रांची: परमहंस योगानंद के अध्यात्म का संदेश सभी धर्मां को सम्मान व विश्व बंधु का नजरिया देता है-राष्ट्रपति

ईश्वर-अर्जुन संवाद का लोकार्पण

NewsCode Jharkhand | 15 November, 2017 5:47 PM

रांची: परमहंस योगानंद के अध्यात्म का संदेश सभी धर्मां को सम्मान व विश्व बंधु का नजरिया देता है-राष्ट्रपति

रांची। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि हर व्यक्ति के मन में एक युद्ध चल रहा होता है, इस कुरूक्षेत्र की लड़ाई स्वयं लड़नी है और खुद ही जीतना है, क्या करना है, क्या नहीं करना है और जीतने के लिए विद्वता की नहीं, बल्कि विवेक की जरूरत होती है, यह विवेक केवल और केवल अध्यात्मिकता से ही आती है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद आज रांची में योगदा सत्संग आश्रम में योगदा सोसायटी ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित गॉड टू टॉक विद अर्जुन के हिन्दी संस्करण ईश्वर-अर्जुन संवाद के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि सभी योग की विभिन्न पद्धतियों से परिचित है और गीता का आचरण लोगों को तमाम झंझावात में भी स्थिरता प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि सफलता-असफलता और जय-पराजय सभी में गीता का संदेश महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया गया कि गीता का अंतिम श्लोक व्यक्ति के कौशल विकास और विजय सुनिश्चित करने में समन्वय के रास्ते को बताता है।

उन्होंने कहा कि रांची के योगदा सत्संग आश्रम के वातावरण और प्राकृतिक दृश्य में अनूठा मेल दिखता है।  यहां आने से पहले उनके मन में आया था कि योगदा सत्संग कोई छोटा से मंदिर होगा, मेडिएशन सेंटर या छोटा से कंपाउंड होगा, लेकिन यहां आने पर उन्हें स्वामीजी ने बताया कि 18-20 एकड़ में यह परिसर फैला है। इस परिसर में जिस वृक्ष के नीचे स्वामी का चित्र लगा है, वह भी अलौकिकता को लेकर करीब 100 वर्ष से खड़ा है।

राष्ट्रपति ने देश-विदेश से आये  योगदा सत्संग के सदस्यों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि परमहंस योगानंद द्वारा योग पर लिखित पुस्तक का प्रकाशन समयानुकूल है। उन्होंने बताया कि गीता से संबंधित एक अन्य कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए उन्हें आमंत्रण मिला है, कुरूक्षेत्र को गीता ज्ञान का केंद्र बताया जाता है और वहां 25 से 30 नवंबर तक एक सप्ताह तक अंतरराष्ट्रीय गीता ज्ञान महोत्सव में भाग लेने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने बताया कि 1995 में इस पुस्तक का अंग्रेजी, स्पेनिस, इटालियन समेत कई अन्य भाषाओं में प्रकाशन हो चुका है और अब हिन्दी में इसके प्रकाशन से लोगों को जीवनोयोगी ज्ञान मिल सकेगा, इसके लिए वे स्वामी नित्यानंद जी का आभार व्यक्त करते है।

उन्होंने बताया कि 1893 में जिस वर्ष शिकागो में स्वामी विवेकानंद ने अपने उदबोधन से भारतीय आध्यात्म से पश्चिमी सभ्यता को अवगत कराया, इसी वर्ष गोरखपुर में स्वामी परमहंस का जन्म हुआ। 1918 से 1920 तक स्वामी परमहंस ने रांची के इसी योगदा सत्संग आश्रम को अपनी कर्मभूमि बनाया, बाद में 1932 तक उन्होंने अमेरिका में क्रियायोग से लोगों को लाभाविंत कराया। उन्होंने बताया कि 1935 में वे फिर से भारत लौटे और इसी आश्रम से क्रियायोग का प्रसार किया। 1925 में इस आश्रम में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी भी आये थे। श्री कोविंद ने बताया कि  परमहंस योगानंद के अध्यात्म का संदेश सभी धर्मां को सम्मान और विश्व बंधु का नजरिया देता है।

एकदिवसीय झारखंड दौरे पर आये राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने योगदा सत्संग द्वारा गरीबों के कल्याण और समाज के अन्य क्षेत्रों में किये जा रहे कार्यां की सराहना की।  इस मौके पर राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू, मुख्यमंत्री रघुवर दास और योगदा सत्संग के कई स्वामी, राज्य सरकार के कई मंत्री, सांसद, विधायक और प्रबुद्ध जन उपस्थित थे।

