रांची : एसीबी ने रिनपास के पूर्व निदेशक के घर चिपकाया नोटिस

NewsCode Jharkhand | 13 March, 2018 9:18 PM
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रांचीभ्रष्‍टाचार निरोधक ब्‍यूरो (एसीबी) ने रिनपास के पूर्व निदेशक डॉ अमोल रंजन के घर पर नोटिस चिपकाया है। उन्‍हें आठ अप्रैल को कोर्ट में सशरीर उपस्थित होने का निर्देश दिया है। उपस्थित नहीं होने पर कोर्ट के आदेश पर कुर्की जब्‍ती का नोटिस भी दिया जाएगा। डॉ रंजन रिनपास परिसर में आवास संख्‍या ई-2 में रहते हैं। वह फरार चल रहे हैं।

मंगलवार की सुबह एसीबी की टीम रिनपास पहुंची। इसमें इंस्‍पेक्‍टर केके झा और चंतनानंद झा शामिल थे। उसे साथ रिनपास के प्रभारी निदेशक डॉ सुभाष सोरेन और उप निदेशक गिरिजा शंंकर प्रसाद भी डॉ अमूल के घर तक गए। इंस्‍पेक्‍टर ने उनके घर के पास नोटिस चिपकाया और उनके पत्‍नी से साईन भी कराया।

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2015 से चल रही जांच

रिनपास के प्रभारी निदेशक पद पर डॉ अमोल रंजन की अवैध तरीके से हुई बहाली और वित्तीय अनियमितता की जांच एसीबी की टीम पिछले वर्ष 2015 से कर रही है। इस मामले में हेमंत सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे राजेंद्र प्रसाद सिंह, स्वास्थ्य सचिव बीके त्रिपाठी, रिनपास निदेशक डॉ अमोल रंजन के खिलाफ प्रारंभिक जांच (पीई) दर्ज कर एसीबी ने छानबीन शुरू की। जांच में गड़बडि़यां सही मिलने पर एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई की गई।

ऐसे निदेशक बने थे डॉ रंजन

वर्ष 2010 में तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री हेमलाल मुर्मू ने डॉ अमोल रंजन को रिनपास का प्रभारी निदेशक बनाने अनुमति दी थी। वर्ष 2013 में एजी की आपत्ति के बाद उन्हें पद से हटाकर डॉ अशोक कुमार नाग को निदेशक बनाया गया। हालांकि महज सात-आठ महीने में उन्हें भी पद छोड़ना पड़ गया।

इसके बाद स्वास्थ्य विभाग के तत्कालीन प्रधान सचिव बीके त्रिपाठी की अनुशंसा और तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र प्रसाद सिंह की सहमति से डॉ रंजन को वर्ष 2014 में रिनपास का फिर से प्रभारी निदेशक बना दिया गया गया। इसके बाद मामला निगरानी की अदालत में दर्ज कराया गया। जानकारी हो कि डॉ नाग को पिछले दिनों एसीबी ने गिरफ्तार किया था।

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झरिया : छेड़खानी का विरोध करने पर मारपीट, कई घायल

NewsCode Jharkhand | 25 September, 2018 6:26 PM
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झरिया (धनबाद)। बहालगढ़ा में छेड़खानी का विरोध करने पर मारपीट हो गई जिससे कई लोग घायल हो गए। प्राप्‍त जानकारी के अनुसार मुहल्ले में कुछ बाइक सवार युवक छेड़खानी किया। विरोध करने पर युवक घर में घुस गए और मारपीट करने लगे।

भुक्‍तभोगी ने स्‍थानीय थाने में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

वहीं दूसरा मामला झरिया के कोयरीबांध का है जहां आपसी रंजिश में मारपीट होने से एक ऑटो ड्राईवर घायल हो गया। घायल ने मारपीट का आरोप एक स्‍थानीय दबंग वयक्ति के भाई पर लगाया है।

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रांची : रिटायर्ड जज एसके अग्निहोत्री आजसू में हुए शामिल, कहा- पार्टी को करेंगे मजबूत

NewsCode Jharkhand | 25 September, 2018 6:22 PM
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रांची। आजसू पार्टी के सुप्रीमो सुदेश महतो के आवास पर मिलन समारोह के मौके पर रिटायर्ड जज के साथ दूसरी अन्य पार्टी के सेकड़ों कार्यकर्ता मुखिया सहित आजसू पार्टी के विचार से प्रभावित होकर पार्टी में शामिल हुए।

इस मौके पर सुदेश महतो ने रिटायर जज के साथ कार्यकर्ताओं को माला पहनाकर पार्टी में स्वागत किया। 2019 लोकसभा और विधानसभा चुनाव को देखते हुए दूसरे पार्टी के कार्यकर्ता  अपनी जमीन तलाशने को लेकर आजसू पार्टी में शामिल होते नजर आ रहे हैं।

