देरी से हुए सुधारों की कीमत चुका रहा किसान

NewsCode | 24 March, 2018 7:05 AM
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नई दिल्ली| नासिक से लेकर मुंबई तक महाराष्ट्र के किसानों का 180 किलोमीटर लंबा मार्च देश में किसान और किसानी की दयनीय हालत को बयां कर गया। इस मार्च में लगभग 40,000 किसानों ने हिस्सा लिया था। यह संकेत है कि देश की यह आबादी विकास प्रक्रिया में अभी भी पिछड़ी हुई है।

महाराष्ट्र में किसान विशेष रूप से बुरे दौर से गुजर रहे हैं, पिछले तीन से चार वर्षों में कृषि की विकास दर नकारात्मक हो गई है। सूखा, नोटबंदी की वजह से नकदी की कमी और गोहत्या पर पाबंदी से राज्य के कृषि क्षेत्र पर बुरा असर पड़ा है।

हालांकि, किसानों का यह मार्च कुछ प्रमुख मुद्दों पर केंद्रित रहा, जैसे कृषि ऋण में पूर्ण छूट, वन अधिकार अधिनियम 2006 का क्रियान्वयन और स्वामीनाथन समिति की सिफारिशों के अनुरूप न्यूनतम समर्थन मूल्य में संशोधन। सरकार ऋण छूट के लिए योग्यता में ढील देने और भूमि निकासी के लिए क्रियान्वयन मुद्दों से निपटने और एमएसपी तय करने पर सहमत हो गई।

लेकिन इन प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में कई वित्तीय एवं प्रशासनिक दिक्कते हैं, जिन्हें विस्तार में समझने की जरूरत है। हालांकि, सत्य यही है कि ये इन समस्याओं का दीर्घकालिक समाधान नहीं है।

इस साल आर्थिक सर्वेक्षण में यह बात निकलकर सामने आई है कि वास्तविक कृषि जीडीपी और वास्तविक कृषि आय बीते चार वर्षों में ज्यों की त्यों रही है। इस अवधि के दौरान कृषि में ग्रास कैपिटल फॉरमेशन 2013-14 में जीडीपी के 2.9 फीसदी के मुकाबले 2016-17 में घटकर 2.17 हो गई। फिर भी खेतों की उत्पादन क्षमता बढ़ाकर इन समस्याओं से निपटा जा सकता है।

कृषि सुधारों के लिए इसके पीछे एक मजबूत आर्थिक कारण भी है। 2008 की विश्व विकास रिपोर्ट में बीते 25 वर्षों में कई विकासशील देशों का सर्वेक्षण किया गया और पता चला कि कृषि में विकास से गरीबी एक फीसदी घटी है, जो गैर कृषि क्षेत्रों में समान विकास में दो से तीन गुना के समान है।

चीन के मामले में यह 3.5 गुना अधिक प्रभावी है और लैटिन अमेरिकी देशों में यह 2.7 गुना अधिक प्रभावी रही। आधे से अधिक देश कृषि से जुड़ा है और लगभग 75 फीसदी गरीबी ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ी है।

चीन में कृषि सुधारों से भारत को कुछ सबक मिल सकते हैं। भारत की तरह जब चीन में आर्थिक सुधार हुए तो यह कृषि क्षेत्र को ध्यान में रखकर शुरू हुए। कम्यून सिस्टम को डिस्मैंटल कर दिया गया और उसे घरेलू सिस्टम से बदल दिया गया और बदल रहे कीमतों को कृषि सामानों से हटा दिया गया।

इन सुधारों के बाद यह क्षेत्र 1952-1977 के दौरान सुधारों से पूर्व की अवधि में 2.3 फीसदी की तुलना में 1978 और 1984 के बीच सात फीसदी प्रतिवर्ष से अधिक रफ्तार से बढ़ा। विकास में इस तेजी की वजह से वास्तविक ग्रामीण आय 15.5 फीसदी प्रति वर्ष की दर से बढ़ी, जिससे 1979 में गरीबी का स्तर 33 फीसदी की तुलना में 1984 में घटकर 15 फीसदी हो गया।

