सोमनाथ मंदिर विवाद: कांग्रेस ने कहा- राहुल हिंदू ही नहीं, जनेऊधारी हिंदू हैं

NewsCode | 30 November, 2017 9:00 AM

सोमनाथ मंदिर विवाद: कांग्रेस ने कहा- राहुल हिंदू ही नहीं, जनेऊधारी हिंदू हैं

 गांधीनगर| कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को सोमनाथ मंदिर के दर्शन किए। राहुल के इस मंदिर दौरे से एक बड़ा विवाद पैदा हो गया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उनकी आस्था को लेकर सवाल उठाए, जबकि कांग्रेस ने भाजपा पर ओछी राजनीति करने का आरोप लगाया। कांग्रेस ने कहा कि राहुल गांधी हिंदू भक्त हैं।

यह विवाद राहुल गांधी के मीडिया समन्वयक मनोज त्यागी के गैर हिंदुओं के लिए बने रजिस्टर में हस्ताक्षर करने से पैदा हुआ। इसके बारे में कांग्रेस ने कहा है कि इस रजिस्टर में बाद में राहुल गांधी व अहमद पटेल का नाम जोड़ा गया।

इस दौरे के कुछ समय बाद सोशल मीडिया पर मनोज त्यागी के हस्ताक्षर वाला रजिस्टर घूमने लगा, जिसमें राहुल गांधी व अहमद पटेल का नाम बाई तरफ था।

इस कहानी के साथ भाजपा सामने आई कि राहुल गांधी ने खुद को एक गैर-हिंदू घोषित कर दिया है।

सौराष्ट्र क्षेत्र के भाजपा प्रवक्ता राजू ध्रुव ने कहा, “कांग्रेस ने हमेशा राहुल गांधी को एक हिंदू के तौर पर दिखाने की कोशिश की, लेकिन तथ्य यह है कि वह हिंदू नहीं हैं। राहुल गांधी ने अक्टूबर से 20 से ज्यादा हिंदू देवी-देवताओं के मंदिरों का दौरा किया है। कांग्रेस झूठ बोल रही है। दाखिल की गई प्रविष्टि दिखाती है कि वह हिंदू नहीं हैं।”

सोमनाथ मंदिर विवाद: कांग्रेस ने कहा- राहुल हिंदू ही नहीं, जनेऊधारी हिंदू हैं

मनोज त्यागी ने बाद में एक बयान जारी कर कहा कि उन्होंने मंदिर में मीडियाकर्मियों को अंदर ले जाने के लिए गांधी का नाम दर्ज किया था। यह राहुल गांधी या अहमद पटेल की तरफ से नहीं था। इसे बाद में जोड़ दिया गया होगा।

कांग्रेस ने जल्दबाजी में एक संवाददाता सम्मेलन बुलाया। इसमें कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजों को लेकर भाजपा डर गई है और ओछी राजनीति पर उतर आई है।

सुरजेवाला ने कहा, “सोमनाथ मंदिर में सिर्फ एक आगंतुक पुस्तिका है, जिस पर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने हस्ताक्षर किए थे। दूसरा कोई भी चित्र जिसे प्रसारित किया जा रहा है वह नकली है।”

सुरजेवाला ने कहा, “मंदिर समिति ने जब उन्हें आगंतुक पुस्तिका दी तो राहुल ने उसमें अपने नाम (राहुल गांधी) व पता (12, तुगलक लेन, नई दिल्ली) के साथ एक संदेश, ‘एक बहुत ही प्रेरणादायी स्थल’ लिखा।”

उन्होंने कहा, “दूसरा रजिस्टर मीडियाकर्मियों के द्वारा ट्वीट किया गया। राहुल गांधी ने न तो उस रजिस्टर में लिखा और न ही वह रजिस्टर उन्हें दिया गया था।”

दूसरे रजिस्टर पर एआईसीसी के मीडिया समन्वयक मनोज त्यागी का हस्ताक्षर है, जिस पर मंदिर के कुछ अधिकारियों ने हस्ताक्षर करने को कहा था, ताकि राहुल गांधी के साथ गए मीडियाकर्मी मंदिर में दाखिल हो सकें।

सुरजेवाला ने कहा, “राहुल के मंदिर से जाने के बाद कुछ मीडिया मित्रों का दुरुपयोग करके एक अन्य फर्जी प्रविष्टि को सार्वजनिक कर दिया गया। क्या भाजपा इतनी कायर हो गई है कि वह बाहर आने व बोलने से डर रही है।”

सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी व अहमद पटेल का नाम चोरी से गैर हिंदुओं के लिए बने रजिस्टर में बाई तरफ किसी ने दाखिल कर दिया। इसमें हेरफेर की गई है।

उन्होंने कहा कि यह एक नकली रजिस्टर है। इन नामों को बाद में जोड़ा गया।

राहुल गांधी की पवित्र धागा पहने तस्वीर को दिखाते हुए सुरजेवाला ने कहा कि राहुल एक जनेऊधारी हिंदू हैं। चाहे उनके नामकरण का समय रहा हो या उनकी बहन की शादी का समय, या फिर उनके पिता के अंतिम संस्कार का समय, उन्हें हमेशा पवित्र जनेऊ के साथ देखा गया है।

सुरजेवाला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से आग्रह किया कि इतना नीचे नहीं गिरें कि 130 करोड़ हिंदू आप से घृणा करने लगें।

उन्होंने कहा कि आपकी साजिश से सच्चाई नहीं बदलेगी।

कांग्रेस के एक अन्य प्रवक्ता दीपेंद्र हुड्डा ने कहा, “भाजपा का इरादा आज बेनकाब हो गया..गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी ने भी यह मान लिया है कि चुनाव में उनकी पार्टी की स्थिति ठीक नहीं है। जब भी वे ऐसी स्थिति में होते हैं, इस तरह की हरकते करते हैं।”

हुड्डा ने कहा, “यह घटना भाजपा के बौद्धिक दिवालिएपन का संकेत है।”

कांग्रेस की यह प्रतिक्रिया भाजपा द्वारा मुद्दे को उठाए जाने के बाद आई है। भाजपा ने राहुल गांधी के धर्म को लेकर सवाल किया था।

भाजपा प्रवक्ता जी.वी.एल. नरसिम्हा राव ने एक ट्वीट में कहा, “राहुल गांधी एक गैर-हिंदू व शिव भक्त हैं? बहुत अच्छा। इसमें कोई आश्चर्य नहीं जब उन्होंने पूर्व में कहा था कि महिलाओं को चिढ़ाने के लिए मंदिर जाते हैं।”

न्यूयॉर्क टाइम्स के 1998 के एक लेख में राहुल गांधी व प्रियंका के रोमन कैथोलिक होने की बात का हवाला देते हुए राव ने कहा, “इससे कभी इनकार नहीं किया गया। क्या राहुल गांधी ने इसके बाद हिंदुत्व स्वीकार किया। कृपया स्पष्टीकरण दें।”

आईएएनएस

कर्नाटक: कांग्रेस के जी परमेश्वर डिप्टी सीएम और रमेश कुमार बनेंगे स्पीकर, बुधवार को शपथ ग्रहण

NewsCode | 22 May, 2018 8:53 PM

कर्नाटक: कांग्रेस के जी परमेश्वर डिप्टी सीएम और रमेश कुमार बनेंगे स्पीकर, बुधवार को शपथ ग्रहण

नई दिल्ली। कर्नाटक की सियासत में बुधवार को जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन सरकार के अस्तित्व में आने के साथ ही एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री बुधवार को एक साथ शपथ लेंगे। जेडीएस के एचडी कुमारस्वामी सीएम और कांग्रेस के जी परमेश्वर डिप्टी सीएम पद की शपथ लेंगे। विधानसभा के स्पीकर का पद भी कांग्रेस को मिला है।

खबर है कि विधानसभा स्पीकर कांग्रेस के केआर रमेश कुमार होंगे। इसके बाद फ्लोर टेस्ट होगा और तभी कैबिनेट विस्तार किया जाएगा। आपको बता दें कि जी परमेश्वकर कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष हैं और उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया जाएगा। गुरुवार को स्पीकर के चुने जाने के बाद कुमारस्वामी विधानसभा में बहुमत साबित करेंगे।

सूत्रों के हवाले से खबर है कि दोनों पार्टियों में कैबिनेट में जगह को लेकर भी बातचीत फाइनल हो गई है। कांग्रेस के 22 और जेडीएस के 12 विधायकों को कैबिनेट में जगह मिल सकती है।

वीआईपी सीटों को लेकर खींचतान

वहीं, दूसरी ओर शपथ ग्रहण समारोह को देखने के लिए लगाई जाने वाली वीआईपी सीटों पर भी अधिक हिस्सेदारी के लिए दोनों पार्टियों में खींचतान चल रही है। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस विधायक दल की बैठक में विधायकों ने जोर दिया कि मंत्रिमंडल में उनकी पार्टी को वाजिब हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। इन विधायकों का कहना था कि वो चुनाव में जेडीएस के साथ तीखी लड़ाई के बाद जीते हैं और अगर कांग्रेस के किसी मंत्री को बुधवार को शपथ नहीं दिलाई जाती है, तो ये उनके लिए असहज स्थिति होगी।

