वेंकैया नायडू ने खारिज किया चीफ जस्टिस के खिलाफ विपक्ष का महाभियोग प्रस्ताव

NewsCode | 23 April, 2018 11:55 AM

वेंकैया नायडू ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि चीफ जस्टिस के खिलाफ लाया गया ये महाभियोग ना ही उचित है और ना ही अपेक्षित है।

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नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू ने प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों के महाभियोग के नोटिस को सोमवार को खारिज कर दिया। कांग्रेस की अगुवाई में 7 विपक्षी दलों ने राज्यसभा सभापति के सामने ये प्रस्ताव पेश किया था, लेकिन कानूनी सलाह के बाद वेंकैया नायडू ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।

वेंकैया नायडू ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि चीफ जस्टिस के खिलाफ लाया गया ये महाभियोग ना ही उचित है और ना ही अपेक्षित है। इस प्रकार का प्रस्ताव लाते हुए हर पहलू को ध्यान में रखना चाहिए। इस खत पर सभी कानूनी सलाह लेने के बाद ही मैं इस प्रस्ताव को खारिज करता हूं।

उपराष्ट्रपति के इस फैसले के बाद सभी कांग्रेस नेताओं को इसपर बयानबाजी करने से रोका गया है। कांग्रेस का कहना है कि वो इस फैसले के लिए पहले से तैयार थी, उसके लिए कोई झटका नहीं है।

गौरतलब है कि महाभियोग के प्रस्ताव के बाद से ही सभी को वेंकैया नायडू के फैसले का इंतजार था। उन्होंने इसको लेकर अटॉर्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल समेत संविधान विशेषज्ञों और कानूनविदों के साथ प्रस्ताव पर विचार-विमर्श करने के बाद ये फैसला लिया। राज्यसभा सचिवालय के सूत्रों के मुताबिक नायडू ने याचिका को स्वीकारने अथवा ठुकराने को लेकर संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप, पूर्व विधि सचिव पी. के. मल्होत्रा सहित अन्य विशेषज्ञों से कानूनी राय ली।

बता दें कि शुक्रवार को कांग्रेस सहित 7 विपक्षी दलों ने राज्यसभा के सभापति नायडू को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ कदाचार का आरोप लगाते हुए उन्हें पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए नोटिस दिया था।

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महाभियोग पर कांग्रेस-बीजेपी में आरोप-प्रत्यारोप

मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ प्रस्ताव लाने के कारण कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हो गया है। केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने दीपक मिश्रा पर महाभियोग चलाने की मांग को लेकर राज्यसभा के सभापति के समक्ष नोटिस लाने को महामूर्खता बताया। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रस्ताव लाना कांग्रेस की महामूर्खता है, जैसा कि कहते हैं, ‘विनाश काले विपरीत बुद्धि’, उसी तरह यह कांग्रेस पार्टी की ‘विनाश काले पप्पू बुद्धि’ है।

न्यायपालिका के सर्वोच्च पद के अपमान का आरोप

कांग्रेस ने कथित कदाचार के आरोपों से मुक्त होने तक प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के न्यायिक और प्रशासनिक कामकाज से खुद को अलग कर लेने की मांग की है। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा है कि बीजेपी प्रधान न्यायाधीश का बचाव कर न्यायपालिका के सर्वोच्च पद का अपमान कर रही है और इस मामले का राजनीतिकरण कर रही है।

इन पांच आधारों पर लाया गया था महाभियोग

कांग्रेस पार्टी ने महाभियोग प्रस्ताव लाने के पीछे 5 वजह बताए थे। कपिल सिब्बल ने मीडिया से बात करते हुए कहा था कि न्यायपालिका और लोकंतत्र की रक्षा के लिए ये आवश्यक था।

1. मुख्य न्यायाधीश के पद के अनुरुप आचरण ना होना, प्रसाद एजुकेशन ट्रस्ट में फायदा उठाने का आरोप। इसमें मुख्य न्यायाधीश का नाम आने के बाद सघन जांच की जरूरत।

2. प्रसाद ऐजुकेशन ट्रस्ट का सामना जब CJI के सामने आया तो उन्होंने CJI ने न्यायिक और प्रशासनिक प्रक्रिया को किनारे किया।