गरीबी में कमी से लोगों की खरीद शक्ति बढ़ी और औद्योगिक सामानों के लिए मांग का सृजन हुआ, जिससे विनिर्माण सुधारों का मार्ग प्रशस्त हुआ, जिससे अगले तीन दशकों में ऐतिहासिक विकास का चरण लौट आया। चीन के उलट भारतीय सुधार रणनीतिक कम थे, बल्कि चुपके से अधिक हुए थे।

इन्हें व्यापार नीति में सुधार कर और औद्योगिक क्षेत्र को डिलाइसेंस कर आर्थिक संकट से निबटने के लिए उठाया गया था। कृषि क्षेत्र को इन सुधारों से दूर रखा गया और बाद में कृषि नीति में सुधार कर इसमें सुधार लाने के प्रयास किए गए। ये सुधार अर्थव्यवस्था में स्थिरता लाने में मददगार साबित हुए और इससे आर्थिक विकास दर को बढ़ावा मिला।

कृषि क्षेत्र को हुए अधिकतर लाभ 2004 और 2011 के बीच में या तो एक्सचेंज दर के अप्रत्यक्ष सुधआरों के जरिए हुए या फिर बढ़ रही वैश्विक कीमतों के बदलाव से हुए। नतीजतन, भारत 18 वर्षों में अपनी गरीबी दर को आधा करने में कामयाब रहा, जबकि चीन ने यह कामयाबी सिर्फ छह वर्षों में ही हासिल कर ली थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब सत्ता में आए थे, तो उन्होंने वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य रखा, लेकिन यथास्थिति जारी रखकर मुश्किल से ही इस लक्ष्य को पूरा किया जा सकता है। इस क्षेत्र में स्थायी विकास दर सुनिश्चित करने के लिए कुछ ही संस्थागत बदलावों ही जरूरत है।

पहला, किसानों के लिए इंसेंटिव ढांचों को दुरुस्त करने की जरूरत है। खाद्य सुरक्षा प्रदान कराने और कीमत स्थिरता के लिए कृषि नीतियों में उपभोक्ता बायस की जरूरत है, जो किसानों के डेटरीमेंट से ही आती है। अनप्रिडेक्टिबल निर्यात पर प्रतिबंध एक पहलू है। इस तरह की कारोबार बाधित नीतियों से बचना चाहिए।

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दूसरा, यह ध्यान में रखते हुए कि आधे से अधिक भारतीय कृषि क्षेत्र अभी भी सूखा है, निवेश का बड़ा अनुपात का इस्तेमाल कृषि बुनियादी ढांचे में सुधार में लगाने की जरूरत है। 2018-19 के कुल कृषि बजट में सिर्फ 12 फीसदी ही निवेश के लिए आवंटित किया गया है, जबकि बाकी सब्सिडी और सुरक्षा मानकों के लए इस्तेमाल होगा।

आखिरकार कृषि में अनुसंधान एवं विकास के कोई प्रयास नहीं किए गए। भारत अपनी कृषि जीडीपी का सिर्फ 0.46-0.6 फीसदी ही इस क्षेत्र में आर एंड डी पर खर्च करता है। इस तरह की नीति से कृषि आय दोगुनी कैसे की जाएगी!

