रेस्तराओं समेत 178 वस्तुओं पर जीएसटी की नई दरें हुईं लागू

NewsCode | 16 November, 2017 9:00 AM

रेस्तराओं से इनपुट टैक्स क्रेडिट की सुविधा वापस ले ली गई है, क्योंकि वे इसका लाभ ग्राहकों तक नहीं हस्तांतरित करते थे।

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नई दिल्ली | वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद की हालिया बैठक में अति व्यापक बदलाव के बाद तय जीएसटी की नई दरें बुधवार से लागू हो गई हैं। जीएसटी परिषद ने 178 वस्तुओं पर जीएसटी की दरें घटाई हैं। इस बदलाव के बाद रेस्तराओं में खाना अब सस्ता हो गया है। बुधवार को जारी अधिसूचना के मुताबिक 7,500 रुपये प्रति कमरा रोजाना तक शुल्क लेने वाले अच्छे होटल के बाहर के सभी रेस्तराओं को पांच फीसदी जीएसटी दर के दायरे में रखा गया है।

हालांकि रेस्तराओं से इनपुट टैक्स क्रेडिट की सुविधा वापस ले ली गई है, क्योंकि वे इसका लाभ ग्राहकों तक नहीं हस्तांतरित करते थे।

हालांकि 7,500 रुपये से ज्यादा प्रति कमरा रोजाना शुल्क रखने वाले होटलों के रेस्तराओं को 18 फीसदी जीएसटी के दायरे में रखा गया है। साथ ही, इनको इनपुट क्रेडिट का लाभ भी दिया गया है।

जीएसटी की कटौती बहुत सारी उपभोक्ता वस्तुओं पर की गई है, जिनमें चॉकलेट, चुइंग गम, शैंपू, डियोडरेंट, शू पॉलिश, डिटरजेंट, पोषक पेय पदार्थ, पत्थर व सौंदर्य प्रसाधन के सामान शामिल हैं।

सबसे ऊंची जीएसटी दर 28 फीसदी के दायरे में सिर्फ 50 वस्तुओं को रखा गया है, जिनमें विलासिता व पातक वस्तुओं यानी सिन गुड्स जैसे मादक पदार्थ आदि, सफेद बजाजी सामान यानी ह्वाइट गुड्स, सीमेंट, पेंट, ऑटोमोबाइल, वाशिंग मशीन, एयर कंडीशनर, हवाई जहाज और नौका के कल-पूर्जे आदि।

सार्वजनिक निधि से संचालित अनुसंधान संस्थानों को मुहैया किए जाने वाले वैज्ञानिक व तकनीकी उपकरणों पर भी जीएसटी दर में रियायत कर पांच फीसदी रखी गई है।

जीएसटी के जानकार प्रीतम महुरे ने आईएएनएस को बताया, “इस बड़े बदलाव का फायदा उपभोक्ताओं को मिलेगा, बशर्ते तेजी से बिकने वाली उपभोक्ता वस्तुओं यानी एफएमसीजी के कारोबारी अपने उत्पादों की कीमतों को जल्दी घटाएं।”

गौरतलब है कि जीएसटी परिषद ने 10 नवंबर की बैठक में 178 वस्तुओं पर जीएसटी की दरों में कटौती करते हुए उन्हें 28 फीसदी के दायरे से निकाल बाहर किया था।

(आईएएनएस)

दिल्ली में 14,000 से ज्यादा पेड़ों की कटाई के विरोध में ‘आप’ का चिपका आंदोलन

NewsCode | 24 June, 2018 7:54 PM
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नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पुनर्विकास के नाम पर 14 हजार से ज्यादा पेड़ काटने का विरोध तेज हो गया है। आम लोगों के साथ अब आम आदमी पार्टी भी इसके खिलाफ उतर आई है। आज रविवार को सरोजिनी नगर में पार्टी ने एक बड़े चिपको आंदोलन का आयोजन किया। सोशल मीडिया में #DelhiChipkoAndolan लगातार ट्रेंड कर रहा है।