जमशेदपुर : गर्मी में बिजली से शुरू की आंख मिचौली, लोगों ने किया प्रदर्शन

NewsCode Jharkhand | 24 April, 2018 10:09 PM

जमशेदपुर : गर्मी में बिजली से शुरू की आंख मिचौली, लोगों ने किया प्रदर्शन

चरमरा गयी है बिजली व्यवस्था

जमशेदपुर। प्रखंड इलाके में इन दिनों बिजली की स्थिति चरमराई हुई है। खासकर बाग़बेड़ा क्षेत्र में इन दिनों बिजली की समस्या गंभीर है। इसे दूर किये जाने की मांग को लेकर झामुमो प्रखंड कमिटी ने करणडीह स्थित विद्दुत विभाग कार्यालय पर प्रदर्शन किया। एक सप्ताह के भीतर समस्या सुलझाने को कहा।

झामुमो नेता बहादुर किस्को ने कहा कि क्षेत्र में बिजली की घोर समस्या है। बिजली के खम्बे कई क्षेत्रों में है ही नहीं। लकड़ी के बांस पर बिजली के तार लटके रहते हैं। भीषण गर्मी में क्षेत्र के लोगों को बिजली की आपूर्ति नहीं की जा रही है। लोग उबल रहे हैं।

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पूर्व में भी इसपर ध्यान देने की अपील की गई है, लेकिन उसका कोई लाभ नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में आंधी और तूफान का दौर शुरू होगा और इस दौरान बांस के सहारे लटके बिजली के तार टूटेंगे। इसे हादसा होने की संभावना है।

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जमशेदपुर : वन अधिकार कानून को लागू करने की मांग, सौंपा मांग पत्र

NewsCode Jharkhand | 24 April, 2018 10:03 PM

जमशेदपुर : वन अधिकार कानून को लागू करने की मांग, सौंपा मांग पत्र

जिला मुख्यालय वनाधिकार मंच का प्रदर्शन

जमशेदपुर। झारखण्ड वनाधिकार मंच और झारखण्ड मुक्ति वाहिनी ने वनाधिकार कानून को सख्ती से लागू करने को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने जिले के उपायुक्त के माध्यम से राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। साल 2006 का वन अधिकार कानून को पालन कराने पर जोर दिया गया है।

आपको बता दें की वर्ष 2006 में वन अधिकार कानून लाया गया था, और इसी को सख्ती से पालन किये जाने की मांग उठाई गई है।  प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वन क्षेत्र में जो भी लोग निवास करते है उन्हें इस कानून के तहत अधिकार है कि वो वन का संरक्षण करें और वन संसाधनों का उपयोग कर अपनी आजीविका चलायें। इसका पालन नहीं किया जा रहा है।  वन क्षेत्र में अगर कोई भी निर्माण कार्य किया जाये तो वहां के ग्रामसभा से इसे पारित करवाना होगा। लेकिन ऐसा नहीं किया जाता है।

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झारखण्ड वनाधिकार मंच और झारखण्ड मुक्ति वाहिनी के प्रतिनिधि ने कहा कि ये सभी चीजें तभी हो सकती है जब वनाधिकार अधिनियम को जिले में सख्ती से लागू करवाया जाये।  मांग पत्र के माध्यम कहा गया है कि वन क्षेत्र के लोगों को उनका अधिकार मिले और वनों का संरक्षण भी सुनिश्चित हो सके।

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जमशेदपुर : टाटा मोर्टस कानवाई चालकों ने किया प्रदर्शन, न्यूनतम मजदूरी की मांग

NewsCode Jharkhand | 24 April, 2018 9:55 PM

जमशेदपुर : टाटा मोर्टस कानवाई चालकों ने किया प्रदर्शन, न्यूनतम मजदूरी की मांग

प्रबंधन पर धमकाने का आरोप

जमशेदपुर। टाटा मोटर्स कानवाई चालकों ने न्यूनतम मजदूरी की मांग को लेकर जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। कई बार प्रदर्शन व अनशन के बाद इन्हें अब तक आश्वाशन ही मिला रहा। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकारी आदेश के बाद भी कंपनी प्रबंधन द्वारा इन्हें न्यूनतम वेतन नहीं दिया जा रहा है।

पिछले तीन वर्षों से कानवाई चालक प्रदर्शन, अनशन करते रहे लेकिन उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया। कंपनी प्रबंधन को सरकारी तौर पर न्यूनतम मजदूरी दिए जाने का सरकारी आदेश भी जारी हुआ। चालक कहते हैं कि इस आदेश को अब एक वर्ष बीत गए लेकिन कंपनी है कि न्यूनतम मजदूरी देने का नाम ही नहीं ले रही है।

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चालकों के अनुसार चालकों को प्रताड़ित किया जाता है। कोई आदेश का अवहेलना करता है तो उनपर मुकदमा चलाया जाता है।  उपायुक्त से मांग की गयी कि टाटा मोटर्स प्रबंधन के खिलाफ सरकारी आदेश को नहीं माने जाने का मामला दर्ज करें और उनपर कार्रवाई करें।

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