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 आईएएनएस

रांची: कांठीटांड़-कांके-विकास तक रिंग रोड 10 साल बाद बन कर हुआ तैयार

NewsCode Jharkhand | 13 November, 2018 1:45 PM
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10 साल बाद छह लेन वाले रिंग रोड फेज-7 का काम पूरा

रांची । करीब 10 साल के इंतजार के बाद रांची रिंग रोड सेक्शन सेवन बन कर तैयार हो गया है। छह लेन वाली 23.575 किमी लंबी इस सड़क पर गाड़ियां भी दौड़ने लगी हैं। यह रिंग रोड रांची-डालटनगंज मुख्य मार्ग (एनएच 75) पर कांठीटांड़ से शुरू होकर कांके रोड होते हुए रांची-रामगढ़ मुख्य मार्ग (एनएच 33)  पर विकास (नेवड़ी) से मिलता है। यानी दो महत्वपूर्ण राष्ट्रीय उच्च पथ एनएच 75 व एनएच 33 को यह जोड़ रहा है।

इस सड़क के बन जाने से बड़ी संख्या में गाड़ियां रांची शहर रातू रोड-बरियातू रोड में प्रवेश नहीं करेंगी, बल्कि रिंग रोड के सहारे निकल जायेंगी। इसका औपचारिक उदघाटन जल्द होगा. इस सड़क का निर्माण आइएलएफएस व पथ निर्माण विभाग की ज्वायंट वेंचर कंपनी झारखंड त्वरित पथ विकास कंपनी लिमिटेड (जेएआरडीसीएल) ने कराया है।

रिंग रोड के सेक्शन थ्री, फोर, फाइव व सिक्स का निर्माण भी इसी कंपनी  के माध्यम से कराया गया है।  रिंग रोड सेक्शन -7 (एक नजर में)  सड़क की लंबाई 23.575 किमी कहां से कहां तक कांठीटांड़ से नेवड़ी सड़क की चौड़ाई  छह लेन (30.5 मीटर) निर्माण पर खर्च 452 करोड़ (लगभग) काम करानेवाली कंपनी आइएलएफएस बड़े पुलों की संख्या 3 छोटे पुलों की संख्या 6 फ्लाइओवर की संख्या 01 अंडर पास की संख्या 7 रेलवे ओवर ब्रिज 01 कलवर्ट की संख्या 53 बस पड़ाव की संख्या 16 इस रोड के बन जाने से खास कर बड़े वाहनों व लंबी दूरी वाली गाड़ियां शहर में नहीं घुसेंगी।

बड़ी गाड़ियां शहर में घुस कर लंबे समय तक जाम में फंसी रहती हैं और ईंधन भी अत्यधिक बर्बाद होता है। अब ऐसा नहीं होगा. शहर की मुख्य सड़कों  पर से थोड़ा ट्रैफिक कम होगा। रिंग रोड के माध्यम से 23.5 किमी की दूरी तय करने में अधिकतम 20 मिनट का ही समय लगेगा, जबकि शहर के अंदर घुस कर इतनी दूरी तय करने में एक घंटे का समय लग रहा था. वहीं बड़े वाहनों के साथ नो इंट्री की भी बाध्यता नहीं रहेगी. वे 24 घंटे चल सकेंगे।

रिंग रोड सेक्शन सेवन का शिलान्यास वर्ष 2008 में हुआ था। इसके बाद इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ। जिस कंपनी को काम मिला था, उसने इसे पूरा नहीं कराया। काम आधा-अधूरा रह गया था। ऐसे में सरकार ने उसका एग्रीमेंट रद्द कर दिया था। इस दौरान लंबे समय तक काम बंद रहा। बाद में इसका काम जेएआरडीसीएल को दिया गया।

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बोकारो : सॉर्ट सर्किट से लगी आग, घर जलकर खाक

NewsCode Jharkhand | 13 November, 2018 1:34 PM
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बोकारो। बिजली के तार में हुए सॉर्ट सर्किट से आग लग गई इस आग की घटना में पूरा घर जलकर खाक हो गया। इस आग लगी से एक लाख से अधिक के नुकसान का अनुमान है। घटना के बाद ग्रामीणों के द्वार आग पर काबू पाने का प्रयास किया गया लेकिन स्थानीय जिला परिषद के प्रतिनिधि की सूचना पर पहुँची  दमकल की गाड़ी ने आग पर काबू पाया।

