विश्व बालश्रम निषेध दिवस : झारखंड में अभी भी 4 लाख से अधिक हैं बाल श्रमिक

NewsCode Jharkhand | 12 June, 2018 12:22 PM
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खोती बचपन के साथ-साथ नारकीय जीवन जीने को विवश

रांची। विश्व बाल श्रम निषेध दिवस प्रत्येक साल 12 जून को मनाया जाता है। भारत में बाल श्रम की समस्या दशकों से प्रचलित है। भारत सरकार ने बाल श्रम की समस्या को समाप्त क़दम उठाए हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 23, बड़े व खतरनाक उद्योगों में बच्चों के रोजगार पर प्रतिबंध लगाता है।

भारत की केंद्र सरकार ने 1986 में बाल श्रम निषेध और नियमन अधिनियम पारित कर दिया। इस अधिनियम के अनुसार बाल श्रम तकनीकी सलाहकार समिति नियुक्त की गई। इस समिति की सिफारिश के अनुसार, खतरनाक उद्योगों में बच्चों की नियुक्ति निषेध है। 1987 में, राष्ट्रीय बाल श्रम नीति बनाई गई थी।

विश्व बालश्रम निषेध दिवस : झारखंड में अभी भी 4 लाख से अधिक हैं बाल श्रमिक

झारखंड में करीब 4 लाख से अधिक बाल श्रमिक

सरकारी आंकड़ों के अनुसार झारखंड में करीब 4 लाख, भारत में करीब 2 करोड़ और अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के अनुसार लगभग 5 करोड़ बच्चे बाल श्रमिक हैं। इन बाल श्रमिकों में से 19 फीसदी के लगभग घरेलू नौकर हैं, ग्रामीण और असंगठित क्षेत्रों में तथा कृषि क्षेत्र से लगभग 80 फीसदी जुड़े हुए हैं।

ठेकेदारों के हाथ बेच दिये जाते हैं ये बच्चे

शेष अन्य क्षेत्रों में, बच्चों के अभिभावक ही बहुत थोड़े पैसों में उनको ऐसे ठेकेदारों के हाथ बेच देते हैं जो अपनी व्यवस्था के अनुसार उनको होटलों, कोठियों तथा अन्य कारखानों आदि में काम पर लगा देते हैं। उनके नियोक्ता बच्चों को थोड़ा सा खाना देकर मनमाना काम कराते हैं। 18 घंटे या उससे भी अधिक काम करना, आधे पेट भोजन और मनमाफ़िक काम न होने पर पिटाई यही उनका जीवन बन जाता है।

विश्व बालश्रम निषेध दिवस : झारखंड में अभी भी 4 लाख से अधिक हैं बाल श्रमिक

कई घातक कार्य करते हैं ये बच्चे

केवल घर का काम नहीं इन बाल श्रमिकों को पटाखे बनाना, कालीन बुनना, वेल्डिंग करना, ताले बनाना, पीतल उद्योग में काम करना, कांच उद्योग, हीरा उद्योग, माचिस, बीड़ी बनाना, खेतों में काम करना, कोयले की खानों में, पत्थर खदानों में, सीमेंट उद्योगों, दवा उद्योगों में तथा होटलों व ढाबों में जूठे बर्तन धोने आदि सभी काम मालिक की मर्जी के अनुसार करने होते हैं।

ये बच्चे नहीं जीते हैं अपने बचपन

इन समस्त कार्यों के अतिरिक्त कूड़ा बीनना, पॉलिथीन की गंदी थैलियां चुनना, आदि अनेक कार्य हैं जहां ये बच्चे अपने बचपन को नहीं जीते, नरक भुगतते हैं परिवार का पेट पालते हैं। इनके बचपन के लिए न मां की लोरियां हैं न पिता का दुलार, न खिलौने हैं, न स्कूल न बालदिवस। इनकी दुनिया सीमित है तो बस काम काम और काम, धीरे धीरे बीड़ी के अधजले टुकड़े उठाकर धुआं उडाना, यौन शोषण को खेल मानना इनकी नियति बन जाती है।

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ये कहता है भारतीय संविधान

संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप भारत का संविधान मौलिक अधिकारों और राज्य के नीति-निर्देशक सिद्धांत की विभिन्न धाराओं के माध्यम से कहता है-

