माह-ए-रमज़ान में सहरी, इफ्तार और नमाज़ का समय बताएगा ये ऐप

NewsCode | 16 May, 2018 2:36 PM
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लखनऊ। रमज़ान के मुकद्दस महीने के दौरान रोजेदारों को सहरी, इफ्तार और तरावीह की नमाज़ का वक्त जानने में सहूलियत के लिए एक विशेष मोबाइल ऐप्लीकेशन की शुरुआत की गई। यह मोबाइल ऐप इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया ने तैयार किया है जिसका नाम है ‘आई.सी.आई. रमजान हेल्प लाइन ऐप’।

सेंटर के चेयरमैन और फरंग महल के नाजिम मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने बताया कि इस ऐप में रमजान की अहमियत के साथ साथ इफ्तार और सहरी का समय, शहर की विशेष मस्जिदों में तरावीह की नमाज का वक्त, इफ्तार, सहरी, तरावीह और शबे कद्र से सम्बन्धित दुआयें शामिल हैं।

इस्लामिक सेंटर के चेयरमैन और फरंग महल के नाजिम मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने बताया कि इस ऐप में रमजान (Ramadan) की अहमियत के साथ-साथ इफ्तार और सहरी का समय, शहर की विशेष मस्जिदों में तरावीह की नमाज का वक्त, इफ्तार, सहरी, तरावीह और शबे कद्र से जुड़ी दुआएं शामिल हैं।

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उन्होंने बताया कि इसके अलावा रोज़ा, जकात, तरावीह, इफ्तार, सहरी, नमाज और अन्य मामलों से सबंधित सवालों के जवाब के लिए ऐप में अलग सेक्शन बनाया गया है। उम्मीद है कि इससे बड़े पैमाने पर लोगों को फायदा पहुंचेगा।

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बर्थडे विशेष : मनमोहन सिंह के वो काम, जिन्हें भुलाना नहीं आसान

NewsCode | 26 September, 2018 4:04 AM
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नई दिल्ली। 26 सितंबर, 1936 को पाकिस्तान के गाह में जन्मे डॉक्टर मनमोहन सिंह देश के पहले सिख प्रधानमंत्री हैं। 22 मई 2004-26 मई 2014 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे डॉ. मनमोहन सिंह देश में आर्थिक सुधारों के जनक कहे जाते रहे हैं। आधुनिक भारतीय अर्थव्यवस्था को नया आयाम देने वाले मनमोहन सिंह की छवि एक बेहद सौम्य, विनम्र और मितभाषी नेता की है।

दस साल के यूपीए कार्यकाल में कम बोलने और अहम मुद्दों पर गुम रहने के कारण मनमोहन हमेशा विपक्षियों के निशाने पर रहे। हालांकि, पीएम बनने के पहले और बाद भी कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां उनके नाम दर्ज हैं। उनकी बनाई कुछ महत्वपूर्ण नीतियों को मोदी सरकार भी आगे बढ़ा रही है।

1. देश में आर्थिक सुधारों के प्रणेता

 1991 में पीएम नरसिम्हा राव की कांग्रेस सरकार में वह वित्त मंत्री हुआ करते थे। ये वो दौर था जब देश दिवालिया होने की कगार पर खड़ा था। देश का फिस्कल डेफिसिट यानी राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद के 8.5 के इर्द गिर्द था। महज एक वर्ष के भीतर मनमोहन सिंह ने उसे 5.9 फीसदी के स्तर पर लाने में कामयाबी हासिल कर ली थी। डॉक्टर सिंह द्वारा लागू किए सुधार कार्यक्रमों के बाद डूबती हुई इकॉनमी ने वह मुकाम हासिल कर लिया कि उसे पीछे मुड़कर नहीं देखना पड़ा।

