रांची : मदर्स डे विशेष : सागर स्याही और धरती कागज बन जाय तो भी मां का वर्णन मुश्किल

Nitish Kumar | 13 May, 2018 2:28 PM
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रांची। ‘मां’ को सिर्फ एक शब्‍द में बयां नहीं किया जा सकता है। मां का वर्णन करने के लिए हजारों शब्‍द भी कम पड़ जाएगें। जब कोई बच्‍चा जन्‍म लेता है तो उसके मुख से निकलने वाला पहला शब्‍द मां ही होता है। मां एक ऐसा रिश्‍ता होता है जिसमें कोई स्‍वार्थ नहीं होता है। इसलिए कहा जाता मां का रिश्‍ता ही अनमोल है।

किसी ने कहा है कि सागर को स्याही बना लिया जाए और धरती को कागज, तब भी मां की महिमा नहीं लिखी जा सकती। इसीलिए हर बच्चा कहता है ‘मेरी मां सबसे अच्छी है।‘ जबकि मां, इसकी-उसकी नहीं हर किसी की अच्छी ही होती है, क्योंकि वह मां होती है

सभी के लिये मातृ दिवस वर्ष का एक बहुत ही खास दिन होता है। जो लोग अपनी मां को बहुत प्यार करते हैं और ख्याल रखते हैं वो इस खास दिन को कई तरह से मनाते हैं। ये साल एकमात्र दिन है जिसे दुनिया की सभी माँ को समर्पित किया जाता है।

विभिन्न देशों में रहने वाले लोग इस उत्सव को अलग अलग तारीखों पर मनाते हैं साथ ही अपने देश के नियमों और कैलेंडर का अनुसरण इस प्यारे त्योहार को मनाने के लिये करते हैं।

मदर्स डे विशेष : सागर स्याही और धरती कागज बन जाय तो भी मां का वर्णन मुश्किल

भारत में इसे हर साल मई के दूसरे रविवार को देश के लगभग हर क्षेत्र में मनाया जाता है। पूरे भारत में आज के आधुनिक समय में इस उत्सव को मनाने का तरीका बहुत बदल चुका है। ये अब समाज के लिये बहुत बड़ा जागरुकता कार्यक्रम बन चुका है।

सभी अपने तरीके से इस उत्सव में भाग लेते हैं और इसे मनाते हैं। विविधता से भरे इस देश में ये विदेशी उत्सव की मौजूदगी का इशारा है। ये एक वैश्विक त्योहार है जो कई देशों में मनाया जाता है।

“जब मैं पैदा हुआ, इस दुनिया में आया, वो एकमात्र ऐसा दिन था मेरे जीवन का जब मैं रो रहा था और मेरी मां के चेहरे पर एक सन्तोषजनक मुस्कान थी।“ए.पी. जे. अब्‍दुल कलाम आजाद

इतिहास

दुनियाभर में मई माह के दूसरे रविवार को मदर्स डे मनाया जाता है। खास तौर से मां के प्रति कृतज्ञता व्यक्त कर उनके दिए गए अथाह प्यार और स्नेह के लिए धन्यवाद देने का एक माध्यम है यह दिन। जितना खास है यह दिन, उतनी ही रोचक है इस दिन को मनाने की शुरुआत भी। अलग-अलग देशों में इस दिन को मनाने की अलग-अलग कहानी है।

चीन में  यह बेहद लोकप्रिय है और इस दिन उपहार के रूप में गुलनार के फूल सबसे अधिक बिकते हैं। 1997 में चीन में यह दिन गरीब माताओं की मदद के लिए निश्चित किया गया था। खासतौर पर उन गरीब माताओं के लिए जो ग्रामीण क्षेत्रों, जैसे पश्चिम चीन में रहती हैं।

जापान में मातृ दिवस शोवा अवधि के दौरान महारानी कोजुन (सम्राट अकिहितो की मां) के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता था। आज कल इसे अपनी मां के लिए ही लोग मनाते हैं। बच्चे गुलनार और गुलाब के फूल उपहार के रूप में मां को अवश्य देते हैं।

थाईलैंड में मातृत्व दिवस थाइलैंड की रानी के जन्मदिन पर मनाया जाता है।

भारत में इसे कस्तुरबा गांधी के सम्मान में मनाए जाने की परंपरा है।

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बाद में यह तारीखें कुछ इस तरह बदली कि वि‍भिन्न देशों में प्रचलित धर्मों की देवी के जन्मदिन या पुण्य दिवस को इस रूप में मनाया जाने लगा। जैसे कैथोलिक देशों में वर्जिन मैरी डे और इस्लामिक देशों में पैगंबर मुहम्मद की बेटी फातिमा के जन्मदिन की तारीखों से इस दिन को बदल लिया गया।

