रांची : हाईस्कूल शिक्षक नियुक्ति परीक्षा, जाने- रिजल्ट नहीं निकलने का सच

NewsCode Jharkhand | 1 April, 2018 6:08 PM
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रांची। झारखंड में होने वाले 17572 हाई स्कूल शिक्षक नियुक्ति परीक्षा का रिजल्ट नहीं निकलने से अभ्यर्थी परेशान हैं। परीक्षा के छह माह बीत जाने के बाद भी रिजल्ट जारी नहीं हो सका है। जबकि परीक्षा का फाइनल आंसर की जनवरी के अंतिम सप्ताह और भौतिकी-गणित का आंसर फरवरी के पहले सप्ताह में ही जारी कर दिया गया था।

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फाइनल आंसर देने के इतने दिन बीत जाने के बाद भी रिजल्ट का नहीं निकलना अभ्यर्थियों को दुविधा में डाल रखा है। अभ्यर्थियों का कहना है कि एक तो रिजल्ट में देर हो रही है, दूसरी ओर बिचौलियों को ज्यादा समय मिलने से अभ्यर्थियों को ठगने का समय मिल जा रहा है। हालांकि नियुक्ति के नाम पर हो रहे दलाली से भी बचने के लिए जेएसएससी ने अभ्यर्थियों को सतर्क कर दिया है।

जेएसएससी ने अभ्यर्थियों को किसी के झांसे में न पड़ने की सलाह दी है। इस बाबत मीडिया में कई बार नोटिस भी दिया गया है। इतने समय के बाद भी रिजल्ट नहीं निकलने के कारणों की जब छानबीन की गई तो कई बात सामने आई।

अर्थशास्त्र की परीक्षा का रद्द होना

ज्ञात हो कि 12 नवंबर 2017 को हुए अर्थशास्त्र की परीक्षा तकनीकी कारणों से रद्द कर दी गई थी। परीक्षा गोड्डा और गिरिडीह जिले की रद्द की गई थी। इसके बाद एक अप्रैल को पुन: परीक्षा ली जा रही है। आयोग चाहता है कि अर्थशास्त्र की रिजल्ट के साथ ही सभी विषयों का परीक्षाफल जारी किया जाये। जिससे कि बाकी की सभी प्रक्रियाएं साथ चले और ज्वाइनिंग सभी विषयों में एक साथ हो।

स्थानीय नीति में बदलाव के संकेत

राज्य के 11 गैर अनुसूचित जिलों में भी अनुसूचित जिलों के तर्ज पर जिला के ही लोगों को नौकरी देने की मांग की जा रही है। इसपर राज्य सरकार ने एक उच्च स्तरीय कमिटी बनायी है। यह कमिटी छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उड़िसा सहित अन्य पड़ोसी राज्यों की स्थानीय नीति का आंकलन कर सरकार को रिर्पोट सौंपेगी। उसके बाद स्थानीय नीति में कोई बदलाव करने पर कैबिनेट फैसला ले सकता है। हालांकि कमिटी ने पड़ोसी राज्यों के स्थानीय नीति का आंकलन कर अपना रिपोर्ट तैयार कर लिया है। जेएसएससी और जेपीएससी के अधिकारियों के साथ बैठक भी हो चुकी है। लेकिन फाइनल रिर्पोट सरकार को नहीं मिल सका है। सूत्रों की माने तो फाइनल रिपोर्ट आने के बाद ही रिजल्ट जारी किया जायेगा। सूत्रों का यह भी कहना है कि कमिटी जानबूझ कर रिपोर्ट में देरी कर रही है क्योंकि निकाय चुनाव सामने है। ऐसे समय में सरकार और कमिटी किसी भी तबके को नाराज नहीं करना चाहती है।

