आरएसएस मुख्यालय में प्रणव की पाठशाला, संघ को पढ़ाया गांधी-नेहरू का राष्ट्रवाद

NewsCode | 7 June, 2018 11:14 PM
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नई दिल्ली। पूर्व राष्ट्रपति और पुराने कांग्रेसी नेता प्रणब मुखर्जी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तृतीय वर्ष संघ शिक्षा वर्ग कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप शिरकत की। नागपुर में आरएसएस के संस्‍थापक केबी हेडगेवार की जन्‍मस्‍थली पहुंचे प्रणब मुखर्जी का स्‍वागत संघ प्रमुख मोहन भागवत ने किया। पूर्व राष्ट्रपति ने केशव बलिराम हेडगेवार को ‘भारत माता का एक महान सपूत’ बताते हुए आगंतुकों के लिए मौजूद किताब में लिखा, “मैं आज यहां भारत माता के महान सपूत को मेरी श्रद्धांजलि और सम्मान पेश करने आया हूं।”

कार्यक्रम को संबोधित करते हुआ प्रणब मुखर्जी ने कहा कि भारत में राष्ट्रीयता एक भाषा और एक धर्म की नहीं है। प्रणब ने कहा कि भारत की ताकत उसकी सहिष्णुता में निहित है और देश में विविधता की पूजा की जाती है। लिहाजा देश में यदि किसी धर्म विशेष, प्रांत विशेष, नफरत और असहिष्णुता के सहारे राष्ट्रवाद को परिभाषित करने की कोशिश की जाएगी तो इससे हमारी राष्ट्रीय छवि धूमिल हो जाएगी।

प्रणब मुखर्जी ने कहा कि वह इस मंच से राष्ट्र, राष्ट्रवाद और देशभक्ति पर अपना मत रखने के लिए आमंत्रित किये गए हैं। इन तीनों शब्दों को अलग-अलग देखना संभव नहीं है। इन शब्दों के समझने के लिए पहले हमें शब्दकोष की परिभाषा देखने की जरूरत है।

प्रणब ने कहा कि भारत एक मुक्त समाज था और पूर्व इतिहास में सिल्क रूट से सीधे जुड़ा था। इसके चलते पूरी दुनिया से तरह-तरह के लोगों का यहां आना हुआ। वहीं भारत से बौद्ध धर्म का विस्तार पूरी दुनिया में हुआ। चीन समेत दुनिया के अन्य कोनों से जो यात्री भारत आए उन्होंने इस बात को स्पष्ट तौर पर लिखा कि भारत में प्रशासन सुचारू है और बेहद मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर रहा है। नालंदा जैसे विश्वविद्यालय छठी सदी से लेकर 1800 वर्षों तक अपनी साख के साथ मौजूद रहे। चाणक्य का अर्थशास्त्र भी इसी दौर में लिखा गया।

प्रणब ने कहा कि जहां पूरी दुनिया के लिए मैगस्थनीज के विचार पर एक धर्म, एक जमीन के आधार पर राष्ट्र की परिकल्पना की गई वहीं इससे अलग भारत में वसुधैव कुटुंबकम की अवधारणा आगे बढ़ी, जिसने पूरी दुनिया को एक परिवार के तौर पर देखा। प्रणब ने कहा कि भारतीय इसी विविधता के लिए जाने जाते हैं और यहां विविधता की पूजा की जाती है।

इतिहास के पन्नों को खंगालते हुए प्रणब मुखर्जी ने कहा कि भारत में राज्य की शुरुआत छठी सदी में महाजनपद की अवधारणा में मिलती है। इसके बाद मौर्य, गुप्त समेत कई वंश का राज रहा और इस अवधारणा पर यह देश आगे बढ़ता रहा। इसके बाद 12वीं सदी में मुस्लिम आक्रमण के बाद से 600 वर्षों तक भारत में मुगलों का राज रहा। इसके बाद ब्रिटिश हुकूमत आई एक बहुत बड़े हिस्से पर राज किया। पहले ईस्ट इंडिया कंपनी और फिर ब्रिटिश हुकूमत ने सीधे भारत पर राज किया।

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प्रणब ने कहा कि आधुनिक भारत की परिकल्पना कई लोगों ने की। इसका पहला अंश भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेशन इन द मेकिंग में मिलता है। इसके बाद नेहरू ने अपनी किताब ‘भारत एक खोज’ में कहा कि भारतीय राष्ट्रीयता केवल हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई के मिलन से ही विकसित होगी। वहीं गांधी के नेतृत्व में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के निरंतर प्रयासों से देश को 1947 में आजादी मिली, जिसके बाद सरदार पटेल की अथक मेहनत से भारत का एकीकरण किया गया।

प्रणब ने कहा कि आजादी के बाद 26 जनवरी 1950 को देश ने अपने लिए नया संविधान अंगीकृत किया। इस संविधान ने देश को एक लोकतंत्र के तौर पर आगे बढ़ाने की कवायद की। हालांकि प्रणब ने कहा कि भारत को लोकतंत्र किसी तोहफे की तरह नहीं मिला बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी के साथ लोकतंत्र के रास्ते पर पहल कदम बढ़ाया गया।