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आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो ने कहा  पार्टी में शामिल हुए रिटायर्ड जज संतोष कुमार अग्निहोत्री का स्वागत करता हूँ।  आजसू पार्टी में शुभ संकेत है। पार्टी में इन्हें बड़ी जिम्मेवारी दी जाएगी। जिससे पार्टी मजबूत हो और जनता के बीच आजसू पार्टी की विचारधारा को पहुंचाया जाए। तीस सालों से न्याययिक सेवा करने के उपरांत इन्होंने समाजसेवा करने का जो फैसला लिये है। वो स्वागत योग्य है। जिनका समाज को जरूर लाभ मिलेगा।

रिटायर्ड जज संतोष कुमार अग्निहोत्री ने कहा कुछ महीनों से आजसू पार्टी को रीड कर रहा था इनकी विचारधारा को जानने की कोशिश कर रहा था जब मैं पूरी तरह से जान पाया तब मैंने  अंतिम फैसला लिया कि मैं आजसू पार्टी में रहकर समाज की सेवा करूंगा और पार्टी को मजबूत करने का काम करूंगा।

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रांची : तीन तलाक कानून से तीन साल सजा के प्रावधान को हटवायें केंद सरकार- आमया संगठन

NewsCode Jharkhand | 25 September, 2018 6:17 PM
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रांची। मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक 2017 को बिना राज्यसभा से पारित कराये केन्द्रीय कैबिनेट और राष्ट्रपति के माध्यम से 20 सितंबर 2018 को अध्यादेश लाकर देश के 19 करोड़ मुसलमानों पर केन्द सरकार ने थोप दिया है। अध्यादेश में तीन तलाक को जघन्य अपराध मनाते हुए आईपीएस की धाराओं के तहत सजा देने का कानून बनाया गया है।

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कोई व्यक्ति एक साथ तीन तलाक बोलता है और उसकी पत्नी या परिवार के सदस्य पुलिस में शिकायत करते है तो तीन साल की सजा के साथ जेल हो जाएगा, जो कि असंवैधानिक है यह मामला सिविल कानून के तहत बननी चाहिए जिसमें ज्यादा से ज्यादा मुआवजा का प्रावधान रखा जाता।

वर्ष 2017 में  सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि तीन तलाक बोलने पर शादी नही टूटेगी, तो फिर किस आधार पर पति को तीन साल की जेल का प्रावधान रखा गया है पति के जेल जाने पर पत्नी और बच्चों का भरण-पोषण कैसे होगा क्या पत्नी पति के खिलाफ मुकदमें लड़ेगी। अध्यादेश देखकर ऐसा लगता है कि सरकार को मुस्लिम महिलाओं के प्रति दर्द कम और वोट पाने की चाहत ज्यादा है।

केन्द्र सरकार को मुस्लिम महिलाओं से हमदर्दी है तो मॉब लिंचिंग में 100 से अधिक लोगों की हत्याएँ देश में  हुई है सिर्फ झारखंड में ही 27 लोग मारे गये है उनकी विधवाएं और मां बहनों को इंसाफ नही मिल रहा है और ना ही मुआवाजा मिले, अपराधी खुलेआम घुम रहे है दोषियों को अदालतों में जमानत मिल जा रही है।

सरकार के ही मंत्री फूल माला और मिठाई नौकरी देने की बात कर रहे है, इसपर सरकार मुकदर्शक बनी हुई है जबकि मॉब लिंचिंग पर 17 जुलाई 2018 को सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने केन्द्र सरकार को कानून बनाने का आदेश दिया है साथ ही कई महत्वपूर्ण निर्देश भी दिये है लेकिन केन्द्र सरकार ने मॉब लिंचिंग पर कानून बनाने की पहल अबतक नही हुई।

हम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी और केन्द्र में विपक्षी दल के नेता और झारखंड के विपक्षी दल के नेता हेमंत सोरेन  से मांग करते है कि तीन तलाक़ कानून से तीन साल सजा के प्रावधान को हटवायें साथ ही धार्मिक संगठनों से मिलकर निकाहनामा फार्म में ही एक साथ तीन तलाक नही बोलने का नियम बनवाये।

यें बाते होटल केन मेन रोड रांची में आमया संगठन द्वारा आयोजित संवाददाता सम्मेलन में संगठन की सचिव पूर्व छात्र नेत्री नाजिया तब्बसुम ने कहीं, प्रेस कांफ्रेंस में मॉब लिंचिंग में मारे गरे अलीमुद्दीन अंसारी की विधवा मरियम खातून, नाजनीन बानों, शमा प्रवीण, रिजवाना बेगम, कमरून निशा, उबैद खातून, आलिया, रुखसार, नरगिस , गजाला, गुलफशां, फरिदा नुसरत, अमरीन सबा थी।

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