रांची : गजब का नंबर प्लेट है इस गाड़ी का

NewsCode Jharkhand | 5 April, 2018 1:27 PM

रांची : गजब का नंबर प्लेट है इस गाड़ी का

रांची। लोगों की रचनात्‍मकता का कहने ही क्‍या। अक्‍सर जगह-जगह यह देखने को मिल जाता है। पर गाड़ियों के नंबर प्‍लेट पर दिखाना थोड़ा अजीब लगता है।

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रांची की सड़क पर ही कई बार यह नजारा देखने को मिल जाता है। ऐसा ही एक गाड़ी का नंबर प्‍लेट बुधवार को हरमू रोड में दिखा। यहां से गुजर रहे एक काले रंग की महिंद्रा एक्सयूवी कार के नंबर प्‍लेट की जगह एक कोटेशन लिखा था। इस फोटो को गौर से देखने पर आपको भी पता चलेगा।

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अजब-गजब : यहाँ 700 साल पुराने बरगद के पेड़ का हो रहा इंसानी इलाज

NewsCode | 19 April, 2018 12:43 PM

अजब-गजब : यहाँ 700 साल पुराने बरगद के पेड़ का हो रहा इंसानी इलाज

नई दिल्ली। तेलंगाना के महबूबनगर जिले में स्थित बरगद का एक पेड़ दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बरगद का पेड़ माना जाता है। इस 700 साल पुराने बरगद के पेड़ का अस्तित्व संकट में है और इसे बचाने के लिए जद्दोजहद तेज हो चुकी है। अब इसे सलाइन ड्रिप चढ़ाकर फिर से जीवित करने के लिए यह कोशिश की जा रही है। वनस्पति विज्ञानी इस पेड़ को केमिकल की ड्रिप चढ़ा रहे हैं।

मीडिया में आई खबरों के मुताबिक इसकी शाखाओं में कीड़े लग चुके हैं। पेड़ पर दीमक का प्रकोप इतना है कि वह इसे खोखला किए जा रहे हैं।। ऐसे में कीटनाशक केमिकल से भरी सैकड़ों बोतलें पेड़ पर लटकाई गई हैं। इंजेक्शन के जरिए इस केमिकल को शाखाओं और तनों में पहुंचाया जा रहा है ताकि यहां पनप रहे कीड़ों को खत्म किया जा सके।

बता दें कि सैकड़ों साल पुराना यह पेड़ महबूब नगर के पिल्लामर्री इलाके में है। यह पेड़ तीन एकड़ जमीन पर फैला हुआ है। माना जा रहा है कि यह दुनिया का दूसरा सबसे विशालकाय पेड़ है। इस पेड़ की लोकप्रियता इतनी ज्यादा है कि इसे देखने के लिए दूर-दूर से सैलानी आते हैं। लेकिन पेड़ की सेहत खराब होने कारण दिसंबर से पर्यटकों का आना-जाना प्रतिबंधित किया जा चुका है। स्थानीय मीडिया के अनुसार, कीड़ों से प्रभावित होने के कारण इसी शाखाएं अचानक टूटकर गिर रही थीं जिससे यहां लोगों को आने से मना कर दिया गया था।

तने से केमिकल डालने पर नहीं हुआ फायदा

पेड़ का इलाज करने के लिए पहले इसके तने में केमिकल डाला गया लेकिन इससे कुछ खास फायदा नहीं हुआ। फिर वन विभाग ने फैसला लिया कि जिस तरह अस्पताल में मरीज को सलाइन में दवा मिलाकर बूंद-बूंद चढ़ाई जाती है वैसे ही पेड़ में बूंद-बूंद करके सलाइन की बोतल से केमिकल चढ़ाया जाए।

बूंद-बूंद चढ़ाई जा रही ड्रिप

अधिकारियों ने सलाइन ड्रिप में केमिकल मिलाया। इस तरह से सैकड़ों बोतलें तैयार की गईं। इन बोतलों को पेड़ में हर दो मीटर की दूरी पर लटकाया गया। उसके बाद पेड़ में बूंद-बूंद करके यह ड्रिप चढ़ाई जा रही है। पेड़ की जो तस्वीरें सामने आई हैं उन्हें देखकर ऐसा लग रहा है कि जैसे अस्पताल में किसी आदमी का इलाज किया जा रहा हो।

World's second largest banyan tree put on saline drop in Telangana mahabubnagar district| NewsCode - Hindi News

