क्या फर्क है नई और पुरानी होंडा ब्रियो में, जानिये यहां

NewsCode | 9 August, 2018 3:55 PM
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होंडा ने हाल ही में इंडोनेशिया में दूसरी जनरेशन की ब्रियो हैचबैक से पर्दा उठाया है। कयास लगाए जा रहे हैं कि जल्द ही कंपनी भारतीय मॉडल से भी पर्दा उठाने वाली है। भारत में नई ब्रियो को 2019 में लॉन्च किया जा सकता है। यहां हमने पहली जनरेशन की ब्रियो की तुलना नई ब्रियो से की है, तो क्या रहे इस तुलना के नतीजे जानेंगे यहां…

Honda Brio: Old vs New

कद-काठी

फर्स्ट जनरेशन (भारतीय मॉडल) दूसरी जनरेशन (इंडोनेशिया मॉडल)
लंबाई 3610 एमएम 3815 एमएम
चौड़ाई 1680 एमएम 1680 एमएम
ऊंचाई 1500 एमएम 1485 एमएम
व्हीलबेस 2345 एमएम 2405 एमएम
बूट स्पेस 175 लीटर 258 लीटर

डिजायन

Honda Brio: Old vs New

डिजायन के मोर्चे पर पहली जनरेशन की ब्रियो हैचबैक काफी पुरानी पड़ चुकी है, जबकि दूसरी जनरेशन की ब्रियो को मौजूदा समय के हिसाब से मॉर्डन बनाया गया है। नई ब्रियो के हैडलैंप्स, बोनट और बूट लिड में सबसे बड़ा बदलाव हुआ है।

second-gen Honda Brio

2018 अमेज़ की तरह नई ब्रियो में फ्लेट और लंबा बोनट, पतले स्विपिंग हैडलैंप्स और होंडा की नई ग्रिल दी गई है। साइड वाला हिस्सा पहले से ज्यादा साफ-सुथरा है। इसके पीछे वाले दरवाजों को बड़ा रखा गया है। रूफलाइन को स्वूपिंग लेआउट में रखा गया है। छत पर पीछे की तरफ एंटीना भी लगा है।

Honda Brio: Old vs New

नई ब्रियो में पारंपरिक बूट लिड दी गई है, जबकि पहली जनरेशन की ब्रियो में ऑल-ग्लास बूट लिड दिया गया है। इसके टेल लैंप्स भी नए हैं।

Honda Brio: Old vs New

इंजन और गियरबॉक्स

दूसरी जनरेशन की होंडा ब्रियो में मौजूदा मॉडल वाला 1.2 लीटर आई-वीटेक पेट्रोल इंजन लगा है। यही इंजन भारत में उपलब्ध होंडा जैज़ और अमेज़ में भी लगा है। इसकी पावर 90 पीएस और टॉर्क 110 एनएम है। इंजन के साथ 5-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स स्टैंडर्ड रखा गया है। भारतीय मॉडल में 5-स्पीड टॉर्क कनवर्टर ऑटोमैटिक गियरबॉक्स का विकल्प भी रखा गया है। इंडोनेशिया में पेश की गई नई ब्रियो में 7-स्टेप सीवीटी गियरबॉक्स का विकल्प रखा गया है। देखने वाली बात ये होगी कि कंपनी भारत आने वाली नई ब्रियो में डीज़ल इंजन का विकल्प देती है या नहीं। हमारे हिसाब से भारत आने वाली ब्रियो में डीज़ल इंजन का विकल्प मिलने की संभावनाएं कम ही हैं।

फीचर

इंडोनेशिया में पेश की गई नई ब्रियो की फीचर लिस्ट में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। इसका डैशबोर्ड भी मौजूदा मॉडल से लिया गया है। 2018 होंडा अमेज़ की बात करें तो इसके डैशबोर्ड का लेआउट नया है।

Honda Brio: Old vs New

इंडोनेशिया मॉडल में ब्लूटूथ इनेबल म्यूजिक सिस्टम और 6.1 इंच टचस्क्रीन इंफोटेंमेंट सिस्टम को ऊपर वाले वेरिएंट से स्टैंडर्ड रखा गया है। इनके अलावा इस में रेग्यूलर हैलोजन मल्टी-रिफ्लेक्टर हैडलैंप्स, एलईडी लाइट गाइड, 14 इंच व्हील (आरएस वर्जन में 15 इंच), ड्यूल एयरबैग, एबीएस और ईबीडी जैसे फीचर भी दिए गए हैं।