3. बैक डेटिंग का आरोप।

4. जमीन का अधिग्रहण करना, फर्जी एफिडेविट लगाना और सुप्रीम कोर्ट जज बनने के बाद 2013 में जमीन को सरेंडर करना।

5. कई संवेदनशील मामलों को चुनिंदा बेंच को देना।

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दिल्ली में 14,000 से ज्यादा पेड़ों की कटाई के विरोध में ‘आप’ का चिपका आंदोलन

NewsCode | 24 June, 2018 7:54 PM
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नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पुनर्विकास के नाम पर 14 हजार से ज्यादा पेड़ काटने का विरोध तेज हो गया है। आम लोगों के साथ अब आम आदमी पार्टी भी इसके खिलाफ उतर आई है। आज रविवार को सरोजिनी नगर में पार्टी ने एक बड़े चिपको आंदोलन का आयोजन किया। सोशल मीडिया में #DelhiChipkoAndolan लगातार ट्रेंड कर रहा है।

दिल्ली सरकार में ‘आप’ के मंत्री इमरान हुसैन ने कई विधायकों, पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों के साथ मिलकर पेड़ों से चिपककर विरोध-प्रदर्शन किया। लोग हाथ से लिखे पोस्टर के साथ पेड़ों को बचाने की अपील करने के लिए वहां पहुंचे थे।

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन ने केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप पुरी से इस प्रोजेक्ट को किसी दूसरे जगह शिफ्ट करने की अपील की।

वहीं, पार्टी के विधायक सौरभ भारद्वाज ने कहा कि, “जब सारी जनता , दिल्ली सरकार और केन्द्र सरकार पेड़ों के बारे में इतनी चिंतित है तो केन्द्र सरकार प्रोजेक्ट बंद कर दे। अब कोई पेड़ ना काटा जाए”

बता दें कि सरोजिनी नगर में शनिवार को भी पेड़ काटने के विरोध में कुछ स्थानीय लोगों और युवाओं ने पेड़ से चिपककर उसे बचाने की अपील की।उनका कहना था कि सुंदर नगर में पेड़ कट चुके हैं। अब सरोजिनी नगर व आरकेपुरम में इन्हें काटा जाना है। हम इसका विरोध कर रहे है। सभी ने कहा कि प्रदूषण मुक्त दिल्ली का नारा पेड़ काटने से पूरा नहीं होगा।

क्या है पूरा मामला ?

दरअसल, केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने दक्षिणी दिल्ली में स्थित सात सरकारी आवसीय कॉलोनियों के पुनर्विकास का प्रस्ताव बनाया था। केंद्र सरकार की कैबिनेट इस पुनर्विकास प्लान को वर्ष 2016 में ही मंजूरी दे चुकी है। इसके तहत ही दक्षिणी दिल्ली में स्थित किदवई नगर में 1123, नेताजी नगर में 2294, नैरोजी नगर में 1454, मोहम्मदपुर में 363 और सरोजनी नगर में 11 हजार से अधिक पेड़ काटे जाने हैं। नैरोजी में पेड़ों की कटाई भी शुरू हो चुकी है। अब इन पेड़ों की कटाई का विरोध शुरू हो गया है। हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि वह जितने पेड़ काटेंगे उससे दोगुना पौधे लगाएं जाएंगे। पूरा पुनर्विकास प्लान ग्रीन प्रोजेक्ट होगा।

1973 में पहली बार हुआ था चिपको आंदोलन

चिपको आंदोलन की शुरुआत उत्तराखंड के चमोली में वर्ष 1973 में हुई थी। तब ग्रामीण किसानों ने राज्य के वन ठेकेदारों द्वारा वनों और जंगलों को काटने के विरोध में चिपको आन्दोलन चलाया था। चिपको आंदोलन का सीधे-सीधे अर्थ है किसी चीज से चिपककर उसकी रक्षा करना। जब यह आंदोलन वहां पर चल रहा था, तब वनों की कटाई को रोकने के लिए गांव के पुरुष और महिलाएं पेड़ों से लिपट जाती थीं और ठेकेदारों को पेड़ नहीं काटने देती थी। इस आंदोलन में महिलाओं की संख्या अधिक होती थी।