सर्टिफिकेट की जांच

जेएसएससी के सूत्रों की माने तो रिजल्ट का मेरिट लिस्ट लगभग तैयार है। अभ्यर्थियों द्वारा ऑनलाइन जमा सर्टिफिकेट की जांच जारी है। 80 फिसदी अभ्यर्थियों का सर्टिफिकेट जांच किया जा चुका है। बाकी 20 प्रतिशत अभ्यर्थियों का भी जल्द पूरा हो जायेगा। साल 2013-14 में हुए प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षक नियुक्ति में मेरिट लिस्ट जारी होने के बाद सर्टिफिकेट की जांच की गई थी। जिसमें काफी अभ्यर्थियों का सर्टिफिकेट फर्जी निकला था और सीटें खाली रह गई थी। जेएसएससी के सूत्र की माने तो अप्रैल के अंतिम या मई के पहले सप्ताह में हाई स्कूल परीक्षा का परिणाम जारी कर दिये जाने की संभावना है।

जमशेदपुर : 2019 की चुनाव को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं की बैठक

NewsCode Jharkhand | 22 July, 2018 9:41 PM
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जमशेदपुर। झारखंड में 2019 का लोकसभा और विधानसभा चुनाव की मद्देनजर सभी पार्टी अपने को मजबूत करने के लिए अपनी कार्जकर्ताओ के साथ बैठक कर पार्टी में लोगो को जोड़ने काम शुरू कर दिया है।

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वहीँ पोटका प्रखंड कांग्रेस समिति की बैठक पोटका प्रभारी गोपाल प्रसाद के उपस्थिति में हुई। अध्यक्षता प्रखंड अध्यक्ष तापस मंडल ने किया। बैठक में प्रभारी ने प्रखंड कमिटी और पंचायत कमिटी के संगठन को मजबूत करने हेतु आवश्यक दिशानिर्देश दिया। साथ ही कांग्रेस पार्टी को मजबूत करने के लिए आलाकमान की दिशा निर्देश पर चलने की मंत्र बताये।

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वही बैठक के दौरान युवा वर्ग को मजबूत करने की बात कही गई। बैठक में ज्योति मिश्रा, श्रीपति दास, सोमेन मंडल, सनातन मंडल, संजय कुमार, अमल बिस्वास, मनोज कुमार सरदार, सौरव चटर्जी, प्रकाश सरदार, सुरेश गोप आदि लोग उपस्थित थे।

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राफेल पर राहुल ने मोदी को घेरा, कहा- विमान सौदे से आ रही है घोटाले की बू

NewsCode | 23 July, 2018 12:58 AM
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नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर से राफेल डील को लेकर पीएम मोदी और रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण को घेरा है। कांग्रेस अध्यक्ष का आरोप है कि इस डील को लेकर पर्दे के पीछे कुछ खेल जरूर हुआ है, और उसे दबाने के लिए रक्षामंत्री किसी के दबाव में काम कर रही हैं।

दरअसल, रविवार को राफेल डील को लेकर राहुल ने ट्वीट के जरिये पीएम मोदी पर निशाना साधा, उन्होंने लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान अपने भाषण में कही बात दोहराई। राहुल की मानें तो रक्षामंत्री किसी के दबाव राफेल डील को लेकर सही बातें नहीं रख पा रही हैं। जबकि पीएम मोदी को लेकर ट्वीट में लिखा है कि उनकी संसद में मुस्कुराहट के पीछे एक घबराहट नजर आई, इसलिए वो मेरी तरफ नहीं देख पा रहे थे। निश्चित तौर पर राफेल सौदे में अब घोटाले का शक गहराता जा रहा है। राफेल का दाम पूछने पर पीएम असहज हो जाते हैं।

राहुल के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस

वहीं भारतीय जनता पार्टी राफेल डील पर राहुल के दिए बयान को लेकर पलटवार की तैयारी में है। बीजेपी के चार सांसदों ने राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है। नोटिस में कहा गया है कि कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के खिलाफ ‘गलत’ आरोप लगाकर संसद को गुमराह किया। बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे, अनुराग ठाकुर, दुष्यंत सिंह और प्रह्लाद जोशी ने लोकसभा अध्यक्ष को नोटिस दिया है।

