रांची : यहां गुर्गों के साथ ‘चटनी’ हॉकी स्टीक चमका कर कराता है काम 

NewsCode Jharkhand | 19 January, 2018 6:33 PM
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रेलवे लॉन्ड्री में कर्मियों को नहीं मिलता है वेतन

रांची। रेलवे स्टेशन के लॉन्ड्री का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। दरअसल लॉन्ड्री में कार्यरत लोगों ने ठेकेदार प्रकाश सिंह उर्फ चटनी सिंह द्वारा गाली-गलौज और वेतन नहीं देने का आरोप लगाया है। वर्तमान समय में वहां 18 लोग कार्यरत हैं। जानकारी के मुताबिक टेंडर के नियम के अनुसार 27 लोगों से काम लिया जाना है। इस संबंध में एक वीडियो भी वायरल हुआ है, जिसमें उसको साफ-साफ सुना और देखा जा सकता है।

कौन है चटनी सिंह’ ?

‘चटनी सिंह’ उर्फ ‘प्रकाश सिंह’ के पिता राजकुमार सिंह रेलवे में जूनियर इंजीनियर के पद पर कर्मचारी थे। बाद में चटनी सिंह भी रेलवे गैंगमैन की नौकरी छोड़ रेलवे की ठेकेदारी करने लगा। ‘मां शारदा केमिकल्स’ के नाम से ‘साउथ इस्टर्न रेलवे’ और ‘ईस्ट रेलवे’ में रजिस्टर्ड उसकी एक कंपनी भी है। फिलहाल कोलकाता की एक कंपनी ‘मेसर्स ओशो गारमेंट फिनिशर्स एंड लॉन्डरर्स प्रा. लि.’ के लिये चटनी पेटी कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहा है।

लोगों का क्या है आरोप ?

वहां कार्यरत लोगों का आरोप है कि उन्हें पिछले तीन माह से किसी को वेतन नहीं दिया गया है। वेतन के नाम पर लॉन्ड्रीकर्मियों को चार से पांच हजार रुपये ही कभी कभार दिया जा रहा है जो प्रतिदिन की न्यूनतम मजदूरी 448 रुपये से काफी कम है। जानकारी के मुताबिक प्रकाश उर्फ ‘चटनी’ द्वारा कुछ लोगों को चेक द्वारा पेमेंट किया गया है, लेकिन कर्मियों के अकाउंट में जमा नहीं हो पाया है। इससे कर्मियों में काफी रोष है। रेलकर्मियों की ये मांग भी है कि ऐसे असामाजिक तत्व रेलवे परिसर में न आएं।

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लोगों ने ये भी आरोप लगाया है कि रांची रेलवे स्टेशन में डिविजनल मैकेनिकल इंजीनियर के पद पर कार्यरत संजय कुमार मंडल का संरक्षण चटनी को मिलता रहा है। इन्हीं के सांठ-गांठ से ‘चटनी’ टेंडर भी मैनेज करवाता है। संजय कुमार का धौंस और उनके साथ मिलकर 15 जनवरी 2018 को रांची रेलवे स्टेशन के लॉन्ड्री में एसएसई के पद पर कार्यरत अमित कुमार को हटिया रेलवे स्टेशन में तबादला करा दिया।

चटनी’ के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज 

फिलहाल शुक्रवार की सुबह को रेल प्रसाशन द्वारा रांची लॉन्ड्रीकर्मियों पर दबाव बनाकर लगभग 21 दिनों पूर्व घटित घटना के प्रति रांची रेलवे स्टेशन के आरपीएफ थाना में चटनी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करवाई गई है।

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धनबाद : पत्थर से लदे दो ट्रक को वन विभाग ने किया जब्त

NewsCode Jharkhand | 17 July, 2018 10:58 AM
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टुण्डी धनबाद । वन विभाग टुण्डी की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर दो अलग अलग जगहों से सफेद पत्थर से लदे दो ट्रक को जब्त किया।  हालांकि दोनो ही ट्रक के चालक व खलासी भागने मे सफल रहे। टुण्डी क्षेत्र के रेंजर शशिभूषण गुप्ता ने बताया कि उन्हे सूचना मिल रही थी।

