कैंसर के जूझ रही सोनाली बेंद्रे को कटवाने पड़े बाल, शेयर किया इमोशनल वीडियो

NewsCode | 10 July, 2018 5:42 PM
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मुंबई। सोनाली बेंद्रे इन दिनों न्यूयॉर्क में हैं और कैंसर का इलाज करवा रही हैं। इस बीच सोनाली की न्यूयॉर्क से पहली तस्वीर सामने आई है । सोनाली ने खुद अपनी फोटो को इंस्टाग्राम पर शेयर किया है। कैंसर के चलते सोनाली को अपने बाल कटवाने पड़े हैं ।

एक्ट्रेस सोनाली बेंद्रे ने कुछ द‍िनों पहले एक पोस्ट शेयर की थी। इस पोस्ट में सोनाली ने हाई ग्रेड कैंसर होने की बात को साझा किया था। सोनाली की बीमारी से बॉलीवुड समेत फैंस को भी जबरदस्त झटका लगा।

छह द‍िन बाद सोनाली ने इंस्‍टाग्राम पर भावुक पोस्‍ट ल‍िख कर उनके ल‍िए दुआ करने वालों को धन्‍यवाद कहा है। उन्‍होंने अपने पसंदीदा लेखक Isabel Allende की एक लाइन से शुरुआत करते हुए ल‍िखा- हम क‍ितने सख्‍त हैं ये हमें तक तक नहीं पता चलता जब तक हमें उस ताकत को द‍िखाने का कोई मौका नहीं म‍िलता है। सोनाली ने कैंसर के इलाज के ल‍िए अपने बाल कटवाए हैं और इसी के फोटोज और एक वीड‍ियो शेयर क‍िया है।

 

In the words of my favourite author Isabel Allende, “We don’t even know how strong we are until we are forced to bring that hidden strength forward. In times of tragedy, of war, of necessity, people do amazing things. The human capacity for survival and renewal is awesome.” The outpouring of love I’ve received in the last few days has been so overwhelming… and I’m especially grateful to those of you who shared stories of your experiences in dealing with cancer, whether it was your own or of loved ones. Your stories have given me an extra dosage of strength and courage, and more importantly, the knowledge that I’m not alone. Each day comes with its own challenges and victories and so for now, I’m taking this #OneDayAtATime. The only thing I’m trying to be consistent about is maintaining a positive outlook… literally #SwitchOnTheSunshine – it’s my way of dealing with this. Sharing my journey is also part of this process… I can only hope it reminds you that all is not lost and that someone, somewhere understands what you’re going through. 🤞🌞

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सोनाली का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है । जिसमें वो बाल कटवाते हुए अलग-अलग एक्सप्रेशन दे रही हैं । सोनाली एक्साइटेड भी हैं और नर्वस भी । सोनाली की पहली तस्वीर लंबे बालों में है, इसके बाद सोनाली ने हेयरकट कराने का पूरा प्रोसेस वीड‍ियो में शेयर किया है।

देखें वीडियो:

We wish u a speedy recovery @iamsonalibendre #getwellsoon #sonalibendre

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सोनाली ने हेयरकट क्यों कराए हैं इस बात का खुलासा नहीं हुआ है. लेकिन कैंसर की बीमारी को ठीक करने के लिए कीमोथेरपी में बाल झड़ने शुरू हो जाते हैं।

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बर्थडे विशेष : मनमोहन सिंह के वो काम, जिन्हें भुलाना नहीं आसान

NewsCode | 26 September, 2018 4:04 AM
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नई दिल्ली। 26 सितंबर, 1936 को पाकिस्तान के गाह में जन्मे डॉक्टर मनमोहन सिंह देश के पहले सिख प्रधानमंत्री हैं। 22 मई 2004-26 मई 2014 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे डॉ. मनमोहन सिंह देश में आर्थिक सुधारों के जनक कहे जाते रहे हैं। आधुनिक भारतीय अर्थव्यवस्था को नया आयाम देने वाले मनमोहन सिंह की छवि एक बेहद सौम्य, विनम्र और मितभाषी नेता की है।

दस साल के यूपीए कार्यकाल में कम बोलने और अहम मुद्दों पर गुम रहने के कारण मनमोहन हमेशा विपक्षियों के निशाने पर रहे। हालांकि, पीएम बनने के पहले और बाद भी कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां उनके नाम दर्ज हैं। उनकी बनाई कुछ महत्वपूर्ण नीतियों को मोदी सरकार भी आगे बढ़ा रही है।