  • 14 साल के कम उम्र का कोई भी बच्चा किसी फैक्टरी या खदान में काम करने के लिए नियुक्त नहीं किया जायेगा और न ही किसी अन्य खतरनाक नियोजन में नियुक्त किया जायेगा (धारा 24)।
  • राज्य अपनी नीतियां इस तरह निर्धारित करेंगे कि श्रमिकों, पुरुषों और महिलाओं का स्वास्थ्य तथा उनकी क्षमता सुरक्षित रह सके और बच्चों की कम उम्र का शोषण न हो तथा वे अपनी उम्र व शक्ति के प्रतिकूल काम में आर्थिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए प्रवेश करें (धारा 39-ई)।
  • संविधान लागू होने के 10 साल के भीतर राज्य 14 वर्ष तक की उम्र के सभी बच्चों को मुफ़्त और अनिवार्य शिक्षा देने का प्रयास करेंगे (धारा 45)।
  • बच्चों को स्वस्थ तरीके से स्वतंत्र व सम्मानजनक स्थिति में विकास के अवसर तथा सुविधाएं दी जायेंगी और बचपन व जवानी को नैतिक व भौतिक दुरुपयोग से बचाया जायेगा (धारा 39-एफ)।
  • बाल श्रम एक ऐसा विषय है, जिस पर संघीय व राज्य सरकारें, दोनों कानून बना सकती हैं। दोनों स्तरों पर कई कानून बनाये भी गये हैं।
  • अन्य प्रयास जो इस संदर्भ में समय समय पर हुए हैं उनमें
    • बाल श्रम (निषेध व नियमन) कानून 1986- यह कानून 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को किसी भी अवैध पेशों और 57 प्रक्रियाओं में, जिन्हें बच्चों के जीवन और स्वास्थ्य के लिए अहितकर माना गया है, नियोजन को निषिद्ध बनाता है। इन पेशों और प्रक्रियाओं का उल्लेख कानून की अनुसूची में है।
    • फैक्टरी कानून 1948- यह कानून 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के नियोजन को निषिद्ध करता है। 15 से 18 वर्ष तक के किशोर किसी फैक्टरी में तभी नियुक्त किये जा सकते हैं, जब उनके पास किसी अधिकृत चिकित्सक का फिटनेस प्रमाण पत्र हो। इस कानून में 14 से 18 वर्ष तक के बच्चों के लिए हर दिन साढ़े चार घंटे की कार्यावधि तय की गयी है और रात में उनके काम करने पर प्रतिबंध लगाया गया है।
    • भारत में बाल श्रम के खिलाफ कार्रवाई में महत्वपूर्ण न्यायिक हस्तक्षेप 1986 में उच्चतम न्यायालय के उस फैसले से आया, जिसमें संघीय और राज्य सरकारों को खतरनाक प्रक्रियाओं और पेशों में काम करने वाले बच्चों की पहचान करने, उन्हें काम से हटाने और उन्हें गुणवत्तायुक्त शिक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया गया था। न्यायालय ने यह आदेश भी दिया था कि एक बाल श्रम पुनर्वास सह कल्याण कोष की स्थापना की जाये, जिसमें बाल श्रम कानून का उल्लंघन करनेवाले नियोक्ताओं के अंशदान का उपयोग हो।

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रांची : मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी ने किया कंफर्ट लाइफ सर्विसेज का शुभारंभ

NewsCode Jharkhand | 2 December, 2018 7:38 PM
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रांची। राज्य के जल संसाधन, पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी ने आज मोरहाबादी स्थित पार्क प्लाजा के दूसरे तल्ले में कंफर्ट लाइफ सर्विसेज का फीता काटकर शुभारंभ किया। इस मौके पर उन्होंने आशा जतायी कि यह सर्विसेज आम जनों के लिए उपयोगी सिद्ध होगा।

कंफर्ट लाइव सर्विसेज में फ्लैट खरीद- बिक्री, स्वास्थ्य बीमा, अवधि बीमा, म्युचुअल फंड, एसआईपी एवं वाहनों की बीमा आदि की सुविधा लोगों को प्राप्त हो सकेगी।

शुभारंभ के मौके पर आजसू पार्टी के केंद्रीय महासचिव डॉ. लंबोदर महतो, चंद्रशेखर महतो, संचालक राजेश कुमार, रंजना चौधरी, गीता महतो, कल्पना मुखिया, संतोष  मुखिया, अमित साव एवं अजय श्रीवास्तव सहित कई गणमान्य लोग मौजूद थे।