 टुण्डी क्षेत्र से सफेद क्वार्टज पत्थर का अवैध रूप से कारोबार चल रहा है और ट्रक के जरिए इन्हे दूसरे राज्य मे भेजा जाता है। एक ट्रक पत्थर की किमत लाखो में होती है।

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इसी सूचना के आधार पर मुख्य मार्ग पर जांच अभियान चलाया गया। जिसके तहत इन ट्रक को जब्त किया गया । जब्त ट्रक संख्या जेएच 02 जे 2709  एवं जेएच 11 ई 4161 पर वन अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर परिवहन विभाग से संपर्क कर इसके मालिक का पता लगाया जा रहा है।

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गोरक्षा के नाम पर हो रही हिंसा को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- केंद्र और राज्य सरकारें बनाएं कानून

NewsCode | 17 July, 2018 11:22 AM
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नई दिल्ली। गोरक्षकों द्वारा हिंसा के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मॉब लिंचिंग की घटनाएं रोकने के लिए दिशानिर्देश जारी किए है। कोर्ट ने चार हफ्ते में केंद्र और राज्यों को लागू करने के आदेश दिए है। कोर्ट ने कहा कि गोरक्षा के नाम पर कोई भी शख्स कानून को हाथ में नहीं ले सकता है।

केंद्र और राज्य सरकार को गाइडलाइन जारी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गोरक्षा के नाम पर होने वाली हिंसा के लिए कानून व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता है।

अदालत ने कहा कि सरकारें हिंसा की इजाजत नहीं दे सकती हैं। सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल पी. एस. नरसिम्हा ने कहा था कि केंद्र सरकार इस मामले में सजग और सतर्क है, लेकिन मुख्य समस्या कानून व्यवस्था की है। कानून व्यवस्था पर नियंत्रण रखना राज्यों की जिम्मेदारी है। केंद्र इसमें तब तक दखल नहीं दे सकता जब तक कि राज्य खुद गुहार ना लगाएं।

बता दें कि गोरक्षा के नाम पर हो रही भीड़ की हिंसा पर रोक लगाने के संबंध में दिशानिर्देश जारी करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई थी। इस याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ये राज्य सरकारों का दायित्व है कि वह इस तरह से हो रही भीड़ की हिंसा को रोकें।

गोरक्षा के नाम पर हिंसा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘मॉबोक्रेसी’ को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता, और इसे नया नियम नहीं बनने दिया जा सकता है। कोर्ट के मुताबिक, इससे कड़ाई से निपटना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने गोरक्षा के नाम पर हुई हत्याओं के सिलसिले में प्रिवेंटिव, रेमिडियल और प्यूनिटिव दिशानिर्देश जारी करते हुए कहा कि संसद को इसके लिए कानून बनाना चाहिए, जिसमें भीड़ द्वारा हत्या के लिए सज़ा का प्रावधान हो। मामले की अगली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट अगस्त में करेगा।

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याचिकाकर्ता इंदिरा जयसिह ने कहा कि भारत में अपराधियों के लिए गोरक्षा के नाम पर हत्या करना गर्व की बात बन गई है। उन्होंने कहा कि सरकार अपने नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने में विफल रही है और उन्हें जीवन की सुरक्षा की गारंटी नहीं दे पा रही है। उन्होंने कहा कि सरकारें इस तरह के अपराध करने वालों पर सख्त कार्रवाई करने में भी विफल रही हैं। इसलिए वक्त की मांग है कि इस बारे में स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए जाएं।

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जमशेदपुर : 4 लैंड माइंस गाड़ियों में 3 विगत 2 साल से है खराब, पड़ा है गैरेज में

NewsCode Jharkhand | 17 July, 2018 11:00 AM
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जमशेदपुर । नक्सल प्रभावित इलाकों में नक्सलियों से लड़ने के लिये सरकार एन्टी लैंड माइंस गाड़ियां देती है। लेकिन जमशेदपुर जिला का हाल ये है कि 4 लैंड माइंस गाड़ियों में 3 विगत 2 साल से खराब है और गैरेज में पड़ा है।

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अधिकारी और गैरेज की माने तो सरकार के पास मरम्मती के लिए खर्च का ब्यौरा भेजा गया है लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं मजबूरी में पुलिस बिना एन्टी लैंड माइंस गाड़ी के हीं नक्सल इलाकों में घूम रही है।

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