अमेरिका के परमाणु समझौते से अलग होने पर भड़का ईरान, जानिए विश्व के नेताओं ने क्या कहा

NewsCode | 9 May, 2018 11:29 AM

अमेरिका के परमाणु समझौते से अलग होने पर भड़का ईरान, जानिए विश्व के नेताओं ने क्या कहा

वाशिंगटन| अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि वह अपने देश को ईरान परमाणु समझौते से अलग कर रहे हैं। ट्रंप की इस घोषणा के बाद दुनियाभर में तनाव व्याप्त हो गया है और इसका कड़ा विरोध किया जा रहा है।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से अमेरिका के अलग होने के बाद मध्य पूर्व में हथियारों की दौड़ तेज होने का खतर बढ़ सकता है।

ईरान और छह अन्य वैश्विक शक्तियों के बीच हुए परमाणु समझौते के तहत ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम बंद करने को राजी हुआ था और बदले में ईरान पर लंबे समय से लगे आर्थिक प्रतिबंधों में ढील दी गई थी।

ट्रंप ने व्हाइट हाउस से टेलीविजन पर प्रसारित अपने संबोधन में अमेरिका के इस समझौते से अलग होने की घोषणा की।

उन्होंने कहा कि वह ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों से संबंधित प्रतिबंधों में ढील देने के समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे और समझौते के तहत तेहरान पर से हटाए गए प्रतिबंधों को दोबारा लागू करेंगे।

ट्रंप ने साथ ही कहा कि अमेरिका ईरान के साथ व्यापारिक संबंध रखने वाले देशों के खिलाफ भी कड़े प्रतिबंध लगाएगा।

ट्रंप ने ईरान और संयुक्त समग्र कार्ययोजना (जीसीपीओए) के नाम से जाने वाले परमाणु समझौते की फिर से आलोचना करते हुए कहा कि यह समझौता ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकने या क्षेत्र में आतंकवाद को बढ़ावा देने से रोकने में विफल रहा है।

उन्होंने कहा, “समझौते के कमजोर प्रावधान पूरी तरह से अस्वीकार्य हैं। अगर मैंने इस समझौते को बनाए रखने की इजाजत दी तो जल्द ही मध्य पूर्व में परमाणु हथियारों की दौड़ शुरू हो जाएगी। ईरान के परमाणु हथियारों के निर्माण के साथ ही हर देश अपने हथियार तैयार करना चाहेगा।”

ट्रंप ने कहा कि अमेरिका तेहरान पर बेहद कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाएगा। उन्होंने साथ ही कहा कि जो भी देश परमाणु हथियार बनाने में ईरान की सहायता करेंगे अमेरिका उन पर भी कड़े प्रतिबंध लगाएगा।

व्हाइट हाउस ने बाद में कहा कि ट्रंप ने अपने प्रशासन को जेसीपीओए से संबंधित प्रतिबंध फिर से लगाने की प्रक्रिया तत्काल शुरू करने का निर्देश दिया है।

ईरान और छह वैश्विक शक्तियों अमेरिका, ब्रिटेन, चीन, रूस, फ्रांस और जर्मनी के बीच जुलाई 2015 में वियना में ईरान परमाणु समझौता हुआ था।

ट्रंप के इस समझौते से अलग होने के फैसले से विश्व भर में तनाव व्याप्त हो गया है।

फ्रांस के राष्ट्रपति एमानुएल मैक्रों ने ट्रंप के इस फैसले पर दुख जाहिर करते हुए कहा कि अमेरिका के इस फैसले से फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन निराश हैं।

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मैक्रों, मर्केल और थेरेसा मे ने ईरान परमाणु समझौते के प्रति अपनी प्रतिबद्धता कायम रखने की बात दोहराते हुए कहा है कि यह समझौता हमारी साझा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

वॉशिंगटन स्थित हथियार नियंत्रण संघ ने भी ट्रंप के फैसले की आलोचना की है।

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 आईएएनएस

कर्नाटक: कांग्रेस के जी परमेश्वर डिप्टी सीएम और रमेश कुमार बनेंगे स्पीकर, बुधवार को शपथ ग्रहण

NewsCode | 22 May, 2018 8:53 PM

कर्नाटक: कांग्रेस के जी परमेश्वर डिप्टी सीएम और रमेश कुमार बनेंगे स्पीकर, बुधवार को शपथ ग्रहण

नई दिल्ली। कर्नाटक की सियासत में बुधवार को जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन सरकार के अस्तित्व में आने के साथ ही एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री बुधवार को एक साथ शपथ लेंगे। जेडीएस के एचडी कुमारस्वामी सीएम और कांग्रेस के जी परमेश्वर डिप्टी सीएम पद की शपथ लेंगे। विधानसभा के स्पीकर का पद भी कांग्रेस को मिला है।

