टेस्ट इतिहास में भारत की सबसे बड़ी जीत, पारी और 262 रनों से हारा अफगानिस्तान

NewsCode | 15 June, 2018 6:12 PM
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नई दिल्ली। टीम इंडिया ने अफगानिस्तान को उसके पदार्पण टेस्ट मैच में पारी और 262 रनों से मात देकर इतिहास बना दिया है। भारतीय टीम ने बेंगलुरु टेस्ट दो दिन में ही जीत लिया और सिर्फ एक ही दिन में अफगानिस्तान की दोनों पारियों को समेट दिया। यह भारत की टेस्ट क्रिकेट में पारी से अब तक की सबसे बड़ी जीत है। इससे पहले भारत ने साल 2007 में बांग्लादेश के खिलाफ पारी और 239 रन और साल 2017 में श्रीलंका के खिलाफ पारी और 239 रन से जीत दर्ज की थी।

टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए टीम इंडिया ने अपनी पहली पारी में अफगानिस्तान के सामने 474 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। जवाब में अफगानिस्तान की टीम अपनी पहली पारी में 109 रन पर सिमट गई और भारत ने पहली पारी के आधार पर अफगानिस्तान पर 365 रनों की बढ़त ले ली। भारत के कप्तान अजिंक्य रहाणे ने अफगानिस्तान को फोलोऑन खेलने के लिए बाधित दिया। जिसके बाद दूसरी पारी में भी अफगानिस्तान ने महज 103 रन पर हथियार डाल दिए।

दूसरी पारी में अफगानिस्तान के लिए हसमातुल्लाह ने सबसे ज्यादा 36 रन बनाए। वह 88 गेंदों में छह चौके लगाकर नाबाद लौटे। कप्तान असगर स्टानिकजई ने 25 रन बनाए। दूसरी पारी में भारत के लिए रवींद्र जडेजा ने चार विकेट लिए। उमेश यादव को तीन और ईशांत शर्मा को दो सफलता मिली। रविचंद्रन अश्विन के हिस्से एक विकेट आया। शिखर धवन को ताबड़तोड़ शतक के लिए ‘मैन ऑफ द मैच’ चुना गया।

पारी से जीतः टेस्ट में भारत की सबसे बड़ी जीत

पारी और 262 रनों से विरुद्ध अफगानिस्तान, बेंगलुरु, 2018

पारी और 239 रनों से विरुद्ध श्रीलंका, नागपुर, 2017

पारी और 239 रनों से विरुद्ध, बांग्लादेश, ढाका, 2007

पारी और 219 रनों से विरुद्ध ऑस्ट्रेलिया, कोलकाता, 1998

पारी और 198 रनों से विरुद्ध न्यूजीलैंड, नागपुर, 2010

पारी और 171 रनों से विरुद्ध श्रीलंका, पल्लेकेल, 2017

पहली पारी में अश्विन की फिरकी के सामने ढेर हुआ अफगानिस्तान

टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए टीम इंडिया ने अपनी पहली पारी में अफगानिस्तान के सामने 474 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। जवाब में अफगानिस्तान की टीम अपनी पहली पारी में 109 रन पर ढेर हो गई। टीम इंडिया के लिए रविचंद्रन अश्विन ने सबसे ज्यादा 4 विकेट लिए जबकि रवींद्र जडेजा और ईशांत शर्मा ने 2-2 और उमेश यादव ने एक विकेट लिया।

अफगानिस्तान की टीम के कप्तान असगर स्टेनिकाजई ने मैच से पहले कहा था कि उनके स्पिनर भारतीय स्पिनरों से ज्यादा बेहतर हैं, जिसका जवाब अश्विन ने 4 विकेट लेकर दिया है। भारत ने मैच के दूसरे दिन दूसरे सत्र में ही उसे सिर्फ 27.5 ओवरों में अफगानिस्तान को पवेलियन पहुंचा दिया। भारत ने पहली पारी के आधार पर अफगानिस्तान पर 365 रनों की बढ़त ले ली। अफगानिस्तान की तरफ से मोहम्मद नबी ने सबसे ज्यादा 24 रन बनाए। मुजीब उर रहमान ने नौ गेंदों में दो चौके और एक छक्की मदद से 15 रनों की पारी खेली।