भारत आने वाली नई ब्रियो में कुछ फीचर नई अमेज़ से लिए जा सकते हैं। इस लिस्ट में एंड्रॉयड ऑटो और एपल कारप्ले सपोर्ट करने वाला 7.0 इंच डिजिपेड 2.0 इंफोटेंमेंट सिस्टम, ऑटो क्लाइमेट कंट्रोल, पैसिव की-लैस एंट्री, पुश बटन स्टार्ट-स्टॉप और 15 इंच अलॉय व्हील शामिल है।

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71 साल पहले ऐसे मना था देश का पहला स्‍वतंत्रता दिवस, देखें 15 अगस्‍त 1947 की दुर्लभ तस्‍वीरें

NewsCode | 15 August, 2018 10:14 AM
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नई दिल्ली। इस वर्ष हम 72वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं। आजादी के 71 साल पूरे हो रहे हैं तो मन में यह विचार भी आना स्वाभाविक है कि पहला स्वतंत्रता दिवस कैसे मनाया गया होगा और उस वक्त कैसा रहा होगा अपना देश? तस्वीरों में देखें 1947 में आजाद भारत की कुछ चुनिंदा तस्वीरें।

पहले स्वतंत्रता दिवस का आगाज पं जवाहरलाल नेहरू के 14 अगस्त की आधी रात की उद्घोषणा के साथ हुआ। लेकिन यह भी सच है कि इस बात की खबर मिलने के बाद देश के लोगों ने 15 अगस्त की सुबह ही जश्न मनाया था। यह तस्वीर 15 अगस्त की सुबह की कोलकाता की है जहां लोग गलियों चौराहों में निकलकर आजादी का जश्न मनाते दिख रहे हैं।


पहले स्वतंत्रता दिवस का संबोधन प्र‌थम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने आधी रात को किया लेकिन उनके प्रथम संबोधन के नाम से यह जो तस्वीर उपलब्‍ध है वह 14 अगस्त की शाम संविधान सभा को संबोधन करने की है।


तत्‍कालीन ब्रिटिश गवर्नर जर्नल लॉर्ड माउंटबेटन और भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू। 15 अगस्त 1947 को नई दिल्‍ली के इंडिया गेट पर तिरंगे को सेल्‍यूट करते हुए।


स्‍वतंत्रता दिवस सम्‍मेलन में भाग लेने पहुंचे हजारों लोग। ये सभी लोग नई दिल्‍ली के रासीना हिल पर एकत्रित हुए थे।


यह तस्वीर आजादी के 11 दिन पहले की है जिसमें भारत के अंतिम वॉयसराय लॉर्ड माउंटबेटन भारतीय नेताओं को सत्ता हस्तांतरण की तैयारी में लगे हैं।


सभी देशवासियों के लिए वो गर्व का पल था जब भारत की शान तिरंगा झंडा फहराया गया।


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शहीद जवान अौरंगजेब और मेजर आदित्य समेत इन जांबाजों को वीरता पुरस्कार

NewsCode | 15 August, 2018 10:01 AM
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नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में आतंकियों द्वारा अगवा कर हत्या किए गए राष्ट्रीय रायफल्स के शहीद जवान औरंगजेब को उनके शौर्य और बलिदान के लिए शांति काल का तीसरा सबसे बड़ा शौर्य पुरस्कार दिया जाएगा। मेजर आदित्य कुमार और राइफलमैन औरंगजेब समेत सशस्त्र बलों के 20 जवानों को स्वतंत्रता दिवस पर सम्मानित किया गया है।

गौरतलब है कि इसी साल 15 जून को ईद मनाने घर जा रहे औरंगजेब को आतंकवादियों ने अगवा करके उनकी बर्बरता से हत्या कर दी थी। गोलियों से छलनी औरंगजेब का शव पुलवामा जिले के गुस्सू इलाके में मिला था।