प्रणब मुखर्जी ने संघ के मंच से ट्रेनिंग लेने वाले शिक्षार्थियों को कहा कि वह शांति का प्रयास करें और जिन आदर्शों पर नेहरू और गांधी जैसे नेताओं ने राष्ट्र, राष्ट्रीयता और देशभक्ति की परिभाषा दी उन्हीं रास्तों पर चलते हुए देश की विविधता को एक सूत्र में पिरोने का काम करें। प्रणब ने कहा कि बीते कई दशकों की कोशिश के बाद आज भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शुमार है ,लेकिन हैपिनेस इंडेक्स में भारत अभी भी 133वें नंबर पर है। लिहाजा, हमारे ऊपर जो दायित्व है उसे निभाते हुए कोशिश करने की जरूरत कि जल्द से जल्द भारत हैपीनेस इंडेक्स में शीर्ष के देशों में शुमार हो।

प्रणब मुखर्जी के भाषण का राजनीतिक लाभ उठाने में जुटे बीजेपी-कांग्रेस

प्रणब मुखर्जी के भाषण के बाद बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दल इसे अपने विचार की जीत और दूसरे को दी गई नसीहत बताने में जुट गए हैं। बता दें कि प्रणब मुखर्जी द्वारा RSS के कार्यक्रम में शामिल होने का न्योता स्वीकार किए जाने का कांग्रेस नेताओं ने जमकर विरोध किया था। कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं ने प्रणब मुखर्जी से RSS के कार्यक्रम में नहीं जाने की अपील की थी, लेकिन वो नहीं माने। हालांकि कांग्रेस पार्टी ने आधिकारिक तौर पर प्रणब मुखर्जी को लेकर कोई बयान नहीं जारी किया था।

आरएसएस के मंच से प्रणब के भाषण के बाद कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति ने आरएसएस को उसके मुख्यालय में ही आईना दिखाने का काम किया है कि विविधता, सहिष्णुता और बहु-सांस्कृतिकवाद ही लोकतंत्र का भारतीय तरीका है।

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सुरजेवाला ने कहा कि प्रणब मुखर्जी ने आरएसएस को भारत का इतिहास याद दिलाया है। उन्होंने बताया है कि भारत की सुंदरता विचारों, धर्मों, भाषाओं की विविधता के प्रति सहिष्णुता में है। क्या आरएसएस सुनने को तैयार है?

वहीं, दूसरी ओर जिस तरह पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी आरएसएस के तृतीय वर्ष शिक्षा वर्ग के समापन समारोह में पहुंचे और संघ के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार के जन्मस्थल पहुंचकर उनको श्रद्धांजलि दी, उससे बीजेपी और आरएसएस गदगद नजर आ रहे हैं।

इस दौरान प्रणब मुखर्जी ने हेडगेवार को भारत माता का महान सपूत करार दिया, जिसको बीजेपी और आरएसएस अपनी सबसे बड़ी जीत बता रहे हैं। बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, ‘प्रणब जी ने अपने भाषण की शुरुआत ही भारत को पहला राष्‍ट्र बताते हुए की। यही तो हमारा विचार है।’

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पाकुड़ : भाजपा की बैठक आयोजित, हुल दिवस को लेकर हुई चर्चा

NewsCode Jharkhand | 25 June, 2018 9:16 PM
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पाकुड़। लिट्टीपाड़ा प्राखण्ड दामिन डाक बंगला परिषर में भाजपा की बैठक प्रखण्ड अध्यक्ष राम मंडल की अध्यक्षता में आहुत किया गया। जिसमे मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश उपाध्यक्ष सह पूर्व मंत्री हेमलाल मुर्मू उपस्थित हुये। बैठक में  मुख्य रूप से 30 जून को  हूल दिवस को लेकर चर्चा की गयी। मंडल इकाई के लोगों को 30 जून को पांच कठिया से भोगनाडीह ले जाने के बातें हुई।

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साथ ही प्रदेश उपाध्यक्ष मुर्मू ने बताया कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम बिल आदिवासियों के हित के लिए बनाया गया है। इसको लेकर विपक्ष दुष्प्रचार कर रहे है लेकिन सभी से अपील किया  हर आदिवासी गांव गांव एवं  घर-घर  जाकर सभी को भूमि  अधिग्रहण अधिनियम बिल के बारे में सरकार की उप्लब्धि आदिवासियों एवं जनजातियों को स्पस्ट रूप से बताया जाएगा। यह कानून सरकारी जनहित के  कार्यो लिया बनाया गया है जिसके तहत सरकारी स्कूल, कॉलेज , हॉस्पिटल, सड़क, रेलवे के अच्छे काम में आएगे।

