प्लेन में बच्चा रोया तो भारतीय जोड़े को ब्रिटिश एयरवेज ने फ्लाइट से उतारा

NewsCode | 9 August, 2018 7:05 PM
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नई दिल्ली। ब्रिटिश एयरवेज़ के एक विमान से कथित तौर पर भारतीय जोड़े को सिर्फ इसलिए नीचे उतार दिया गया क्योंकि उनका बच्चा लगातार रो रहा था। ये वघटना 23 जुलाई की बताई जा रहे है। जिस दौरान ये कपल ब्रिटिश एयरवेज की फ्लाइट में लंदन से बर्लिन जा रहा था।

भारत सरकार के सड़क मंत्रालय में जाइंट सेकेट्ररी ए.पी. पाठक ने न्यूज़ एजेंसी को बताया कि वह लंदन से बर्लिन जा रहे थे। तभी फ्लाइट में हमारा तीन साल का बच्चा रोने लगा, तभी वहां मौजूद अधिकारियों ने कहा कि वह बच्चे को चुप करवाएं वरना उन्हें उतार दिया जाएगा। पाठक के अनुसार, कुछ देर बाद ही उन्हें फ्लाइट से उतार दिया गया।

उन्होंने इस बारे में केंद्रीय उड्डयन मंत्री सुरेश प्रभु को चिट्ठी लिख दी है। साथ ही विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को भी इस मामले के बारे में अवगत कराया गया है।

ए.पी. पाठक ने कहा कि मैंने दोनों मंत्रियों को इस बारे में लिखा है, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं आया है. ये एक तरह से रेसिस्म का मामला है। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश एयरवेज़ के क्रू ने हमारे बच्चे को डांटा, नस्लीय टिप्पणी की। ब्रिटिश एयरवेज़ ने भी इस शिकायत के बाद मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। उन्होंने कहा है कि अगर ऐसा हुआ है, तो वह इस मामले में कड़ी कार्रवाई करेंगे।

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देवघर : आयुषी ने बहायी देश-प्रेम की गंगा, संस्‍कृत में गाया “ऐ मेरे वतन के लोगों”   

NewsCode Jharkhand | 15 August, 2018 2:25 PM
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देवघर। एक ओर जहां युवाओं का रुझान पश्चिमी रहन-सहन, खान-पान और व्यवहार की ओर केंद्रित होता जा रहा है तो वहीं दूसरी ओर देश प्रेम की भावना से ओत-प्रोत, कुछ ऐसे भी बच्‍चे-बच्चियां हैं जिनके भीतर अपने देश की सभ्यता, संस्कृति और मातृभाषा की जननी संस्कृत के प्रति अगाध श्रद्धा और समर्पण देखने को मिलती है। देवघर की आयुषी अनन्‍या भी ऐसे ही लोगों में से एक है। आयुषी डीएवी स्कूल में 9वीं क्लास की छात्रा है।

देवघर : आयुषी ने बहायी देश-प्रेम की गंगा, संस्‍कृत में गाया "ऐ मेरे वतन के लोगों" 

संस्कृत को लोकप्रिय बनाने का प्रयास

विलक्षण प्रतिभा की धनी ये बालिका, बॉलीवुड हो या फिर कोई पाश्‍चात्‍य गीत, सभी का न सिर्फ संस्कृत में अनुवाद करती है बल्कि उसे सस्‍वर खुद गाती भी है। आयुषी ने स्‍वतंत्रता दिवस के मौके पर लता मांगेशकर के गए गीत ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ का संस्कृत में अनुवाद किया और खुद ही गाया भी। आयुषी को इस बात का गर्व है कि वह अपनी मातृभाषा की जननि संस्कृत को, गीतों के माध्‍यम से और भी ज्यादा लोकप्रिय बनाने की न सिर्फ एक छोटी से कोशिश कर रही है बल्कि संस्कृत से दूर हो रहे युवाओं को भी अपनी सभ्यता, संस्‍कृति और भाषा की ओर  वापस लौटने के लिए प्रेरित कर रही है।