दिल्ली सरकार में ‘आप’ के मंत्री इमरान हुसैन ने कई विधायकों, पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों के साथ मिलकर पेड़ों से चिपककर विरोध-प्रदर्शन किया। लोग हाथ से लिखे पोस्टर के साथ पेड़ों को बचाने की अपील करने के लिए वहां पहुंचे थे।

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन ने केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप पुरी से इस प्रोजेक्ट को किसी दूसरे जगह शिफ्ट करने की अपील की।

वहीं, पार्टी के विधायक सौरभ भारद्वाज ने कहा कि, “जब सारी जनता , दिल्ली सरकार और केन्द्र सरकार पेड़ों के बारे में इतनी चिंतित है तो केन्द्र सरकार प्रोजेक्ट बंद कर दे। अब कोई पेड़ ना काटा जाए”

बता दें कि सरोजिनी नगर में शनिवार को भी पेड़ काटने के विरोध में कुछ स्थानीय लोगों और युवाओं ने पेड़ से चिपककर उसे बचाने की अपील की।उनका कहना था कि सुंदर नगर में पेड़ कट चुके हैं। अब सरोजिनी नगर व आरकेपुरम में इन्हें काटा जाना है। हम इसका विरोध कर रहे है। सभी ने कहा कि प्रदूषण मुक्त दिल्ली का नारा पेड़ काटने से पूरा नहीं होगा।

क्या है पूरा मामला ?

दरअसल, केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने दक्षिणी दिल्ली में स्थित सात सरकारी आवसीय कॉलोनियों के पुनर्विकास का प्रस्ताव बनाया था। केंद्र सरकार की कैबिनेट इस पुनर्विकास प्लान को वर्ष 2016 में ही मंजूरी दे चुकी है। इसके तहत ही दक्षिणी दिल्ली में स्थित किदवई नगर में 1123, नेताजी नगर में 2294, नैरोजी नगर में 1454, मोहम्मदपुर में 363 और सरोजनी नगर में 11 हजार से अधिक पेड़ काटे जाने हैं। नैरोजी में पेड़ों की कटाई भी शुरू हो चुकी है। अब इन पेड़ों की कटाई का विरोध शुरू हो गया है। हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि वह जितने पेड़ काटेंगे उससे दोगुना पौधे लगाएं जाएंगे। पूरा पुनर्विकास प्लान ग्रीन प्रोजेक्ट होगा।

1973 में पहली बार हुआ था चिपको आंदोलन

चिपको आंदोलन की शुरुआत उत्तराखंड के चमोली में वर्ष 1973 में हुई थी। तब ग्रामीण किसानों ने राज्य के वन ठेकेदारों द्वारा वनों और जंगलों को काटने के विरोध में चिपको आन्दोलन चलाया था। चिपको आंदोलन का सीधे-सीधे अर्थ है किसी चीज से चिपककर उसकी रक्षा करना। जब यह आंदोलन वहां पर चल रहा था, तब वनों की कटाई को रोकने के लिए गांव के पुरुष और महिलाएं पेड़ों से लिपट जाती थीं और ठेकेदारों को पेड़ नहीं काटने देती थी। इस आंदोलन में महिलाओं की संख्या अधिक होती थी।

जानिए क्या है चिपको आंदोलन, जिस पर Google ने बनाया डूडल

इस आंदोलन को चंडीप्रसाद भट्ट, गौरा देवी और ग्रामीणों ने मिलकर अंजाम दिया था। बाद में प्रसिद्ध पर्यावरण प्रेमी सुन्दरलाल बहुगुणा ने आगे बढ़ाया। आंदोलन को सम्यक जीविका पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है। जिस समय यह आन्दोलन चल रहा था, उस समय केंद्र की राजनीति में भी पर्यावरण एक एजेंडा बन गया था। इस आंदोलन को देखते हुए तत्कालीन केंद्र सरकार ने वन संरक्षण अधिनियम बनाया।

