चाईबासा : बेरोजगारी से पलायन करने वालों के दर्द को खत्म करने का बीड़ा राज्य सरकार ने उठाया

NewsCode Jharkhand | 17 July, 2018 9:44 AM

राज्य के एक लाख बेरोजगारों को नौकरी देने के अभियान की शुरुआत चाईबासा से हुई शुरू

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चाईबासा (पश्चिमी सिंहभूम) । झारखंड का सबसे बडा दर्द पलायन रहा है। बिचौलिए और दलाल झारखंड के बेरोजगारों का जमकर शोषण करते रहे हैं। लेकिन राज्य सरकार ने पलायन के दर्द को खत्म करने का बीडा उठाया है,और इसके लिए सरकार ने राज्य के एक लाख बेरोजगारों को नौकरी देने के अभियान की शुरूआत कोल्हान की धरती चाईबासा से शुरू की है। प्रथम चरण में एक हजार युवक-युवतियों को नियुक्ति पत्र सौंपा गया है, जिससे राज्य के युवक-युवतियां बेहद खुश हैं।

एक लाख युवक-युवतियों को हुनरमंद बना कर निजी कंपनियो में नौकरी देने की पहल शुरू

बेरोजगारी की बढ़ती समस्या से सरकार ही नहीं युवक-युवतियां और उनके अभिभावक भी परेशान थे। गरीब और कमजोर वर्ग के बेरोजगारों के सामने शोषण होने के आलावा कोई चारा भी नहीं है। लेकिन राज्य सरकार ने इस सबसे बडी चुनौती को स्वीकार कर इस साल एक लाख युवक-युवतियों को हुनरमंद बनाकर निजी कंपनियों में नौकरी देने की पहल शुरू की है। जिसका राज्य के युवाओं ने दिल खोल कर स्वागत किया है। निजी कंपनियों में ही अच्छी सैलरी और सुविधा मिलने से युवाओं में काफी उत्साह है।

युवाओं में उत्साह

पतरातू की तबस्सूम नाज को रामगढ में ही माइक्रो कंपनी में जॉब मिला है, जिससे वह  काफी खुश दिखी और अपने माता-पिता के साथ सीएम रघुवर दास के प्रति आभार जताया। इसी तरह खूंटी की ओलिना सांगा को रांची के ही एक कंपनी में 16 हजार के सौलरी पर सिक्यूरिटी गार्ड की नौकरी मिली, वहीं रांची के एक युवा चंदन मिश्रा को रांची में हीं रिलायंस रिटेल में एक लाख 80 हजार का पैकेज मिला। रांची के ही हसन इकबाल ने बताया कि उसने जॉब के लिए काफी प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिली थी। लेकिन जैसे ही उसने ऑटोमोबाइल में ट्रेनिंग ली, उसे महिन्द्रा में अस्टिेंट सर्विस प्रोवाइडर में 13 हजार की मासिक सैलरी मिल गई। इन सभी युवाओं को शिक्षा मंत्री ने अपने हाथों से नियुक्ति पत्र सौंपा है, जिसे पाकर ये सभी युवा काफी गदगद है और सरकार के पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा कर रहे हैं।

अब रुकेगी पलायन

राज्य सरकार ने अगले साल 12 जनवरी 2019 तक राज्य के एक लाख युवाओं को नौकरी देने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए झारखंड स्किल डेवलपमेंट मिशन सोसाईटी को 40 हजार का लक्ष्य मिला है। शेष अन्य निजी कंपनियों को लक्ष्य दिया गया है। सरकार इसके लिए एक रोड मैप तैयार किया है। जिसके तहत झारखंड स्किल डेवलपमेंट मिशन सोसाईटी अपने ट्रेनिंग सर्विस सेंटरों में अनट्रेंड युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर उन्हें तैयार कर रही है। उसके बाद उन्हें विभिन्न निजी कंपनियों में प्लेसमेंट कर देंगी. इस योजना के तहत चाईबासा में एक हजार युवाओं को नौकरी दी गई। सरकार के अब अधिक से अधिक बेरोजगारों को नौकरी देने के लिए राज्य के सभी इंडस्ट्री को अपने साथ जोड़ रही है और इन कंपनियों में सीधे नौकरी दी जाएगी। इससे राज्य के बेरोजगारों को राज्य से बाहर जाने की जरूरत नहीं होगी।

