चंदनकियारी : लालपुर गांव में डायरिया से एक व्यक्ति की मौत

NewsCode Jharkhand | 9 August, 2018 3:05 PM
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चंदनकियारी (बोकारो)। चंदनकियारी प्रखंड के लालपुर गांव में बीते एक सप्ताह से चल रहे डायरिया के प्रकोप के बाद बुधवार रात को एक व्यक्ति की मौत के बाद प्रसाशन हरकत में आया। इससे पहले मेडिकल पदाधिकारी डायरिया को साधारण बताकर ताल मटोल जवाब देकर अपना पल्ला झाड़ लेते थे।। परंतु एक व्यक्ति कि मौत के बाद गुरुवार की सुबह से गांव में कैम्प किया गया हैैैै। जिससे ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार चंदनकियारी के लालपुर गांव में बीते एक सप्ताह से डायरिया का प्रकोप चल रहा है। जहां ग्रामीण निजी स्तर पर इलाज करा रहे हैं। इसी कड़ी में उक्त गांव लालपुर में 52 वर्षीय परितोष माहथा को काम से लौटने के बाद डायरिया की चपेट में आ गया। परिजनों ने तुरंत डायरिया की आशंका जताते हुए बोकारो जेनरल अस्पताल में भर्ती कराया। जहां डॉक्टरों ने उनकी स्थिति गंभीर देखते हुए अन्यत्र रेफर कर दिया। परिजन परितोष को रांची ले जा रहे थे कि रास्ते मे ही उन्होंने दम तोड़ा दिया।

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मौत की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया। बुधवार रात को ही एसडीओ चास, बीडीओ चंदनकियारी एवं सीओ चंदनकियारी ने बीजीएच पंहुचकर वहां पहले से भर्ती झींगा देवी का हाल चाल लिया। वहीं ग्रामीणों ने कहा कि गांव में डायरिया की सूचना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा पदाधिकारी को दी गई थी लेकिन किसी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। यदि मेडिकल टीम इसे गंभीरता से लेती तो एक आदमी की जान बच जाती।

इधर जिला से एक मेडिकल टीम डॉ. संजय कुमार के नेतृत्व में लालपुर गांव पंहुचकर एक एक घर का जायजा लिया। साथ ही पीड़ित परिवारों की स्वास्थ्य जांच कर आवश्यक दवा दिए गए। इस अवसर पर डॉ. संजय कुमार ने कहा कि गांव में स्थिति सब सामान्य हैं। दो बच्चों का लक्षण पाया गया जिन्हें दवा दे दी गई है। स्थिति नियंत्रण में हैं। साथ ही ग्रामीणों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

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रांची : भारत का एक मात्र पहाड़ी मंदिर जहां राष्ट्रीय पर्व पर फहराया जाता है तिरंगा

NewsCode Jharkhand | 15 August, 2018 9:55 AM
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रांची । झारखंड की राजधानी रांची के पहाड़ी मंदिर की कहानी बेहद ही रोचक है। पहाड़ पर स्थित भगवान शिव का यह मंदिर देश की आजादी के पहले अंग्रेजों के कब्जें में था। हिंदुस्तान को दुनिया में मंदिरों का देश कहा जाता है। इनमें कुछ मंदिर अपनी खास वास्तुकला, मान्यता और पूजा के नियमों में अलग ही मायने रखते हैं। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर हम आपको ऐसे ही मंदिर के बारे में बता रहे हैं। जहां भगवान की भक्ति और धार्मिक झंडे के साथ राष्ट्रीय झंडे को भी फहराया जाता है।

पहाड़ी बाबा मंदिर का पुराना नाम टिरीबुरू था जो आगे चलकर ब्रिटिश हुकूमत के समय फांसी टुंगरी में परिवर्तित हो गया। क्योंकि अंग्रेजो के राज में देश भक्तों और  क्रांतिकारियों को यहां फांसी पर लटकाया जाता था। आजादी के बाद रांची में पहला तिरंगा धवज यही पर फहराया गया था। जिसे रांची के ही एक स्वतंत्रता सेनानी कृष्ण चन्द्र दास से फहराया था।

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उन्होंने यहां पर शहीद हुए देश भक्तों की याद व सम्मान में तिरंगा फहराया था, तभी से यह परम्परा बन गई की स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस को यहां पर तिरंगा फहराया जाता है। राष्ट्र ध्वज को धर्म ध्वज से ज्यादा सम्मान देते हुए उसे मंदिर के ध्वज से ज्यादा ऊंचाई पर फहराया जाता है। पहाड़ी बाबा मंदिर में एक शिलालेख लगा है जिसमें 14 अगस्त, 1947 को देश की आजादी संबंधी घोषणा भी अंकित है।