3 एकड़ में फैला है यह विशालकाय पेड़

महबूबनगर जिला वन अधिकारी चुक्का गंगा रेड्डी के मुताबिक पेड़ इतना बड़ा है कि यह लगभग तीन एकड़ जमीन पर फैला है। पेड़ को बचाने के लिए उन लोगों ने विशेषज्ञ और आईएफएस ऑफिसर रहे मनोरंजन भंजा की सलाह ली। पेड़ को बचाने के लिए तीन तरह से इलाज और संरक्षण शुरू किया गया। पेड़ में बने छेदों में केमिकल डाला गया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। बाद में सलाइन ड्रिप से केमिकल चढ़ाया जाना शुरू किया गया। अब यह फॉर्म्युला काम कर रहा है।

तीन तरीकों से चल रहा इलाज

पहले तरीके से संरक्षण करने के लिए पेड़ में सलाइन चढ़ाया जा रहा है। दूसरा पेड़ के जड़ों में केमिकल डायल्यूटेड पानी डाला जा रहा है। वहीं तीसरा तरीका पेड़ को सपॉर्ट के लिए अपनाया गया है। उसके आस-पास से कंक्रीट का स्ट्रक्चर बनाया गया है ताकि उसके भारी शाखाएं गिरने से बच सकें। पेड़ के तने को बचाने के लिए उसे पाइप्स और पिलर्स का सहारा दिया गया है।

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अधिकारी खुद कर रहे निगरानी

दिसंबर के महीने तक यह पेड़ पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र था। यहां दूर-दूर से पर्यटक पेड़ को देखने आते थे। तब इसकी देखभाल का जिम्मा पर्यटन विभाग को था। पर्यटन विभाग का करना है कि उन्होंने पेड़ के संरक्षण के लिए तमाम प्रयास किए लेकिन कोई भी प्रयोग उसे दीमकों से बचाने में सफल नहीं रहा।

वन विभाग ने इस पेड़ के संरक्षण की जिम्मेदारी वापस ले ली और अब इसके जीर्णोद्धार के लिए काम हो रहा है। जिलाधिकारी रोनाल्ड रॉस ने बताया कि वह व्यक्तिगत तौर पर इस संरक्षित पेड़ के इलाज की निगरानी कर रहे हैं। अब पेड़ की हालत स्थिर है। उम्मीद है कि उसे कुछ ही दिनों में सामान्य कर लिया जाएगा। उच्चाधिकारियों से बात के बाद यहां पर्यटकों का आना फिर से शुरू किया जाएगा।

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हिंदुओं को ये मुस्लिम सोसायटी ब‍िना क‍िसी ब्‍याज के दे रही कर्ज

NewsCode | 17 April, 2018 7:02 AM

हिंदुओं को ये मुस्लिम सोसायटी ब‍िना क‍िसी ब्‍याज के दे रही कर्ज

पटना| मुसलमान बिरादरी में भाईचारा व सामूहिकता आम बात है मगर मुस्लिम समुदाय के संगठनों द्वारा हिंदुओं के जीवन में बदलाव लाने की मिसालें निस्संदेह बदले हुए समाज में सांप्रदायिक सद्भाव को मजूबती प्रदान करती है। ऐसी ही एक मिसाल बिहार के पटना में देखने को मिली, जहां मुस्लिम को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटी ने ब्याजमुक्त कर्ज देकर हजारों हिंदू परिवार के जीवन में बदलाव लाया है।

कमला देवी, पंकज कुमार, गीता देवी और संजय सिंह उन्हीं परिवारों से आते हैं जिनको अलखर को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटी लिमिटेड ने रोजी-रोटी के लिए अपना कारोबार खड़ा करने के लिए ब्याजमुक्त ऋण प्रदान किया। करीब 9,000 हिंदुओं को इस सोसायटी ने कारोबार खड़ा करने के लिए ऋण प्रदान किया है। इनमें में ज्यादातर लोग वेंडर, छोटे कारोबारी, पटरियों पर दुकान चलाने वाले, सीमांत किसान और महिलाएं हैं।

पटना के मिरशिकर टोली में दुकान चलाने वाली कमला ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “मैं सड़क किनारे पटरियों पर आलू और प्याज बेचती थी। इसके लिए 2,000 से 5,000 रुपये साहूकारों से सूद पर कर्ज लेती थी और उनके कर्ज तले हमेशा दबे रहती थी। लेकिन कुछ साल पहले जब मुझे किसी ने कहा कि अल खर सोसायटी बिना ब्याज के ऋण देता है तो हैरान हो गई।”

दुकान चलाने के लिए उसने सबसे पहले सोसायटी से 10,000 रुपये कर्ज लिया। उसके बाद उसने सोसायटी से 20,000 रुपये से 50,000 रुपये तक ऋण लिया।

कमला ने कहा, “सोसायटी से कर्ज लेकर मैंने छोटे से खोमचे की दुकान से अपना कारोबार बढ़ाकर थोक की दुकान खोल ली।”

