जा रहा है, उन गैर गुजरातियों में बिहार एवं उत्तर प्रदेश के रहने वाले लोग खास तौर पर शामिल हैं। सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया कि करीब यूपी-बिहार के लोगों को निशाना बनाने और इस तरह के हमले पिछले एक हफ्ते में गांधीनगर, मेहसाना, साबरकांठा, पाटन और अहमदाबाद जिलों में हुए हैं और इन घटनाओं के संबंध में 150 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अहमदाबाद से 116 किलोमीटर की दूरी पर स्थित साबरकांठा में पुलिस पेट्रोलिंग कर रही है। हालांकि, अब स्थिति नियंत्रण में है।

बता दें कि आरोपी की गिरफ्तारी के एक दिन बाद गांधी नगर, अहमदाबाद, पाटन, साबरकांठा और मेहसाना में गैर गुजरातियों को निशाना बनाने का मामला भड़क उठा। समाचार एंजेंसी एएनआई से गुजरात पुलिस के डीजीपी शिवानंज झा ने कहा कि हिम्मतमनगर के गम्बोई रेप मामले के विरोध में कुछ लोग उन लोगों को निशाना बना रहे हैं जो दूसरे राज्यों से गुजरात आए हैं। यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है। हमने 150 से अधिक ऐसे लोगों को गिरफ्तार कर लिया है और ऐसे इलाकों में गश्त लगा रहे हैं, जहां अधिक गैर-गुजराती लोग हैं।

उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया पर गैर गुजरातियों खासकर बिहार एवं उत्तर प्रदेश के लोगों के खिलाफ घृणा संदेश प्रसारित होने के बाद ये हमले हुए। पुलिस ने बताया कि 28 सितंबर को साबरकांठा जिले के हिम्मतनगर कस्बे के पास एक गांव में 14 माह की बच्ची से कथित तौर पर बलात्कार हुआ था। उन्होंने बताया कि बिहार के रहने वाले रविंद्र साहू नाम के मजदूर को घटना वाले दिन ही गिरफ्तार कर लिया गया था। झा ने संवाददाताओं को बताया कि गैर गुजरातियों पर हमले के बाद से राज्य के विभिन्न जिलों में अब तक 18 प्राथमिकियां दर्ज हुई हैं।


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लातेहार : माओवादियों ने निर्माण कार्य में लगे मशीनों व वाहनों को किया आग के हवाले

NewsCode Jharkhand | 14 November, 2018 3:23 PM
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लातेहार। महुआडांड थाना क्षेत्र में नक्सली संगठन भाकपा-माओवादियों के एक हथियारबंद दस्ते ने बीती रात लोध गांव में पुल निर्माण कार्य में लगी मशीनों और वाहनों को आग के हवाले कर दिया।
मजदूरों ने बताया कि पचास-साठ की संख्या में आये अत्याधुनिक हथियारों से लैस माओवादियों ने मजदूरों को काम न करने की चेतावनी दी और मशीनों में आग लगा दी।
दरअसल महुआडांड शास्त्री चौक से लोध फॉल तक पथ निर्माण विभाग द्वारा चौवालीस करोड़ रूपये की लागत से सड़क चौड़ीकरण और पुलिया का निर्माण कराया जा रहा है।
पुलिस अनुमंडल पदाधिकारी ने इस घटना की पुष्टि करते हुए कहा है कि नक्सलियों ने लेवी वसूलने की नियत से इस घटना को अंजाम दिया है। यह इलाका छत्तीसगढ़ की सीमा से लगा हुआ है।

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पलामू : अर्घ्य देने के लिए नहाने के क्रम में पानी में डूबने से अधेड़ की मौत

NewsCode Jharkhand | 14 November, 2018 8:24 PM
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पलामू। लेस्लीगंज तालाब में छठ पर्व पर अर्ध्य देने के लिए नहाने के दौरान डूबने से अधेड़ की मौत हो गयी। तीन से चार घंटे की मशक्कत के बाद तालाब से शव बाहर निकाला जा सका। शव की पहचान लेस्लीगंज निवासी कुंज बिहारी भुइयां (58वर्ष) के रूप में हुई है।

कुंज बिहारी भुइयां की पत्नी छठ व्रत की थी। सुबह करीब पांच बजे उदीयमान सूर्य के अर्ध्य लेने के लिए कुंज बिहारी तालाब में नहा रहा था। तालाब में इस पार से उस पार जाने के क्रम में कुंजबिहारी पानी की गहराई में समा गया। काफी देर तक जब उसका कुछ अता-पता नहीं चला तो उसकी खोजबीन शुरू की गयी। पूर्वाहन में उसका शव तालाब से बरामद किया जा सका।

कल तक छठ व्रत पर खुशी-खुशी भगवान सूर्य को अर्ध्य देने की तैयार में जुटा कुंजबिहारी के परिवार के सदस्यों को उसकी मौत की सूचना जैसे ही मिली, उनके बीच चीख-पुकार मच गयी। पत्नी और बच्चे दहाड़ मारकर रोने लगे।