साथ ही भाजपा नेता साहेब हाँसदा ने कहा कि बूथ स्तर पर संगठन मजबूती करने, गाँव-गाँव में जाकर सरकार  कि उपलब्धी के बारे में जानकरी देने के लिए कार्यकर्त्ताओं  से अनुरोध किया । इस बैठक के मौके पर एस टी मोर्चा प्रखंड अध्यक्ष भोला हेम्ब्रम, प्रखंड प्रभारी सुलेमान मुर्मू, दिनेश मुर्मू, जिला कार्यकारणी सदस्य बबलू सोरेन, पंचायत प्रभारी मंझला सोरेन, प्रखंड उपाध्यक्ष मुंशी मुर्मू, प्रखंड मंत्री रेंगटा किस्कू सहित दर्जनों कार्यकार्ता उपस्थित थे।

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बेंगाबाद : तेज रफ्तार का टूटा कहर, बाइक सवार युवक की मौत

NewsCode Jharkhand | 25 June, 2018 9:20 PM
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बेंगाबाद (गिरिडीह)। बेंगाबाद मधुपुर मुख्य मार्ग एनएच 114 ए पर सोमवार को फिर रफ्तार का कहर टूटा और एक ज़िन्दगी काल के गाल में समां गई। इस पथ पर झलकडीहा मोड़ के समीप एक तेज रफ्तार बाइक अनियंत्रित होकर पहले सड़क किनारे पुलिया से टकराई फिर दूर गड्ढे में जा गिरी। घटना में बाइक पर सवार लगभग 25 वर्षीय युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। आनन-फानन में उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाने के क्रम में उसने दम तोड़ दिया।

बेंगाबाद : नए रेंजर ने लिया पदभार, कहा वनों की सुरक्षा होगी प्राथमिकता : अजय कुमार

बेंगाबाद पुलिस द्वारा शव को कब्ज़े में लेकर पोस्टमार्टम सदर अस्पताल पहुंचाया गया। ख़बर लिखे जाने तक मृतक युवक की पहचान नही हो पाई थी। घटना के संबंध में बताया गया कि जेएच 15बी 9021 नंबर की एक यामाहा बाइक पर सवार होकर एक युवक  मधुपुर से गिरिडीह की ओर आ रहा था। इसी क्रम में अत्यधिक स्पीड होने के कारण झलकडीहा मोड़ के पर बाइक का संतुलन बिगड़ गया और बाइक सड़क किनारे बनी पुलिया से टकरा गई। फिलहाल पुलिस द्वारा मृतक के घरवालों का पता लगाया जा रहा है।

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जमशेदपुर : महाधरना तो ट्रेलर है, पूरी फिल्म 5 जुलाई को दिखेगी- विपक्ष

NewsCode Jharkhand | 25 June, 2018 9:03 PM
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भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल के विरोध में विपक्ष का महाधरना

जमशेदपुरभूमि अधिग्रहण संशोधन बिल के विरोध में सम्पूर्ण विपक्ष द्वारा आहूत राज्य-व्यापी जिला मुख्यालयों पर महाधरना के आलोक में पूर्वी सिंहभूम जिला मुख्यालय के समक्ष भी विपक्षी दलों की एकता देखने को मिली। बिल के विरोध में विपक्षी गठबंधन द्वारा चलाये जा रहे विरोध प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने यहां विधि-व्यवस्था को लेकर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। विपक्षी दलों के नेताओं धरना के माध्यम से एक स्वर से राज्य सरकार से बिल को अविलंब निरस्त करने की मांग की है।

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भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल को लेकर पूरे सूबे की गरमाई सियासत के बीच विपक्षी दलों का आंदोलन अब तीखा हो चला है। आंदोलन के क्रम में विपक्षी दलों ने पूर्वी सिंहभूम जिला मुख्यालय पर महा धरना देकर राज्य सरकार तक संदेश दिया कि बिल के मौजूदा स्वरूप को किसी भी सूरत में स्वीकार नही किया जाएगा।

विपक्षी दल जेएमएम, कांग्रेस, जेवीएम, आरजेडी और वाम दलों और संगठनों के लोगों ने बिल के विरोध में एकजुटता दिखाते हुए राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा किया और कहा कि झारखंडी आवाम के हितों के विपरीत लाये गए भूमि अधिग्रहण बिल पूंजीपतियों के फायदे के लिए है न कि यहां के निवासियों के लिए।

महाधरना के माध्यम से सरकार को चेतावनी दी गई कि यदि तमाम विरोध के बावजूद बिल को लागू किया जाता है तो आने वाले चुनावों में भाजपा को मुँह की खानी पड़ेगी। विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति द्वारा बिल को मंजूरी दिए जाने पर कहा कि दरअसल इस मुद्दे पर राष्ट्रपति को भी अंधेरे में रख कर बाइक डोर से बिल पास कराया गया है, जो किसी भी सूरत में स्वीकार नही किया जाएगा। बिल के विरोध में महाधरना तो एक फ़िल्म का ट्रेलर है, बाकी पूरी फिल्म 5 जुलाई को आहत झारखंड बन्द के दौरान दिखेगी।

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