बहरहाल राज्य में बेरोजगारों की बढ़ती फौज को रोकने के लिए मुख्यमंत्री रघुवर दास के इस प्रयास को युवाओं ने दिल खोल कर स्वागत किया है। बेरोजगार नौकरी चाहते हैं, चाहे निजी हो या सरकारी। युवा मानता है कि नौकरी मिलने से उनकी सिर्फ बेरोजगारी हीं नहीं दूर हो रही है बल्कि उनका सपना भी पूरा हो रहा है। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरेगी।

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रांची : नागपंचमी के साथ-साथ स्वतंत्रता दिवस की रंग में रंगा पहाड़ी मंदिर

NewsCode Jharkhand | 15 August, 2018 10:31 AM
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रांची । नागपंचमी पर पूरे देश में श्रद्धालु भोलेनाथ के साथ नाग देव की पूजा कर रहे हैं। दूध-लावा का भोग चढ़ा रहे हैं। इस मौके पर रांची के पहाड़ी मंदिर स्थित नाग देवता मंदिर में भी श्रद्धालुओं का तांता लगा है। लोग नाग-नागिन को दूध और धान का लावा चढ़ाकर परिवार के लिए दुआ मांग रहे हैं।

कई सपेरों ने अपने सापों के साथ यहां पर डेरा भी डाल रखा है। सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी को महादेव ने गले में नाग देवता वासुकी को धारण किया था तब से इस दिन का विशेष  महत्व है। भक्त नाग राज के साथ राजा तक्षक की भी पूजा कर रहे हैं।

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धार्मिक मान्यता एवं परम्परा के मुताबिक सनातनी श्रद्धालु घरों में कटहल के पत्ते पर दूध-लावा रखकर पूजा करते हैं। कई घरों में सरसों मिले गाय के गोबर से दीवारों पर नाग देवता की आकृति बनायी जाती है। शास्त्रीय दृष्टिकोण से समस्त दुर्गुणों का त्याग कर सदगुण के साथ भोलेनाथ के गले में विराजमान होनेवाले नाग देवता नागपंचमी के दिन सगुण से युक्त होकर अभिष्ट सिद्धि देते हैं। नागपंचमी पर नमका-चमका के महामंत्रों से शिव की आराधना फलदायी होती है ।

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71 साल पहले ऐसे मना था देश का पहला स्‍वतंत्रता दिवस, देखें 15 अगस्‍त 1947 की दुर्लभ तस्‍वीरें

NewsCode | 15 August, 2018 10:14 AM
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नई दिल्ली। इस वर्ष हम 72वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं। आजादी के 71 साल पूरे हो रहे हैं तो मन में यह विचार भी आना स्वाभाविक है कि पहला स्वतंत्रता दिवस कैसे मनाया गया होगा और उस वक्त कैसा रहा होगा अपना देश? तस्वीरों में देखें 1947 में आजाद भारत की कुछ चुनिंदा तस्वीरें।

पहले स्वतंत्रता दिवस का आगाज पं जवाहरलाल नेहरू के 14 अगस्त की आधी रात की उद्घोषणा के साथ हुआ। लेकिन यह भी सच है कि इस बात की खबर मिलने के बाद देश के लोगों ने 15 अगस्त की सुबह ही जश्न मनाया था। यह तस्वीर 15 अगस्त की सुबह की कोलकाता की है जहां लोग गलियों चौराहों में निकलकर आजादी का जश्न मनाते दिख रहे हैं।


पहले स्वतंत्रता दिवस का संबोधन प्र‌थम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने आधी रात को किया लेकिन उनके प्रथम संबोधन के नाम से यह जो तस्वीर उपलब्‍ध है वह 14 अगस्त की शाम संविधान सभा को संबोधन करने की है।


तत्‍कालीन ब्रिटिश गवर्नर जर्नल लॉर्ड माउंटबेटन और भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू। 15 अगस्त 1947 को नई दिल्‍ली के इंडिया गेट पर तिरंगे को सेल्‍यूट करते हुए।