आज सुबह चास प्रखण्ड के सोनाबाद पंचायत स्थित गांव आमडीहा टोला बंधुडीह के फूलचंद माहतो के कच्चे मकान में सौभाग्य योजना के तहत बिजली का कनेक्सन तार में अचानक के सर्ट सर्किट में आग लग गई।

इस आगलगी की घटना के बाद घर में रखे पुआल में आग लग गई। इसके बाद आग की तेज लपटों ने पूरे घर को पूरी तरह से जलाकर खाक कर दिया। इस घटना के बाद ग्रामीणों ने आग पर काबू करने का प्रयास किया।स्थानीय लोगों की सूचना पर जिला परिषद संजय कुमार के प्रतिनिधि नरेश माहतो ने दमकल विभाग को इसकी जानकारी दी।

मौके पर पहुँची दमकल की एक गाड़ी ने आग पर काबू पाया। इस आग की घटना में घर में  रखा पुआल, कपड़े, अनाज, नकदी समेत अन्य कागजात जल कर खाक हो गया। मौके पर पहुँची पिंडराजोड़ा थाना पुलिस ने घटना स्थल का जायजा लिया।

जिला परिषद संजय कुमार ने इस घटना की जानकारी चास अंचलाधिकारी वन्दन सेजवालकर को दी और पीड़ित को अर्थित सहायता देने की बात कही।सीओ ने कर्मचारी को मौके पर पहुँच नुकसान का आकलन करने का निर्देश दिया है।

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रांची : स्थापना दिवस- नव चयनित शिक्षक ड्रेस कोड में होंगे शामिल

NewsCode Jharkhand | 13 November, 2018 1:06 PM
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रांची। राज्य स्थापना दिवस का मुख्य समारोह मोरहाबादी मैदान में होगा। इसमें झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की अनुशंसा के बाद चयनित पोस्ट ग्रेजुएट ट्रेंड टीचर (पीजीटी) शामिल होंगे। राज्य के सभी जिलों में कुल 1235 पीजीटी शिक्षकों का चयन किया गया है।

इनमें रांची जिला के लिए 130 शिक्षक हैं। इन सभी नव चयनित पीजीटी शिक्षकों को ड्रेस कोड में शामिल होने के लिए स्कूली शिक्षा विभाग द्वारा निर्देश दिया गया है।

स्कूली शिक्षा विभाग द्वारा इसके लिए दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल के क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक (आरडीडीई) अशोक कुमार शर्मा, जिला शिक्षा पदाधिकारी रजनीकांत वर्मा और जिला शिक्षा अधीक्षक सी. विजय सिंह को नोडल पदाधिकारी बनाया गया है। सोमवार को जिला स्कूल में रांची जिले के लिए चयनित पीजीटी शिक्षकों के साथ नोडल पदाधिकारी ने बैठक दी।

नोडल पदाधिकारी सह डीएसई रांची सी. विजय सिंह ने नव चयनित पीजीटी शिक्षकों को अनुशासन का पाठ पढ़ाया। निर्धारित ड्रेस कोड में पुरुष शिक्षकों के लिए क्रीम कलर फुल शर्ट, ब्लैक फुल पैंट, मैरून टाई, मैरून स्वेटर या ब्लेजर, पॉकेट नेम प्लेट, ब्लैक शू व डॉ राधाकृष्णन जैसी पिंक कलर की पगड़ी निर्धारित किया गया है। इसी प्रकार महिलाओं के लिए मैरून कलर की साड़ी या पायजामा, ब्लैक जूती या सैंडल और पिंक पगड़ी में आने का निर्देश नोडल पदाधिकारी ने दिया है।

नोडल पदाधिकारी ने समारोह स्थल पर सुबह आठ बजे तक नव चयनित शिक्षकों को रिपोर्टिंग करने का निर्देश दिया। कहा कि समारोह स्थल पर पहुंचने के साथ शिक्षक अपना रजिस्ट्रेशन करा लें। शिक्षकों को मोबाइल साइलेंट मोड में रखने का निर्देश दिया है।

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