रांची : 1000 दिन में सरकार पर कोई दाग नहीं, 10 सूत्री एजेंडे पर चल रहा है काम : रघुवर दास

NewsCode Jharkhand | 11 September, 2017 6:51 PM
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रांची मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि झारखंड के विकास के लिए वे 10 सूत्री एजेंडों पर काम कर रहे हैं  और 1000 दिन के कार्यकाल में उन्हें इस दिशा में काफी हद तक सफलता मिली है।

मुख्यमंत्री ने अपने 10 सूत्री एजेंडों के संबंध में बताया कि बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध कराना, योजनाओं की गुणवत्ता में सुधार लाना, आर्थिक विकास, सभी को स्वास्थ्य सुविधा, पेयजल सुविधा, आवास , सिंचाई की सुविधा, विद्य्नुतीकरण, सड़क की स्थिति में सुधार और शहरी विकास के एजेंडों पर काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 1000 दिन में स्थिति सुधारने की हरसंभव कोशिश हुई है और स्थिति में सुधार भी हुआ है।

झारखंड का विकास दर गुजरात के बाद सबसे अधिक

इस दौरान उन्होंने सिर्फ राज्य हित को ध्यान में रखकर काम किया, दल हित या व्यक्तिगत हित को ध्यान नहीं दिया, क्योंकि वे जिस पार्टी में है, उस पार्टी में सबसे पहला स्थान देश हित, फिर दल व अंत में व्यक्ति है। इस दौरान कृषि, सिंचाई, जल संसाधन, सड़क, पेयजल, उद्य्नोग-धंधे, स्वचछ पेयजल एवं स्वास्थ्य सुविधाओं में लगातार सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि वे सिर्फ  पद को सुशोभित करने के लिए मुख्यमंत्री नहीं बने हैं, उनका उद्देश्य राज करने का नहीं,बल्कि काम करने का है।

झारखंड के विकास को ध्यान में रखकर काम की शुरुआत की गयी, इस दौरान झारखंड का विकास दर 8.64प्रतिशत रहा, जो गुजरात के बाद सबसे अधिक है। वहीं योजना मद की राशि 97प्रतिशत खर्च हुई, जो यह बताता है वित्तीय स्थिति की दश में निरंतर सुधार हो रहा है।  उन्होंने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से देवघर-बासुकीनाथ पथ, देवघर व गढ़वा बाईपास, भूमि अधिग्रहण के लिए 200करोड़ रुपये की मांग रखी, जिसे गडकरी ने अपने भाषण में मंजूर करने की घोषणा की।

एक हजार दिन में मिला एक लाख लोगों को रोजगार

मुख्यमंत्री ने कहा कि एक हजार दिन में सरकार ने एक लाख लोगों को रोजगार देने का काम किया और आगामी छह महीने में 50 हजार अन्य युवाओं को रोजगार मिलेगा। उन्होंने बताया कि 14वर्षां से प्रतीक्षित स्थानीय नीति को उनकी सरकार ने मंजूरी प्रदान की, जिसके बाद राज्य में नियुक्तियों का रास्ता खुला और 90 प्रतिशत नौकरियां यहां के स्थानीय लोगों को मिला। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सशक्त करने के लिए सखी मंडल बनाया। एक हजार दिन में 8.50लाख लोगों को बिजली के नये कनेक्शन दिये, 2113गांवों में बिजली पहुंचायी गयी। जब उन्हें सत्ता मिली, तो राज्य के 32 हजार गांवों में 68लाख परिवारों में से मात्र 30लाख घरों में बिजली पहुंची थी, लेकिन इस दौरान सात लाख से अधिक घरों में बिजली पहुंची गयी और वर्ष 2018 तक सभी घरों में बिजली पहुंचा दी जाएगी। उन्होंने बताया कि 1000 दिन में तीन नये मेडिकल कॉलेज हजारीबाग दुमका व पलामू को मंजूरी मिली और 2018 में इन तीनों कॉलेजों में पढ़ाई शुरु होगी, जबकि बोकारो, चाईबासा व कोडरमा में मेडिकल कॉलेज के लिए डीपीआर बना लिया गया है, केंद्र सरकार से तीन नये मेडिकल कॉलेजों के लिए अनुमति मांगी गयी है। दो लाख लोगों तक स्वास्थ्य बीमा का लाभ पहुंचाया जा रहा है और सरकार की यह मंशा है कि हर व्यक्ति को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिले।