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इस आंदोलन को चंडीप्रसाद भट्ट, गौरा देवी और ग्रामीणों ने मिलकर अंजाम दिया था। बाद में प्रसिद्ध पर्यावरण प्रेमी सुन्दरलाल बहुगुणा ने आगे बढ़ाया। आंदोलन को सम्यक जीविका पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है। जिस समय यह आन्दोलन चल रहा था, उस समय केंद्र की राजनीति में भी पर्यावरण एक एजेंडा बन गया था। इस आंदोलन को देखते हुए तत्कालीन केंद्र सरकार ने वन संरक्षण अधिनियम बनाया।

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धनबाद : झरिया के अस्तित्‍व को बचाने के लिए फिर होगा आंदोलन

NewsCode Jharkhand | 24 June, 2018 7:48 PM
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झरिया को उजाडने की सरकारी मंसूबे को जनता कामयाब नहीं होने देगी

धनबाद (झरिया)। झरिया के अस्तित्व को बचाने के लिए एक बार फिर आंदोलन होगा। इसबार आंदोलन की मुख्‍य भूमिका में पूर्व मंत्री समरेश सिंह रहेंगे। आंदोलन की रुपरेखा तैयार करने के बावत आज झरिया प्रेस क्लब में समरेश सिंह की अगुवाई में बैठक हुई जिसमें पूर्व में हो चुके झरिया आंदोलन से जुड़े कई लोगों ने भाग लिया।

बैठक में निर्णय लिया गया कि झरिया को बचाने के लिए यह आखिरी आंदोलन होगा। इस आंदोलन में झरिया की जनता पूरी ईमानदारी से लड़ेगी।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि बंद आर एस पी कॉलेज को उसी जगह चालू किया जाएगा जहां वह है। इसके लिए कोर्ट जाना पड़े या कहीं और लेकिन बंद कॉलेज को खुलवाया जाएगा। बैठक में भाग ले रह लोगों ने एकसुर से कहा कि केंद्र व राज्य सरकार झरिया के अस्तित्व को खत्म करना चाहती है जिसे यहां की जनता सफल नहीं होने देगी।

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गिरीडीह : सुरीली आवाज से जिले के साथ गांव का नाम रौशन करना चाहती है नाजिया

NewsCode Jharkhand | 24 June, 2018 7:36 PM
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उदित नारायण के साथ मंच साझा कर चुकी है

गिरीडीह। अपनी सुरीली आवाज से संगीत की दुनिया में धूम मचानेवाली नाजिया परवीन अपने गृह जिले गिरीडीह व गांव का नाम रौशन कर रही है। वह इस जिले के पिहरा गांव की रहनेवाली है। मशहूर बॉलीवुड गायक उदित नारायण के साथ वह मंच साझा कर चुकी है।

हाल ही में उनकी मेरी आवाज ही मेरी पहचान है एलबम रिलीज हुई है। एलबम में वह पर्दे पर गाती नजर आती है। आवाज में तो वाकई जादू है। ईद के मौके पर अपने घर पहुंची नाजिया ने बताया कि झारखंड की नक्सली घटना पर चिलखारी एक दर्द नामक सिनेमा बन रही है जिसमें उन्‍हें उदित नारायण के साथ गाने का मौका मिला।

गिरीडीह : युवती को लेकर युवक फरार, परिजनों ने थाने में लगाई गुहार

नाजिया इससे पहले तू लौट के आजा एलबम में एक गीत को आवाज दे चुकी है। नाजिया के पिता मोहम्‍मद मोइनुद्दीन पेशे से एक किसान हैं व मां जैनब खातून आंगनबाड़ी सेविका है।

 गिरीडीह : सुरीली आवाज से जिले के साथ गांव का नाम रौशन करना चाहती है नाजिया

मैट्रिक तक की पढ़ाई कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय गावां से पूरी करने के बाद नाजिया रांची में रहकर एमए करने के साथ-साथ संगीत भी सीख रही है। कस्‍तूरबा विद्यालय में पढ़ने के दौरान नाजिया स्‍कूल में आयोजित गीत-संगीत व नृत्‍य प्रतियोगिता में भाग लेती थी और दर्शकों का वाहवाही बटोरती थी।

नाजिया का सपना अपनी आवाज के जरिये पिछडे जिले में शुमार गिरीडीह तथा अपने गांव पिहरा गावां को पहचान दिलाना है।

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