रांची : 65 फीट लम्बा रावण, 60फीट का कुंभकरण व 55फीट के मेघनाथ के पुतला दहन की तैयारी  

NewsCode Jharkhand | 27 September, 2017 8:07 PM
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रांची। राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान में 65फीट लम्बा रावण, 60फीट का कुंभकरण व 55फीट के मेघनाथ के पुतला दहन की तैयारी अंतिम चरण में है। इस बार पुतले को वाटरप्रूफ बनाया गया है, ताकि बारिश से कोई नुकसान नहीं हो सके। हर बार की तरह इस बार भी रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले को बनाने की जिम्मेवारी उन्हीं मुस्लिम कारीगरों पर है, जो खुद या उनके परिजन पुतला का निर्माण करते आये हैं।

बताया गया है कि विगत एक महीने से दिन-रात कर 20 कारीगरों की टीम इस कार्य में जुटी है, इनमें से 16 कारीगर मुस्लिम समुदाय के हैं और वे हिन्दू के पर्व में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निवर्हन कर अनोखो भाईचारा की मिसाल पेश कर रहे हैं।

1947 को जब देश का बंटवारा हुआ, तो पश्चिम पाकिस्तान से भारी संख्या में देश के विभिन्न शहरों में रिफ्यूजी कैंपों में शरणार्थियों को ठहराया गया। रांची तथा लोहरदगा में भी शरणार्थी शिविर बनाये गये। रांची में यह शरणार्थी शिविर रांची रेलवे स्टेशन जाने वाली सड़क पर खजुरिया तालाब के बगल में एमईएस के रेस्ट कैंप में था।

यहां नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर के बन्नू शहर से आये कई परिवारों को ठहराया गया। इन शरणार्थियों ने रांची में अपना पहला दहशरा मनाया और रावण दहन का आयोजन किया। समाज के मुखिया लाला खिलदा राम भाटिया ने अपने कुछेक सहयोगियों के साथ एक छोटे से रावण के पुतले का निर्माण कराया, जिसकी ऊंचाई 12 फुट थी। उस समय लाला कृष्ण लाल नागपाल, शादीराम भाटिया, कृष्ण लाल शर्मा, अमीरचंद सनीजा तथा अशोक नागपाल ने रावण के पुतले के निर्माण में अपनी भूमिका निभायी।

समाज के लोगों ने 2 से 3 सौ रुपये चंदा कर पुतले का निर्माण किया। शरणार्थी शिविर में आये सभी लोग शुरू-शुरू में बेकार थे, तब सभी शिविरों में सरकारी राशन मिलता था, वे वहीं खाते थे और जैसे-तैसे रावण का पुतला बना। पुतला बनने के बाद उस समय के डिग्री कॉलेज (बाद में रांची कॉलेज और अब रांची विश्वविद्यालय परिसर) में आसपास के दो-तीन सौ लोगों की मौजूदगी में रावण दहन किया गया। बन्नू समाज द्वारा रावण दहन का कार्यक्रम इसी मैदान में दो वर्षां तक चला। वर्ष 1949 में रावण के पुतले की लम्बाई(ऊंचाई) 18फुट थी। धीरे-धीरे आयोजन को देखने वालों की संख्या भी बढ़ती गयी।

बाद में 1950 से 1955 तक रावण दहन कार्यक्रम कचहरी रोड पर शिफ्टन पेवेलियन में संपन्न हुआ, क्योंकि डिग्री कॉलेज परिसर छोटा पड़ गया था और तब रावण के पुतले के निर्माण की लागत 15 से 18 हजार रुपये के बीच होने लगी।

इस बीच लाला खिलदा राम भाटिया के निधन के बाद दहशरे की कमान कृष्ण लाल नागपाल के हाथों में दी गयी। इनकी टीम खुद अपने हाथों से रावण के पुतलों का निर्माण करती थी। रावण के पुतले का निर्माण पहले रेस्ट कैंप और बाद में डोरंडा राममंदिर में किया जाने लगा। वहीं 1955 तक रावण का मुंह गणे का बना होता था, पर बाद में इसमें सुधार कर मानव मुखौटा बनाया जाने लगा।

निर्माण में खर्च बढ़ने के बाद बन्नूवाल समाज ने इसके निर्माण का भार पंजाबी हिन्दू बिरादरी के धीमान जी, लाल राधाकृष्ण बिरमानी, लाल ईश्वर दास आजमानी तथा लाला कश्मीरी लाल को सौंप दिया गया। तब से लेकर आज तक पंजाबी हिन्दू बिरादरी के पास से ही इसकी कमान है।

गिरिडीह : बिजली विभाग की लापरवाही से लाखों के बिजली उपकरण जल कर हुए खाक  

NewsCode Jharkhand | 21 September, 2018 7:23 PM
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गिरिडीहबिजली विभाग की लापरवाही जगजाहिर है। यहां लचर व्यवस्था का खामयाजा रह रह कर शहरवासियों को भुगतना पड़ता है। एक बार फिर शहर के बभनटोली स्थित गार्डेना गली के लोग विभाग के लापरवाह रुख से परेशन हो उठे।

बताया गया कि गुरुवार की सुबह जर्जर तार को बदलने के उद्देश्य से सामान्य के जगह केबल वायर लगाया लेकिन केबल वायर लगाने के लिए बहाल किये गए कार्य एजेंसी की नासमझी ने बिजली उपभोक्ताओं को मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान कर दिया।

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बताया जाता है कि गुरुवार  देर शाम को केबल वायर का कार्य संपादित होने के बाद जैसे ही विधुत प्रभावित की गयी तभी नए विधुतीकरण तारों में 440 वोल्ट की धारा प्रवाहित होने लगा। इस दौरान कई घरों के बिजली उपकरण जल गए। यह सिलसिला यही पर थमा नही देर रात 11 बजे भी फॉल्ट को दूर करने की बात कहकर पुनः विधुत प्रभावित की गई तो एक बार फिर घरो में लगे बिजली के उपकरण नष्ट होने लगे।

