रांची : विवेकानंद सेवा संघ को 8000 रूपये मासिक मिलेगा-सीएम

NewsCode Jharkhand | 5 December, 2017 9:08 PM

रांची : विवेकानंद सेवा संघ को 8000 रूपये मासिक मिलेगा-सीएम

रामकृष्ण विवेकानंद विश्वविद्याल को मंजूरी

रांची। मुख्यमंत्री  रघुवर दास ने कहा कि हम सभी लोग मिलकर न्यू इंडिया-न्यू झारखंड बनायेंगे, जहां कोई बेघर न रहे, बेईलाज न रहे, बेरोजगार न रहे। 2022 तक राज्य से बीपीएल परिवारों को रोजगार से जोड़कर गरीबी रेखा से ऊपर लाने का काम किया जायेगा। इसके लिए रामकृष्ण मिशन जैसे सामाजिक संगठनों का सहयोग जरूरी है। हम सभी को स्वामी विवेकानंद जी के सपनों का भारत व झारखंड बनाना है। गरीबों के चेहरे पर मुस्कान लाना है सभी का एक मात्र लक्ष्य होनी चाहिए। वे आज मोराहबादी स्थित रामकृष्ण मिशन आश्रम में वाटर हार्वेस्टिंग मॉडल के उदघाटन के बाद विश्व मृदा दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे।

अफसरशाही के भरोसे विकास नहीं हो सकता

मुख्यमंत्री  ने कहा कि केवल अफसरशाही के भरोसे विकास नहीं हो सकता है। 67 साल में देश ने यह देख लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों की आय दोगुनी करने के लिए शुरू किये गये अभियान में मिट्टी के स्वास्थ्य की जांच कर वहां होनेवाली ऊपज के बारे में किसानों को सलाह दी जाती है। इसका असर दिख रहा है। भूमि की पैदावार बढ़ गयी है। हम सब मिलकर गांवों में थोड़ा प्रयास करें, तो प्राकृतिक संसाधन और संपदाओं से भरे झारखंड राज्य से हम गरीबी को समाप्त कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री  रघुवर दास ने रामकृष्ण मिशन द्वारा रांची, रामगढ़ और खूंटी के 120 गांवों में बनाये गये विवेकानंद सेवा संघ की सराहना करते हुए कहा कि इनके जिम्मे काफी कुछ रहेगा। सरकार इन्हें 8000 रुपये मासिक देगी। दो आंगनबाड़ी पर एक क्लब बनाया जा रहा है। इसमें सेवा संघ के स्वयंसेवकों को शामिल किया जायेगा। इनका काम होगा गांव के लोगों की सोच बदलना। हर सप्ताह गांव वालों के साथ बैठक कर गांव के लिए तीन साल का विलेज डेवलेपमेंट प्लान तैयार करें। गांव को नशामुक्त हेतु प्रेरित करें। खुले में शौच बंद करायें। जिन घरों में शौचालय नहीं है, उनकी सूची बनायें। सरकार वहां शौचालय बनाने हेतु पैसा देगी।

 हमें अपनी संस्कृति पर गर्व होनी चाहिए

इसी प्रकार गांव के सभी बच्चे स्कूल जायें, इसे सुनिश्चित करें। ड्राप आउट कर चुकीं 14 से 24 वर्ष की बालिकाओं की रूचि जाने। जो गरीबी के कारण पढ़ाई से वंचित हैं, सरकार उन्हें पढ़ायेगी। जो काम करना चाहती हैं, उनका कौशल विकास कर रोजगार से जोड़ा जायेगा। गांव के बीपीएल परिवारों की सूची तैयार करें। इन परिवारों को प्रशिक्षित कर रोजगार से जोड़ा जायेगा। इससे उन्हें जो आमदनी होगी और वे बीपीएल की श्रेणी के बाहर आ सकेंगे। इसमें मधुमक्खी पालन, गाय पालन, मुर्गीपालन, बकरी पालन, सुकर पालन के साथ ही वस्त्र निर्माण आदि का प्रशिक्षण दिया जायेगा। इसके साथ ही गांव में डोभा, कुआं, तालाब, चेकडैम आदि बनाने के लिए भी गांव वाले ही बतायेंगे। सरकार उन्हें सीधे पैसे दे देगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी संस्कृति अत्यंत प्राचीन हैं। स्वामी विवेकानंद ने शिकागो में जाकर हमारी संस्कृति और आध्यात्म के बारे में दुनिया को अवगत कराया। हमें अपनी संस्कृति पर गर्व होनी चाहिए। पाश्चात्य संस्कृति हमारे झारखंड की संस्कृति को नष्ट करना चाहती है। हम सभी को इससे सावधान रहने की जरूरत है। स्वामी जी के बतायी बातों का अनुकरण करना चाहिए। झारखंड के विकास में भी स्वामी जी का योगदान अहम है। जमशेदजी टाटा को उन्होंने ही भारत में स्टील प्लांट लगाने के लिए प्रेरित किया था, जब श्री टाटा विदेश में प्लांट लगाने के उद्देश्य से विदेश जा रहे थे। देश का पहला औद्योगिक प्लांट हमारे राज्य में लगा।