स्‍वतंत्रता दिवस सम्‍मेलन में भाग लेने पहुंचे हजारों लोग। ये सभी लोग नई दिल्‍ली के रासीना हिल पर एकत्रित हुए थे।


यह तस्वीर आजादी के 11 दिन पहले की है जिसमें भारत के अंतिम वॉयसराय लॉर्ड माउंटबेटन भारतीय नेताओं को सत्ता हस्तांतरण की तैयारी में लगे हैं।


सभी देशवासियों के लिए वो गर्व का पल था जब भारत की शान तिरंगा झंडा फहराया गया।


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शहीद जवान अौरंगजेब और मेजर आदित्य समेत इन जांबाजों को वीरता पुरस्कार

NewsCode | 15 August, 2018 10:01 AM
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नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में आतंकियों द्वारा अगवा कर हत्या किए गए राष्ट्रीय रायफल्स के शहीद जवान औरंगजेब को उनके शौर्य और बलिदान के लिए शांति काल का तीसरा सबसे बड़ा शौर्य पुरस्कार दिया जाएगा। मेजर आदित्य कुमार और राइफलमैन औरंगजेब समेत सशस्त्र बलों के 20 जवानों को स्वतंत्रता दिवस पर सम्मानित किया गया है।

गौरतलब है कि इसी साल 15 जून को ईद मनाने घर जा रहे औरंगजेब को आतंकवादियों ने अगवा करके उनकी बर्बरता से हत्या कर दी थी। गोलियों से छलनी औरंगजेब का शव पुलवामा जिले के गुस्सू इलाके में मिला था।

बता दें कि ईद की छुट्टी मनाने जा रहे औरंगजेब ने कैंप के बाहर से दक्षिण कश्मीर के शोपियां जाने के लिए टैक्सी ली थी। लेकिन रास्ते में कालम्पोरा गांव के पास आतंकवादियों ने उन्हें अगवा कर लिया था। टैक्सी ड्राइवर के सूचना देने के बाद पुलिस और सेना के संयुक्त दल को औरंगजेब का गोलियों से छलनी शव कालम्पोरा से करीब 10 किलोमीटर दूर गुस्सु गांव में मिला था। जम्मू-कश्मीर के पुंछ के रहने वाले औरंगजेब 4-जम्मू-कश्मीर लाइट इन्फेंटरी के शादीमार्ग (शोपियां) स्थित 44 राष्ट्रीय राइफल में तैनात थे।

वो हिज्बुल आतंकी समीर को 30 अप्रैल 2018 को ढेर करने वाले मेजर रोहित शुक्ला की टीम में शामिल थे। जांबाज औरंगजेब ने कई बड़े ऑपरेशनों को अंजाम दिया था. सेना के ऑपरेशनों में हिस्सा लेने के चलते आतंकियों ने उनको निशाना बनाया था।

वहीं, शौर्य चक्र पाने वाले मेजर आदित्य को 2017 में कश्मीर के बडगाम में एक आतंकवाद रोधी अभियान के दौरान ‘सावधानीपूर्वक योजना बनाने और बहादुर से कार्रवाई करने के लिए सम्मानित किया जाएगा। इसके अलावा सिपाही वी पाल सिंह को मरणोपरांत कीर्ति चक्र के लिए नामित किया गया है। दक्षिण कश्मीर के अलगर गांव में नवंबर 2017 में आतंकवाद रोधी अभियान में उनकी मौत हो गई थी।

इसके अलावा जम्मू कश्मीर के रहने वाले हेड कांस्टेबल शरीफ उद्दीन गैनी और मोहम्मद तफैल को प्रेसिडेंट पुलिस मैडल फॉर गैलेंट्री अवार्ड से सम्मानित किया गया है। इसके अलवा आठ सीआरपीएफ के जवानों को भी गैलेंट्री मेडल दिया जाएगा।

इसके साथ ही पानी के जहाज़ से दुनिया का चक्कर लगाने वाले अभियान में शामिल रही भारतीय नौसेना की छह महिला अधिकारियों को नौसेना मेडल दिया जाएगा।

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