रांची : विद्यार्थी परिषद ने परीक्षा नियंत्रक कक्ष में की तालाबंदी

NewsCode Jharkhand | 15 March, 2018 8:14 PM
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रांची। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद रांची महानगर के सदस्‍यों ने गुरूवार को परीक्षा नियंत्रक कक्ष में तालाबंदी की। उन्‍होंने रांची विश्वविद्यालय के वर्तमान परीक्षा नियंत्रक डॉ आशीष झा के कार्यकाल में बार-बार परीक्षा के सवाल सिलेबस से बाहर से पूछे जाने का आरोप लगाया। इसके विरोध में तालाबंदी की। प्रदेश सह मंत्री आशुतोष सिंह के नेतृत्व में विभिन्न मांगों को लेकर कार्यकर्ता परीक्षा नियंत्रक से 12 बजे मिलने गए थे।

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हालांकि 12 बजे से तीन बजे तक नहीं परीक्षा नियंत्रक मिलने नहीं आए। विश्वविद्यालय का कोई अन्य पदाधिकारी मिलने आया। इससे कार्यकर्ता नाराज हो गए। इसके बाद परीक्षा नियंत्रक कक्ष में तालाबंदी की। अभाविप के विभाग संयोजक मोनू शुक्ला ने कहा कि वर्तमान परीक्षा नियंत्रक के कार्यकाल में हर परीक्षा में सवाल सिलेबस के बाहर से पूछे गए हैं।

इसके कारण छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। कभी प्रश्‍न पत्र की प्रतियां कम पड़ जाती है, तो कभी छाया प्रति देकर काम चलया जाता है। अभाविप ने प्रश्न पत्र में गड़बड़ी के लिए दोषी प्राध्यापक पर करवाई करते हुए उन्हें तत्काल निलंबित करने की मांग की।

प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य आकाश सिंह राजपूत ने कहा कि परीक्षा नियंत्रक की लचर कार्यशैली के कारण आज बीएड आदि परीक्षाओं के परीक्षाफल के प्रकाशन में भी देरी हो रही है। इससे विश्वविद्यालय का सत्र धीमा चल रहा है। कई छात्र इससे अन्य विश्वविद्यालयों या कॉलेजों  में नामांकन से वंचित हो जाते हैं। उन्‍होंने परीक्षा नियंत्रक को तत्काल बर्खास्त करने की मांग की।

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झरिया : “इंटरनेट के चीजों” विषय पर कार्यशाला आयोजित

NewsCode Jharkhand | 23 June, 2018 10:35 AM
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झरिया (धनबाद) । “इंटरनेट के चीजों” विषय पर, एनकेएन (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग) के माध्यम से एनआईटी पटना और एनआईटी वारंगल के सहयोग से बीआईटी सिंदरी, धनबाद द्वारा संकाय विकास कार्यक्रम आयोजित किया गया है।

बीआईटी सिंदरी के 20 संकाय इस कार्यक्रम में भाग लिया और उन्होंने हमें बताया है कि इस कार्यक्रम से उन्होंने कई नई चीजें सीखी हैं और वे कॉलेज में आईओटी की उच्च गुणवत्ता वाली प्रयोगशाला स्थापित करने में सक्षम हैं।

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निदेशक बीआईटी ने कहा है कि यह कार्यक्रम सभी के लिए फायदेमंद है क्योंकि यह है नवीनतम तकनीक और हमें बीआईटी सिंदरी में इस कोर्स को करने के लिए अवसर मिला है जो अब भारत सरकार के ई और आईसीटी अकादमी का हिस्सा है।

उन्होंने इस कार्यक्रम के लिए भारत सरकार की भी सराहना की है। बीआईटी सिंदरी प्रोफेसर राजीव रंजन और प्रोफेसर रघुनाथन ने समन्वयक के रूप में कार्य करने की सराहना की और बताया कि भविष्य में ऐसा कार्यक्रम बीआईटी सिंदरी में किया जाएगा।

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दिल्ली में 14,000 से ज्यादा पेड़ों की कटाई के विरोध में ‘आप’ का चिपका आंदोलन

NewsCode | 24 June, 2018 7:54 PM
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नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पुनर्विकास के नाम पर 14 हजार से ज्यादा पेड़ काटने का विरोध तेज हो गया है। आम लोगों के साथ अब आम आदमी पार्टी भी इसके खिलाफ उतर आई है। आज रविवार को सरोजिनी नगर में पार्टी ने एक बड़े चिपको आंदोलन का आयोजन किया। सोशल मीडिया में #DelhiChipkoAndolan लगातार ट्रेंड कर रहा है।

दिल्ली सरकार में ‘आप’ के मंत्री इमरान हुसैन ने कई विधायकों, पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों के साथ मिलकर पेड़ों से चिपककर विरोध-प्रदर्शन किया। लोग हाथ से लिखे पोस्टर के साथ पेड़ों को बचाने की अपील करने के लिए वहां पहुंचे थे।