विद्युतीकरण में लगे कार्य एजेंसी को जब अपनी गलती का एहसास हुआ तो वह रातभर विधुत प्रभाव को संबंध विच्छेद कर दिया जिससे बभनटोली और गार्डेना गली के लोग रात भर अंधेरे में रहे।

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अगले दिन शुक्रवार को पुनः कार्य एजेंसी द्वारा  फॉल्ट नही पकड़े जाने की स्थिति में पुराने तार को ही मेन लाइन से जोड़ दिया गया।  यहां भी कमोवेश यही स्थिति रही और दोपहर को जैसे ही लाइन चालू हुआ घर मे बचे खुचे उपकरण भी कार्य एजेंसी की लापरवाही और नासमझी का भेंट चढ़ गया।

बताया जाता है कि  दो दिन में 3 बार 440 v. होने से करीब 250 घर की आबादी वाले घर मे लाखों रुपये के बिजली की उपकरण खराब हो गया है । घटना को  लेकर स्थानीय लोगों में विभाग के प्रति आक्रोश देखने को मिला रहा है। इस बाबत सीधे शब्दों में लोग इस घटना का जिम्मेदार विभागीय लोगों को ठहरा रहे  हैं।

बताया गया कि इलाके में बल्ब तो अनगिनत उड़े हैं।इसके आलावे  टीवी, फैन, एसी, फ्रिज, आदि घरेलू उपकरणों के जलने के भी मामले बारी बारी से आ रहे हैं। फिलहाल शहरी क्षेत्र के 27 नंबर वार्ड के गार्डेना गली और बभनटोली में अभी भी बिजली गुल है।

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जमशेदपुर : सफाई की बाट जोह रही कचरे से भरी स्वर्णरेखा नदी

NewsCode Jharkhand | 21 September, 2018 7:28 PM
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जमशेदपुर। जमशेदपुर शहर की जीवनरेखा स्वर्णरेखा नदी इन दिनों सफाई की बाट जोह रही है। नदी में चारों तरफ कचरे भरे पड़े हैं। लेकिन इसकी सफाई पर कोई ध्यान नहीं दे रहा।

वैसे पूूरे देश भर में स्‍वच्छता  पखवाड़ा चलाया जा रहा है, लेकिन इस जीवनरेखा  नदी के सफाई पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है।

चांडिल : डाकघर कर्मचारियों ने चलाया स्वच्छता अभियान

वैसे स्वर्णरेखा नदी जमशेदपुर के लिए लाइफ लाइन इसलिए है, क्योंकि पूरे शहर के लिए पानी का एक मात्र साधन यही नदी है, इतना ही नहीं टाटा कंपनी में भी पानी इसी नदी से पहुंचता है।

विसर्जन के बाद मूर्तियों के पड़े अवशेष

इस नदी का हाल इन दिनों खस्ता है। नदी की पानी फिलवक्त नदी का पानी इन दिनों न पीने लायक है और न ही नहाने लायक। पिछले दिनों हुए गणपति विसर्जन के बाद मूर्तियों के अवशेष पड़े हैं और इसकी सफाई की कोई व्यवस्था अब तक नहीं की गई है।

आलम ये हैं की पूरी नदी कचड़े से भर सा गया है। वैसे इन दिनों देश भर में स्वच्छता पखवाड़ा चलाकर साफ सफाई की जा रही है, लेकिन इस प्राणदायिनी नदी पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है।

नदी में आने वाले लोगों के अनुसार नदी का पानी इतना दूषित हो चुुका है कि ये न ही पीने लायक है और न ही नहाने लायक। अब सोचने वाली बात ये है कि जब नदी ही दूषित है, तो फिर स्वच्छता अभियान किस काम का।

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सिमडेगा : मुहर्रम का पर्व शांतिपूर्वक संपन्‍न, अखाड़ों ने दिखाए करतब

NewsCode Jharkhand | 21 September, 2018 7:27 PM
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सिमडेगा। मुहर्रम का पर्व शांतिपूर्वक संपन्‍न हो गया। सभी अखाड़ों ने भट्ठी टोली स्थित हारून रसीद चौक से सामूहिक रूप से मुहर्रम का जुलूस निकाला। लोग गाजे-बाजे के साथ इस्‍लामपुर स्थित हारून रसीद चौक पहुंचे। जुलूस के दौरान कई स्थानों पर शस्त्र-चालन का प्रदर्शन किया गया तथा कई करतब भी दिखाये। मुहर्रम के जुलूस से पूर्व गुलजार गली के सामने मुहर्रम समिति चर्च रोड के तत्वावधान में पगड़ी समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपायुक्त जटाशंकर चौधरी एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में एसपी संजीव कुमार सहित कई अधिकारी और गणमान्‍य लोग मौजूद थे।

सिमडेगा : मुहर्रम का पर्व शांतिपूर्वक संपन्‍न, अखाड़ों ने दिखाए करतब

गुमला से आये ताशा ग्रुप में शामिल मो. सद्दाम ने एक से बढ़ कर एक देश भक्ति गीतों से समां बांध दिया। उन्होंने कई देश भक्ति गीत के अलावा धार्मिक गीत भी प्रस्तुत किये। साथ ही ताशा पार्टी में शामिल कलाकारों ने ढोल-ताशे की धुन से लोगों को मंत्रमुग्‍ध कर दिया।

कोलेबिरा : सड़क निर्माण कंपनी के कैंप से 33 ड्राम अलकतरे की चोरी

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