भारत द्वारा खड़े किए गए विशाल स्कोर के सामने अपनी पहली पारी खेलने उतरी अफगानिस्तान की बल्लेबाजी बेहद कमजोर साबित हुई। टीम के बल्लेबाज टेस्ट की परीक्षा में विफल रहे। विकेट पर पैर जमाना उनके लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा था।

भारतीय पारी

टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए टीम इंडिया ने अपनी पहली पारी में अफगानिस्तान के सामने 474 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। टीम इंडिया के लिए पहली पारी में शिखर धवन ने सिर्फ 96 गेंद में 107 रन बनाए। वहीं विजय ने 153 गेंद में 105 रन बनाए। इसके अलावा हार्दिक पंड्या ने 94 गेंदों में 71 रनों की पारी खेली और टीम को 450 रन के पार पहुंचने में मदद की।

अफगानिस्तान की ओर से यामिन अहमदजई ने 3, राशिद खान और वफादार ने 2-2, मोहम्मद नबी और मुजीब उर रहमान ने 1-1 विकेट लिए, जबकि एक खिलाड़ी रन आउट हुआ। बता दें कि टीम इंडिया ने पहले दिन का खेल खत्म होने तक 78 ओवर में 6 विकेट गंवा कर 347 रन बनाए थे और रविचंद्रन अश्विन (7 रन) और हार्दिक पंड्या (10 रन) क्रीज पर टिके हुए थे।

नहीं चले अफगानी गेंदबाज

मैच के पहले दिन अफगानिस्तानी गेंदबाजों ने मजबूत भारतीय बल्लेबाजी के समाने अपेक्षाकृत अच्छी गेंदबाजी की। बारिश के कारण मैच रुकने के बाद अफगानिस्तानी गेंदबाजों को पिच से मदद मिलने लगी। भारतीय टीम के बल्लेबाजों ने अफगानिस्तान की स्पिन तिगड़ी- राशिद खान, मुजीब उर रहमान और मोहम्मद नबी की जमकर धुनाई की उनके टेस्ट क्रिकेट में अनुभवहीन होने का फायदा उठाया।

मुरली विजय ने जड़ा 12वां टेस्ट शतक

शिखर धवन के बाद मुरली विजय ने भी शानदार शतक लगाया। यह मुरली विजय का टेस्ट क्रिकेट में 12वां शतक है। उन्होंने 50वें ओवर में अफगान गेंदबाज वफादार की गेंद पर चौका लगाते हुए अपना शतक पूरा किया। मुरली विजय 105 रन बनाकर आउट हुए। उन्होंने अपनी पारी में 15 चौके और एक छक्का लगाया।

धवन का रिकॉर्ड शतक

टीम इंडिया के गब्बर यानी शिखर धवन ने टेस्ट मैच के पहले दिन के पहले सत्र में ही अपना शतक जड़ दिया है। ऐसा करने वाले वह भारत के पहले और दुनिया के छठे बल्लेबाज बन गए हैं। धवन ने सिर्फ 87 गेंदों में 18 चौकों और 3 छक्कों की बदौलत अपना 7वां टेस्ट शतक ठोका। इससे पहले पारी के 14वें ओवर में ही धवन ने अपना अर्धशतक पूरा किया।

शिखर धवन सर डॉन ब्रैडमैन जैसे महान क्रिकेटर के क्लब में शामिल हो गए हैं। यह उपलब्धि हासिल करने वाले धवन दुनिया के छठे बल्लेबाज हैं। इस सूची में ऑस्ट्रेलिया के विक्टर ट्रंपर, उनके हमवतन चार्ली मैकार्टनी, डॉन ब्रैडमैन, पाकिस्तान के मजीद खान और ऑस्ट्रेलिया के डेविड वॉर्नर का नाम शामिल है।

लंच से पहले सबसे ज्यादा रन बनाने का भारतीय रिकॉर्ड पूर्व बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग के नाम था। जिन्होंने साल 2006 में वेस्टइंडीज के खिलाफ सेंट लूसिया में 99 रन बनाए थे। लंच के बाद शिखर धवन अपने खाते में 3 रन और जोड़कर आउट हो गए। 29वें ओवर में शिखर धवन यामिन अहमदजई की गेंद पर मोहम्मद नबी को कैच दे बैठे और 107 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। उन्होंने मुरली विजय के साथ मिलकर पहले विकेट के लिए 168 रनों की ओपनिंग पार्टनरशिप की थी।

