क्या है म्यूचुअल फंड और इसके हैं कितने प्रकार, जानें कब और कैसे करें निवेश

NewsCode | 16 January, 2018 12:57 PM

अलग अलग श्रेणी के निवेशक अपने जोखिम लेने की क्षमता, निवेश के लक्ष्यों, निवेश की अवधि और निवेश की राशि के अनुसार उनका चयन करते है ।

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नई दिल्ली। म्यूचुअल फंड क्या है और यह कितने प्रकार के होते है, इसे लेकर लोगों के मन में कई तरह के प्रश्न उठते हैं। म्यूचुअल फंड में निवेश करने से पहले यह जरूरी है कि आप यह जान लें कि यह कितने प्रकार के होते हैं और किस म्यूच्यूअल फण्ड के इन्वेस्टमेंट में कितना रिस्क है।

विभिन्‍न प्रकार की म्यूचुअल फंड कंपनियों द्वारा समय-समय पर विभिन्‍न प्रकार की म्यूचुअल फंड योजनाओं को लांच किया जाता है और एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) तथा भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा इन विभिन्‍न प्रकार की म्यूचुअल फंड स्कीमों को रेग्यूलेट व मॉनिटर किया जाता है, ताकि निवेशक को इन स्कीमों में इन्वेस्ट करने पर किसी गलत नियम और शर्तों की वजह से कभी भी किसी भी तरह का वित्तीय घाटा न हो।

अलग अलग श्रेणी के निवेशक अपने जोखिम लेने की क्षमता, निवेश के लक्ष्यों, निवेश की अवधि और निवेश की राशि के अनुसार उनका चयन करते है । आईये जानते है की म्यूच्यूअल फंड्स के कितने प्रकार होते है और इसके क्या फायदे होते है और लोग आजकल कैसे इनका लाभ ले रहें है ।

अलग लोगों की अलग जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न प्रकार के म्यूचुअल फंड मौजूद हैं। मोटे तौर पर देखें तो म्यूचुअल फंड मुख्यत: दो प्रकार के होते हैं।

1. ओपन–एंडेड फंड (Open-Ended Funds):

 इन म्यूचुअल फंड योजनाओं में इन्वेस्टर अपनी जरूरत व सुविधानुसार समय-समय पर फंड्स को बेच और खरीद सकता है। यानी इन्वेस्टर के पास जब कुछ अतिरिक्त बचत हो, तो वह अपनी बचत को जब चाहे तब अपनी सुविधानुसार इस प्रकार की म्यूचुअल फंड योजनाओं में इन्वेस्ट करने के लिए लगा सकता है।

मतलब यह है कि इस स्कीम के तहत निवेशक किसी भी समय निवेश कर सकता है, और आवश्कता पड़ने पर कभी भी अपने निवेश को भुना सकता है | अर्थात इस स्कीम में लिक्विडिटी यानि तरलता की कोई कमी नही होती है | लेकिन, कुछ ओपन एंडेड फंड्स में लॉक इन पीरियड रहता है जैसे कि ELSS स्कीम। लॉक इन पीरियड के दौरान आप अपने यूनिट्स को रिडीम नहीं कर सकते.

म्यूचुअल फंडों की ओपन एंडेड फंड्स की श्रेणी निम्न प्रकार है-

लिक्विड फंड (Liquid Fund)- लिक्विड फंड उन निवेशको के लिए निवेश का अच्छा विकल्प हो सकता है, जो कम समय के लिए निवेश करना चाहते है | इस योजना के तहत उन्हें कम समय में बैंक खाते के मुकाबले अधिक ब्याज मिल सकता है और आवश्यकता पड़ने पर अपनी पूंजी को नकदी में बदल सकें |

लिक्विड फंड के पोर्टफोलियो का अधिकतर हिस्सा डेब्ट इंस्ट्रूमेंट की शार्ट मैच्यूरिटी में निवेश किया जाता है | इस फंड को शार्ट टर्म फंड यानि अल्प अवधि फंड भी कह सकते हैं |

ऋण फंड (Debt Fund)- डेब्ट फंड में अधिकतर निवेश डिवेंचर, गवर्नमेंट सिक्योरिटीज, कॉमर्शियल पेपर, कॉल मनी इत्यादि में किया जाता है | इस फंड में इक्विटी फंड के मुकाबले कम रिटर्न मिल सकता है लेकिन इस फंड में रिस्क कम होने के साथ-साथ एक निश्चित रिटर्न देने में भी सफल हो सकते है |

