रांची : आजादी के 70 वर्षों के बाद भी अंधेरे में है राज्‍य के कई गांव

NewsCode Jharkhand | 1 May, 2018 3:55 PM

रांची : आजादी के 70 वर्षों के बाद भी अंधेरे में है राज्‍य के कई गांव

प्रधानमंत्री महोदय इन गांवों का कब छंटेगा अंधेरा ?

 रांची। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के हर घर में दिसंबर 2018 तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यही कारण है कि झारखंड की बीजेपी सरकार ने प्रधानमंत्री के इस लक्ष्य को स्वतः ही अपने जिम्मे में ले लिया। हालांकि राज्य की जो कुछ परिस्थिति है, उससे इस बात के साफ संकेत मिल रहे हैं कि शायद सौ प्रतिशत लक्ष्य पूरा करना आसान नहीं होगा।

हालांकि पिछले 10 सालों से अधिक समय से केंद्र सरकार की मुहिम रही है कि सभी गांव में बिजली पहुंचाई जाए। लेकिन अभी तक हालात इतने बेहतर नहीं बन पाए हैं जिससे सभी गांव तक बिजली पहुंचाई जा सके। हम राज्य के कुछ ऐसे इलाकों की चर्चा कर रहे हैं जहां अभी तक बिजली नहीं पहुंच पाई है। लेकिन यह बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि आखिर इसके लिए जिम्मेदार कौन है?

ग्रामीण विद्युतीकरण की पोल खोल रहा है चतरा जिला

 चतरा एक ऐसा जिला है जो ग्रामीण विद्युतीकरण की पोल खोल रहा है। आजादी के 70 साल बीत जाने के बाद भी जिले के पांच सौ से अधिक गांवों में बिजली नहीं पहुंच पाई है। पिछले 10 सालों से चल रहे ग्रामीण विद्युतीकरण का कार्य पूरा नहीं हो पाया है।

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डीवीसी (दामोदर वैली कॉर्पोरेशन) ने इलाके के इन गावों में विद्युतीकरण का कार्य करने से इंकार कर दिया है, लेकिन इलाके के कई ऐसे गांव हैं जहां बिजली का खंभा और तार तो लग गया है लेकिन बिजली आपूर्ति नहीं हो रही है। आगे का काम कौन करेगा यह अब भगवान भरोसे है।

काम करने का जिम्मा डीवीसी का था लेकिन डीवीसी ने अब हाथ खड़े कर दिए हैं। हाथ खड़े करने के बाद इस मामले में पहल तो हो रही है लेकिन समस्याएं बनी हुई हैं। डीवीसी ने जिन गांवों में काम बंद कर दिए हैं वे सारे के सारे इलाके विद्युतीकरण के लिहाज से सरकार के लिए महत्वपूर्ण हैं।

इसमें लावालौग, कुंदा आदि शामिल है। इन सारे इलाकों में नक्सलियों से निजात पाने के लिए भी अलग से लड़ाई लड़ी जा रही है।

सरायकेला के कई इलाकों में 70 साल से बिजली आने का है इंतजार

 इधर सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल इलाके के ग्रामीणों को पिछले 70 सालों से बिजली के आने का इंतजार है। इस इलाके का कुकड़ू ऐसा प्रखंड है जहां शाम होते ही पूरा गांव अंधेरे में डूब जाता है।

आजादी के 70 साल बीत जाने के बाद भारत देश के इस लंबे सफर में विकास के कई सोपान लिखे गए। देश ने सुई बनाने से लेकर हवाई जहाज, रॉकेट, उपग्रह बनाने के साथ चांद और मंगल तक का सफर पूरा किया। मगर, कुछ तस्वीरें हैं जो इन उपलब्धियों को चिढ़ा रही हैं। सरायकेला-खरसावां जिले के कई ऐसे गांव हैं, जहां अब भी अंधेरे की बेड़ियों में जकड़े हैं। जिले का एक गांव ऐसा भी है जहां बिजली के खंभे तो गाड़ दिये गए हैं लेकिन तैयारी पूरी होने के बाद भी अफसर गांव में करंट दौड़ाने में असफल साबित हुए हैं।