कर्नाटक की सत्ता में भागीदारी ही नहीं, कांग्रेस को शपथ ग्रहण समारोह को देखने के लिए लगने वाली करीब 6000 वीआईपी सीटों को लेकर भी चिंता है कि उसके खाते में कितनी सीटें आएंगी। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस नेताओं को लगता है कि कहीं जेडीएस अपने नेताओं के लिए अधिक सीटों पर कब्जा न कर ले। ऐसे में पर्याप्त संख्या में पार्टी नेताओं के लिए वीआईपी सीटें सुरक्षित कर पाने को लेकर भी कांग्रेस चिंतित है।

कर्नाटक विधान सौध परिसर में जेडीएस की ओर से ऐसे कई पोस्टर लगाए गए हैं, जिसमें उसके गठबंधन में बड़े पार्टनर होने का आभास होता है। मालूम हो कि कर्नाटक में येदियुरप्पा के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बाद अब जेडीएस के कुमारस्वामी कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाने जा रहे हैं।

याद रहे कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए 12 मई को मतदान हुए थे, जबकि 15 मई को नतीजे आए थे। इसमें 104 सीटें जीतकर बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, जबकि कांग्रेस को 78 सीटों और जेडीएस को 37 सीटों पर जीत मिली थी। इस चुनाव में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, जिसके चलते बीजेपी ने सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा करके सरकार बना ली थी, लेकिन येदियुरप्पा विधानसभा में बहुमत साबित करने में विफल रहे और उन्होंने ढाई दिन में ही इस्तीफा दे दिया। इसके बाद जेडीएस और कांग्रेस मिलकर सरकार बनाने जा रहे हैं। दोनों के कुल विधायकों की संख्या बहुमत से भी ज्यादा है।

कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह में अखिलेश-मायावती बनाएंगे इतिहास, केजरीवाल भी होंगे शामिल

कर्नाटक: डिप्टी सीएम को लेकर कांग्रेस-जेडीएस में फंसा पेंच, राहुल लेंगे अंतिम निर्णय

Read Also

SBI को अब तक का सबसे बड़ा घाटा, दिसंबर-मार्च 2018 तिमाही में ₹7718 करोड़ का नुकसान

NewsCode | 22 May, 2018 8:08 PM

SBI को अब तक का सबसे बड़ा घाटा, दिसंबर-मार्च 2018 तिमाही में ₹7718 करोड़ का नुकसान

नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) को पिछले वित्त वर्ष की चौथी यानी जनवरी-मार्च 2018 तिमाही में कुल 7,718 करोड़ रुपये का बड़ा घाटा हुआ है। ये अब तक का सबसे बड़ा तिमाही घाटा है। एसबीआई ने आज अपना तिमाही परिणाम घोषित किया।

इसके मुताबिक, एक साल में बैंक का एनपीए दोगुने से भी ज्यादा बढ़ गया है। बैंक की नॉन-परफॉर्मिंग ऐसेट्स (एनपीए) वित्त वर्ष 2016-17 के 177866 करोड़ रुपये और 9.11 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2017-18 में 2,23,427 करोड़ रुपये और 10.91 प्रतिशत हो गया है। पिछले साल जनवरी-मार्च तिमाही में एनपीए 11,740 करोड़ रुपए था जो 22,096 करोड़ रुपए हो गया है। अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में ये 18,876 करोड़ रुपए था।

लगातार दूसरी तिमाही में घाटा

आपको बता दें कि अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में भी एसबीआई को 2,416.37 करोड़ रुपए का घाटा हुआ। जबकि पिछले साल की तीसरी तिमाही में 2,814.82 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ था। इस तरह वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान बैंक को 6,547 करोड़ का नुकसान हुआ है जबकि 2016-17 में 10,484 करोड़ का मुनाफा हुआ था।

बैंक की बढ़ी आय 

चौथी तिमाही में एसबीआई की आय 68,436.06 करोड़ रुपए रही है। पिछले साल की जनवरी-मार्च तिमाही में आय 57,720.07 करोड़ रुपए थी। पूरे वित्त वर्ष के दौरान आय 2,59,664 करोड़ रुपए रही है जो 2016-17 में 2,10,979 करोड़ थी। जनवरी-मार्च तिमाही में ब्याज से आय 10.5% बढ़कर 19,974 करोड़ रुपए हो गई।