1. देश में आर्थिक सुधारों के प्रणेता

 1991 में पीएम नरसिम्हा राव की कांग्रेस सरकार में वह वित्त मंत्री हुआ करते थे। ये वो दौर था जब देश दिवालिया होने की कगार पर खड़ा था। देश का फिस्कल डेफिसिट यानी राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद के 8.5 के इर्द गिर्द था। महज एक वर्ष के भीतर मनमोहन सिंह ने उसे 5.9 फीसदी के स्तर पर लाने में कामयाबी हासिल कर ली थी। डॉक्टर सिंह द्वारा लागू किए सुधार कार्यक्रमों के बाद डूबती हुई इकॉनमी ने वह मुकाम हासिल कर लिया कि उसे पीछे मुड़कर नहीं देखना पड़ा।

2004 से 2014 तक लगातार 10 साल देश के पीएम रहे मनमोहन सिंह ने 1991 में जब देश के वित्त मंत्री का पद संभाला था तब आर्थिक क्रांति ला दी थी। इन्होंने ही ग्लोबलाइजेशन की शुरूआत की थी। 1991 से 1996 के बीच उनके द्वारा किए गए आर्थिक सुधारों की जो रूपरेखा, नीति और ड्राफ्ट तैयार किया, उसकी दुनिया भर में प्रशंसा की जाती है।

2. साल में 100 दिन का रोजगार पक्का

बेरोजगारी का दंश झेलते देश में रोजगार गारंटी योजना की सफलता का श्रेय मनमोहन सिंह को जाता है। इसके तहत बता दें कि साल में 100 दिन का रोजगार और न्यूनतम दैनिक मजदूरी 100 रुपये तय की गई।  इसकी खास बात यह भी है कि इसके तहत पुरुषों और महिलाओं के बीच किसी भी भेदभाव की अनुमति नहीं है। इसलिए, पुरुषों और महिलाओं को समान वेतन भुगतान किया जाना चाहिए। सभी वयस्क रोजगार के लिए आवेदन कर सकते हैं।

इसके तहत यदि सरकार काम देने में नाकाम रहती है तो आवेदक बेरोज़गारी भत्ता पाने के हकदार होंगे।  मनरेगा यानी महात्मा गांधी नेशनल रूरल एंप्लॉयमेंट गारंटी एक्ट 2005, ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत यूपीए के कार्यकाल में डॉक्टर मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री कार्यकाल में शुरू की गई थी।

3. आधार कार्ड योजना की संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी की तारीफ

पूर्व पीएम मनमोहन सिंह की आधार योजना की यूएन ने भी तारीफ की थी। यूएन की ओर से कहा गया था कि आधार स्कीम भारत की बेहतरीन स्कीम है। जैसा कि हम और आप देख ही रहे हैं कि वर्तमान पीएम मोदी की सरकार में आधार संख्या को यूनीक नंबर होने के चलते विभिन्न कामों में अनिवार्य कर दिया गया है। भारतीय विशिष्‍ट पहचान प्राधिकरण सन 2009 में मनमोहन सिंह के समय ही गठित किया गया जिसके तहत सरकार की इस बहुउद्देशीय योजना को बनाया गया। देश के हर व्यक्ति को पहचान देने और प्राथमिक तौर पर प्रभावशाली जनहित सेवाएं उस तक पहुंचाने के लिए इसे शुरू किया था।

4. भारत और अमेरिका के बीच न्यूक्लियर डील

साल 2002 में एनडीए से देश की बागडोर यूपीए के हाथ में गई। गठबंधन सरकार के तमाम प्रेशर के बीच भारत ने इंडो यूएस न्यूक्लियर डील को अंजाम दे दिया। साल 2005 में जब इस डील को अंजाम दिया गया, उसके बाद भारत न्यूक्लियर हथियारों के मामले में एक पावरफुल नेशन बनकर उभरा। उस वक्त यूएस में जॉर्ज बुश प्रेजिडेंट हुआ करते थे। इस डील के तहत यह सहमति बनी थी कि भारत अपनी इकॉनमी की बेहतरी के लिए सिविलियन न्यूक्लियर एनर्जी पर काम करता रहेगा।

5. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 (खाद्य अधिनियम का अधिकार) मनमोहन सिंह के कार्यकाल में ही पास हुआ।  भूख और कुपोषण को मात देने के उद्देश्य से शुरू की गयी इस महत्वकांक्षी योजना का लक्ष्य भारत के 1.2 अरब लोगों के लगभग दो तिहाई तक सब्सिडी वाले अनाज प्रदान करना है। 

इसमें मध्याह्न भोजन योजना, एकीकृत बाल विकास सेवा योजना और सार्वजनिक वितरण प्रणाली शामिल है। बिल के प्रावधानों के तहत, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (या पीडीएस) के लाभार्थी न्यूनतम मूल्यों पर प्रति व्यक्ति प्रति माह 5 किलोग्राम अनाज के हकदार हैं। इसमें चावल 3 रुपये प्रति किलो, गेहूं 2 रू प्रति किलो और मोटे अनाज (बाजरा) 1 रू प्रति किलो में मुहैया करवाये जाते हैं। 