 उठो जागो और तबतक मत रूको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाये के आधार पर काम करना है

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने किसानों के बीच मृदा स्वास्थ्य कार्ड का वितरण किया। उन्होंने कहा कि जैसे मिट्टी के स्वास्थ्य के लिए यह कार्ड है, उसी प्रकार लोगों के स्वास्थ्य के लिए मुख्यमंत्री हेल्थ बीमा शुरू की गयी है, जिससे गरीब से गरीब व्यक्ति भी दो लाख रुपये का इलाज करवा सकते हैं। उन्होंने रामकृष्ण विवेकानंद विश्वविद्याल को भी मंजूरी प्रदान की। रांची सांसद रामटहल चौधरी ने कहा कि गांवों के विकास की दिषा में काफी कार्य किये जा रहे हैं। रामकृष्ण मिशन का योगदान काफी सराहनीय है।

मुख्य सचिव राजबाला वर्मा ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय दोगुणा करने के लिये काफी काम कर रही है। सभी स्वामी विवेकानंद जी का सूत्र उठो जागो और तबतक मत रूको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाये के आधार पर काम करना है। इसमें सभी का योगदान जरूरी है।कार्यक्रम में रामकृष्ण मिशन आश्रण के सचिव स्वामी भवेशानंद जी, कृषि सचिव पूजा सिंघल, रामकृष्ण विवेकानंद विश्वविद्याल के कुलपति स्वामी आत्मप्रियानंद, नाबार्ड के सीजीएम सुब्रतो मंडल समेत अन्य लोग उपस्थित थे।

केरल के बाद हिमाचल में निपाह वायरस की आशंका, स्कूल में मरे मिले कई चमगादड़

NewsCode | 24 May, 2018 1:01 PM

केरल के बाद हिमाचल में निपाह वायरस की आशंका, स्कूल में मरे मिले कई चमगादड़

नाहन। केरल में निपाह वायरस से 11 से ज्यादा लोगों की मौत होने के बाद केरल समेत पूरे देश में ‘निपाह वायरस’ को लेकर भय बना हुआ है। नीपाह वायरस को लेकर दिल्ली-एनसीआर समेत जम्मू-कश्मीर, गोवा, राजस्थान, गुजरात और तेलंगाना में अलर्ट जारी कर दिया गया है। वहीं अब हिमाचल प्रदेश में एक दर्जन से ज्यादा मरे हुए चमगादड़ मिलने से सनसनी मच गई है।

खबर है कि हिमाचल के नाहन की पंचायत बर्मापापड़ी के एक सीनियर सेकंडरी स्कूल के प्रांगण में 18 चमगादड़ मरे हुए पाए गए हैं, बताया जा रहा है कि ये चमगादड़ बीते काफी सालों से यहां के पेड़ों पर रहते थे, ये कभी किसी को परेशान नहीं करते थे लेकिन अचानक से बुधवार को यहां डेढ़ दर्जन चमगादड़ों की मौत हो गई, जिसे देखकर लोग भयभीत हो गए।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, पशुपालन विभाग और वन विभाग की टीम ने मृतक चमगादड़ों के सैंपल लेकर जांच के लिए भेज दिए गए हैं। इनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत की वजह का खुलासा हो पाएगा।

जिला मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी संजय शर्मा ने कहा, हर साल इस इलाके में बड़ी संख्या में चमगादड़ दिखते हैं. वैसे इस बार इनकी संख्या कुछ ज्यादा ही थी। उन्होंने कहा, स्कूल के प्रिंसिपल और छात्रों ने बताया कि हर साल चमगादड़ आते हैं और इस तरह की घटना भी हर साल ही होती है. हालांकि, इस साल उनकी संख्या काफी ज्यादा है।

उन्होंने आगे कहा, हमने स्कूल के टीचर और छात्रों को वायरस के बारे में जानकारी दे दी है। हमने किसी भी तरह के फिजिकल कॉन्टेक्ट से उन्हें स्पष्ट मना कर दिया है। स्कूल की प्रिंसिपल सुपर्णा भारद्वाज ने कहा, निपाह वायरस की वजह से इस पूरे मामले में लोग डर गए थे। छात्रों को निपाह वायरस के बारे में पूरी जानकारी दे दी गई है।