सूचना मिलने पर लेस्लीगंज बीडीओ विजय प्रकाश मरांडी और थाना प्रभारी वीरेन मिंज मौके पर पहुंचे। बाद में गोताखोरों को बुलाकर तालाब में छानबीन की गयी। शव मिलने के बाद पुलिस ने उसे कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम सदर अस्पताल में कराया। कुंजबिहारी भुईयां के तीन लड़के व दो लड़कियां हैं, सभी शादीशुदा हैं।

मौके पर भाजपा नेता अमित उपाध्याय, लेस्लीगंज मुखिया धर्मेंद्र सोनी, कोट पंचायत मुखिया संतोष मिश्रा, तारकेश्वर पासवान सहित कई लोगों ने शव को निकलवाने में पहल की।

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कहीं समारोह तक ही सीमित न रह जाये स्थापना दिवस- योगेन्द्र प्रताप

NewsCode Jharkhand | 14 November, 2018 8:05 PM
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रांची। झाविमो के केन्द्रीय प्रवक्ता योगेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि भगवान बिरसा की धरती माने जाने वाला झारखंड आज अपनी 18वीं सालगिरह मना रहा है। कह सकते हैं कि आज हमारा झारखंड बालिग हो गया। झाविमो की ओर से सर्वप्रथम भगवान बिरसा को नमन।

हर साल सरकार स्थापना दिवस तो धूमधाम से मनाती है परंतु अफसोस यह आयोजन महज एक समारोह तक ही सीमित होकर रह जाता है। सरकार जो संकल्प लेती है, जिन योजनाओं की घोषनाएं या शिलान्यास करती है वह धरातल पर कितनी उतर पाती हैं, पूर्व की घोषनाओं का कितना लाभ जनमानस को मिला है, सरकार को कभी उसकी भी समीक्षा कर लेनी चाहिए।

2014 के बाद के भाजपा सरकार द्वारा 2015 से लेकर 2017 यानि तीन स्थापना दिवस के मौके पर की गयी घोषनाओं पर गौर डाला जाय तो उनमें से अधिकांशतः घोषनाएं हवा-हवाई ही साबित हुई है, कुछ धरातल पर उतरी भी तो बाद में उसका हश्र भी बुरा ही हुआ।

मुख्यमंत्री तो घोषणा इतनी कर चुके हैं कि अगर आधी भी सरजमीं पर उतर गई होती तो अब तक झारखंड समृद्ध हो गया होता। 2015 के समारोह में सीएम ने कहा था कि जनता राम-सीता है और वे हनुमान हैं। वे जनता के सेवक हैं तथा जनता और उनके बीच दूरी नहीं होगी।

अब जो सरकार अपने ही गृहनगर के दूसरे पायदान का दर्जा रखने वाले एक मंत्री से चार वर्षो में दूरी नहीं पाट सके, जनता की दूरी भला क्या पाटेंगे। पिछले तीन स्थापना दिवस के दौरान और भी कई बातें हुई।

झारखंड को निवेशकों की पहली पसंद बनाने, औद्योगिक घरानों के लिए एक लाख हेक्टेयर भूमि चिन्ह्ति करने की बात हुई। सरकार को श्वेत पत्र जारी कर बतानी चाहिए कि किन निवेशकों ने राज्य में कितने का निवेश किया है और किस उद्योग को कितनी जमीन आवंटित की गई तथा इससे जनता को क्या लाभ हो रहा है।

एयरपोर्ट से बिरसा चौक तक स्मार्ट सड़क, केन्द्र से 10000 करोड़ की सड़क निर्माण, जोहार योजना, मुख्यमंत्री विद्या लक्ष्मी योजना, जनता के लिए लांच किये 15 मोबाईल एप, कृषि रथ, बेरोजगारी व पलायन रोकने के लिए कौशल विकास योजना, 25 डाइविंग ट्रेनिंग सेंटर, 2017 गरीब कल्याण वर्ष, 37 नदियां जलमार्ग में विकसित की योजना, 108 एंबुलेंस, मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना, हरमू फ्लाईओवर आदि तमाम योजनाओं का आज क्या हश्र है।

मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा में 50 हजार से लेकर दो लाख तक निःशुल्क इलाज की बात है परंतु यहां रिम्स में महज 50 रूपये के लिए मौत हो रही है। एंबुलेंस के बिना मरीज मर रहे हैं। किसान आत्महत्या कर रहे हैं।

तमाम योजनाएं महज कागजी हैं परंतु सरकार केवल अपनी पीठ खुद थपथपाने की आदी हो चुकी है। झाविमो का मानना है कि राज्य अलग होने की सार्थकता तभी होगी जब राज्य की जनता वास्तव में खुशहाल होगी न कि केवल घोषनाओं से।

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