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भोगनाडीह : झामुमो ने संथाल को भ्रष्टाचार और बिचौलिया दिया- मुख्यमंत्री

NewsCode Jharkhand | 2 December, 2018 7:36 PM
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भोगनाडीह  में भाजपा कार्यकर्ता सम्मेलन में शामिल हुए

भोगनाडीह। राज्य को संथाल परगना ने झारखण्ड मुक्ति मोर्चा से तीन तीन मुख्यमंत्री दिये,  लेकिन उन्होंने मुख्यमंत्री बनाया वो गरीब आदिवासी, वंचित दलित की अनदेखी कर अर्थपेटी और मतपेटी भरने का कार्य किया।

साथ ही संथाल परगना को भ्रष्टाचार और बिचौलिया दिया। सबसे ज्यादा आदिवासियों की जमीन लूटने का काम सोरेन परिवार ने किया है। आज सीएनटी-एस पीटी एक्ट के उल्लंघन कर विभिन्न शहरों में आदिवासियों की जमीन ले ली।

जबकि संथाल परगना समेत राज्य भर में यह कह कर गुमराह किया गया कि अगर भारतीय जनता पार्टी की सरकार आएगी तो आदिवासी की जमीन लूट लेगी। क्या 4 साल सरकार द्वारा किसी आदिवासी की जमीन लूटी गई नहीं। उपरोक्त बातें मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कही।

बरहेट का प्रतिनिधित्व करने वाला कभी विधानसभा में सवाल नहीं उठाया

मुख्यमंत्री ने कहा कि बरहेट का विधानसभा में प्रतिनिधित्व करने वाले ने कभी भी विधानसभा में क्षेत्र की समस्याओं को लेकर प्रश्न नहीं रखा, क्योंकि उसे पता ही नहीं है कि क्षेत्र की समस्या क्या है ऐसे में विकास के कार्य कैसे सम्पन्न होंगे।

लोगों को यह सोचना चाहिए और स्थानीय उम्मीदवार को प्राथमिकता देनी चाहिए। चाहे वोकिसी पार्टी का हो।

कार्यकर्ता पार्टी का प्राण, पार्टी के लिए राष्ट्र पहले

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता पार्टी के प्राण हैं। यह एक ऐसी पार्टी है जहां वंशवाद और परिवार नहीं। एक चाय बेचने वाला प्रधानमंत्री और मजदूर मुख्यमंत्री बन सकता है। मैं भी बूथ स्तर का कार्यकर्ता था।

पार्टी के लिए समर्पण भाव से कार्य करते हुए 1995 में विधायक बना और अब मुख्यमंत्री हूं। आप भी ईमानदारी से कार्य करें। सरकार की योजनाओं को जन जन पहुंचाये। पार्टी के वविभिन्न मोर्चा के लोग इस कार्य में लगे। क्योंकि पार्टी के लिए राष्ट्र पहले है।

इस राष्ट्र को और मजबूत करने के लिए वैश्विक पटल पर अपनी पहचान बना चुके प्रधानमंत्री  के हाथों को मजबूत करें। इस अवसर पर अनंत ओझा,  धर्मपाल सिंह, हेमलाल मुर्मू समेत अन्य मौजूद थे।

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रांची : अखिल झारखंड छात्र संघ ने चुनाव को लेकर चलाया जनसंपर्क अभियान

NewsCode Jharkhand | 2 December, 2018 7:24 PM
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रांची। अखिल झारखंड छात्र संघ ने राजधानी स्थित विभिन्न हॉस्टलों एवं लॉजों में सघन जनसंपर्क अभियान चलाया। इस जनसंपर्क अभियान के दौरान आजसू को मिल रहे शुरुआती रुझान से यह साफ तौर पर प्रतीत होता है कि इस बार रांची विश्वविद्यालय के तमाम सभी कॉलेजों में आजसू का पलड़ा भारी रहेगा।

यह सघन जनसंपर्क अभियान सुबह 8:00 बजे से शुरू होकर शाम 5:00 बजे तक लगातार चला। “वोटर के द्वार” कार्यक्रम के तहत आजसू कि विभिन्न टोलियां विभिन्न क्षेत्रों में अवस्थित करीब करीब 40 हॉस्टलों का दौरा किया।