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धनबाद : झरिया के अस्तित्‍व को बचाने के लिए फिर होगा आंदोलन

NewsCode Jharkhand | 24 June, 2018 7:48 PM
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झरिया को उजाडने की सरकारी मंसूबे को जनता कामयाब नहीं होने देगी

धनबाद (झरिया)। झरिया के अस्तित्व को बचाने के लिए एक बार फिर आंदोलन होगा। इसबार आंदोलन की मुख्‍य भूमिका में पूर्व मंत्री समरेश सिंह रहेंगे। आंदोलन की रुपरेखा तैयार करने के बावत आज झरिया प्रेस क्लब में समरेश सिंह की अगुवाई में बैठक हुई जिसमें पूर्व में हो चुके झरिया आंदोलन से जुड़े कई लोगों ने भाग लिया।

बैठक में निर्णय लिया गया कि झरिया को बचाने के लिए यह आखिरी आंदोलन होगा। इस आंदोलन में झरिया की जनता पूरी ईमानदारी से लड़ेगी।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि बंद आर एस पी कॉलेज को उसी जगह चालू किया जाएगा जहां वह है। इसके लिए कोर्ट जाना पड़े या कहीं और लेकिन बंद कॉलेज को खुलवाया जाएगा। बैठक में भाग ले रह लोगों ने एकसुर से कहा कि केंद्र व राज्य सरकार झरिया के अस्तित्व को खत्म करना चाहती है जिसे यहां की जनता सफल नहीं होने देगी।

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गिरीडीह : सुरीली आवाज से जिले के साथ गांव का नाम रौशन करना चाहती है नाजिया

NewsCode Jharkhand | 24 June, 2018 7:36 PM
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उदित नारायण के साथ मंच साझा कर चुकी है

गिरीडीह। अपनी सुरीली आवाज से संगीत की दुनिया में धूम मचानेवाली नाजिया परवीन अपने गृह जिले गिरीडीह व गांव का नाम रौशन कर रही है। वह इस जिले के पिहरा गांव की रहनेवाली है। मशहूर बॉलीवुड गायक उदित नारायण के साथ वह मंच साझा कर चुकी है।

हाल ही में उनकी मेरी आवाज ही मेरी पहचान है एलबम रिलीज हुई है। एलबम में वह पर्दे पर गाती नजर आती है। आवाज में तो वाकई जादू है। ईद के मौके पर अपने घर पहुंची नाजिया ने बताया कि झारखंड की नक्सली घटना पर चिलखारी एक दर्द नामक सिनेमा बन रही है जिसमें उन्‍हें उदित नारायण के साथ गाने का मौका मिला।

गिरीडीह : युवती को लेकर युवक फरार, परिजनों ने थाने में लगाई गुहार

नाजिया इससे पहले तू लौट के आजा एलबम में एक गीत को आवाज दे चुकी है। नाजिया के पिता मोहम्‍मद मोइनुद्दीन पेशे से एक किसान हैं व मां जैनब खातून आंगनबाड़ी सेविका है।

 गिरीडीह : सुरीली आवाज से जिले के साथ गांव का नाम रौशन करना चाहती है नाजिया

मैट्रिक तक की पढ़ाई कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय गावां से पूरी करने के बाद नाजिया रांची में रहकर एमए करने के साथ-साथ संगीत भी सीख रही है। कस्‍तूरबा विद्यालय में पढ़ने के दौरान नाजिया स्‍कूल में आयोजित गीत-संगीत व नृत्‍य प्रतियोगिता में भाग लेती थी और दर्शकों का वाहवाही बटोरती थी।

नाजिया का सपना अपनी आवाज के जरिये पिछडे जिले में शुमार गिरीडीह तथा अपने गांव पिहरा गावां को पहचान दिलाना है।

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