पिछले साल की चौथी तिमाही में ये 18,070.7 करोड़ रुपए थी। बैंक ने बताया कि उन्होंने राइट-ऑफ किए गए लोन में से उसने 21.18 प्रतिशत की रिकवरी हुई है। बैंक ने कहा कि वित्त वर्ष 2017 में 59,461 करोड़ रुपये के मुकाबले पिछले वित्त वर्ष में 0.08% की वृद्धि के साथ उसे 59,511 करोड़ रुपये की ऑपरेटिंग प्रॉफिट रही।

पीएनबी के बाद सबसे बड़ा तिमाही घाटा

भारतीय बैंकिंग इतिहास में पीएनबी के बाद एसबीआई को सबसे बड़ा तिमाही घाटा हुआ है। नीरव मोदी के घोटाले की वजह से चौथी तिमाही में पीएनबी को रिकॉर्ड 13,417 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। वहीं एनपीए बढ़ने से एसबीआई को 7,718 करोड़ का घाटा हुआ है।

आईएफसीआई का घाटा बढ़कर हुआ 176.87 करोड़ रुपये

नीरव मोदी स्टाइल में हरियाणा की कंपनी ने बैंक को लगाया 155 करोड़ रुपये का चूना

अर्थव्यवस्था के कुप्रबंधन को लेकर चिदंबरम का मोदी सरकार पर हमला

254 दिनों में पूरी दुनिया का चक्‍कर लगा भारत लौटीं नौसेना की जाबांज महिलाएं, देखें तस्वीरें

NewsCode | 22 May, 2018 6:06 PM

254 दिनों में पूरी दुनिया का चक्‍कर लगा भारत लौटीं नौसेना की जाबांज महिलाएं, देखें तस्वीरें

गोवा। भारतीय नौसेना की शान आईएनएस तारिणी आठ महीने और 11 दिनों में दुनिया का चक्कर लगाकर स्वदेश पहुंच गया है। आठ महीने से ज्यादा समय में समुद्र के रास्ते दुनिया को नापने वाली ‘INSV तारिणी’ की चालक दल की 6 महिला सदस्य गोवा पहुंच गईं।

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और नौसेना प्रमुख सुनील लांबा ने नौसेना की इन जाबांज महिलाओं का स्वागत किया। लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी की अगुवाई में टीम ने 254 दिन में 26 हजार समुद्री मील का सफर तय किया। इन महिलाओं ने अपनी यात्रा के दौरान 21,600 नॉटिकल माइल की दूरी तय की और दो बार भूमध्य रेखा, तारिणी चार महाद्वीपों और तीन सागरों को पार किया।

समुद्री प्रदूषण के आंकड़ों को जुटाने और मौसम की बेहतर भविष्यवाणी के लिए समुद्री तरंगों का डाटा जुटाने के मिशन को निकली टीम तारिणी ने समुंद्री लहरों के कई खौफनाक मंजर भी देखे। अलग-अलग देशों में उन्हें मौसम के मिजाज का सामना करना पड़ा। कभी कड़कड़ाती ठंड के साथ तूफानों से उनका सामना हुआ। टीम के सदस्यों ने बताया कि उन्हें दिन भर खाना नसीब नहीं होता था।

इस अभियान का नाम ‘नाविका सागर परिक्रमा’ था और पिछले साल 10 सितंबर को आईएनएस मांडवी बोट पुल से रवाना की गई थी। इस अभियान का नेतृत्व लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी कर रही थीं और इसमें चालक दल की सदस्य लेफ्टिनेंट कमांडर प्रतिभा जामवाल, स्वाति पी, लेफ्टिनेंट ऐश्वर्या बोड्डापति, एस विजया देवी और पायल गुप्ता समेत शामिल थीं।

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने 10 सितंबर 2017 को आइएनएस तारिणी को गोवा से झंडी दिखाकर इस ऐतिहासिक यात्रा के लिए रवाना किया था। इन्होंने अभियान में पांच चरणों में यह दूरी तय की। इन चार बंदरगाहों पर इसका पड़ाव फ्रीमेंटल (ऑस्ट्रेलिया), लाइटेलटन (न्यूजीलैंड), पोर्ट स्टेनले (फॉकलैंड) और केप टाउन (दक्षिण अफ्रीका) शामिल हैं।

X

अपना जिला चुने