सवा तीन करोड़ जनता के सपने को पूरा करने का हो रहा है प्रयास

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2014 के पहले राज्य की पहचान स्कैम झारखंड के रुप में थी, लेकिन उनकी सरकार पर एक भी दाग नहीं है, हालांकि उन्होंने यह स्वीकार किया कि रोजमर्रा की जिंदगी में अब भी भ्रष्टाचार मौजूद है और निचले स्तर पर जो भ्रष्टाचार है, उसे जनसहयोग से समाप्त किया जाएगा। उन्होंने लोगों से आशीर्वाद मांगा कि कभी उनसे कोई गलत काम न हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह सपना है कि जब देश 75वां स्वतंत्रता दिवस मनाये, तो कोई गरीब और बेरोजगार न रहे, इस सपने को पूरा करने में वे झारखंड में मजदूर नंबर-वन बनकर काम कर रहे है और दिन रात जनता की सेवा जुटे है। राज्य की सवा तीन करोड़ जनता के सपने को पूरा करने का प्रयास कर रहे है।

 

दिल्ली में 14,000 से ज्यादा पेड़ों की कटाई के विरोध में ‘आप’ का चिपका आंदोलन

NewsCode | 24 June, 2018 7:54 PM
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नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पुनर्विकास के नाम पर 14 हजार से ज्यादा पेड़ काटने का विरोध तेज हो गया है। आम लोगों के साथ अब आम आदमी पार्टी भी इसके खिलाफ उतर आई है। आज रविवार को सरोजिनी नगर में पार्टी ने एक बड़े चिपको आंदोलन का आयोजन किया। सोशल मीडिया में #DelhiChipkoAndolan लगातार ट्रेंड कर रहा है।

दिल्ली सरकार में ‘आप’ के मंत्री इमरान हुसैन ने कई विधायकों, पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों के साथ मिलकर पेड़ों से चिपककर विरोध-प्रदर्शन किया। लोग हाथ से लिखे पोस्टर के साथ पेड़ों को बचाने की अपील करने के लिए वहां पहुंचे थे।

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन ने केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप पुरी से इस प्रोजेक्ट को किसी दूसरे जगह शिफ्ट करने की अपील की।

वहीं, पार्टी के विधायक सौरभ भारद्वाज ने कहा कि, “जब सारी जनता , दिल्ली सरकार और केन्द्र सरकार पेड़ों के बारे में इतनी चिंतित है तो केन्द्र सरकार प्रोजेक्ट बंद कर दे। अब कोई पेड़ ना काटा जाए”

बता दें कि सरोजिनी नगर में शनिवार को भी पेड़ काटने के विरोध में कुछ स्थानीय लोगों और युवाओं ने पेड़ से चिपककर उसे बचाने की अपील की।उनका कहना था कि सुंदर नगर में पेड़ कट चुके हैं। अब सरोजिनी नगर व आरकेपुरम में इन्हें काटा जाना है। हम इसका विरोध कर रहे है। सभी ने कहा कि प्रदूषण मुक्त दिल्ली का नारा पेड़ काटने से पूरा नहीं होगा।

क्या है पूरा मामला ?

दरअसल, केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने दक्षिणी दिल्ली में स्थित सात सरकारी आवसीय कॉलोनियों के पुनर्विकास का प्रस्ताव बनाया था। केंद्र सरकार की कैबिनेट इस पुनर्विकास प्लान को वर्ष 2016 में ही मंजूरी दे चुकी है। इसके तहत ही दक्षिणी दिल्ली में स्थित किदवई नगर में 1123, नेताजी नगर में 2294, नैरोजी नगर में 1454, मोहम्मदपुर में 363 और सरोजनी नगर में 11 हजार से अधिक पेड़ काटे जाने हैं। नैरोजी में पेड़ों की कटाई भी शुरू हो चुकी है। अब इन पेड़ों की कटाई का विरोध शुरू हो गया है। हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि वह जितने पेड़ काटेंगे उससे दोगुना पौधे लगाएं जाएंगे। पूरा पुनर्विकास प्लान ग्रीन प्रोजेक्ट होगा।

1973 में पहली बार हुआ था चिपको आंदोलन

चिपको आंदोलन की शुरुआत उत्तराखंड के चमोली में वर्ष 1973 में हुई थी। तब ग्रामीण किसानों ने राज्य के वन ठेकेदारों द्वारा वनों और जंगलों को काटने के विरोध में चिपको आन्दोलन चलाया था। चिपको आंदोलन का सीधे-सीधे अर्थ है किसी चीज से चिपककर उसकी रक्षा करना। जब यह आंदोलन वहां पर चल रहा था, तब वनों की कटाई को रोकने के लिए गांव के पुरुष और महिलाएं पेड़ों से लिपट जाती थीं और ठेकेदारों को पेड़ नहीं काटने देती थी। इस आंदोलन में महिलाओं की संख्या अधिक होती थी।