खबर है कि विधानसभा स्पीकर कांग्रेस के केआर रमेश कुमार होंगे। इसके बाद फ्लोर टेस्ट होगा और तभी कैबिनेट विस्तार किया जाएगा। आपको बता दें कि जी परमेश्वकर कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष हैं और उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया जाएगा। गुरुवार को स्पीकर के चुने जाने के बाद कुमारस्वामी विधानसभा में बहुमत साबित करेंगे।

सूत्रों के हवाले से खबर है कि दोनों पार्टियों में कैबिनेट में जगह को लेकर भी बातचीत फाइनल हो गई है। कांग्रेस के 22 और जेडीएस के 12 विधायकों को कैबिनेट में जगह मिल सकती है।

वीआईपी सीटों को लेकर खींचतान

वहीं, दूसरी ओर शपथ ग्रहण समारोह को देखने के लिए लगाई जाने वाली वीआईपी सीटों पर भी अधिक हिस्सेदारी के लिए दोनों पार्टियों में खींचतान चल रही है। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस विधायक दल की बैठक में विधायकों ने जोर दिया कि मंत्रिमंडल में उनकी पार्टी को वाजिब हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। इन विधायकों का कहना था कि वो चुनाव में जेडीएस के साथ तीखी लड़ाई के बाद जीते हैं और अगर कांग्रेस के किसी मंत्री को बुधवार को शपथ नहीं दिलाई जाती है, तो ये उनके लिए असहज स्थिति होगी।

कर्नाटक की सत्ता में भागीदारी ही नहीं, कांग्रेस को शपथ ग्रहण समारोह को देखने के लिए लगने वाली करीब 6000 वीआईपी सीटों को लेकर भी चिंता है कि उसके खाते में कितनी सीटें आएंगी। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस नेताओं को लगता है कि कहीं जेडीएस अपने नेताओं के लिए अधिक सीटों पर कब्जा न कर ले। ऐसे में पर्याप्त संख्या में पार्टी नेताओं के लिए वीआईपी सीटें सुरक्षित कर पाने को लेकर भी कांग्रेस चिंतित है।

कर्नाटक विधान सौध परिसर में जेडीएस की ओर से ऐसे कई पोस्टर लगाए गए हैं, जिसमें उसके गठबंधन में बड़े पार्टनर होने का आभास होता है। मालूम हो कि कर्नाटक में येदियुरप्पा के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बाद अब जेडीएस के कुमारस्वामी कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाने जा रहे हैं।

याद रहे कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए 12 मई को मतदान हुए थे, जबकि 15 मई को नतीजे आए थे। इसमें 104 सीटें जीतकर बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, जबकि कांग्रेस को 78 सीटों और जेडीएस को 37 सीटों पर जीत मिली थी। इस चुनाव में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, जिसके चलते बीजेपी ने सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा करके सरकार बना ली थी, लेकिन येदियुरप्पा विधानसभा में बहुमत साबित करने में विफल रहे और उन्होंने ढाई दिन में ही इस्तीफा दे दिया। इसके बाद जेडीएस और कांग्रेस मिलकर सरकार बनाने जा रहे हैं। दोनों के कुल विधायकों की संख्या बहुमत से भी ज्यादा है।

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NewsCode | 22 May, 2018 8:08 PM

SBI को अब तक का सबसे बड़ा घाटा, दिसंबर-मार्च 2018 तिमाही में ₹7718 करोड़ का नुकसान

नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) को पिछले वित्त वर्ष की चौथी यानी जनवरी-मार्च 2018 तिमाही में कुल 7,718 करोड़ रुपये का बड़ा घाटा हुआ है। ये अब तक का सबसे बड़ा तिमाही घाटा है। एसबीआई ने आज अपना तिमाही परिणाम घोषित किया।

इसके मुताबिक, एक साल में बैंक का एनपीए दोगुने से भी ज्यादा बढ़ गया है। बैंक की नॉन-परफॉर्मिंग ऐसेट्स (एनपीए) वित्त वर्ष 2016-17 के 177866 करोड़ रुपये और 9.11 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2017-18 में 2,23,427 करोड़ रुपये और 10.91 प्रतिशत हो गया है। पिछले साल जनवरी-मार्च तिमाही में एनपीए 11,740 करोड़ रुपए था जो 22,096 करोड़ रुपए हो गया है। अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में ये 18,876 करोड़ रुपए था।

