टुण्डी : नि:शुल्क स्वास्थ्य जाँच शिविर का आयोजन, ग्रामीणों ने की सराहना

NewsCode Jharkhand | 17 May, 2018 5:35 PM

टुण्डी : नि:शुल्क स्वास्थ्य जाँच शिविर का आयोजन, ग्रामीणों ने की सराहना

टुण्डी (धनबाद)। उत्क्रमित उच्च विद्यालय मैयरानवाटांड़ में गुरुवार को तरुण हिन्दू एवं भारत सेवाश्रम संघ की ओर से नि:शुल्क स्वास्थ्य जाँच शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें धनबाद के जाने-माने स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर नीद माधव दास, न्यूरो सर्जन डॉ. नरेश प्रसाद, डॉ. एस के घोषाल, डॉ. शीतल विश्वास ने रोगियों की जाँच कर दवाई दी गई।

शिविर में मैयरानवाटांड़, कांसजोर भोक्ताटोला, बोहड़ाडंगाल, दुम्मा, रजामडीह कुरकूटांड़, मकराटांड़, मोहलीडीह, बागजबडा़ आदि गाँव से भारी संख्या में महिला पुरुष पहुंचे और स्वास्थ्य जांच कराई।

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ग्रामीण क्षेत्र में जाँच शिविर लगाने की लोगों ने सराहना करते हुए कहा कि हमारे क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधा की बहुत कमी है, मैयरानवाटांड़ में एक उप स्वास्थ्य केंद्र है लेकिन उसमें कभी डॉक्टर आते नही है, जिस कारण किसी के बीमार पडने पर निजी स्तर से ही ईलाज कराना पडता है।

इस तरह के शिविर के आयोजन से हम ग्रामीणों को काफी सुविधा मिलेगी। मौके पर सुजय रक्षित, प्रज्वल भट्टाचार्य, एना दास, पंकज महतो, नंदलाल साव आदि उपस्थित थे।

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कोडरमा : इस कारण से भी युवा हो रहे हैं एड्स के शिकार…

Kumar Ramesham | 24 May, 2018 7:09 PM

कोडरमा : इस कारण से भी युवा हो रहे हैं एड्स के शिकार…

हर महीने 12-15 नये एड्स रोगियों की हो रही पहचान

कोडरमा। जिले के कोडरमा सतगावाँ मरकच्चो जयनगर, चंदवारा, डोमचाँच समेत विभिन्न प्रखण्ड़ों और आस-पास के ग्रामीण इलाकों से रोजी-रोटी कमाने की खातिर मुम्बई, कोलकाता, दिल्ली, चेन्नई, बेगलुरू, गोवा समेत अन्य बड़े महानगरों में जाने वाले हजारों की संख्या में युवा वहाँ की चकाचौंध से जागरूकता के अभाव में प्रभावित होकर एड्स जैसी बिमारी के लगातार शिकार हो रहे हैं।

जनवरी से मई 2018 तक 50 रोगी चिन्हित

घर वापसी के दौरान संक्रमित युवा अपने परिजनों को भी इससे प्रभावित कर रहे हैं। कोडरमा जिले के विभिन्न इलाकों से जिला अस्पताल के परिसर में संचालित आईसीटीसी सेंटर में जांच के लिए हर दिन पहुचाते है।

हर महीने लगभग 12 से 15 नये रोगी चिन्हित हो रहे हैं। जनवरी से मई 2018 तक लगभग 50 रोगियों की पहचान की जा चुकी है।

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2008 से यहाँ आईसीटीसी सेंटर संचालित है। अभी तक जिले के विभिन्न इलाकों समेत झारखण्ड की सीमा से सटे बिहार के नवादा जिले के लगभग 700 ऐसे रोगी चिन्हित किये गये है, जिन्हें यहाँ के एआरटी सेंटर से हर महिने एड्स रोग संबंधी जीवन रक्षक दवाईयां निःशुल्क दी जाती है।

कोडरमा : इस कारण से भी युवा हो रहे हैं एड्स के शिकार...

बाहर कमाने जाने वाले युवा एड्स से हो रहे हैं संकर्मित- सिविल सर्जन

सेंटर के फार्मासिस्ट सतीश प्रसाद ने जानकारी दी और कहा कि नेशनल एड्स कंट्रोल ओरगेनाईजेशन (नर्को) के द्वारा यह सुविधा प्रदान की जा रही है।

इस मामले में पूछे जाने पर सिविल सर्जन योगेन्द्र महतो ने बताया कि बाहर जाने वाले युवा संक्रमित होकर इस बिमारी को यहाँ ला रहे हैं।

उन्होंने बताया कि इसके लिए जागरूकता अभियान और संध्या चौपाल जैसे कई कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं। उन्होंने इसके पृष्ठ भूमि में एक अन्य अहम जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान समय में युवाओं में देर से विवाह करने की पनप चुकी मानसिकता के कारण भी वे इसका शिकार हो रहे हैं। यह एक सामाजिक सोच बन चुकी है कि आत्मनिर्भर होने के बाद ही विवाह करेंगे इसमें बदलाव की जरूरत है।

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देवघर : मीजल्स-रूबेला को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए जिला प्रशासन कृतसंकल्पि‍त

NewsCode Jharkhand | 24 May, 2018 4:32 PM

देवघर : मीजल्स-रूबेला को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए जिला प्रशासन कृतसंकल्पि‍त

टास्‍क फोर्स के साथ उपायुक्‍त ने की बैठक

देवघर। मीजल्‍स-रूबेला को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए जिला प्रशासन कृतसंकल्पित है। इसे आपसी समन्वय एवं प्रभावी कार्य योजना के माध्यम से पूरी तरह समाप्त कर ली जाएगी। इन्हीं उद्देश्यों की पूर्ति के लिए जिला स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक उपायुक्त राहुल कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में समाहरणालय सभागार में आयोजित की गई।