बता दें कि संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने कहा था कि सदन के नियमों के अनुसार किसी सदस्य के खिलाफ आरोप लगाने से पहले गांधी को नोटिस देना चाहिए था, उन्हें लोकसभा अध्यक्ष को आरोपों के समर्थन में सामग्री सौंपनी चाहिए थी। राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि सीतारमण ने यह कहकर देश को गुमराह किया कि फ्रांस के साथ हुए राफेल सौदा मामले में भारत गोपनीयता शर्तों से बंधा हुआ है।

संसद में राहुल ने उठाया था राफेल का मुद्दा

गौरतलब है कि अविश्वास प्रस्ताव के दौरान लोकसभा में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सरकार पर राफेल सौदे के ब्यौरे साझा करने के मुद्दे पर देश से ‘‘झूठ’’ बोलने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कथित भ्रष्टाचार के मामलों में ‘‘भागीदार’’ हैं, ‘‘चौकीदार’’ नहीं। लोकसभा में राजग सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान राहुल ने अपने भाषण में कहा कि फ्रांस के राष्ट्रपति ने एक बैठक के दौरान उनसे साफ साफ कहा था कि 58,000 करोड़ रुपये के राफेल लड़ाकू विमान से संबंधित ब्यौरे साझा करने में कोई दिक्कत नहीं है।

राहुल गांधी की टिप्पणी के कुछ ही घंटे बाद फ्रांस के विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि भारत के साथ 2008 में किया गया सुरक्षा समझौता गोपनीय है और दोनों देशों के बीच रक्षा उपकरणों की संचालन क्षमताओं के संबंध में इस गोपनीयता की रक्षा करना कानूनी रूप से बाध्यकारी है। हालांकि उन्होंने यह साफ नहीं किया कि क्या समझौते के प्रावधान भारत सरकार को राफेल सौदे से जुड़े कीमत के ब्यौरे का खुलासा करने से रोकते हैं।

कांग्रेस राफेल सौदे में भ्रष्टाचार का आरोप लगाती रही है और उपकरण एवं हथियारों की कीमत सहित उससे जुड़े ब्यौरे मांगती रही है लेकिन सरकार फ्रांस के साथ गोपनीय समझौते का हवाला देते हुए ब्यौरे साझा करने से इनकार करती रही है।

राहुल ने कथित भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सरकार पर करारा हमला करते हुए मोदी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, ‘मैं उन्हें मुस्कुराते देख सकता हूं, घबराहट की झलक है। वह दूर देख रहे हैं, मेरी आंखों में नहीं देख रहे।’ राहुल की इस टिप्पणी पर सत्ता पक्ष से विरोध तेज हो गया जिसके बाद विपक्षी सदस्यों ने अपनी सीट से खड़े होकर उनका सामना किया।

आपको याद दिला दें कि राहुल संसद में कहा था कि रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण प्रधानमंत्री के दबाव में देश से झूठ बोल रही हैं। उन्होंने कहा कि किसकी मदद की जा रही है, क्यों की जा रही है, निर्मलाजी, प्रधानमंत्री देश को बताएं।

हालांकि रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के इस आरोप को पूरी तरह गलत करार दिया कि राफेल विमान सौदे के संदर्भ में फ्रांस और भारत के बीच गोपनीयता का कोई समझौता नहीं हुआ है। सीतारमण ने कहा कि लड़ाकू विमान खरीदने के लिए भारत और फ्रांस के बीच 2008 में समझौता हुआ था।

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गाजियाबाद में धराशायी हुई पांच मंजिला इमारत, योगी ने दिए सख्त कार्रवाई के आदेश

NewsCode | 22 July, 2018 11:02 PM
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गाजियाबाद। दिल्ली से सटे गाजियाबाद में रविवार को 5 मंजिला निर्माणाधीन इमारत ढह गई है। इसमें एक व्यक्ति की हताहत होने की खबर है जबकि सात लोग गंभीर रूप से घायल हैं। इमारत के मलबे में कई मजदूरों के दबे होने की आशंका है। बताया जा रहा है कि जिस इलाके में यह बिल्डिंग गिरी है, वह पूरी तरह से अवैध रूप से बसाई गई है।