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लोगों के दहशत को देखते हुए वन विभाग के डीसी ललित जैन ने लोगों से अपील की वो परेशान या भयभीत ना हो क्योंकि चमगादड़ों की मौत के बाद इस क्षेत्र में ‘निपाह वायरस’ के फैलने की संभावना ना के बराबर है क्योंकि चमगादड़ों के मरने के बाद संक्रमण फैलने की संभावना नहीं पाई गई है। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि गर्मी के कारण चमागादड़ों की मौत हुई हो।

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देवघर : मधुपुर नगर परिषद अध्यक्ष लतिका मुर्मू और उपाध्यक्ष जियाउल हक हुए सख्त

कहा नहीं बनेगी सड़क, जनता के पैसे का होता है दुरुपयोग। पूर्व नप अध्यक्ष द्वारा कराया गया था टेंडर

NewsCode Jharkhand | 24 May, 2018 12:56 PM

देवघर : मधुपुर नगर परिषद अध्यक्ष लतिका मुर्मू और उपाध्यक्ष जियाउल हक हुए सख्त

देवघर । मधुपुर नगर परिषद के वार्ड नंबर 12 में पीसीसी सड़क का टेंडर पूर्व नप अध्यक्ष द्वारा कराया गया था जबकि सड़क की स्थिति बिल्कुल सही है। आज फिर से शिलापट लगाकर विधिवत आधारशिला रखा गया था और सड़क बनाने का काम शुरू होना था।

नवनिर्वाचित नप अध्यक्ष लतिका मुर्मू ओर उपाध्यक्ष जियाउल हक द्वारा इसका विरोध किया गया और काम को बंद करा दिया गया। वही इनका कहना है कि मधुपुर की शहर के सौंदर्यीकरण के लिए प्लान बनाया गया है और जहां जर्जर सड़क है वहां कालीकरण किया जाएगा । फिजूल में सड़क पर सड़क नही बनने दिया जाएगा।

जिस सड़क की स्थिति बिल्कुल सही है उसमें सड़क पर सड़क बना कर जनता के पैसे का दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा। वही स्थानीय लोग भी सड़क पर सड़क बनाने का विरोध किया। शिलापट लगा का लगा ही रह गया और नप अध्यक्ष लतिका मुर्मू ओर उपाध्यक्ष जियाउल हक द्वारा काम बंद करा दिया गया ।

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चाईबासा : जिले में 13 फीसदी बच्चे अति गंभीर कुपोषण का शिकार

NewsCode Jharkhand | 24 May, 2018 12:48 PM

चाईबासा : जिले में 13 फीसदी बच्चे अति गंभीर कुपोषण का शिकार

केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग और यूनिसेफ की संयुक्त टीम ने प. सिंहभूम जिले का किया दौरा

चाईबासा (पश्चिमी सिंहभूम)। केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग और यूनिसेफ की संयुक्त टीम पश्चिमी सिंहभूम जिला के दौरे पर है। केंद्रीय और यनिसेफ की एक टीम सारंडा के विभिन्न गांवों का दौरा कर रही है तो दूसरी टीम सदर अस्पताल के कुपोषण उपचार केंद्र का निरीक्षण कर रही है। टीम मुख्य रूप से जिले में कुपोषित बच्चों के उपचार, रख-रखाव और उनके स्वास्थ्य का डाटा तैयार कर रही है। अपने दौरे के क्रम में टीम के अधिकारियों ने कुपोषण उपचार केंद्र के डाक्टर, नर्स और अन्य कर्मियों को कई दिशा -निर्देश भी दिए।

चाईबासा कुपोषण उपचार केंद्र में इलाजरत बच्चों को देखने के बाद टीम संतुष्ट दिखी, लेकिन उपचार केंद्र से जाने के बाद कुपोषित बच्चों के मां से सप्ताह में एक बार बच्चे के स्वास्थ्य की जानकारी लेकर डाटा तैयार करने का निर्देश दिया।

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वहीं सारंडा का दौरा कर रही टीम गांवों के आंगनबाडी केंद्रों में बच्चों के रहन-सहन, खाने-पीने और परिवेश का जानकारी हासिल कर रही है। गौरतलब है कि प सिंहभूम जिला में 1 से पांच साल के बच्चों की कुल संख्या का 13 फीसदी बच्चे अति गंभीर कुपोषण का शिकार है, जबकि हजारों की संख्या में बच्चे कुपोषण से ग्रसित है।

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कुपोषण के कारण जिले बच्चों का मानसिक, शारीरिक और बौद्धिक विकास रूक गया है। केंद्र और राज्य सरकार  इसे गंभीरता से लेते हुए जिले में कुपोषित बच्चों को बचाने की अपनी मुहिम तेज कर दी। कुपोषण के लिए अलग से फंड जारी किया गया। केंद्र और युनिसेफ टीम का दौरा इसी क्रम का हिस्सा है।

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