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन ने केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप पुरी से इस प्रोजेक्ट को किसी दूसरे जगह शिफ्ट करने की अपील की।

वहीं, पार्टी के विधायक सौरभ भारद्वाज ने कहा कि, “जब सारी जनता , दिल्ली सरकार और केन्द्र सरकार पेड़ों के बारे में इतनी चिंतित है तो केन्द्र सरकार प्रोजेक्ट बंद कर दे। अब कोई पेड़ ना काटा जाए”

बता दें कि सरोजिनी नगर में शनिवार को भी पेड़ काटने के विरोध में कुछ स्थानीय लोगों और युवाओं ने पेड़ से चिपककर उसे बचाने की अपील की।उनका कहना था कि सुंदर नगर में पेड़ कट चुके हैं। अब सरोजिनी नगर व आरकेपुरम में इन्हें काटा जाना है। हम इसका विरोध कर रहे है। सभी ने कहा कि प्रदूषण मुक्त दिल्ली का नारा पेड़ काटने से पूरा नहीं होगा।

क्या है पूरा मामला ?

दरअसल, केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने दक्षिणी दिल्ली में स्थित सात सरकारी आवसीय कॉलोनियों के पुनर्विकास का प्रस्ताव बनाया था। केंद्र सरकार की कैबिनेट इस पुनर्विकास प्लान को वर्ष 2016 में ही मंजूरी दे चुकी है। इसके तहत ही दक्षिणी दिल्ली में स्थित किदवई नगर में 1123, नेताजी नगर में 2294, नैरोजी नगर में 1454, मोहम्मदपुर में 363 और सरोजनी नगर में 11 हजार से अधिक पेड़ काटे जाने हैं। नैरोजी में पेड़ों की कटाई भी शुरू हो चुकी है। अब इन पेड़ों की कटाई का विरोध शुरू हो गया है। हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि वह जितने पेड़ काटेंगे उससे दोगुना पौधे लगाएं जाएंगे। पूरा पुनर्विकास प्लान ग्रीन प्रोजेक्ट होगा।

1973 में पहली बार हुआ था चिपको आंदोलन

चिपको आंदोलन की शुरुआत उत्तराखंड के चमोली में वर्ष 1973 में हुई थी। तब ग्रामीण किसानों ने राज्य के वन ठेकेदारों द्वारा वनों और जंगलों को काटने के विरोध में चिपको आन्दोलन चलाया था। चिपको आंदोलन का सीधे-सीधे अर्थ है किसी चीज से चिपककर उसकी रक्षा करना। जब यह आंदोलन वहां पर चल रहा था, तब वनों की कटाई को रोकने के लिए गांव के पुरुष और महिलाएं पेड़ों से लिपट जाती थीं और ठेकेदारों को पेड़ नहीं काटने देती थी। इस आंदोलन में महिलाओं की संख्या अधिक होती थी।

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इस आंदोलन को चंडीप्रसाद भट्ट, गौरा देवी और ग्रामीणों ने मिलकर अंजाम दिया था। बाद में प्रसिद्ध पर्यावरण प्रेमी सुन्दरलाल बहुगुणा ने आगे बढ़ाया। आंदोलन को सम्यक जीविका पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है। जिस समय यह आन्दोलन चल रहा था, उस समय केंद्र की राजनीति में भी पर्यावरण एक एजेंडा बन गया था। इस आंदोलन को देखते हुए तत्कालीन केंद्र सरकार ने वन संरक्षण अधिनियम बनाया।

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धनबाद : झरिया के अस्तित्‍व को बचाने के लिए फिर होगा आंदोलन

NewsCode Jharkhand | 24 June, 2018 7:48 PM
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झरिया को उजाडने की सरकारी मंसूबे को जनता कामयाब नहीं होने देगी

धनबाद (झरिया)। झरिया के अस्तित्व को बचाने के लिए एक बार फिर आंदोलन होगा। इसबार आंदोलन की मुख्‍य भूमिका में पूर्व मंत्री समरेश सिंह रहेंगे। आंदोलन की रुपरेखा तैयार करने के बावत आज झरिया प्रेस क्लब में समरेश सिंह की अगुवाई में बैठक हुई जिसमें पूर्व में हो चुके झरिया आंदोलन से जुड़े कई लोगों ने भाग लिया।

बैठक में निर्णय लिया गया कि झरिया को बचाने के लिए यह आखिरी आंदोलन होगा। इस आंदोलन में झरिया की जनता पूरी ईमानदारी से लड़ेगी।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि बंद आर एस पी कॉलेज को उसी जगह चालू किया जाएगा जहां वह है। इसके लिए कोर्ट जाना पड़े या कहीं और लेकिन बंद कॉलेज को खुलवाया जाएगा। बैठक में भाग ले रह लोगों ने एकसुर से कहा कि केंद्र व राज्य सरकार झरिया के अस्तित्व को खत्म करना चाहती है जिसे यहां की जनता सफल नहीं होने देगी।

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