टीम इंडिया ने जीता टॉस

मैच से पहले आज काबुल में जन्मे पूर्व भारतीय आलराउंडर सलीम दुर्रानी ने टास के लिए सिक्का उछाला। टीम इंडिया ने टॉस जीतकर बल्लेबाजी का फैसला किया और अफगानिस्तान की टीम को पहले गेंदबाजी दी। टीम इंडिया की प्लेइंग इलेवन में दिलचस्प बदलाव हुए हैं।

शिखर धवन और मुरली विजय के ओपनिंग कॉम्बिनेशन को बरकरार रखा गया है। लोकेश राहुल को मिडिल आर्डर में मौका दिया गया है, जबकि विकेटकीपिंग का जिम्मा दिनेश कार्तिक के कंधो पर है। करुण नायर को टीम में जगह नहीं मिली है। आठ साल बाद टेस्ट में वापसी करने वाले दिनेश कार्तिक को भी टीम में शामिल किया गया है।

अफगानिस्तान टीम को भेंट किया गया स्मृति चिन्ह

अफगानिस्तान की पूरी टीम टेस्ट डेब्यू कर रही है। उसके कप्तान असगर स्टानिकजाई को टॉस से पहले भारत के पूर्व खिलाड़ी सलीम दुर्रानी ने स्मृति चिन्ह भेंट किया। इस मौके पर केंद्रीय खेल मंत्री राज्यवर्धन राठौड़ ने अफगानिस्तान टीम से मुलाकात की।

इस मौके पर स्टानिकजाई ने कहा, हमें अपना पहला टेस्ट मैच खेलने पर गर्व है। सभी ने प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेली है, लेकिन पहले टेस्ट मैच का अनुभव अलग है। अफगानिस्तान ने इस मैच में तीन स्पिन गेंदबाजों को प्लेइंग इलेवन में चुना है।

टेस्ट खेलने वाला 12वां देश बना अफगानिस्तान

मैदान पर यह केवल एक अन्य टेस्ट मैच है, लेकिन इसका महत्व इससे भी बढ़कर है। अफगानिस्तान इसके साथ टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू करने वाला 12वां देश बन गया और इस ऐतिहासिक मैच में राशिद खान, मुजीब जादरान और मोहम्मद शहजाद जैसे खिलाड़ी अपनी तरफ से सर्वश्रेष्ठ प्रयास करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी बधाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अफगानिस्तान की इस ऐतिहासिक शुरुआत के लिए ट्वीट कर उन्हें शुभकामनाएं दी है।

सिर्फ ऑस्ट्रेलिया ने जीता डेब्यू टेस्ट

टेस्ट में अपना पहला मैच खेलने वाली टीमों में सिर्फ ऑस्ट्रेलिया ने अपना पहला मैच जीता है। उसने 1877 में इंग्लैंड को हराया था। उसके बाद 10 देशों ने डेब्यू किया, जिनमें से 9 को हार का सामना करना पड़ा। वहीं, जिम्बाब्वे ने अपना पहला टेस्ट मैच भारत के खिलाफ खेला था, जो ड्रॉ हुआ।

14 साल के प्रियांशु का बड़ा कारनामा- एक पारी में ठोके 556 रन, जड़े 98 चौके

NewsCode | 1 November, 2018 4:32 AM
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नई दिल्ली। 14 साल के एक किशोर ने जूनियर क्रिकेट में तहलका मचा दिया है। इस बल्लेबाज ने बिना आउट हुए 556 रन की मैराथन पारी खेल डाली। मंगलवार को डीके गायकवाड़ अंडर-14 क्रिकेट टूर्नामेंट में बड़ौदा के प्रियांशु मोलिया ने 556 रनों की तूफानी पारी खेली है। मोहिंदर लाला अमरनाथ क्रिकेट एकेडमी की ओर से खेलते हुए प्रियांशु ने अपनी पारी में 98 चौके जड़े। प्रियांशु की इस पारी से अमरनाथ एकेडमी ने योगी क्रिकेट एकेडमी को पारी और 690 रनों से रौंदा।