2004 से 2014 तक लगातार 10 साल देश के पीएम रहे मनमोहन सिंह ने 1991 में जब देश के वित्त मंत्री का पद संभाला था तब आर्थिक क्रांति ला दी थी। इन्होंने ही ग्लोबलाइजेशन की शुरूआत की थी। 1991 से 1996 के बीच उनके द्वारा किए गए आर्थिक सुधारों की जो रूपरेखा, नीति और ड्राफ्ट तैयार किया, उसकी दुनिया भर में प्रशंसा की जाती है।

2. साल में 100 दिन का रोजगार पक्का

बेरोजगारी का दंश झेलते देश में रोजगार गारंटी योजना की सफलता का श्रेय मनमोहन सिंह को जाता है। इसके तहत बता दें कि साल में 100 दिन का रोजगार और न्यूनतम दैनिक मजदूरी 100 रुपये तय की गई।  इसकी खास बात यह भी है कि इसके तहत पुरुषों और महिलाओं के बीच किसी भी भेदभाव की अनुमति नहीं है। इसलिए, पुरुषों और महिलाओं को समान वेतन भुगतान किया जाना चाहिए। सभी वयस्क रोजगार के लिए आवेदन कर सकते हैं।

इसके तहत यदि सरकार काम देने में नाकाम रहती है तो आवेदक बेरोज़गारी भत्ता पाने के हकदार होंगे।  मनरेगा यानी महात्मा गांधी नेशनल रूरल एंप्लॉयमेंट गारंटी एक्ट 2005, ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत यूपीए के कार्यकाल में डॉक्टर मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री कार्यकाल में शुरू की गई थी।

3. आधार कार्ड योजना की संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी की तारीफ

पूर्व पीएम मनमोहन सिंह की आधार योजना की यूएन ने भी तारीफ की थी। यूएन की ओर से कहा गया था कि आधार स्कीम भारत की बेहतरीन स्कीम है। जैसा कि हम और आप देख ही रहे हैं कि वर्तमान पीएम मोदी की सरकार में आधार संख्या को यूनीक नंबर होने के चलते विभिन्न कामों में अनिवार्य कर दिया गया है। भारतीय विशिष्‍ट पहचान प्राधिकरण सन 2009 में मनमोहन सिंह के समय ही गठित किया गया जिसके तहत सरकार की इस बहुउद्देशीय योजना को बनाया गया। देश के हर व्यक्ति को पहचान देने और प्राथमिक तौर पर प्रभावशाली जनहित सेवाएं उस तक पहुंचाने के लिए इसे शुरू किया था।

4. भारत और अमेरिका के बीच न्यूक्लियर डील

साल 2002 में एनडीए से देश की बागडोर यूपीए के हाथ में गई। गठबंधन सरकार के तमाम प्रेशर के बीच भारत ने इंडो यूएस न्यूक्लियर डील को अंजाम दे दिया। साल 2005 में जब इस डील को अंजाम दिया गया, उसके बाद भारत न्यूक्लियर हथियारों के मामले में एक पावरफुल नेशन बनकर उभरा। उस वक्त यूएस में जॉर्ज बुश प्रेजिडेंट हुआ करते थे। इस डील के तहत यह सहमति बनी थी कि भारत अपनी इकॉनमी की बेहतरी के लिए सिविलियन न्यूक्लियर एनर्जी पर काम करता रहेगा।

5. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 (खाद्य अधिनियम का अधिकार) मनमोहन सिंह के कार्यकाल में ही पास हुआ।  भूख और कुपोषण को मात देने के उद्देश्य से शुरू की गयी इस महत्वकांक्षी योजना का लक्ष्य भारत के 1.2 अरब लोगों के लगभग दो तिहाई तक सब्सिडी वाले अनाज प्रदान करना है। 

इसमें मध्याह्न भोजन योजना, एकीकृत बाल विकास सेवा योजना और सार्वजनिक वितरण प्रणाली शामिल है। बिल के प्रावधानों के तहत, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (या पीडीएस) के लाभार्थी न्यूनतम मूल्यों पर प्रति व्यक्ति प्रति माह 5 किलोग्राम अनाज के हकदार हैं। इसमें चावल 3 रुपये प्रति किलो, गेहूं 2 रू प्रति किलो और मोटे अनाज (बाजरा) 1 रू प्रति किलो में मुहैया करवाये जाते हैं। 

