रांची : मध्य विद्यालय पंडरा में योग समेत अन्‍य कार्यक्रमों का आयोजन

NewsCode Jharkhand | 19 May, 2018 7:24 PM
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रांची।  राजकीयकृत मध्य विद्यालय पंडरा में शनिवार को तीन महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का संगम आयोजित हुआ। विद्यालय प्रातःकालीन प्रार्थना सभा के बाद परिसर में योग एवं प्राणायाम आयोजित हुए। इसमें लगभग 800 छात्र छात्रायें, प्रबंधन एवं सरस्वती वाहिनी संचालन समिति के सदस्यों के अतिरिक्त सभी शिक्षक शिक्षिकाओं एवं कुछ अभिभावक भी सम्मिलित हुए।

कार्यक्रम में पंडरा पंचायत के मुखिया सुनील तिर्की एवं प्रतिनिधि अरुण तिवारी ने सामुदायिक सहभागिता का बेहतरीन उदाहरण पेश कर योगाभ्यास एवं प्राणायाम किया।  योगा के 90 मिनट के कार्यक्रम पूरे होने के उपरान्त परिसर में स्वच्छता सभा आयोजित की गई।

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इसमें मुखिया ने पंडरा परिक्षेत्र में स्वच्छता के लिए किये जा रहे सरकारी प्रयासों एवं जनसमुदाय की सक्रिय प्रतिभागिता तथा उनमें स्कूली बच्चों की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उपप्रधानमंत्री रंगोली गुप्ता द्वारा स्वछता पर स्वरचित उत्प्रेरक कविताएँ प्रस्तुत की गई। प्रिंसिपल अशोक प्रसाद सिंह द्वारा सभी उपस्थित छात्र छात्राओ एवं जनप्रतिनिधियों को स्वच्छता संकल्प एवं शपथ दिलाया गया।

मौके पर माह अप्रैल एवं मई महीने में विद्यालय में कुल 39 पठन पाठन के दिवसों में शत प्रतिशत उपस्थिति वाले 75 बच्चों का हौसलाफजाई किया गया एवं सभी विधाओं में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले विनीता कुमारी वर्ग 8ए एवं दुर्गेश प्रजापति वर्ग 5ए को अप्रैल एवं मई महीने का सर्वश्रेष्ठ विद्यार्थी के रूप में पुरस्कृत किया गया।

मौके पर मुखिया ने विद्यालय प्रबंधन के कार्यो प्रातःकालीन प्रार्थना सभा, योगा, प्राणायाम, व्यायाम, स्वच्छता अभियान, मध्याह्न भोजन योजना, बाल संसदीय मंत्रिमंडल, हॉउस सिस्टम, शिक्षण सहगामी क्रियाशीलनो में विद्यालय के छात्रों की उपलब्धियों की सराहना की। मौके पर विद्यालय के प्रधानाध्यापक समेत कई गणमान्य लोग मौजूद थे।

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चांडिल : नन्हें बच्चों का भविष्य नन्हें कंधे पर, इंटर का छात्र पढ़ा रहा है बच्चों को

NewsCode Jharkhand | 17 July, 2018 8:08 AM
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चांडिल (सरायकेला) । यू तो सरकार की गलत नीतियों के कारण आम जनता को कई बार खामियाजा भुगतना पड़ता है, लेकिन इस बार बात नौनिहालों के भविष्य की है । झारखण्ड सरकार की प्राथमिक स्कूल के विलय संबंधी निति की त्रुटियों के कारण नौबत ये आ गई है कि सरायकेला खरसावां जिले के बडाकांकड़ा पंचायत के धातकीडीह प्राथमिक स्कूल के विलय के बाद एक इंटर का छात्र स्कूल के 45 बच्चों को पढ़ा रहा है, देखिये ये रिपोर्ट ……

ये स्कूल बड़ाकांकडा पंचायत के धातकीडीह की है, जहां 45 बच्चे पढ़ते हैं । फ़िलहाल इस स्कूल की बागडोर एक इंटर का विद्यार्थी संभाले हुए है, क्यूंकि इस स्कूल का विलय लगभग एक किलोमीटर दूर स्थित केरकेटाडीह विद्यालय में कर दिया गया है जहां सिर्फ 14 विद्यार्थी पढ़ते हैं। जबकि नियमानुसार कम संख्या वाले स्कूलों का विलय अधिक संख्या वाले विद्यालय में करना होता है, लेकिन सरकारी त्रुटी के कारण उल्टा हो गया।

अब बात करते हैं स्कूलों के विलय की जरुरत क्यों पड़ी । झारखण्ड अलग होने के बाद झारखण्ड सरकार ने स्कूली शिक्षा पर विशेष योजना बनायीं, जिसके तहत एक किलोमीटर पर नव विद्यालय खोला गया और मिडिल स्कूल अपग्रेड तथा हाई स्कूल को प्लस 2 का दर्जा दिया गया, लेकिन शिक्षकों की नियुक्ति स्कूल के अनुसार नहीं की गई । 18 वर्ष बीतने के बाद शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों का विलय और डिग्रेड करने का निर्देश दिया गया । ऐसे नियमों में बदलाव के कारण ग्रामीणों को अपने बच्चों की शिक्षा भंवर में पटकती दिखाई दे रही है । खुद पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा और झामुमो के विधायक दशरथ गागराई भी ऐसे बदलाव के विरोध में हैं ….

