मजदूर दिवस विशेष : 151 साल पहले मजदूरों को 14 घंटे करना पड़ता था काम

NewsCode Jharkhand | 30 April, 2018 3:18 PM

मजदूर दिवस विशेष : 151 साल पहले मजदूरों को 14 घंटे करना पड़ता था काम

पूरे विश्व में “1 मई” को अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस  मनाया जाता है। किसी भी देश की तरक्की उस देश के किसानों और कामगारों पर निर्भर होती है। एक मकान को खड़ा करने और सहारा देने के लिये जिस तरह मजबूत “नींव” की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, ठीक वैसे ही किसी समाज, देश, उद्योग, संस्था, व्यवसाय को खड़ा करने के लिये कामगारों (कर्मचारियों) की विशेष भूमिका होती है।

‘अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस’ लाखों मजदूरों के परिश्रम, दृढ़ निश्चय और निष्ठा का दिवस है। यह दिवस उस श्रमिक वर्ग को समर्पित है जो अपना खून-पसीना बहा कर विश्व के विभिन्न हिस्सों में दिन रात काम करके उस देश की प्रगति में अपना अमूल्य योगदान देते हैं। इतिहास के पन्ने पलटने पर मजदूर दिवस मनाने के पीछे की कहानी जानने को मिलती है।

एक घटना ने लोगों को झकझोरा

वर्ष 1886 में 4 मई के दिन शिकागो शहर के हेमार्केट चौक पर मजदूरों का जमावड़ा लगा हुआ था। मजदूरों नें उस समय आम हड़ताल की हुई थी। हड़ताल का मुख्य कारण मजदूरों से बेहिसाब काम कराना था। मजदूर चाहते थे कि उनसे दिन भर में आठ घंटे से अधिक काम न कराया जाए।

मौके पर कोई अप्रिय घटना ना हो जाये इसलिये वहाँ पर स्थानीय पुलिस भी मौजूद थी। तभी अचानक किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा भीड़ पर एक बम फेंका गया। इस घटना से वहाँ मौजूद शिकागो पुलिस ने मजदूरों की भीड़ को तितर-बितर करने के लिये एक्शन लिया और भीड़ पर फायरिंग शुरू कर दी। इस घटना में कुछ प्रदर्शनकारियों की मौत हो गयी। मजदूर वर्ग की समस्या से जुड़ी इस घटना नें समग्र विश्व का ध्यान अपनी और खींचा था।

हेमार्केट नरसंहार की याद में मजदूर दिवस

इसके बाद 1889 में अंतर्राष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन  में ऐलान किया गया कि हेमार्केट नरसंहार में मारे गये निर्दोष लोगों की याद में 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाएगा और इस दिन सभी कामगारों व श्रमिकों का अवकाश रहेगा। पूर्व काल में मजदूर औरकामगार वर्ग की स्थिति अत्यंत दयनीय थी। मजदूरों को दिन में दस से पंद्रह घंटे काम कराया जाता था।

कार्य स्थल इतने विषम और प्रतिकूल होते थे कि वहाँ आये दिन काम पर मजदूरों की अकस्मात मृत्यु की घटनायेँ होती रहती थीं। इन्हीं परिस्थितियों के चलते अमरीका में कुछ मजदूर समस्या निवारण संघ और समाजवादी संघ द्वारा मजदूरों के कल्याण के लिये आवाज़ उठाई जाने लगी।

साल 1884 में 8 घंटे का काम सुनिश्चित

आगे चल कर वर्ष 1884 में शिकागो शहर के राष्ट्रीय सम्मेलन में मजदूर/कामगार वर्ग के लिये प्रति दिन 8 घंटे काम करने का वैधानिक समय सुनिश्चित कर दिया गया। यह एक ऐतिहासिक फ़ैसला था।

दुनिया को अपने हाथों बनाने, खून और पसीना से सजाने वाले मजदूरों के अधिकारों की जागरूकता के रूप में मई दिवस मनाया जाता है। कामगारों के लिए मई दिवस एक बड़ी उपलब्धि के रूप में मनाया जाता है। मई दिवस को इंटरनेशनल लेबर डे और मजदूर दिवस के रूप में भी जाना जाता है। 1 मई को ब्रिटेन में एक त्योहार भी शुरू होता है।

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तो इसलिए मनाया जाता है मई दिवस

1800 के दौर में (19वीं शताब्दी में) यूरोप, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में मजदूरों से 14 घंटे तक काम कराया जाता था। न कोई मेडिकल लीव होती थी और न ही किसी त्योहार पर छुट्टी होती थी। इन सभी यातनाओं के खिलाफ 1 मई 1984 में अमेरिका में करीब तीन लाख मजदूर सड़कों पर उतर पड़े। इन मजदूरों की मांग थी कि अधिकतम 8 घंटे काम कराया जाए और सोने के लिए भी आठ घंटे दिए जाएं।