यदि निवेश से कमाई रु.10,000 से अधिक है तो निवेशक कर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है।

इक्विटी फंड (Equity Fund)- इक्विटी फंड को ग्रोथ फंड भी कहते है | इस फंड में रिटर्न दुसरे अन्य फंड के तुलना में अधिक मिलता है | अधिक रिटर्न के साथ-साथ इस फंड में रिस्क यानि जोखिम भी ज्यादा होता है | यह फंड इक्विटी यानि शेयर बाज़ार से जुड़े होने के कारण इसकी पूंजी का एक बड़ा हिस्सा इक्विटी में निवेशित होता है |

इस फंड का बड़ा हिस्सा शेयर बाजार से जुड़ा होता है, इसलिए स्टॉक मार्किट में जब बढ़त देखने को मिलती है तो इस फंड का औसत रिटर्न भी काफी अच्छा होता है |इक्विटी फंड से मिलने वाला रिटर्न अस्थिर होता है, क्योंकि इस फंड पर ‘शेयर बाज़ार’ की हलचल का सीधा असर होता है |

इक्विटी फंड के श्रेणी में इंडेक्स फंड (INDEX FUND), ईएलएसएस फंड (ELSS FUND), डाइवर्सिफाइड फंड (DIVERSIFIED FUND), मिड कैप स्माल कैप फंड (MID CAP SMALL CAP FUND) इत्यादि आते है |

बैलेंस्ड फंड (Balanced Fund) – बैलेंस्ड फंड यानि संतुलित फंड निवेशकों को नियमित अंतराल पर विकास और आय का आनंद लेने के लिए अनुमति प्रदान करता है। यह योजना संतुलित फंड में इक्विटी के साथ डेब्ट अथवा बांड और सरकारी प्रतिभूतियों में भी निवेश किया जाता है |

इस फंड में इस बात का खास ध्यान दिया जाता है कि दोनों (इक्विटी और डेब्ट) में निवेश संतुलित हो | इक्विटी और डेब्ट का अनुपात कितना है इसके बारे में फंड के ऑफर लेटर से जाना जा सकता है | संतुलित फंड होने के कारण इसमें निवेशक की बाजार से जुडा रिस्क काफी कम हो जाता है |

2. क्लोज एंडेड फंड (CLOSE ENDED FUNDS) :     क्लोज एंडेड फंड में निवेश की एक निश्चित समय-सीम होती है | इस फंड में निवेशक तभी निवेश कर सकता है, जब इसका न्यू फण्ड ऑफर (NFO) मार्किट में उपलब्ध हो | यानि जब NFO जारी किया जाता है तभी इसमें निवेश किया जाता है |

ऑफर की समाप्ति के बाद इसमें निवेश नही किया जा सकता है | लेकिन ‘सेबी’ के गाइड लाइन के अनुसार इस फंड में निवेशकों के लिए एग्जिट का रास्ता भी है | यानि पैसे की आवश्यकता होने पर निवेशक इस स्कीम से अपना पैसा निकाल सकते है | यह फंड लंबे समय निवेश के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकता है |

एफआरडीआई विधेयक : आपकी जमा राशि कभी सुरक्षित नहीं रही

क्लोज्ड एंडेड योजनाओं में मुख्य रूप से दो तरह के  फंड होते हैं-

कैपिटल प्रोटेक्शन फंड (Capital Protection )- यदि आप रिस्क फ्री निवेश करना चाहते हैं और अच्छा फायदा लेना चाहते हैं तो कैपिटल प्रोटेक्शन फंड आप के लिए अच्छा विकल्प है। पूंजी संरक्षण फंड निश्चित आय सुरक्षा के अंदर निवेश की जाती है और यही छोटे इक्विटी में भी निवेश की जाती है और छोटी बड़ी सभी निवेश होती है।

इसकी समय-सीमा होने के कारण इस में रिस्क बिलकुल भी नहीं होता है। इस स्कीम के तहत पूंजी का ज्यादातर हिस्सा फिक्स्ड इनकम और सिक्योरिटीज में निवेश के साथ-साथ एक छोटा सा हिस्सा इक्विटी में भी निवेश किया जाता है | इस स्कीम में पूंजी को सुरक्षित रखकर लाभ कमाया जाता है |

फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान (Fixed Maturity Plan)- फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान में मैच्योरिटी की समय-सीमा तय रहती है | इस स्कीम के तहत ऐसे डेब्ट साधनों में निवेश किया जाता है जो फंड की तय सीमा के साथ मैच्योर होते हों | इस प्रकार के फंड्स में भी चार्जेज कम रहते हैं क्योंकि फण्ड मेनेजर को पहले से निर्धारित इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करना होता है और फण्ड प्रबंधन के लिए अधिक कुछ करने की संभावना ही नहीं बचती।

डुमरी : घायल होने के बावजूद मैट्रिक में अव्वल आई छात्रा, संस्था ने दिया कंप्यूटर सेट

NewsCode Jharkhand | 22 June, 2018 7:12 PM
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सड़क हादसे में हुई थी घायल, नहीं मानी पढ़ाई में हार

डुमरी (गिरिडीह)। गरीबी, शारीरिक पीड़ा को दरकिनार कर एकाग्रता से पढ़ाई कर अव्वल अंक लाने वाली छात्रा बबिता कुमारी को सरिया के श्री रामकृष्ण आश्रम संस्था ने कंप्यूटर सेट देकर सम्मानित किया है। भरखर स्थित पंचायत भवन में इसको लेकर एक कार्यक्रम का आयोजन कर छात्रा की हौसला अफ़जाई की गई।

इस बाबत संस्था के ट्रस्टी रमेश चंद्र डागा ने कहा कि इस गरीब छात्रा ने शारीरिक पीड़ा के बावजूद अच्छा अंक लाकर परिवार, विद्यालय समेत पूरे भरखर का नाम रौशन किया है। संस्था ऐसे गरीब व मेधावी छात्र-छात्राओं की खोज कर उन्हें एजुकेशन मैटेरियल्स मुहैया कराता है। ताकि मेधावी और जरूरत मंद बच्चे आगे बढ़ते रहे। इसी कड़ी में बबिता को कंप्यूटर सेट दिया गया है और बबिता के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

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गौरतलब है कि पिछले 21 जुलाई को बबिता डुमरी मोड़ स्थित कोचिंग सेंटर से पढ़ाई कर अपने साईकल से लौटने के क्रम में जीटी रोड के सिमराडीह में सड़क पास करने के दौरान एक ट्रेलर वाहन की चपेट में आकर बुरी तरह घायल हो गई थी।

जिले में मुसीबत में पड़े लोगों का मददगार माने जाने वाला प्रवासी ग्रुप व अन्य संस्थाओं के माध्यम से उस वक़्त लगभग एक लाख रुपये का सहयोग बबिता के इलाज में की गई थी। लेकिन इलाज़ के बावजूद बबिता चलने फिरने में असमर्थ होगई थी। इसके बाद भी उसके हौसले में कमी नहीं आई और उसने मैट्रिक परीक्षा देने की ठान ली। और बबिता ने कड़ी मेहनत के बल परीक्षा में प्रथम स्थान हासिल किया।

यहां इस कार्यक्रम में  मुखिया दशरथ महतो, प्रवासी ग्रुप एडमिन सिकन्दर अली, शिक्षक कैलाश महतो, हाफ़िज़ अंसारी, यसवंत रजक, गौरव डागा, राम सेवक सिंह, दिनेश सिंह, संदीप सिंह, जितेंद्र साव समेत दर्जनों ग्रामीण मौजूद थे।

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देवघर : श्रावणी मेला की तैयारी को लेकर डीआरएम ने जसीडीह स्टेशन का किया दौरा

NewsCode Jharkhand | 22 June, 2018 9:55 PM
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देवघर। विश्‍व प्र‍सिद्ध श्रावणी मेला तैयारी को लेकर आसनसोल रेलवे डिवीजन के डीआरएम पीके मिश्रा सहित अन्‍य अधिकारियों ने जसीडीह स्टेशन का दौरा किया। दौरा के दौरान डीआरएम ने मेला शुरु होने से पहले स्‍टेशन का सौन्‍दर्यीकरण व यात्री सुविधाओं को पूरा कर लेने का आदेश रेलवे अधिकारियों को दिया।