6. शिक्षा का अधिकार

मनमोहन सिंह के कार्यकाल में ही राइट टु एजुकेशन यानी शिक्षा का अधिकार अस्तित्व में आया। इसके तहत 6-14 साल के बच्चे को शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित किया गया। कहा गया कि इस उम्र के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा दी ही जाएगी।


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जमशेदपुर : छुुुुट्टी मांगी, न‍हीं मिली, गर्भावस्‍था के पांंचवें माह में ड्यूूटी करने को मजबूर सुरक्षाकर्मी

NewsCode Jharkhand | 26 September, 2018 3:58 PM
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एमजीएम अस्पताल की संवेदनहीनता

जमशेदपुर। जमशेदपुर का एमजीएम अस्पताल इन दिनों फिर से सुर्खियों में है। वैसे इस बार यह अस्पताल अलग ही तरह के कारनामों को लेकर सुर्खियों में है।

इस अस्पताल की लापरवाही की खबरें तो आम बात है, लेकिन इस बार इस अस्पताल में काम कर रही महिला सुरक्षाकर्मियों की क्या स्थिति है, यह बता रहे हैं।

किस तरह 8 महीने की गर्भवती महिला सुरक्षाकर्मी ड्यूटी करने को मजबूर है। ऐसा नहीं है कि उस महिला कर्मी ने छुट्टी के लिए गुहार नहीं लगाई थी।

इस महिला ने प्रेगनेंसी लीव का आवेदन दिया था, लेकिन अस्पताल प्रबंधन या होमगार्ड  के वरीय अधिकारी इस महिला के आवेदन को निरस्त करते हुए इतना ही कहा कि जब तुम्हें परेशानी होगी तो तुम्हें छुट्टी दे दी जाएगी।

ठीक से खड़ी नहीं हो पा रही महिला ड्यूूटी करने को मजबूर

अब सवाल यह उठता है कि आखिर 8 महीने की गर्भवती महिला को क्या परेशानी नहीं हो रही होगी ?  क्या एमजीएम अस्पताल प्रबंधन और झारखंड सरकार का गृह रक्षा वाहिनी विभाग इतना संवेदनहीन हो गया है कि जो महिला अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो पा रही, उसे अस्पताल की सुरक्षा में लगा दिया गया।

वैसे यह कोई पहली महिला नहीं है, जो गर्भवती होने के बाद भी ड्यूटी बजा रही है, बल्कि इनकी जैसी और भी एक महिला सुरक्षाकर्मी यहां ड्यूटी पर तैनात है।

पांचवें माह से ही प्रेगनेंसी लीव दिए जाने का है प्रावधान

ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर सरकारी योजना जिसके तहत महिलाओं को पांचवें माह से ही प्रेगनेंसी लीव दिए जाने का प्रावधान है, उसका उल्‍लंघन हो रहा है। यदि महिला होमगार्ड की जवान के साथ कुछ अनहोनी हो जाए तो उसके लिए कौन जिम्मेवार होगा।

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NewsCode Jharkhand | 26 September, 2018 3:19 PM
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लोहरदगा। शहर के बड़ा तालाब, जामा मस्जिद आदि क्षेत्रों में नगर परिषद की ओर से अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया। अभियान में लोहरदगा सदर अंचलाधिकारी परमेश्वर कुशवाहा, सदर थाना प्रभारी पुलिस निरीक्षक शैलेश प्रसाद, नगर परिषद के सिटी मैनेजर आफताब आलम सहित कई अधिकारी और पुलिस बल के जवान मौजूद थे। अतिक्रमण अभियान के दौरान किसी भी प्रकार की स्थिति से निपटने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया था। अतिक्रमण का दोषी पाए जाने पर, ऑन द स्‍पॉट कई दुकानदारों पर जुर्माना भी लगाया गया। नगर परिषद के इस अभियान से दुकानदारों में भी डर का माहौल देखा जा रहा है।

लोहरदगा : अतिक्रमण हटाओ अभियान से दुकानदारों में हड़कंप

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अतिक्रमण को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दिए जाने के बाद से नगर परिषद अतिक्रमण हटाने को लेकर अभियान चला रहा है। इस दौरान क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों में दुकानदारों द्वारा अतिक्रमण किए जाने का मामला सामने आने पर, अतिक्रमण हटाने को लेकर अभियान चलाया जा रहा है। इससे पहले नगर परिषद ने कई बार दुकानदारों को चेतावनी देते हुए अतिक्रमण नहीं करने का निर्देश दिया था। बावजूद इसके अतिक्रमण होने की वजह से सड़कें संकरी हो गई थी और आए दिन दुर्घटनाएं हो रही थी। जिसकी वजह से नगर परिषद और अंचल प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने को लेकर जोरदार अभियान चलाया।

लोहरदगा : टेबल-कुर्सी ही संभालते हैं कार्यालय, मत्स्य अधिकारी रहते हैं गायब 

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