इसी दौरान यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में भी कई मजदूर आंदोलन हुए जिसके परिणामस्वरूप काम के घंटे 8 तय किए।

भारत में मजदूर

भारत में 16,154 कामगार संगठन हैं, जिनके करीब 92 लाख सदस्य हैं। भारत में कुल 50 करोड़ कर्मचारी व मजदूर हैं जिनमें करीब 94 फीसदी असंगठित क्षेत्र के कामगार हैं।

भारत में मजदूर दिवस

भारत में ‘मई दिवस’ सबसे पहले चेन्नई में 1 मई 1923 को मनाना शुरू किया गया। तब इसे ‘मद्रास दिवस’ के तौर पर मनाया जाता था। इसकी शुरूआत भारतीय मज़दूर किसान पार्टी के नेता कामरेड सिंगरावेलू चेट्यार ने शुरू की थी। मद्रास हाईकोर्ट के सामने एक बड़ा प्रदर्शन किया गया और एक संकल्प पास करके यह सहमति बनाई गई कि इस दिवस को भारत में भी कामगार दिवस के तौर पर मनाया जाये और इस दिन छुट्टी का ऐलान किया जाये।

इस तरह पकड़ी आन्दोलन ने तेज़ी

1928 ई. में बम्बई कपड़ा मिल मज़दूरों ने सबसे बड़ी हड़ताल की। यह 6 माह तक चली तथा इसमें डेढ़ लाख लोगों ने भाग लिया। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद श्रमिक आंदोलन में काफ़ी तेज़ी आई, क्योंकि रूस के विजयी होने के बाद साम्यवादियों का प्रभुत्व बढ़ा, जिसका प्रभाव भारतीय श्रमिक आन्दोलन पर पड़ा। 1940 ई. में साम्यवादी नेता एम.एन.राय ने अपने को अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस से अलग कर ‘इण्डियन फ़ेडरेशन ऑफ़ लेबर’ की स्थापना की। इस दल को सरकार का समर्थक दल माना जाता था।

राष्ट्रवादी नेता वल्लभभाई पटेल ने मई, 1947 ई. में ‘भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस’ की स्थापना की। सरदार वल्लभभाई पटेल इसके प्रथम अध्यक्ष थे। समाजवादियों के प्रयास से 1948 ई. में ‘हिन्द मज़दूर सभा’ की स्थापना हुई।

इस संघ की स्थापना का उद्देश्य था, भारत में लोकतांत्रिक समाजवादी समाज को स्थापित करना, मज़दूरों के हित, अधिकार एवं सुविधा की लड़ाई लड़ना, शैक्षिक स्तर को सुधारने के लिए संस्थाएं गठित करना आदि।

उद्योगपतियों से गांधी जी की अपील

महात्मा गांधी ने मजदूरों के लिए उद्योगपतियों से अपील करते हुए कहा था कि किसी देश की तरक्की उस देश के कामगारों और किसानों पर निर्भर करती है। इसलिए मजदूरों के हितों का ख्याल रखना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा था कि उद्योगपतियों को मज़दूरों और कामगारों की बेहतरी, भलाई और विकास के लिए वचनबद्ध होना चाहिए। तभी जाकर उनका भी विकास संभव है।

संतोष कुमार की रिपोर्ट, न्यूजकोड, सरायकेला

 

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कोडरमा : भाकपा माले कार्यकर्ताओं ने पीएम और सीएम का पुतला फूंका

NewsCode Jharkhand | 25 May, 2018 10:02 PM

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कोडरमाभाकपा माले कार्यकर्ताओं ने तिलैया शहर के झंड़ा चौक पर पीएम नरेन्द्र मोदी, सीएम रघुवर दास का पुतला फूंका और जनसभा की। जनसभा को श्यमादेव यादव मो. इब्राहिम, विरेन्द्र कुमार, इश्वरी राणा, रामधन यादव समेत कई नेताओं ने संबोधित किया। पार्टी कार्यकर्ता पेट्रोल-डीजल वृद्धि समेत अन्य सवालों को लेकर आंदोलन कर रहे थे।

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साथ ही 25 मई को धनवाद में पीएम द्वारा पार्टी नेताओं के द्वारा पूर्व में दी गई जानकारी के अनुसार करमा अस्पताल को मेडिकल कॉलेज बनाने के लिए इसकी आधारशिला नहीं रखे जाने का विरोध कर रहे थे। मौके पर धीरज कुमार समेत कई कार्यकर्ता मौजूद थे।

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लोहरदगा : ज़िले के कराटेकारों ने झारखंड को दिलाये कई पदक

NewsCode Jharkhand | 25 May, 2018 9:35 PM

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लोहरदगा। ब्राजिलियन जुजुत्सू स्पोर्ट्स फैडरेशन ऑफ इंडिया के तत्वावधान में नवाब मनसूर अली खान पटौदी  में 20 मई  को नेशनल ओपेन ब्राजिलियन जुजुत्सू चैम्पियनशिप का आयोजन किया गया।

