पितृ पक्ष: श्राद्ध क्रिया में इन खास बातों का रखें ख्याल

NewsCode | 6 September, 2017 12:57 PM
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हिंदू कर्मकांड में श्रद्धा और मंत्र के मेल से पूर्वपुरुषों (पितरों) की आत्मा की तृप्ति के निमित्त जो विधि होती है उसे श्राद्ध कहते हैं। हमारे जिन सगे-संबंधियों का देहांत हो गया है, वे पितृलोक में या यत्र-तत्र विचरण करते हैं, उनके लिए पिण्डदान किया जाता है। बच्चों एवं संन्यासियों के लिए पिण्डदान नहीं किया जाता। आज से पितृ पक्ष प्रारंभ हो गया है।

अगर पंडित से श्राद्ध नहीं करा पाते तो सूर्य नारायण के आगे अपने दोनों हाथ ऊपर करके ये बोलें : “हे सूर्य नारायण ! मेरे पिता (नाम), अमुक (नाम) का बेटा, अमुक जाति (नाम), (अगर जाति, कुल, गोत्र नहीं याद तो ब्रह्म गोत्र बोल दें) को आप संतुष्ट/सुखी रखें। इस निमित्त मैं आपको अर्घ्य व भोजन करता हूं।” इसके पश्चात् आप भगवान सूर्य को अर्घ्य दें और भोग लगायें।

 इन बातों का रखें खास ख्याल –

  • श्राद्ध में कपड़े और अनाज दान करना ना भूलें। इससे पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है।
  • बताया जाता है कि श्राद्ध दोपहर उपरांत ही किया जाना चाहिए। जानकारों के अनुसार जब सूर्य की छाया पैरों पर पड़ने लगे तो श्राद्ध का समय हो जाता है। दोपहर या सुबह में किये गए श्राद्ध का कोई मतलब नहीं होता है।
  • जिस दिन श्राद्ध करना हो उससे एक दिन पूर्व ही उत्तम ब्राह्मणों को निमंत्रण दे दें। परंतु श्राद्ध के दिन कोई अनिमंत्रित तपस्वी ब्राह्मण घर पर पधारें तो उन्हें भी भोजन कराना चाहिए।  ब्राह्मण भोज के वक्त खाना दोनों हाथों से परोसें, एक हाथ से खाने को पकड़ना अशुभ माना जाता है।
  • श्राद्ध के दिन घर में सात्विक भोजन ही बनना चाहिए। इस दिन खाने में लहसुन और प्याज का इस्तेमाल  नहीं होना चाहिए। गौर करने वाली बात यह भी है कि पितरों को जमीन के नीचे पैदा होने वाली सब्जियां नहीं चढ़ाई जाती हैं। इनमें अरबी, आलू, मूली, बैंगन और अन्य कई सब्जियों शामिल हैं।
  • पूरे विधान में मंत्र का बड़ा महत्व है। श्राद्ध में आपके द्वारा दी गयी वस्तु कितनी भी बेशकीमती क्यों न हो, आपके द्वारा यदि मंत्र का उच्चारण ठीक न हो तो काम व्यर्थ हो जाता है। मंत्रोच्चारण शुद्ध होना चाहिए और जिसके निमित्त श्राद्ध करते हों उसके नाम का उच्चारण भी शुद्ध करना चाहिए।
  • श्राद्ध के दिन अपने पितरों के नाम से ज्यादा से ज्यादा गरीबों को दान करें।

10 रन पर 8 विकेट, झारखण्ड के स्पिनर शाहबाज नदीम ने तोड़ा 21 साल पुराना विश्व रिकॉर्ड

NewsCode | 20 September, 2018 2:08 PM
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नई दिल्ली। झारखण्ड के खब्बू स्पिनर शाहबाज नदीम ने नया कीर्तिमान रच दिया है। नदीम ने विजय हजारे ट्रॉफी में राजस्थान के खिलाफ खेलते हुए सिर्फ 10 रन पर 8 विकेट चटकाकर लिस्ट-ए क्रिकेट में सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी का दो दशक पुराना विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया है।आईपीएल की दिल्ली डेयरडेविल्स टीम का हिस्सा शाहबाज नदीम की स्पिन के जाल में फंसकर राजस्थान की टीम 28.3 ओवर में केवल 73 रनों पर ढेर हो गई। नदीम ने 10 ओवर में 4 मेडन फेंकते हुए 10 रन देकर 8 विकेट हासिल किए और टीम इंडिया में जगह बनाने की मजबूत दावेदारी पेश कर दी है।

बता दें कि लिस्ट-ए क्रिकेट में इससे पहले का विश्व रिकॉर्ड भी भारत के ही बाएं हाथ के स्पिनर राहुल सांघवी के नाम था, जिन्होंने 1997-98 में हिमाचल प्रदेश के खिलाफ दिल्ली की ओर से खेलते हुए 15 रन देकर 8 विकेट चटकाए थे। सांघवी भारत की ओर से एकमात्र टेस्ट 2001 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले।