6. शिक्षा का अधिकार

मनमोहन सिंह के कार्यकाल में ही राइट टु एजुकेशन यानी शिक्षा का अधिकार अस्तित्व में आया। इसके तहत 6-14 साल के बच्चे को शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित किया गया। कहा गया कि इस उम्र के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा दी ही जाएगी।


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जामताड़ा : ट्रक और बाइक में जोरदार टक्कर, तीन घायल

Tarun Kumar Choubey | 26 September, 2018 10:03 AM
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जामताड़ा। मंगलवार शाम करीब पांच बजे नारायणपुर थाना क्षेत्र के पबिया बाजार में गोविंदपुर-साहेबगंज हाइवे पर सीमेंट लदा ट्रक (जेएच 10 ओ 6365) से बाइक का आमने सामने टक्कर हो जाने से तीन लोग घायल हो गए। ट्रक धनबाद से सीमेंट लादकर जामताड़ा जा रही थी।

तीनों के सिर  व शरीर पर काफी चोटें लगी है। मौके पर ट्रक चालक ट्रक छोड़कर फरार हो गया। भीड़ ने ट्रक को अपने कब्जे में कर लिया। जानकारी के अनुसार  मोटरसाइकिल में तीन व्यक्ति सवार थे। चालक लबसन हेम्ब्रम (27), जितेंद्र टुडू (65) व महिला पकलु टुडू (35) तीनों की स्थिति नाजुक बताई जा रही है।

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सभी घायल नारायणपुर थाना क्षेत्र के मझलाड़ीह पंचायत के बरमसिया गांव का रहने वाले हैं। बजरंग दल के जिला संयोजक सोनू सिंह व भाजपा के मंडल अध्यक्ष सुधीर मंड़ल ने तीनों घायलों को बेहतर इलाज के लिए जामताड़ा सदर अस्पताल लाया। चिकित्सक ने प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए धनबाद भेज दिया।

स्थानीय लोगों ने किया सड़क जाम

स्थानीय लोगों ने दुर्घटना के बाद मुआवजे की मांग को लेकर सड़क जाम कर दिया गया। सूचना मिलते ही घटना स्थल पर नारायणपुर थाना प्रभारी अजय कुमार सिंह व एसआई बीके सिंह पुलिस बल के साथ पहुंचे। लोगों ने सरकारी मुआवजे की मांग कर रहे थे।

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थाना प्रभारी ने सड़क जाम कर रहे लोगों को समझा बुझाकर जाम हटाया। प्रभारी ने कहा कि सरकारी सहायता घायलों को जरूर मिलेगा। स्थानीय लोगों ने पबिया में अक्सर हो रहे दुर्घटना पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस बेरिकेड लगाने की मांग की। थाना प्रभारी ने उक्त व्यवस्था करने का आश्वासन दिया।

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बाघमारा : प्रखण्ड में आयोजित दिव्यांग शिविर में नहीं पहुंचे अधिकारी

NewsCode Jharkhand | 26 September, 2018 9:10 AM
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बाघमारा। प्रखण्ड में आयोजित दिव्यांग शिविर में को भी अधिकारी नहीं पहुंचा। बाघमारा प्रखण्ड में दिव्यांगों के सर्टीफिकेट बनाने के लिये शिविर का आयोजन की गई थी और साथ ही दिव्यांगों को पेंशन कार्ड भी बनाया जाना था। आयोजित शिविर में अधिकारी के नहीं पहुँचने पर दिव्यांग लोग बेहाल रहे।

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सुबह 10 बजे से ही दिव्यांग प्रखण्ड मुख्यालय पहुँच गये थे। तपती गर्मी में लाचार लोग तडपते रहे।  इस शिविर के लिये प्रचार-प्रसार किया गया था। ऐसे में अधिकारी का समय पर शिविर में न पहुँचना सरकार से लोगों का विस्वास तोड़ने का काम कर रहे  है।

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