बैटिंग से पहले प्रियांशु ने गेंदबाजी में भी जलवा बिखेरते हुए चार विकेट चटकाए थे। उनके इस प्रदर्शन की बदौलत योगी अकादमी मैच के पहले दिन केवल 52 रन पर ही ढेर हो गई थी। इसके बाद मोहिंदर लाला अमरनाथ अकादमी ने प्रियांशु की बल्लेबाजी की बदौलत पूरे मैच पर ही अपना कब्जा कर लिया।

प्रियांशु ने अपनी नाबाद 556 रन की पारी के लिए 319 गेंद खेलीं। उन्होंने 98 चौके और 1 छक्का लगाया, जिसकी बदौलत उनकी टीम ने चार विकेट पर 826 का पहाड़ सरीखा स्कोर खड़ा किया। इसके बाद योगी एकेडमी की दूसरी पारी 84 रनों पर ढेर हुई। प्रियांशु ने अपनी ऑफ स्पिन के सहारे दूसरी पारी में भी विकेट चटकाए।

इस पारी से पहले तक प्रियांशु का सर्वश्रेष्ठ स्कोर 254 रन था, जो उन्होंने इसी टूर्नामेंट में पिछले साल बनाया था। पारी के बाद प्रियांशु ने कहा कि मैं अपने स्वाभाविक खेल खेल रहा था क्योंकि गेंदबाजी आक्रमण काफी अच्छा था। यह संतोषजनक पारी थी। हालांकि मैं चार-पांच मौकों पर बीट भी हुआ।

बता दें कि साल 1983 विश्व कप के फाइनल के मैन ऑफ द मैच रहे मोहिंदर अमरनाथ खुद प्रियांशु के लिए मेंटोर की भूमिका निभाते हैं। मोहिंदर का प्रियांशु की प्रतिभा में बहुत ही ज्यादा भरोसा है। मोहिंदर अमरनाथ ने खुद प्रियांशु की तारीफ करते हुए कहा, ‘ मैंने उसे पहली बार जब देखा, तो मुझे पता था कि मैं कुछ खास देख रहा हूं। वह प्रतिभावान है और समय के साथ मौके मिलते रहने से उसमें काफी निखार आएगा। मुझे उसका जुनून पसंद है।’

गौरतलब है कि हाल ही में वेस्टइंडीज के खिलाफ भारतीय टेस्ट टीम में जगह पाने वाले युवा बल्लेबाज पृथ्वी शॉ 14 साल की उम्र में 546 रनों की पारी खेल कर सुर्खियों में आए थे और अब प्रियांशु ने अपने प्रदर्शन से सबको चौंकाया है।


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पलामू : अर्घ्य देने के लिए नहाने के क्रम में पानी में डूबने से अधेड़ की मौत

NewsCode Jharkhand | 14 November, 2018 8:24 PM
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पलामू। लेस्लीगंज तालाब में छठ पर्व पर अर्ध्य देने के लिए नहाने के दौरान डूबने से अधेड़ की मौत हो गयी। तीन से चार घंटे की मशक्कत के बाद तालाब से शव बाहर निकाला जा सका। शव की पहचान लेस्लीगंज निवासी कुंज बिहारी भुइयां (58वर्ष) के रूप में हुई है।

कुंज बिहारी भुइयां की पत्नी छठ व्रत की थी। सुबह करीब पांच बजे उदीयमान सूर्य के अर्ध्य लेने के लिए कुंज बिहारी तालाब में नहा रहा था। तालाब में इस पार से उस पार जाने के क्रम में कुंजबिहारी पानी की गहराई में समा गया। काफी देर तक जब उसका कुछ अता-पता नहीं चला तो उसकी खोजबीन शुरू की गयी। पूर्वाहन में उसका शव तालाब से बरामद किया जा सका।

कल तक छठ व्रत पर खुशी-खुशी भगवान सूर्य को अर्ध्य देने की तैयार में जुटा कुंजबिहारी के परिवार के सदस्यों को उसकी मौत की सूचना जैसे ही मिली, उनके बीच चीख-पुकार मच गयी। पत्नी और बच्चे दहाड़ मारकर रोने लगे।

सूचना मिलने पर लेस्लीगंज बीडीओ विजय प्रकाश मरांडी और थाना प्रभारी वीरेन मिंज मौके पर पहुंचे। बाद में गोताखोरों को बुलाकर तालाब में छानबीन की गयी। शव मिलने के बाद पुलिस ने उसे कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम सदर अस्पताल में कराया। कुंजबिहारी भुईयां के तीन लड़के व दो लड़कियां हैं, सभी शादीशुदा हैं।