लगातार दूसरी तिमाही में घाटा

आपको बता दें कि अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में भी एसबीआई को 2,416.37 करोड़ रुपए का घाटा हुआ। जबकि पिछले साल की तीसरी तिमाही में 2,814.82 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ था। इस तरह वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान बैंक को 6,547 करोड़ का नुकसान हुआ है जबकि 2016-17 में 10,484 करोड़ का मुनाफा हुआ था।

बैंक की बढ़ी आय 

चौथी तिमाही में एसबीआई की आय 68,436.06 करोड़ रुपए रही है। पिछले साल की जनवरी-मार्च तिमाही में आय 57,720.07 करोड़ रुपए थी। पूरे वित्त वर्ष के दौरान आय 2,59,664 करोड़ रुपए रही है जो 2016-17 में 2,10,979 करोड़ थी। जनवरी-मार्च तिमाही में ब्याज से आय 10.5% बढ़कर 19,974 करोड़ रुपए हो गई।

पिछले साल की चौथी तिमाही में ये 18,070.7 करोड़ रुपए थी। बैंक ने बताया कि उन्होंने राइट-ऑफ किए गए लोन में से उसने 21.18 प्रतिशत की रिकवरी हुई है। बैंक ने कहा कि वित्त वर्ष 2017 में 59,461 करोड़ रुपये के मुकाबले पिछले वित्त वर्ष में 0.08% की वृद्धि के साथ उसे 59,511 करोड़ रुपये की ऑपरेटिंग प्रॉफिट रही।

पीएनबी के बाद सबसे बड़ा तिमाही घाटा

भारतीय बैंकिंग इतिहास में पीएनबी के बाद एसबीआई को सबसे बड़ा तिमाही घाटा हुआ है। नीरव मोदी के घोटाले की वजह से चौथी तिमाही में पीएनबी को रिकॉर्ड 13,417 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। वहीं एनपीए बढ़ने से एसबीआई को 7,718 करोड़ का घाटा हुआ है।

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254 दिनों में पूरी दुनिया का चक्‍कर लगा भारत लौटीं नौसेना की जाबांज महिलाएं, देखें तस्वीरें

NewsCode | 22 May, 2018 6:06 PM

254 दिनों में पूरी दुनिया का चक्‍कर लगा भारत लौटीं नौसेना की जाबांज महिलाएं, देखें तस्वीरें

गोवा। भारतीय नौसेना की शान आईएनएस तारिणी आठ महीने और 11 दिनों में दुनिया का चक्कर लगाकर स्वदेश पहुंच गया है। आठ महीने से ज्यादा समय में समुद्र के रास्ते दुनिया को नापने वाली ‘INSV तारिणी’ की चालक दल की 6 महिला सदस्य गोवा पहुंच गईं।

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और नौसेना प्रमुख सुनील लांबा ने नौसेना की इन जाबांज महिलाओं का स्वागत किया। लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी की अगुवाई में टीम ने 254 दिन में 26 हजार समुद्री मील का सफर तय किया। इन महिलाओं ने अपनी यात्रा के दौरान 21,600 नॉटिकल माइल की दूरी तय की और दो बार भूमध्य रेखा, तारिणी चार महाद्वीपों और तीन सागरों को पार किया।

समुद्री प्रदूषण के आंकड़ों को जुटाने और मौसम की बेहतर भविष्यवाणी के लिए समुद्री तरंगों का डाटा जुटाने के मिशन को निकली टीम तारिणी ने समुंद्री लहरों के कई खौफनाक मंजर भी देखे। अलग-अलग देशों में उन्हें मौसम के मिजाज का सामना करना पड़ा। कभी कड़कड़ाती ठंड के साथ तूफानों से उनका सामना हुआ। टीम के सदस्यों ने बताया कि उन्हें दिन भर खाना नसीब नहीं होता था।

इस अभियान का नाम ‘नाविका सागर परिक्रमा’ था और पिछले साल 10 सितंबर को आईएनएस मांडवी बोट पुल से रवाना की गई थी। इस अभियान का नेतृत्व लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी कर रही थीं और इसमें चालक दल की सदस्य लेफ्टिनेंट कमांडर प्रतिभा जामवाल, स्वाति पी, लेफ्टिनेंट ऐश्वर्या बोड्डापति, एस विजया देवी और पायल गुप्ता समेत शामिल थीं।

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने 10 सितंबर 2017 को आइएनएस तारिणी को गोवा से झंडी दिखाकर इस ऐतिहासिक यात्रा के लिए रवाना किया था। इन्होंने अभियान में पांच चरणों में यह दूरी तय की। इन चार बंदरगाहों पर इसका पड़ाव फ्रीमेंटल (ऑस्ट्रेलिया), लाइटेलटन (न्यूजीलैंड), पोर्ट स्टेनले (फॉकलैंड) और केप टाउन (दक्षिण अफ्रीका) शामिल हैं।

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