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नियमों में बदलाव और त्रुटिपूर्ण निर्णय के कारण ग्रामीण खुल के विलय का विरोध कर रहे हैं । वहीँ शिक्षक अपने सरकारी आदेशों का पालन करने को मजबूर हैं । इन सबका नतीजा ये है कि ग्रामीण नन्हे कंधे पर बच्चों की शिक्षा का भार देकर निश्चिंत हो गए और अधिकारी आदेश का पालन करके निश्चिंत हो गए । इन सबके बीच नौनिहालों की शिक्षा कैसे पूरी होगी इस पर किसी का ध्यान नहीं है । वही इसका खामियाजा नन्हे बच्चे भुगत रहे हैं ।

आपको बता दें कि धातकीडीह में पदस्थापित दो शिक्षकों को केरकेटाडीह नव प्राथमिक विद्यालय में भेज दिया गया है और प्राथमिक विद्यालय धातकीडीह के सभी कमरे में ताला जड़ दिया गया है । विद्यालय की संयोजिका को हटाकर मिडडे मिल भी बंद कर दिया गया है । इस फैसले से अभिभावकों ने असहमति जताते हुए दुसरे विद्यालय में बच्चों को भेजने से इंकार करते हुए विद्यालय के बरामदे में गांव के ही प्लस 2 की पढ़ाई कर रहे दो युवकों को पढाने का जिम्मा दे दिया । इस तरह की सरकारी बदलाव की खुद शिक्षक भी त्रुटिपूर्ण बता रहे हैं ।

सरायकेला खरसावां जिले के नौ प्रखंडों में कुल 287 विद्यालयों का विलय और 44 उत्त्क्रमित विद्यालयों को डीग्रेड किया गया है । जिले के कुल 321 विद्यालय के विलय के बाद कई विद्यालय के विलय प्रक्रिया में विसंगति रही है । जल्द शिक्षा विभाग इन विसंगतियों को दूर नहीं करती है तो ऐसे कई बच्चे शिक्षा से दूर हो जायेंगे या फिर नन्हे कन्धों पर ही नन्हे बच्चों का दिशाहीन भविष्य होगा ।

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गोरक्षा के नाम पर हो रही हिंसा को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- केंद्र और राज्य सरकारें बनाएं कानून

NewsCode | 17 July, 2018 11:22 AM
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नई दिल्ली। गोरक्षकों द्वारा हिंसा के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मॉब लिंचिंग की घटनाएं रोकने के लिए दिशानिर्देश जारी किए है। कोर्ट ने चार हफ्ते में केंद्र और राज्यों को लागू करने के आदेश दिए है। कोर्ट ने कहा कि गोरक्षा के नाम पर कोई भी शख्स कानून को हाथ में नहीं ले सकता है।

केंद्र और राज्य सरकार को गाइडलाइन जारी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गोरक्षा के नाम पर होने वाली हिंसा के लिए कानून व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता है।

अदालत ने कहा कि सरकारें हिंसा की इजाजत नहीं दे सकती हैं। सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल पी. एस. नरसिम्हा ने कहा था कि केंद्र सरकार इस मामले में सजग और सतर्क है, लेकिन मुख्य समस्या कानून व्यवस्था की है। कानून व्यवस्था पर नियंत्रण रखना राज्यों की जिम्मेदारी है। केंद्र इसमें तब तक दखल नहीं दे सकता जब तक कि राज्य खुद गुहार ना लगाएं।

बता दें कि गोरक्षा के नाम पर हो रही भीड़ की हिंसा पर रोक लगाने के संबंध में दिशानिर्देश जारी करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई थी। इस याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ये राज्य सरकारों का दायित्व है कि वह इस तरह से हो रही भीड़ की हिंसा को रोकें।

गोरक्षा के नाम पर हिंसा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘मॉबोक्रेसी’ को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता, और इसे नया नियम नहीं बनने दिया जा सकता है। कोर्ट के मुताबिक, इससे कड़ाई से निपटना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने गोरक्षा के नाम पर हुई हत्याओं के सिलसिले में प्रिवेंटिव, रेमिडियल और प्यूनिटिव दिशानिर्देश जारी करते हुए कहा कि संसद को इसके लिए कानून बनाना चाहिए, जिसमें भीड़ द्वारा हत्या के लिए सज़ा का प्रावधान हो। मामले की अगली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट अगस्त में करेगा।

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याचिकाकर्ता इंदिरा जयसिह ने कहा कि भारत में अपराधियों के लिए गोरक्षा के नाम पर हत्या करना गर्व की बात बन गई है। उन्होंने कहा कि सरकार अपने नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने में विफल रही है और उन्हें जीवन की सुरक्षा की गारंटी नहीं दे पा रही है। उन्होंने कहा कि सरकारें इस तरह के अपराध करने वालों पर सख्त कार्रवाई करने में भी विफल रही हैं। इसलिए वक्त की मांग है कि इस बारे में स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए जाएं।

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NewsCode Jharkhand | 17 July, 2018 11:00 AM
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जमशेदपुर । नक्सल प्रभावित इलाकों में नक्सलियों से लड़ने के लिये सरकार एन्टी लैंड माइंस गाड़ियां देती है। लेकिन जमशेदपुर जिला का हाल ये है कि 4 लैंड माइंस गाड़ियों में 3 विगत 2 साल से खराब है और गैरेज में पड़ा है।

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अधिकारी और गैरेज की माने तो सरकार के पास मरम्मती के लिए खर्च का ब्यौरा भेजा गया है लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं मजबूरी में पुलिस बिना एन्टी लैंड माइंस गाड़ी के हीं नक्सल इलाकों में घूम रही है।

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