लिस्ट-ए क्रिकेट में सर्वश्रेष्ठ बॉलिंग प्रदर्शन

8/10 शाहबाज नदीम, 2018

8/15 राहुल सांघवी, 1997/98

8/19 चामिंडा वास, 2001/02

8/20 थारका कोटेहेवा 2007/08

8/21 माइकल होल्डिंग, 1988

गौरतलब है कि 29 साल के नदीम ने अब तक 99 प्रथम श्रेणी मैचों में 29.74 की औसत से 375 विकेट चटकाए हैं। उन्होंने 87 लिस्ट ए मैचों में 124 विकेट, जबकि 109 टी-20 मैचों में 89 विकेट हासिल किए हैं।

लिस्ट-ए क्रिकेट में वनडे इंटरनेशनल के अलावा विभिन्न घरेलू मुकाबले शामिल होते हैं। वैसे अंतर्राष्ट्रीय मैच भी लिस्ट-ए के अंतर्गत आते हैं, जिनमें खेल रही टीमों को वनडे इंटरनेशनल का दर्जा प्राप्त नहीं है। लिस्ट-ए के तहत 40 से 60 ओवरों तक की एक पारी होती है।


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रांची : एनसीसी ने नशा मुक्त एवं यातायात नियमों के प्रति निकाली जागरूकता रैली

Chandan Verma | 20 September, 2018 2:45 PM
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रांची। झारखण्ड बटालियन एन.सी.सी. द्वारा रांची ग्रूप के एन.सी.सी. कड़ेट्स को प्रशिक्षण  प्रदान करने के लिए दस दिवसीय संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर का आयोजन के रांची के बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम मोरहाबादी में किया गया है।

इस शिविर में एन.सी.सी कड़ेट्स ने समाज के नशा के दुष्प्रभाव व ड्रग्स एडिक्शन से छुटकारा पाने के लिए शिविर से कहचरी चौक तक एक जागरूकता रैली में हिस्सा लिया और स्वयं आरा-करम से आये हुए रमेश बेदिया एवं नगरकोटी विभाग से आए पदाधिकारी संजय मिश्रा ने इस पर प्रकाश डाला।

रांची : मांदर की थाप पर झूमे सुबोधकांत, धूमधाम से मना करमा पर्व  

इसी शिविर में कैडेट्स को  यातायात नियमों के अनुपालन के प्रति समाज में जागरूकता रैली सिद्धू कान्हू से मुख्यमंत्री आवास से होते हुए सूचना भवन से गुजरते हुए एन.सी.सी. शिविर मोरहाबादी तक निकाली गई तथा नगर के नागरिकों को जागरूक किया गया।

शिविर में एन. सी.सी. कैडेट्स को 9 बटालियन एन. डी.आर.एफ. की टीम ने आपदा प्रबंधन के विभिन्न तरीकों जैसे की सी.पी.आर., रक्त की बहाओ को रोकना, स्थानिय वस्तु से स्ट्रेचर/लाइफ जैकेट बनाने की शिक्षा दी ताकि जरूरत पड़ने पर एन. सी.सी. कैडेट्स आपदा प्रबंधन में प्रशासन की मदद कर सके।

इसके अलावा कड़ेट्स को शूटिंग रेंज में फ़ाईरिंग में निपुणता हासिल करने के लिए ट्रेनिंग दी गयी। शिविर में मिलिटेरी ट्रेनिंग कैम्प कामंडैंट कर्नल अभिजात कश्यप, सूबेदार  मेजर- Lt.लखबीर सिंह,सूबेदार अर्जुडेन्ट राधे भगत , बी.अच्.ऍम. हरजीत सिंह और अन्य सैन्य अधिकारी द्वारा प्रदान किया जा रहा है।

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रांची : मांदर की थाप पर झूमे सुबोधकांत, धूमधाम से मना करमा पर्व  

NewsCode Jharkhand | 20 September, 2018 2:38 PM
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रांची। आरयू के जनजातीय क्षेत्रीय भाषा विभाग में प्रकृति पूजा का पर्व करमा धूमधाम से मनाया गया। प्रो.वीसी कामिनी कुमार, राज्यसभा सांसद समीर उरांव, पूर्व  केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय आदि शामिल होकर मांदर की थाप पर खूब झूमे। झारखंड की जनता को करमा पर्व की बधाई दी।

करमा उत्‍सव के मौके पर छात्राओं ने पारंपारिक नृत्य प्रस्तुत की। पांच साल का बच्चा आदिवासी परिधान में मांदर बजाया। करमा पर्व पर आदिवासियों ने किसानों की अच्छी फसल और परिवार की खुशहाली की कामना की।  बहनें अपने भाइयों की सलामती के लिए प्रार्थना की।

झारखंड के आदिवासी ढोल और मांदर की थाप पर झूमते-गाते रहे। परम्परा के मुताबिक खेतों में बोई गई फसलें बर्बाद न हो इसलिए प्रकृति की पूजा की जाती है।

इस मौके पर एक बर्तन में बालू भरकर उसे बहुत ही कलात्मक तरीके से सजाया जाता है। पर्व शुरू होने के कुछ दिनों पहले ही उसमें जौ डाल दिए जाते है। करम पर्व के दिन यही जावा आदिवासी महिला अपने बालों में गूंथकर झूमती-नाचती है।

मौके पर मौजूद राजयसभा उपसभापति हरिवंश ने कहा कि करमा पर्व प्रकृति की सरंक्षण का पर्व है। जो समाज में उत्साह का माहौल बनाता है ।

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