हम जिस गांव की बात कर रहे हैं, वह है चांडिल अनुमंडल के कुकड़ू प्रखंड का सापारुम गांव। तकरीबन एक वर्ष पहले ही इस गांव में बिजली के खंभे गाड़े गए हैं, इसके बावजूद सापारूम गांव को आज भी बिजली मयस्सर नहीं है।

अजीब है इस गांव की बिजली रानी  की कहानी

सापरुम में बिजली की कहानी बेहद अजीब है। गांव के हिस्से में बिजली की योजना करीब 10 वर्ष पूर्व बनी थी। दशकों के इंतजार के बाद साल भर पहले हुक्मरानों की नींद टूटी तो आनन-फानन गांव में पोल गाड़े गए।

करीब एक वर्ष पूर्व ही गांव में पोल गाड़ने का काम पूरा हो चुका है। लेकिन हालात जस के तस बनी हुई है। अब तो ग्रामीणों का विश्वास टूटने लगा है कि उनके गांव बिजली से कभी उजाला होगा।

हाथियों के आक्रमण के कारण लोगों की रात गुजरती है मचान पर

सरायकेला जिला के कुकड़ू प्रखंड के सापारुम गांव के नीचे टोला में रहने वाले कई परिवारों ने पेड़ों पर ही अपना ठिकाना बना लिया है। वे खुद को हाथियों से बचाने के लिए पेड़ों पर मचान बना कर रात को सोने को मजबूर हैं।

गांव के लोग बताते हैं कि उन्हें अपना बचाव खुद करने के लिए छोड़ दिया गया है। लोग खेती करके ही अपना जीवन चलाते हैं। उनके पास अपने को जिंदा रखने के लिए कोई और विकल्प नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें हाथियों का डर सताते रहता है इसलिये पेड़ों पर ही ठिकाना बना लिया है।

रांची-कई इलाकों के साथ-साथ लोगों का जीवन भी कर रहे हैं रौशन

ऐसा नहीं है कि विद्युतीकरण का कार्य पूरा करने की प्रतिशत में कमी ही है। राज्य के कई ऐसे इलाके हैं, जहां बिजली पहुंची तो लोगों की किस्मत ही बदल गई। ऐसा ही एक इलाका है रांची से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हुंडरू।

इसी साल बिजली पहुंचकर इस इलाके के लोगों के जीवन में भी नई रौशनी भर दी है। खासकर महिलाएं आत्मनिर्भर ही नहीं आत्मविश्वास से भी लबरेज नजर आ रही हैं। यहां बिजली पहुंचाने में इलाके के लोगों की भी काफी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

लोहरदगा

इसी तरह लोहरदगा जिले के उनेगड़ा गांव में जब हाल में ही बिजली आई तो इलाके में लोगों के लिए मानो लाइफ-लाइन बन गई। इलाके के लोगों के अनुसार बिजली आने के बाद उनके जीवन शैली ही बदल गई है।

उन्हें इस बात की उम्मीद होने लगी है कि अब उनके इलाके का ही नहीं बल्कि जीवन का अंधियारा भी खत्म हो जाएगा। महिलाएं अब अपने साथ मोबाइल भी रखती हैं और मिक्सी से मसाला भी पीसतीं हैं।

राकेश कुमार एग्जीक्यूटिव एडिटर

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कोडरमा : भाकपा माले कार्यकर्ताओं ने पीएम और सीएम का पुतला फूंका

NewsCode Jharkhand | 25 May, 2018 10:02 PM

कोडरमा : भाकपा माले कार्यकर्ताओं ने पीएम और सीएम का पुतला फूंका

कोडरमाभाकपा माले कार्यकर्ताओं ने तिलैया शहर के झंड़ा चौक पर पीएम नरेन्द्र मोदी, सीएम रघुवर दास का पुतला फूंका और जनसभा की। जनसभा को श्यमादेव यादव मो. इब्राहिम, विरेन्द्र कुमार, इश्वरी राणा, रामधन यादव समेत कई नेताओं ने संबोधित किया। पार्टी कार्यकर्ता पेट्रोल-डीजल वृद्धि समेत अन्य सवालों को लेकर आंदोलन कर रहे थे।