उपायुक्‍त ने कहा कि इस अभियान की सफलता के लिए एएनएम, सहिया, आंगनबाड़ी केन्द्रों की सेविकाओं को बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेना होगा। साथ ही पंचायत प्रतिनिधियों का भी सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि टोलों एवं मुहल्लों के स्तर पर उनका प्रभाव सबसे महत्वपूर्ण होता है।

उन्होंने सभी पंचायत प्रतिनिधियों से अपील की है कि वे इस अभियान को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन को महत्वपूर्ण सहयोग दें। उन्होंने निजी विद्यालय के प्रधानाध्यापक एवं उन विद्यालय के बच्चों के अभिभावकों से भी उपायुक्त ने अपील की है कि वे अपने बच्चों को मीजल्‍स-रूबेला के टीकाकरण अवश्य कराएँ, क्योंकि जब तक सभी स्तर से टीकाकरण का कार्यक्रम सफल नहीं होगा इसका उन्मूलन संभव नहीं है।

उन्होंने स्पष्ट एवं प्रभावकारी जवाबदेही सौंपने के उद्देश्य से प्रत्येक आंगनबाड़ी केन्द्रों एवं स्कूलों से एक-एक एएनएम, सहिया, सहायिका को जोड़ने हेतु माईक्रोप्लान तैयार करने के लिए सिविल सर्जन को निदेशित किया।

उन्होंने सभी केन्द्रों पर दवाई एवं अन्य सामग्री ससमय पहुंच जाए। इसे सुनिश्चित करने का निदेश स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को दिया। उन्होंने कहा कि देश के 21 राज्यों में यह समाप्त हो चुका है और शीघ्र ही अपने प्रयासों से इसे इस राज्य से भी समाप्त किया जा सकेगा।

उन्होंने लोगों से इसके प्रति जन-जागरूकता लाने के उद्देश्य से व्यापक प्रचार-प्रसार करने की जिम्मेवारी जिला जनसम्पर्क पदाधिकारी को सौंपी।

उन्होंने कहा मीजल्‍स रूबेला वायरस के दुष्प्रभावों एवं इससे बचने के उपायों का व्यापक प्रचार-प्रसार जिले को उपलब्ध एलईडी वाहन से कराएं। इसके लिए पंचायतों में भी जागरूकता कार्यक्रम चलाने का निदेश अधिकारियों को दिया। अभियान हेतु देवघर एवं गिरीडीह जिला के प्रभारी-सह-टीम लीडर डॉ. अमरेन्द्र ने पावर प्वाइंट के माध्यम से इस मीजल्‍स-रूबेला बीमारी के लक्षणों, इससे बचने के उपाय एवं अभियान के संचालन हेतु माईक्रोप्लॉन के बारे में विस्तार से चर्चा की।

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उन्होंने जानकारी देते हुए कहा कि इसे 2020 तक पूरी तरह से समाप्त कर लिया जाना है। अभियान के तकनीकी पहलुओं की जानकारी देते हुए कहा कि टीकाकरण का कार्य एक गांव अथवा एक स्कूल में एक ही दिन में समाप्त कर ली जानी है। दूसरे दिन के लिए शेष नहीं छोड़ना है।

बैठक में सिविल सर्जन डॉ. कृष्ण कुमार, जिला जनसम्पर्क पदाधिकारी रवि कुमार, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी सुमन सिंह, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, जिला यक्ष्मा पदाधिकारी, जिला के विभिन्न चिकित्सक एवं अन्य उपस्थित थे।

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रांची : रिम्स- मरीज पर्ची कटाकर जांच नहीं कराये, तो पैसा सीधे खाते में होगा वापस

NewsCode Jharkhand | 24 May, 2018 3:48 PM

रांची : रिम्स- मरीज पर्ची कटाकर जांच नहीं कराये, तो पैसा सीधे खाते में होगा वापस

रांची। रिम्स के कैश काउंटर से होनेवाली किसी भी गड़बड़ी को रोकने के लिए अब मरीजों की जांच के बाद रिटर्न होनेवाला पैसा सीधे मरीजों के खाते में भेजा जाएगा। अगर मरीज जांच का पुर्जा कटाते हैं और किसी कारण से उनकी जांच नहीं हो पाती है, तो वापसी का पैसा उनके खाते में ही भेजा जाएगा।

रिम्स प्रबंधन ने यह कदम कैश काउंटर में पिछले कई सालों से हो रही गड़बड़ी को रोकने के लिए उठाया है। रिम्स के कैश काउंटर में पिछले काई सालों में लाखों रुपए का कैश घोटाला हुआ है, जिसकी अब जांच चल रही है।

कैसे हो रही थी गड़बड़ी

रिम्स के कैश काउंटर का संचालन कर रही कंपनी इंफोनेट लिंक प्रालि पर 99.42 लाख की हेराफेरी के आरोप लगे हैं। काउंटर संचालन की जिम्मेवारी कंपनी को तत्कालीन रिम्स निदेशक ने 12 जनवरी 2006 को दी थी।

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रिम्स में किसी भी मरीज (बीपीएल छोड़कर) को पैथोलॉजी या रेडियोलॉजी टेस्ट कराने के लिए कैश काउंटर से पर्ची कटानी पड़ती है। संबंधित विभाग कैश मेमो लेकर मरीज की जांच करता है। जांच नहीं होने पर पैसा वापस करना पड़ता है। इसी में खेल हो रहा था।

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