स्कूल कैंप से मिली संस्‍कृत भाषा में गाने की प्रेरणा

आयुषी को संस्कृत भाषा में गीत गाने की प्रेरणा उसके स्कूल कैंप के दौरान मिली। जहां आयोजित की गई प्रतियोगिता को संस्कृत भाषा में ही पूरा करना था। जब इस प्रतियोगिता में आयुषी ने खुद को संस्कृत के करीब पाया तो फिर उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा। फिर एक के बाद एक हिंदी गानों को संस्कृत में अनुवाद करना शुरू कर दिया। आयुषी ने कई कठिन गीतों का सरल संस्कृत में अनुवाद कर उसे अपनी स्‍वर में गाया भी है।

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लेखक की संवेदना और विभाजन का दर्द बयां करती है नवाजुद्दीन सिद्दीकी की ‘मंटो’, देखें ट्रेलर

NewsCode | 15 August, 2018 2:49 PM
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नई दिल्ली। 72वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर नवाजुद्दीन सिद्दीकी की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘मंटो (Manto)’ का ट्रेलर रिलीज कर दिया गया है। फिल्म की कहानी भारत-पाकिस्तान विभाजन और विवादित लेखक सआदत हसन मंटो के जीवन पर आधारित है। अभिनेत्री-फिल्मकार नंदिता दास द्वारा निर्देशित मंटो का ट्रेलर काफी दिलचस्प है।

फिल्म की कहानी पाकिस्तानी लेखक मंटो के इर्द-गिर्द घूमती है। ट्रेलर में नवाजुद्दीन इस किरदार को बड़े पर्दे पर जीवंत करते दिखाई दे रहे हैं। साल 1948 के दशक पर आधारित लौहार की इस कहानी में ‘मंटो’ काफी दमदार डायलॉग बोले हैं। पाकिस्तान की पृष्टभूमि पर आधारित इस फिल्म के ट्रेलर में मंटो कहते हैं, “जब गुलाम थे तो आजादी का ख्वाब देखते थे और अब आजाद हैं तो कौन-सा ख्वाब देखें?”

देखें, ‘मंटो’ का ट्रेलर…

विचार से बागी और स्वभाव से घुमक्कड़ लेखक सआदत हसन मंटो के जीवन पर भारतीय फिल्मकार नंदिता दास द्वारा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की अवधारणा के आधार पर बनाई गई फिल्म ‘मंटो’ ने मौजूदा हालात के हिसाब से काफी प्रासंगिक है। इसमें ऐसे ज्वलंत मुद्दे को उठाया गया है जो न सिर्फ भारत बल्कि विश्व भर में अहम है। मंटो का जन्म 11 मई, 1912 को हुआ था और वह बाद में पाकिस्तान चले गए। मंटो का निधन 42 साल की उम्र में 18 जनवरी, 1955 को हुआ।

बता दें कि यह फिल्म लेखक मंटो के 1946 से 1950 तक के जीवन पर केंद्रित है। लेखक भारत-पाक विभाजन पर लिखी गई अपनी कहानियों के लिए दुनिया भर में मशहूर हैं। रिलीज होने से पहले ही फिल्म काफी तारीफ बटोर चुकी है और इसमें नवाजुद्दीन सिद्दीकी के अलावा ऋषि कपूर, परेश रावल और गीतकार जावेद अख्तर जैसे दिग्गज कलाकार नजर आएंगे। मंटो 21 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

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बेजुबानों को भी होती हैै आजादी प्यारी

जमशेदपुर। आजादी किसे प्यारी नहीं होती… चाहे इंसान हो या जानवर, हर कोई आजाद रहना चाहता है। आज एक ओर जहां पूरा देश  आजादी के जश्न मे डूबा हुआ है, वहीं जमशेदपुर के कुछ पक्षी प्रेमियों ने सौ से भी अधिक विदेशी पक्षियों को पिंजरा से आजाद किया और एक संदेश देने का प्रयास किया कि बेजुबानों को भी आजादी प्यारी होती है।

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टाटा जू ने भी लंगूरों को खुले बाड़े में रखने का लिया निर्णय

वहीं इस कड़ी में टाटा जू ने भी एक कदम बढ़ा दिया है और आज से जू के लंगूरों को छोटे बाड़े से निकालकर बड़े और खुले बाड़े में आजाद रखने का निर्णय लिया गया। वहीं लंगूर खुले बाड़े में काफी खुश नजर आए। खुले बाड़े में छोड़े जाने के बाद सभी लंगूर इधर उधर धमा- चौकड़ी करते हुए काफी खुश दिखे।

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