मौके पर भाजपा नेता अमित उपाध्याय, लेस्लीगंज मुखिया धर्मेंद्र सोनी, कोट पंचायत मुखिया संतोष मिश्रा, तारकेश्वर पासवान सहित कई लोगों ने शव को निकलवाने में पहल की।

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कहीं समारोह तक ही सीमित न रह जाये स्थापना दिवस- योगेन्द्र प्रताप

NewsCode Jharkhand | 14 November, 2018 8:05 PM
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रांची। झाविमो के केन्द्रीय प्रवक्ता योगेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि भगवान बिरसा की धरती माने जाने वाला झारखंड आज अपनी 18वीं सालगिरह मना रहा है। कह सकते हैं कि आज हमारा झारखंड बालिग हो गया। झाविमो की ओर से सर्वप्रथम भगवान बिरसा को नमन।

हर साल सरकार स्थापना दिवस तो धूमधाम से मनाती है परंतु अफसोस यह आयोजन महज एक समारोह तक ही सीमित होकर रह जाता है। सरकार जो संकल्प लेती है, जिन योजनाओं की घोषनाएं या शिलान्यास करती है वह धरातल पर कितनी उतर पाती हैं, पूर्व की घोषनाओं का कितना लाभ जनमानस को मिला है, सरकार को कभी उसकी भी समीक्षा कर लेनी चाहिए।

2014 के बाद के भाजपा सरकार द्वारा 2015 से लेकर 2017 यानि तीन स्थापना दिवस के मौके पर की गयी घोषनाओं पर गौर डाला जाय तो उनमें से अधिकांशतः घोषनाएं हवा-हवाई ही साबित हुई है, कुछ धरातल पर उतरी भी तो बाद में उसका हश्र भी बुरा ही हुआ।

मुख्यमंत्री तो घोषणा इतनी कर चुके हैं कि अगर आधी भी सरजमीं पर उतर गई होती तो अब तक झारखंड समृद्ध हो गया होता। 2015 के समारोह में सीएम ने कहा था कि जनता राम-सीता है और वे हनुमान हैं। वे जनता के सेवक हैं तथा जनता और उनके बीच दूरी नहीं होगी।

अब जो सरकार अपने ही गृहनगर के दूसरे पायदान का दर्जा रखने वाले एक मंत्री से चार वर्षो में दूरी नहीं पाट सके, जनता की दूरी भला क्या पाटेंगे। पिछले तीन स्थापना दिवस के दौरान और भी कई बातें हुई।

झारखंड को निवेशकों की पहली पसंद बनाने, औद्योगिक घरानों के लिए एक लाख हेक्टेयर भूमि चिन्ह्ति करने की बात हुई। सरकार को श्वेत पत्र जारी कर बतानी चाहिए कि किन निवेशकों ने राज्य में कितने का निवेश किया है और किस उद्योग को कितनी जमीन आवंटित की गई तथा इससे जनता को क्या लाभ हो रहा है।

एयरपोर्ट से बिरसा चौक तक स्मार्ट सड़क, केन्द्र से 10000 करोड़ की सड़क निर्माण, जोहार योजना, मुख्यमंत्री विद्या लक्ष्मी योजना, जनता के लिए लांच किये 15 मोबाईल एप, कृषि रथ, बेरोजगारी व पलायन रोकने के लिए कौशल विकास योजना, 25 डाइविंग ट्रेनिंग सेंटर, 2017 गरीब कल्याण वर्ष, 37 नदियां जलमार्ग में विकसित की योजना, 108 एंबुलेंस, मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना, हरमू फ्लाईओवर आदि तमाम योजनाओं का आज क्या हश्र है।

मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा में 50 हजार से लेकर दो लाख तक निःशुल्क इलाज की बात है परंतु यहां रिम्स में महज 50 रूपये के लिए मौत हो रही है। एंबुलेंस के बिना मरीज मर रहे हैं। किसान आत्महत्या कर रहे हैं।

तमाम योजनाएं महज कागजी हैं परंतु सरकार केवल अपनी पीठ खुद थपथपाने की आदी हो चुकी है। झाविमो का मानना है कि राज्य अलग होने की सार्थकता तभी होगी जब राज्य की जनता वास्तव में खुशहाल होगी न कि केवल घोषनाओं से।

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