जानिए क्या है चिपको आंदोलन, जिस पर Google ने बनाया डूडल

इस आंदोलन को चंडीप्रसाद भट्ट, गौरा देवी और ग्रामीणों ने मिलकर अंजाम दिया था। बाद में प्रसिद्ध पर्यावरण प्रेमी सुन्दरलाल बहुगुणा ने आगे बढ़ाया। आंदोलन को सम्यक जीविका पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है। जिस समय यह आन्दोलन चल रहा था, उस समय केंद्र की राजनीति में भी पर्यावरण एक एजेंडा बन गया था। इस आंदोलन को देखते हुए तत्कालीन केंद्र सरकार ने वन संरक्षण अधिनियम बनाया।

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धनबाद : झरिया के अस्तित्‍व को बचाने के लिए फिर होगा आंदोलन

NewsCode Jharkhand | 24 June, 2018 7:48 PM
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झरिया को उजाडने की सरकारी मंसूबे को जनता कामयाब नहीं होने देगी

धनबाद (झरिया)। झरिया के अस्तित्व को बचाने के लिए एक बार फिर आंदोलन होगा। इसबार आंदोलन की मुख्‍य भूमिका में पूर्व मंत्री समरेश सिंह रहेंगे। आंदोलन की रुपरेखा तैयार करने के बावत आज झरिया प्रेस क्लब में समरेश सिंह की अगुवाई में बैठक हुई जिसमें पूर्व में हो चुके झरिया आंदोलन से जुड़े कई लोगों ने भाग लिया।

बैठक में निर्णय लिया गया कि झरिया को बचाने के लिए यह आखिरी आंदोलन होगा। इस आंदोलन में झरिया की जनता पूरी ईमानदारी से लड़ेगी।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि बंद आर एस पी कॉलेज को उसी जगह चालू किया जाएगा जहां वह है। इसके लिए कोर्ट जाना पड़े या कहीं और लेकिन बंद कॉलेज को खुलवाया जाएगा। बैठक में भाग ले रह लोगों ने एकसुर से कहा कि केंद्र व राज्य सरकार झरिया के अस्तित्व को खत्म करना चाहती है जिसे यहां की जनता सफल नहीं होने देगी।

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गिरीडीह : सुरीली आवाज से जिले के साथ गांव का नाम रौशन करना चाहती है नाजिया

NewsCode Jharkhand | 24 June, 2018 7:36 PM
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उदित नारायण के साथ मंच साझा कर चुकी है

गिरीडीह। अपनी सुरीली आवाज से संगीत की दुनिया में धूम मचानेवाली नाजिया परवीन अपने गृह जिले गिरीडीह व गांव का नाम रौशन कर रही है। वह इस जिले के पिहरा गांव की रहनेवाली है। मशहूर बॉलीवुड गायक उदित नारायण के साथ वह मंच साझा कर चुकी है।

हाल ही में उनकी मेरी आवाज ही मेरी पहचान है एलबम रिलीज हुई है। एलबम में वह पर्दे पर गाती नजर आती है। आवाज में तो वाकई जादू है। ईद के मौके पर अपने घर पहुंची नाजिया ने बताया कि झारखंड की नक्सली घटना पर चिलखारी एक दर्द नामक सिनेमा बन रही है जिसमें उन्‍हें उदित नारायण के साथ गाने का मौका मिला।

गिरीडीह : युवती को लेकर युवक फरार, परिजनों ने थाने में लगाई गुहार

नाजिया इससे पहले तू लौट के आजा एलबम में एक गीत को आवाज दे चुकी है। नाजिया के पिता मोहम्‍मद मोइनुद्दीन पेशे से एक किसान हैं व मां जैनब खातून आंगनबाड़ी सेविका है।

 गिरीडीह : सुरीली आवाज से जिले के साथ गांव का नाम रौशन करना चाहती है नाजिया

मैट्रिक तक की पढ़ाई कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय गावां से पूरी करने के बाद नाजिया रांची में रहकर एमए करने के साथ-साथ संगीत भी सीख रही है। कस्‍तूरबा विद्यालय में पढ़ने के दौरान नाजिया स्‍कूल में आयोजित गीत-संगीत व नृत्‍य प्रतियोगिता में भाग लेती थी और दर्शकों का वाहवाही बटोरती थी।

नाजिया का सपना अपनी आवाज के जरिये पिछडे जिले में शुमार गिरीडीह तथा अपने गांव पिहरा गावां को पहचान दिलाना है।

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