इस कार्यक्रम की शुरुआत पी. जी. डिपार्टमेंट के चुनाव प्रभारी सौरभ शर्मा के नेतृत्व में मोरहाबादी स्थित पीजी हॉस्टल से की गई। मोरहाबादी क्षेत्र में हॉस्टल भ्रमण के दौरान हरप्रीत सिंह विजय महतो गुलशन तिवारी धीरज कुमार ने अहम योगदान दिया।

एसएस मेमोरियल कॉलेज के प्रत्याशियों के लिए जनसंपर्क अभियान का नेतृत्व अजीत कुमार एकरामुल अंसारी हुसैन अंसारी कर रहे थे। इस दौरान कांके जवाहर नगर चांदनी चौक क्षेत्र का द्वारा किया गया।

आर ए एस वाई कॉलेज के प्रत्याशियों के लिए छात्रों से वोट की अपील करने के अभियान का नेतृत्व चेतन प्रकाश बंटी राय सूरज झा कर रहे थे। इस दौरान कोकर लालपुर कांटा टोली स्थित विभिन्न हॉस्टलों का दौरा किया गया।

महिला कॉलेज के प्रत्याशियों के लिए वोट  की अपील करने के अभियान के तहत गदाधर महतो एवं नीरज वर्मा के नेतृत्व में लालपुर बर्द्धमान कंपाउंड स्थित विभिन्न महिला छात्रावासों में जाकर अधिक से अधिक वोट करने की अपील की गई।

डोरंडा कॉलेज के प्रत्याशियों के पक्ष में वोट मांगते हुए ज्योत्स्ना केरकेट्टा एवं अरविंद कुमार के नेतृत्व डोरंडा, हिनू, शुक्ला कॉलोनी आदि क्षेत्रों के विभिन्न हॉस्टलों में अभियान चलाया गया।

इधर हिंदपीढ़ी स्थित  मारवाड़ी कॉलेज के सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने नीतीश सिंह रमेश कपड़िया राहुल तिवारी के संयुक्त नेतृत्व में पूरे जोशो खरोश के साथ हिंदपीरी अपर बाजार मेन रोड किशोरगंज आदि क्षेत्रों का दौरा किया।

वहीं मांडर कॉलेज के प्रत्याशियों ने दीपक साहू, नवीन सिंह, सोहेल अंसारी ,सुक्का उरांव , सौरभ पाठक के नेतृत्व में मांडर आसपास के विभिन्न गांवों का दौरा किया एवं आजसू के प्रत्याशियों के पक्ष में ज्यादा से ज्यादा मतदान करने की अपील की। इनके प्रचार करने का तरीका बेहद अद्भुत एवं भव्य था जिसे देखते बन रहा था।

इस अभियान के दौरान आजसू  के प्रदेश प्रभारी हरीश कुमार ने  कहा कि हमारा लक्ष्य जीत और हार से कहीं ऊपर यह है की इस छात्र संघ चुनाव में छात्र संघ की महत्ता को बढ़ाने हेतु ज्यादा से ज्यादा वोटरों को बूथ तक लाकर वोटिंग कराना है ताकि वोट प्रतिशत औसतन बढ़िया रहे और ज्यादा से ज्यादा वोटर जागरूक हो सके।

आज के इस अभियान को सफल बनाने में मुख्य रूप से आजसू के  प्रदेश प्रभारी हरीश कुमार प्रदेश अध्यक्ष गौतम सिंह प्रदेश वरीय उपाध्यक्ष लाल मनीष नाथ शाहदेव प्रदेश वरीय उपाध्यक्ष जब्बार अंसारी प्रदेश उपाध्यक्ष सौरभ सिंह प्रदेश उपाध्यक्ष नीरज वर्मा प्रदेश कोषाध्यक्ष गदाधर महतो प्रदेश सचिव ओम वर्मा प्रदेश सचिव ज्योत्स्ना केरकेट्टा प्रदेश सचिव चेतन प्रकाश प्रदेश सचिव अजीत कुमार विश्व विद्यालय प्रभारी उस साहू विश्वविद्यालय अध्यक्ष नीतीश सिंह विश्वविद्यालय महासचिव राजकिशोर महतो आदि का सराहनीय योगदान रहा।

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