खबरों के मुताबिक प्रसन्नजीत गौतम नाम के शख्स की ज़मीन है। बिल्डर मनीष गोयल नाम का शख्स है। दोनों ही अभी पुलिस की पंहुच से दूर हैं। इन दोनों के परिवार वालों पुलिस ने पूछताछ के लिए हिरासत में ले रखा है।

हादसे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गाजियाबाद के एसएसपी को सख्त कार्रवाई करने को कहा है। सीएम की सख्ती के बाद दोषियों की गिरफ्तारी को पुलिस की चार टीमों का गठन कर दिया गया है। वहीं मृतकों के परिजनों को दो लाख और घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता की घोषणा की गयी है। याद रहे कि पांच दिन पहले ग्रेटर नोएडा के शाहबेरी में दो इमारतें भरभराकर गिर गईं थी, जिसमें 9 लोगों की मौत हो गई थी। प्राप्त जानकारी के अनुसार इस इमारत में चार लोग हिस्सेदार हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बेसमेंट मिलाकर पांच तल वाली बिल्डिंग में 17 मजदूर काम कर रहे थे। दोपहर पौने तीन बजे इमारत भरभराकर गिर गई और उसमें काम कर रहे सभी मजदूर मलबे में दब गए। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत दो मजदूरों को बाहर निकाला और उन्हें अस्पताल पहुंचाया। सूचना पर पहुंची एनडीआरएफ की टीम और पुलिस ने देर शाम तक मलबे से छह मजदूरों को निकाला। इनमें से एक को संयुक्त अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया।

सामने आई बिल्डर की लापरवाही

गाजियाबाद इमारत हादसे में बिल्डर की बड़ी लापरवाही भी सामने आई हैै। घटनास्थल पर काम कर रहे मजदूरों का कहना है कि बिल्डिंग के एक हिस्से में दरार आ गई थी, जिसके बारे में बिल्डर को जानकारी थी। बिल्डर ने मजदूरों को इस दरार को भरने को कहा और इमारत में जबरदस्ती काम जारी रखा।

राहत और बचाव कार्य जारी

हादसे की सूचना मिलने के बाद मौके पर पुलिस और NDRF की टीम पहुंच चुकी है राहत और बचाव का कार्य जारी है। बचाव के कार्य में डॉग स्क्वायड की भी मदद ली जा रही है। स्थानीय लोगों के मुताबिक इमारत के गिरते उमसें कई मजदूर मौजूद थे। हादसे में घायल महिला गुलाबरानी (47), शिवा (8) व देवेन्द्र (5) साल की हालत गंभीर बनी हुई है। तीनों को जिला संयुक्त अस्पताल से जीटीबी दिल्ली रेफर कर दिया गया है।

कभी भी गिर सकती है ग्रेटर नोएडा की 13 मंजिला इमारत

ग्रेटर नोएडा के पॉश सेक्टर बीटा-2 में नई बिल्डिंग बनाने के लिए की गई गहरी खुदाई और उसमें जमे पानी की वजह से पास की 13 मंजिला बिल्डिंग पर खतरा मंडराने लगा है। इमारत की दीवार में दरारें आ गई हैं। 13 मंजिला बिल्डिंग कभी भी गिर सकती है।

बारिश के पानी और बिल्डर की मनमानी से 180 परिवारों की जिंदगी को खतरे में डाल दिया है। ग्रेटर नोएडा के सेक्टर बीटा-2 की स्पार्क डिवाइन में रहनेवाले लोगों की नींद सोसाइटी के ठीक बगल में खोदे गए 25 फीट गहरे गड्ढे के कारण गायब हो गई है। ऐसे में यहां के 20 परिवार अपना फ्लैट खाली कर सुरक्षित जगहों पर चले गए हैं।

बता दें कि गड्ढे से ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी का दफ्तर महज 500 मीटर की दूरी पर है। थाना और भी पास है, लेकिन किसी ने भी इस बड़े खतरे और खुदाई की ओर ध्यान नहीं दिया। हालांकि, लोगों के विरोध के बाद ग्रेटर नोएडा प्रशासन एक्शन मोड में आया है। पानी को निकालने के लिए पंप लाया गया। गड्ढे को भरने का काम भी शुरू हो गया

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