प्रतियोगिता में 500 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इस प्रतियोगिता में लोहरदगा जिले जे. एम. एस. इंग्लिश मीडियम स्कूल हरमू के लाल पृथ्वी राज नाथ शाहदेय ने अपने प्रतिद्वंदी को पछाड़ते हुए प्रथम स्थान प्राप्त करके झारखंड के झोली में गोल्ड मैडल डाला वहीं बी।एस। कॉलेज के दिव्याकाश साहु ने भी अपने प्रतिद्वंदी को हराकर तृतीय स्थान प्राप्त करके झारखंड को ब्राउन्ज मैडल दिलाया।

मालूम हो कि के फाईटर सिहान श्रवण साहु ब्लैक बेल्ट पांचवी डॉन, जोयन्ट सेक्रेटरी इन्टरनेशनल शोतोकाई कराटे फैडरेशन ऑफ इंडिया, मुख्य कराटे प्रशिक्षक झारखंड के द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

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इस मौके पर जे. एम. एस. स्कूल के निर्देशिका श्रीमती सुष्मा सिंह ने दोनों फाईटरों एवं सिहान साहु को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। और कहा कि मार्शल आर्ट आज की मांग है। तथा सेंसाई सुर्यावती साहु, सेंसाई क्यूम खान, सेंसाई जगनंदन पौराणिक, सेंसाई  संजय उरांव, सेंपाई अनमोल साहु, आदि ने भी शुभकामनाएं दी है।

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कोडरमा : पुलिस ने साइबर अपराधी को किया गिरफ्तार, कई सिम कार्ड बरामद

NewsCode Jharkhand | 25 May, 2018 9:27 PM

कोडरमा : पुलिस ने साइबर अपराधी को किया गिरफ्तार, कई सिम कार्ड बरामद

कोडरमा। पुलिस ने साइबर अपराध के मामले का खुलासा करते हुए कांड में शामिल अपराधी निर्मण मंडल (ग्राम मोतीलेदा, बेंगावाद, जिला गिरिडीह) को गिरिडीह से गिरफ्तार कर लिया है। अपराधी के पास से पुलिस ने एक आइसीआईसीआइ बैंक का डेबिट कार्ड,  विभिन्न कंपनियों के तीन मोबाइल, एक वोडाफोन का सिम एक ल्यूमिनस कम्पनी की 150 एएमएच की बैटरी व एक माईक्रोटेक कंपनी का इनवर्टर बरामद किया है।

एसपी एम. तमिल वाणन ने शुक्रवार को बताया कि 30 मार्च को छोटेलाल यादव बाराडीह थाना चंदवारा निवासी ने चंदवारा थाना में आवेदन देकर मामला दर्ज कराया था। आवेदन में छोटेलाल यादव ने कहा था कि उनके मोबाइल पर साइबर अपराधी ने फोन करके उनसे उनका आधार कार्ड नंबर और ओटीपी नंबर पूछा था। इसके बाद उनके खाते से 42,175 रुपये की ऑनलाइन खरीदारी एवं निकासी कर ली थी।

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इस आवेदन के आधार पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करते हुए मामले को टेक्निकल सेल को सौंप अनुसंधान शुरू किया गया। अनुसंधान के दौरान जिस मोबाइल नंबर के पेटीएम एकांउट में अवैध रूप से पैसा भेजा गया है, उसका पता लगाया गया। फिर पुलिस ने 24 मई की रात्रि को कांड के आरोपी को मोतीलेदा को गिरिडीह से गिरफ्तार कर लिया। एसपी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी ने मामले में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली है।

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कुछ लोगों का है गिरोह

एसपी एम. तमिल वाणन ने बताया कि कांड को अंजाम देने में चार-पांच लोगों का एक गिरोह है जो इसमें लगा हुआ है। गिरफ्तार आरोपी के पास से करीब 25 सिम का उपयोग लोगों को ठगने के लिए किया जा रहा था।

इस गिरोह के माध्यम से करीब 1000 से अधिक लोगों को ठगने का कार्य अबतक कर चुका है। ठगी के पैसे से बाइक, एलईडी सहित कई सामान खरीदते थे और आरोपियों द्वारा खरीदे गए सामान को कुछ कम दाम में बेच दिया जाता था।

टीम में ये लोग थे शामिल

एसपी ने बताया कि मामले के खुलासा करने वाली टीम में चंदवारा थाना प्रभारी एसआई सोनी प्रताप, थाना प्रभारी बेंगावाद एसआई पीसेन दास, एएसआइ शाहनवाज खान तकनीकी सेल के कुणाल कुमार सिंह आदि शामिल थे। एसपी ने बताया कि जल्द ही कांड में शामिल अन्य आरोपियों को भी पकड़ लिया जाएगा।

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