बता दें कि ईद की छुट्टी मनाने जा रहे औरंगजेब ने कैंप के बाहर से दक्षिण कश्मीर के शोपियां जाने के लिए टैक्सी ली थी। लेकिन रास्ते में कालम्पोरा गांव के पास आतंकवादियों ने उन्हें अगवा कर लिया था। टैक्सी ड्राइवर के सूचना देने के बाद पुलिस और सेना के संयुक्त दल को औरंगजेब का गोलियों से छलनी शव कालम्पोरा से करीब 10 किलोमीटर दूर गुस्सु गांव में मिला था। जम्मू-कश्मीर के पुंछ के रहने वाले औरंगजेब 4-जम्मू-कश्मीर लाइट इन्फेंटरी के शादीमार्ग (शोपियां) स्थित 44 राष्ट्रीय राइफल में तैनात थे।

वो हिज्बुल आतंकी समीर को 30 अप्रैल 2018 को ढेर करने वाले मेजर रोहित शुक्ला की टीम में शामिल थे। जांबाज औरंगजेब ने कई बड़े ऑपरेशनों को अंजाम दिया था. सेना के ऑपरेशनों में हिस्सा लेने के चलते आतंकियों ने उनको निशाना बनाया था।

वहीं, शौर्य चक्र पाने वाले मेजर आदित्य को 2017 में कश्मीर के बडगाम में एक आतंकवाद रोधी अभियान के दौरान ‘सावधानीपूर्वक योजना बनाने और बहादुर से कार्रवाई करने के लिए सम्मानित किया जाएगा। इसके अलावा सिपाही वी पाल सिंह को मरणोपरांत कीर्ति चक्र के लिए नामित किया गया है। दक्षिण कश्मीर के अलगर गांव में नवंबर 2017 में आतंकवाद रोधी अभियान में उनकी मौत हो गई थी।

इसके अलावा जम्मू कश्मीर के रहने वाले हेड कांस्टेबल शरीफ उद्दीन गैनी और मोहम्मद तफैल को प्रेसिडेंट पुलिस मैडल फॉर गैलेंट्री अवार्ड से सम्मानित किया गया है। इसके अलवा आठ सीआरपीएफ के जवानों को भी गैलेंट्री मेडल दिया जाएगा।

इसके साथ ही पानी के जहाज़ से दुनिया का चक्कर लगाने वाले अभियान में शामिल रही भारतीय नौसेना की छह महिला अधिकारियों को नौसेना मेडल दिया जाएगा।

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रांची : भारत का एक मात्र पहाड़ी मंदिर जहां राष्ट्रीय पर्व पर फहराया जाता है तिरंगा

NewsCode Jharkhand | 15 August, 2018 9:55 AM
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रांची । झारखंड की राजधानी रांची के पहाड़ी मंदिर की कहानी बेहद ही रोचक है। पहाड़ पर स्थित भगवान शिव का यह मंदिर देश की आजादी के पहले अंग्रेजों के कब्जें में था। हिंदुस्तान को दुनिया में मंदिरों का देश कहा जाता है। इनमें कुछ मंदिर अपनी खास वास्तुकला, मान्यता और पूजा के नियमों में अलग ही मायने रखते हैं। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर हम आपको ऐसे ही मंदिर के बारे में बता रहे हैं। जहां भगवान की भक्ति और धार्मिक झंडे के साथ राष्ट्रीय झंडे को भी फहराया जाता है।

पहाड़ी बाबा मंदिर का पुराना नाम टिरीबुरू था जो आगे चलकर ब्रिटिश हुकूमत के समय फांसी टुंगरी में परिवर्तित हो गया। क्योंकि अंग्रेजो के राज में देश भक्तों और  क्रांतिकारियों को यहां फांसी पर लटकाया जाता था। आजादी के बाद रांची में पहला तिरंगा धवज यही पर फहराया गया था। जिसे रांची के ही एक स्वतंत्रता सेनानी कृष्ण चन्द्र दास से फहराया था।

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उन्होंने यहां पर शहीद हुए देश भक्तों की याद व सम्मान में तिरंगा फहराया था, तभी से यह परम्परा बन गई की स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस को यहां पर तिरंगा फहराया जाता है। राष्ट्र ध्वज को धर्म ध्वज से ज्यादा सम्मान देते हुए उसे मंदिर के ध्वज से ज्यादा ऊंचाई पर फहराया जाता है। पहाड़ी बाबा मंदिर में एक शिलालेख लगा है जिसमें 14 अगस्त, 1947 को देश की आजादी संबंधी घोषणा भी अंकित है।

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