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रांची : नागपंचमी के साथ-साथ स्वतंत्रता दिवस की रंग में रंगा पहाड़ी मंदिर

NewsCode Jharkhand | 15 August, 2018 10:31 AM
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रांची । नागपंचमी पर पूरे देश में श्रद्धालु भोलेनाथ के साथ नाग देव की पूजा कर रहे हैं। दूध-लावा का भोग चढ़ा रहे हैं। इस मौके पर रांची के पहाड़ी मंदिर स्थित नाग देवता मंदिर में भी श्रद्धालुओं का तांता लगा है। लोग नाग-नागिन को दूध और धान का लावा चढ़ाकर परिवार के लिए दुआ मांग रहे हैं।

कई सपेरों ने अपने सापों के साथ यहां पर डेरा भी डाल रखा है। सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी को महादेव ने गले में नाग देवता वासुकी को धारण किया था तब से इस दिन का विशेष  महत्व है। भक्त नाग राज के साथ राजा तक्षक की भी पूजा कर रहे हैं।

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धार्मिक मान्यता एवं परम्परा के मुताबिक सनातनी श्रद्धालु घरों में कटहल के पत्ते पर दूध-लावा रखकर पूजा करते हैं। कई घरों में सरसों मिले गाय के गोबर से दीवारों पर नाग देवता की आकृति बनायी जाती है। शास्त्रीय दृष्टिकोण से समस्त दुर्गुणों का त्याग कर सदगुण के साथ भोलेनाथ के गले में विराजमान होनेवाले नाग देवता नागपंचमी के दिन सगुण से युक्त होकर अभिष्ट सिद्धि देते हैं। नागपंचमी पर नमका-चमका के महामंत्रों से शिव की आराधना फलदायी होती है ।

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71 साल पहले ऐसे मना था देश का पहला स्‍वतंत्रता दिवस, देखें 15 अगस्‍त 1947 की दुर्लभ तस्‍वीरें

NewsCode | 15 August, 2018 10:14 AM
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नई दिल्ली। इस वर्ष हम 72वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं। आजादी के 71 साल पूरे हो रहे हैं तो मन में यह विचार भी आना स्वाभाविक है कि पहला स्वतंत्रता दिवस कैसे मनाया गया होगा और उस वक्त कैसा रहा होगा अपना देश? तस्वीरों में देखें 1947 में आजाद भारत की कुछ चुनिंदा तस्वीरें।

पहले स्वतंत्रता दिवस का आगाज पं जवाहरलाल नेहरू के 14 अगस्त की आधी रात की उद्घोषणा के साथ हुआ। लेकिन यह भी सच है कि इस बात की खबर मिलने के बाद देश के लोगों ने 15 अगस्त की सुबह ही जश्न मनाया था। यह तस्वीर 15 अगस्त की सुबह की कोलकाता की है जहां लोग गलियों चौराहों में निकलकर आजादी का जश्न मनाते दिख रहे हैं।


पहले स्वतंत्रता दिवस का संबोधन प्र‌थम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने आधी रात को किया लेकिन उनके प्रथम संबोधन के नाम से यह जो तस्वीर उपलब्‍ध है वह 14 अगस्त की शाम संविधान सभा को संबोधन करने की है।


तत्‍कालीन ब्रिटिश गवर्नर जर्नल लॉर्ड माउंटबेटन और भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू। 15 अगस्त 1947 को नई दिल्‍ली के इंडिया गेट पर तिरंगे को सेल्‍यूट करते हुए।


स्‍वतंत्रता दिवस सम्‍मेलन में भाग लेने पहुंचे हजारों लोग। ये सभी लोग नई दिल्‍ली के रासीना हिल पर एकत्रित हुए थे।


यह तस्वीर आजादी के 11 दिन पहले की है जिसमें भारत के अंतिम वॉयसराय लॉर्ड माउंटबेटन भारतीय नेताओं को सत्ता हस्तांतरण की तैयारी में लगे हैं।


सभी देशवासियों के लिए वो गर्व का पल था जब भारत की शान तिरंगा झंडा फहराया गया।


LIVE: 72वें स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर पीएम मोदी का राष्ट्र के नाम सन्देश, यहाँ देखें

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