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साथ ही 25 मई को धनवाद में पीएम द्वारा पार्टी नेताओं के द्वारा पूर्व में दी गई जानकारी के अनुसार करमा अस्पताल को मेडिकल कॉलेज बनाने के लिए इसकी आधारशिला नहीं रखे जाने का विरोध कर रहे थे। मौके पर धीरज कुमार समेत कई कार्यकर्ता मौजूद थे।

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सिमडेगा : अतिक्रमण पर चला प्रशासन का डंडा, 25 दूकानों को तोड़ा गया

NewsCode Jharkhand | 25 May, 2018 9:56 PM

सिमडेगा : अतिक्रमण पर चला प्रशासन का डंडा, 25 दूकानों को तोड़ा गया

सिमडेगा।  बानो प्रखंड के हुरदा बजारटांड में सीओ मनींद्र भगत के निर्देश पर अतिक्रमण जेसीबी से हटाया गया। मालुम हो कि हुरदा बजार टांड में दुकानदारों के द्वारा अवैध रुप से अतिक्रमण कर दूकानों को निर्माण किया गया था। जिससे हटाने के लिये फरवरी माह  में दुकानदारों को नोटिस दिया गया था।

दुकानदारों के द्वारा अतिक्रमण नहीं  हटाया गया। एक सप्ताह पूर्व माईक से अतिक्रमण हटाने के लिये एऩाउंस कराया गया था। इसमें 23 मई तक अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया गया था। लेकिन अतिक्रमण नहीं हटाया गया।

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इसके बाद आज  जेसीबी लगाकर लगभग 25 दुकानदारो के दूकानों को तोड़ कर  अतिक्रमण हटाया गया। सीओ ने बताया कि अतिक्रमण करने वाले दुकानदारों से अतिक्रमण हटाने में होने वाले खर्च वसुला जायेगा। इसके लिये सभी दुकानदारों को चिहिन्त कर नोटिस दिया जायेगा।

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लोहरदगा : ज़िले के कराटेकारों ने झारखंड को दिलाये कई पदक

NewsCode Jharkhand | 25 May, 2018 9:35 PM

लोहरदगा : ज़िले के कराटेकारों ने झारखंड को दिलाये कई पदक

लोहरदगा। ब्राजिलियन जुजुत्सू स्पोर्ट्स फैडरेशन ऑफ इंडिया के तत्वावधान में नवाब मनसूर अली खान पटौदी  में 20 मई  को नेशनल ओपेन ब्राजिलियन जुजुत्सू चैम्पियनशिप का आयोजन किया गया।

प्रतियोगिता में 500 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इस प्रतियोगिता में लोहरदगा जिले जे. एम. एस. इंग्लिश मीडियम स्कूल हरमू के लाल पृथ्वी राज नाथ शाहदेय ने अपने प्रतिद्वंदी को पछाड़ते हुए प्रथम स्थान प्राप्त करके झारखंड के झोली में गोल्ड मैडल डाला वहीं बी।एस। कॉलेज के दिव्याकाश साहु ने भी अपने प्रतिद्वंदी को हराकर तृतीय स्थान प्राप्त करके झारखंड को ब्राउन्ज मैडल दिलाया।

मालूम हो कि के फाईटर सिहान श्रवण साहु ब्लैक बेल्ट पांचवी डॉन, जोयन्ट सेक्रेटरी इन्टरनेशनल शोतोकाई कराटे फैडरेशन ऑफ इंडिया, मुख्य कराटे प्रशिक्षक झारखंड के द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

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इस मौके पर जे. एम. एस. स्कूल के निर्देशिका श्रीमती सुष्मा सिंह ने दोनों फाईटरों एवं सिहान साहु को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। और कहा कि मार्शल आर्ट आज की मांग है। तथा सेंसाई सुर्यावती साहु, सेंसाई क्यूम खान, सेंसाई जगनंदन पौराणिक, सेंसाई  संजय उरांव, सेंपाई अनमोल साहु, आदि ने भी शुभकामनाएं दी है।

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