चतरा : अपहृत लड़की को पुलिस ने किया बरामद, युवक गिरफ्तार

Aman Rana | 7 August, 2018 9:27 PM
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चतरा। बालूमाथ पुलिस ने मंगलवार को चतरा कॉलेज के समीप से हुई अपहृत युवती को बरामद किया है। सदर पुलिस ने बताया कि 20  जुलाई को हफुआ गांव निवासी मुरारी सिंह की पुत्री का अपहरण चतरा कॉलेज के समीप से हो गया था। इस बाबत उसने सदर थाना में लिखित आवेदन देकर अपहरण का मामला दर्ज कराया था।

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पुलिस ने बताया कि अपहृत युवक बालूमाथ के मकरा गांव निवासी चरका तुरी का पुत्र सुरेंद्र तुरी ने शादी के इरादे से बहला फुसलाकर अपने साथ ले गया था। सदर पुलिस तुरंत एक टीम का गठन कर बालूमाथ के लिए रवाना हुई। बालूमाथ पुलिस के सहयोग से युवती को बरामद करते हुए युवक को जेल भेज दिया।

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तिसरी : डायन बिसाही का आरोप लगा मां-बेटी को बुरी तरह पीटा

NewsCode Jharkhand | 15 August, 2018 7:54 AM
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तिसरी (गिरिडीह) । तिसरी थाना क्षेत्र के भठ्ठीकुंड बलियारी गांव में मंगलवार की देर रात को डायन बिसाही मामले को लेकर गांव के ही कथित लोगों ने मंझली मरांडी व उनकी पुत्री मुन्नी बास्के तथा मुनिका बास्के की लाठी, डंडे और पत्थर से जमकर पिटाई कर दी। जिसके कारण मंझली व उनकी दोनों बेटियां गंभीर रूप से घायल हो गयी।

बताया जाता है कि दो दिनों पहले गांव के एक व्यक्ति के पुत्र की सांप काटने से मौत हो गई थी। इसके बाद गांव के सुनील टुडू व श्यामेल बास्के मंझली पर डायन का आरोप लगाकर उसे पड़ताडित कर रहे थे। मंगलवार रात को सुनील व श्यामेल ने गांव के कथित लोगों के साथ मिलकर मंझली व उनकी दोनों बेटियों को जान मारने की नीयत से लाठी, डंडे और पत्थर से पिटाई कर दी।

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सूचना मिलते ही तिसरी पुलिस आनन-फानन में भठ्ठीकुंड गांव पहुंची और मंझली व उनकी बेटी मुन्नी की जान बचाने का काम किया। पुलिस ने मंझली और उनकी बेटी मुन्नी बास्के को तिसरी अस्पताल लेकर आई जहां पर दोनों मां बेटी का प्राथमिक इलाज करने के बाद गिरिडीह रेफर कर दिया गया है। वहीं मुनिका बास्के लापता है। पुलिस मुनिका को ढूंढने में लग गई है।

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जमशेदपुर : पक्षी प्रेमियों ने दिखायी संवेदना, सैकड़ों पक्षियों को पिंजरे से किया आजाद

NewsCode Jharkhand | 15 August, 2018 2:46 PM
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बेजुबानों को भी होती हैै आजादी प्यारी

जमशेदपुर। आजादी किसे प्यारी नहीं होती… चाहे इंसान हो या जानवर, हर कोई आजाद रहना चाहता है। आज एक ओर जहां पूरा देश  आजादी के जश्न मे डूबा हुआ है, वहीं जमशेदपुर के कुछ पक्षी प्रेमियों ने सौ से भी अधिक विदेशी पक्षियों को पिंजरा से आजाद किया और एक संदेश देने का प्रयास किया कि बेजुबानों को भी आजादी प्यारी होती है।

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टाटा जू ने भी लंगूरों को खुले बाड़े में रखने का लिया निर्णय

वहीं इस कड़ी में टाटा जू ने भी एक कदम बढ़ा दिया है और आज से जू के लंगूरों को छोटे बाड़े से निकालकर बड़े और खुले बाड़े में आजाद रखने का निर्णय लिया गया। वहीं लंगूर खुले बाड़े में काफी खुश नजर आए। खुले बाड़े में छोड़े जाने के बाद सभी लंगूर इधर उधर धमा- चौकड़ी करते हुए काफी खुश दिखे।

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देवघर : आयुषी ने बहायी देश-प्रेम की गंगा, संस्‍कृत में गाया “ऐ मेरे वतन के लोगों”   

NewsCode Jharkhand | 15 August, 2018 2:25 PM
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देवघर। एक ओर जहां युवाओं का रुझान पश्चिमी रहन-सहन, खान-पान और व्यवहार की ओर केंद्रित होता जा रहा है तो वहीं दूसरी ओर देश प्रेम की भावना से ओत-प्रोत, कुछ ऐसे भी बच्‍चे-बच्चियां हैं जिनके भीतर अपने देश की सभ्यता, संस्कृति और मातृभाषा की जननी संस्कृत के प्रति अगाध श्रद्धा और समर्पण देखने को मिलती है। देवघर की आयुषी अनन्‍या भी ऐसे ही लोगों में से एक है। आयुषी डीएवी स्कूल में 9वीं क्लास की छात्रा है।

देवघर : आयुषी ने बहायी देश-प्रेम की गंगा, संस्‍कृत में गाया "ऐ मेरे वतन के लोगों" 

संस्कृत को लोकप्रिय बनाने का प्रयास

विलक्षण प्रतिभा की धनी ये बालिका, बॉलीवुड हो या फिर कोई पाश्‍चात्‍य गीत, सभी का न सिर्फ संस्कृत में अनुवाद करती है बल्कि उसे सस्‍वर खुद गाती भी है। आयुषी ने स्‍वतंत्रता दिवस के मौके पर लता मांगेशकर के गए गीत ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ का संस्कृत में अनुवाद किया और खुद ही गाया भी। आयुषी को इस बात का गर्व है कि वह अपनी मातृभाषा की जननि संस्कृत को, गीतों के माध्‍यम से और भी ज्यादा लोकप्रिय बनाने की न सिर्फ एक छोटी से कोशिश कर रही है बल्कि संस्कृत से दूर हो रहे युवाओं को भी अपनी सभ्यता, संस्‍कृति और भाषा की ओर  वापस लौटने के लिए प्रेरित कर रही है।

स्कूल कैंप से मिली संस्‍कृत भाषा में गाने की प्रेरणा

आयुषी को संस्कृत भाषा में गीत गाने की प्रेरणा उसके स्कूल कैंप के दौरान मिली। जहां आयोजित की गई प्रतियोगिता को संस्कृत भाषा में ही पूरा करना था। जब इस प्रतियोगिता में आयुषी ने खुद को संस्कृत के करीब पाया तो फिर उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा। फिर एक के बाद एक हिंदी गानों को संस्कृत में अनुवाद करना शुरू कर दिया। आयुषी ने कई कठिन गीतों का सरल संस्कृत में अनुवाद कर उसे अपनी स्‍वर में गाया भी है।

रांची : नन्‍हे देशभक्‍तों ने देश के लिए बलिदान देने का लिया संकल्‍प

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