कमला के पास अब इतने पैसे हैं कि वह अपने दो बेटों की पढ़ाई की व्यवस्था खुद कर पा रही है। उसका एक बेटा इंजीनिरिंग कॉलेज में पढ़ता है और दूसरा बीएड कर रहा है।

अल खर सोसायटी ने पिछले एक दशक में इस्लामिक मूल्यों का पालन करते करीब 20,000 लोगों को 50 करोड़ रुपये का कर्ज प्रदान किया है। इनमें ज्यादातर वे लोग शामिल हैं जो रोजी-रोटी चलाने के लिए संघर्ष कर रहे थे।

सोसायटी के लाभार्थियों में तकरीबन 50 फीसदी हिंदू हैं। जाहिर है कि अलखर धार्मिक भेदभाव से ऊपर उठकर जरूरतमंदों की मदद करता है।

कमला की तरह गीता देवी ने भी सड़क किनारे सब्जियों की अपनी छोटी दुकान की जगह अब बड़ी सी दुकान खोल ली है। उसने अपने बेटे को भी सब्जी की एक दुकान खुलवा दिया है।

गीता ने बताया, “अल खर सोसायटी के संपर्क में आने के बाद मेरी जिंदगी बदल गई। इसने हमें सम्मान की जिंदगी जीने में मदद की। हमारे जैसे गरीब लोगों के लिए ब्याजमुक्त कर्ज भगवान का वरदान ही है। यहां बैंकों की तरह कर्ज मिलने की कोई अनिश्चिता नहीं होती है।”

मंजू देवी ने पिछले पांच साल में अपने बच्चों की सालाना फीस भरने के लिए अलखर से 20,000 रुपये कर्ज लिया। उसके पति सड़क किनारे दुकान चलाते हैं।

कमला ने कहा कि वह अपनी कमाई में से कुछ पैसे किस्त के रूप में अल खर सोसायटी को भुगतान करती है जिससे कर्ज उतर जाए।

संजय सिंह ने कहा कि छोटी दुकान करने वालों को कर्ज देने में बैंकों की कोई दिलचस्पी नहीं होती है। उन्होंने कहा, “बैंक कर्ज पर ब्याज तो लेता ही है। साथ ही, कर्ज लेने के लिए इतने सारे दस्तावेज भरने की जरूरत होती है कि गरीब आदमी परेशान हो जाता है।” संजय के पास कपड़े की छोटी सी दुकान है, जो उनकी पत्नी चलाती है और वह साइकिल पर घूम-घूम कर कपड़े बेचते हैं।

अलखर सोसायटी से करीब एक दशक से जुड़े अवकाश प्राप्त बैंक अधिकारी शमीम रिजवी ने बताया, “ब्याजमुक्त कर्ज भले ही मुस्लिम परंपरा हो क्योंकि इस्लाम में ब्याज को अनुचित माना जाता है। मगर यह (अलखर) न सिर्फ मुस्लिम बल्कि सबको ब्याजमुक्त कर्ज देता है।”

अलखर सोसायटी के प्रबंध निदेशक नैयर फातमी ने आईएएनएस को बताया कि ब्याजमुक्त कर्ज की आमपसंदी बढ़ रही है।

उन्होंने कहा, “जिनकी पहुंच बैंक तक नहीं हो पाती है उनके लिए पांच से 10,000 रुपये की छोटी रकम भी काफी अहम होती है। ब्याजमुक्त कर्ज पाने वाले लोगों में करीब 50 फीसदी हिंदू हैं। ज्यादातर लोग अपनी रोजी-रोटी चलाने के लिए कर्ज लेते हैं जिससे उनका सशक्तीकरण हो रहा है।”

अलखर सोसायटी ब्याजमुक्त कर्ज प्रदान करने वाली एक सफल माइक्रोफायनेंस संस्था की मिसाल है, जिसने हजारों लोगों के चेहरों पर मुस्कान लाई है। सोसायटी ने छोटी सी निधि से काम शुरू किया था और इसके पास शुरुआत में पटना स्थित एक छोटे से दफ्तर में सिर्फ दो कर्मचारी थे। मगर आज संस्था में 100 कर्मचारी काम करते हैं।

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इन कर्मचारियों के वेतन, दफ्तर का किराया और अन्य खर्च के लिए यह कर्ज लेने वालों से नाममात्र का सेवा प्रभार लेता है।

मुस्लिम समुदाय के कुछ पढ़े-लिखे लोगों के साथ वर्ष 2000 के आरंभ में इस संगठन की नींव पड़ी थी। संगठन का मकसद धर्म, जाति और वर्ग की परवाह किए बगैर जरूरतमंद लोगों को आर्थिक मदद करना था।