गौरतलब है कि स्‍टेशन सौन्‍दर्यीकरण का काम पहले से चल रहा है तथा मेला आरंभ होने से पहले पूरा कर लिया जाना है। डीआरएम ने पत्रकारों से कहा कि इस दौरा का मकसद मकसद जसीडीह रेलवे स्‍टेशन में श्रावणी मेला को लेकर चल रहे कार्यों का जायजा लेना है।

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उन्‍होंने कहा कि सौन्‍दर्यीकरण का काम मेला शुरु होने से पहले शुरु हुआ था जिसे बहुत जल्‍द पूरा कर लिया जाएगा। जो काम बांकी रह गया है उसे जल्‍द से जल्‍द पूरा करने का निर्देश रेलवे अधिकारियों को दिया गया है। कुछ कार्यों के मेला से पहले पूरा होने पर उन्‍होंने संतोष व्‍यक्‍त किया। डीआरएम ने कहा कि यात्रियों की सुविधा के लिए जसीडीह स्टेशन में एलईडी हाई मास्ट टावर तीन लगाये गए हैं।

फुटओवर ब्रिज रैंप का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है, इससे मेला में आनेवले वयस्‍क लोगों को सुविधा होगी। स्टेशन के बाहरी परिसर का समतलीकरण किया जा रहा है। यह जगह पहले काफी संकरी थी लेकिन समतलीकरण के बादखुला विशाल परिसर यात्रियों को मिलेगा। एक पड़ाव एरिया बनाया जाएगा जिसमें बरसात के समय लगभग 2500 लोग बैठ सकेंगे और आराम कर पाएंगे।

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कोडरमा : खदान में मजदूर के सिर पर गिरा पत्थर का टुकड़ा, मौके पर मौत

NewsCode Jharkhand | 22 June, 2018 9:22 PM
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कोडरमा। जिले के नवलशाही थाना क्षेत्र अन्तर्गत बच्छेडीह पंचायत के जमडीहा मौजा में संचालित पत्थर खदान में कार्यरत मजदूर के सिर पर पत्थर का टुकड़ा धंसकर गिरने से मौके पर उसकी मौत हो गई, जबकि एक अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गया। मृतक की पहचान पवन दास (24 वर्ष) व घायल की पहचान अनिल कुमार दास (28 वर्ष) के रूप में की गई है। दोनों थानाक्षेत्र के जमडीहा के रहनें वाले हैं।

कोडरमा : विकास योजनाओं की समीक्षा, उपायुक्त ने दिए कई निर्देश

घटना शुक्रवार की सुबह सात बजे की बताई गई है। जानकारी अनुसार दोनों मजदूर सुबह खदान में पहुंच कर ड्रिल किये गये होल में ब्लास्टिंग के लिए मशाला भरने का कार्य कर रहे थे। इसी दौरान ऊपर करीब पैंतीस से चालीस फिट की ऊँचाई से एक बड़ा पत्थर का हिस्सा सीधा पवन के सिर पर गिर गया जिससे सिर पूरी तरह जख्मी हो गया, जिससे पवन ने मौके पर दम तोड़ दिया, जबकि अनिल गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

घटना के बाद नवलशाही थाना प्रभारी मो शाहीद रजा व एसआई राम कृत प्रसाद मौके पर पहुंच कर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए कोडरमा भेज दिया। तत्पश्चात पुलिस मामले की जांच में जुट गयी।

नहीं था सेफटी का इंतजाम

खदान में कार्यरत मजदरों के सुरक्षा और बचाव के उपाय के इंतजाम नहीं थे। अशोक कुमार गुप्ता और सुरेश चन्द्र साव की उक्त खदान में कार्यरत मजदूरों को न तो खदान संचालक द्वारा सेफटी किट दिये गये थे और ना हीं वहां फस्ट एड की व्यवस्था थी। खदान में बेतरतीब तरीके से कार्य करवाये जा रहे थे और सेफटी नियमों का पूरी तरह उल्लंघन किया जा रहा था। अधिकांश संचालित पत्थर खदानों में यही स्थिति है। जब कोई दुर्घटना होती है तो पत्थर खदान के मालिक या संचालक लाश की सौदेबाजी में जुट जाते हैं और पुलिस को मेल में लेकर मामले को रफा दफा करवा देते है।

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