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(यह साप्ताहिक फीचर श्रंखला आईएएनएस और फ्रैंक इस्लाम फाउंडेशन की सकारात्मक पत्रकारिता परियोजना का हिस्सा है।)

 आईएएनएस

दिल्ली : 6 महीने से AIIMS में फर्जी डॉक्टर बनकर घूमता रहा बिहार का अदनान, इस तरह चढ़ा पुलिस के हत्थे

पुलिस ने जब इस फर्जी डॉक्टर को पकड़ा तो वह भी उसकी जानकारी देखकर दंग रह गई क्योंकि उसकी दवाईयों और डॉक्टरों के नामों की काफी बढि़या जानकारी थी।

NewsCode | 16 April, 2018 7:31 PM

दिल्ली : 6 महीने से AIIMS में फर्जी डॉक्टर बनकर घूमता रहा बिहार का अदनान, इस तरह चढ़ा पुलिस के हत्थे

नई दिल्ली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में एक 19 वर्षीय युवक छह महीनों से अपनी असली पहचान छिपा कर फर्जी डॉक्टर बन घूमता रहा। लेकिन किसी को इस बात की भनक तक नहीं लगी। इतना ही नहीं, वह खुद को डॉक्टर बताकर तमाम मेडिकल कार्यक्रमों और सेमिनारों में भी हिस्सा लेता था और मेडिकल साइंस के कई छात्रों और उनसे संबंधित विभागों में उसने अपनी दोस्ती-यारी भी बढ़ा रखी थी। शनिवार (14 अप्रैल) को दिल्ली पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया है। पुलिस ने जब इस फर्जी डॉक्टर को पकड़ा तो वह भी उसकी जानकारी देखकर दंग रह गई क्योंकि उसकी दवाईयों और डॉक्टरों के नामों की काफी बढि़या जानकारी थी।

पुलिस ने कहा कि यह बात अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाई है कि फर्जी डॉक्टर बने इस युवक को यह सब क्यों करना पड़ा। एक तरफ तो वह कह रहा है कि उसकी बहन भी एम्स में भर्ती है और उसका ब्लड कैंसर का इलाज चल रहा है। बहन को ज्यादा मदद मिले इसलिए उसको फर्जी डॉक्टर बनने का आईडिया आया था। वहीं, दूसरी तरफ वो यह भी कह रहा था कि उसको डॉक्टरों के साथ समय बिताना पसंद है और उन्हीं की तरह बनना चाह रहा है।

बता दें कि आरोपी की पहचान मूलरूप से बिहार निवासी अदनान खुर्रम के रूप में हुई है। लेकिन अस्पताल में वह अपना नाम खुर्शीद बताता था। अदनान फिलहाल दिल्ली में जामिया नगर के पास बाटला हाउस में रहता है। आरोपी के बारे में एम्स रेसिडेंट डॉक्टर्स ने बताया कि आरोपी के पास डॉक्टरों को जारी की जाने वाली एक खास डायरी भी थी। चूंकि खुर्रम पूछताछ में बार-बार अपने बयान बदल रहा है, लिहाजा अभी तक मामले के पीछे की सच्चाई सामने नहीं आ सकी है।

ऐसे पकड़ी गयी चोरी

शनिवार को डॉक्टरों ने मैराथन का आयोजन किया था, जिसमें कुछ डॉक्टरों से पहचान-पत्र दिखाने के लिए कहा गया था। खुर्रम उन्हीं में से था, जो अपना पहचान पत्र नहीं दिखा सका, जिसके बाद उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया था। पुलिस का कहना है कि खुर्रम के खिलाफ आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। सोशल मीडिया पर खुर्रम ने लैब कोट पहने हुए अपनी ढेर सारी तस्वीरें डाल रखी थीं।

डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (दक्षिण) रोमिल बनिया ने कहा कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 419 और 468 के तहत उस पर हौज खास पुलिस थाने में मामला दर्ज हुआ है।

रेजिडेंस डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष हरजीत सिंह ने कहा कि खुर्रम उनकी गतिविधियों पर कुछ महीनों से लगातार नजर बनाए हुए थे। उनके अनुसार, वह हर वक्त लैब कोट पहनकर और स्टेथोस्कोप लेकर घूमता था। वह विभिन्न डॉक्टरों से अलग-अलग दावे करता था। एम्स में तकरीबन 2000 रेजिडेंस डॉक्टर हैं, लिहाजा उन्हें व्यक्तिगत स्तर पर एक-दूसरे को पहचानना बेहद कठिन है। खुर्रम ने बस इसी बात का फायदा उठाया।

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