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देवघर : खतरे में है डढ़वा नदी, बालू माफियाओं ने किया बर्बाद

NewsCode Jharkhand | 9 October, 2018 3:39 PM
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देवघर की लाइफ लाइन मानी जानेवाली नदी सूखी पड़ी है

देवघर। भोले बाबा की नगरी देवघर में सभी त्योहार बड़े ही धूमधाम से मनाए जाते हैं। छठ पर्व भी इस जगह पूरी श्रद्धा-भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस त्‍योहर पर सबसे ज्‍यादा भीड़ देवघर की लाइफ लाइन डढ़वा नदी के घाट पर उमड़ती थी।

अब इस नदी पर खतरा मंडरा रहा है क्‍योंकि नदी सूख गई है। नदी में पानी नहीं होने से छठ वहां नहीं होता। बालू माफियाओं ने बालू निकालकर नदी को बर्बाद कर दिया है। बालू निकाले जाने से नदी में मिट्टी और पत्‍थर जमा हो गया है। अब यह नदी पूरी तरह से बंजर हो गई है। नदी में पानी नहीं के बराबर है।

नदी की दुर्दशा देखकर यहां के छठ पूजा समिति ने नाराजगी जताते हुए नगर निगम से इसकी पुनरुद्धार की अपील की है। नगर निगम पुररुद्धार करने में आनाकानी करेगा तो समिति आंदोलन छेड़ेगी।

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छठ पूजा सिमि‍ति के शैलेन्‍द्र कुमार ने बताया कि यह नदी देवघर की शान हुआ करती थी। शहर के नजदीक होने और स्वच्छ जल के कारण छठ पूजा इसी नदी के तट पर मनाया जाता था। बालू माफियाओं ने इस नदी केा बर्बाद करके रख दिया।

नदी में पानी नहीं हेाने से अब श्रद्धालु यहां नहीं आते। सरकार ने भी नदी केा बचाने में लापरवाही रवैया अपनाई है। देवघर से कुछ दूर इस नदी पर छोटा बांध बना दिया है। इसके वजह से भी पानी का बहाव बाधित हुआ है।

उन्‍होंने बताया कि हमलोगों को यह चिंता है कि छठ पूजा कहां करेंगे? घाट का निरीक्षण करने के दौरान नदी की दुर्दशा देखकर समिति ने तय किया कि नगर निगम को आवेदन देकर इसे बचाने की गुहार लगाई जाएगी। नगर निगम पहल नहीं करेगा तो आंदोलन छेड़ दिया जाएगा।

वहीं स्‍थानीय लेागों ने इस नदी की विकट स्थिति के लिए जिला प्रशासन को जिम्‍मेवार ठहराया है। उनलोगों ने बताया कि लापरवाही बरतने से ही बालू माफियाओं ने नदी से बालू निकालकर इसे बेकार कर दिया।

नगर निगम के जोनल चेयरमैन वशिष्ठ नारायण सुमन की मानें तो वाकई स्थिति गंभीर है। उन्‍होंने इस मामले को नगर निगम बोर्ड की बैठक में उठाने की बात कही। उन्‍होंने बताया कि विभागीय अनदेखी की वजह से नदी की दुर्दशा हुई है।

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रांची : लोक आस्था का महापर्व छठ उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ संपन्न

NewsCode Jharkhand | 14 November, 2018 1:02 PM
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रांची। लोक आस्था का चार दिवसीय महापर्व छठ उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ राज्यभर में संपन्न हो गया। राजधानी रांची के स्वर्णरेखा, जुमार नदी के अलावा हटनिया तालाब, बड़ा तालाब सहित अन्य जलाशयों में श्रद्धालुओं ने बुधवार को सवेरे अर्घ्य अर्पित किया।

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने जमशेदपुर के सिदगोड़ा स्थित सूर्य मंदिर जाकर अर्घ्य अर्पित किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने झारखंड सहित देशवासियों की समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

उधर हजारीबाग में ख्याति प्राप्त झील के साथ अन्य जलाशयों में छठ महापर्व को लेकर श्रद्धालुओं की भीड़ रही। इधर गुमला के छठ तालाब, बांध तालाब सहित अन्य जलाशयों में भगवान भाष्कर को अर्घ्य अर्पित करने के लिए छठव्रतियों की भीड़ उमड़ी। विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उरांव ने कोयल नदी जाकर अर्घ्य अर्पित किया।

इस मौके पर दिनेश उरांव ने कहा कि कोयल नदी घाट पर अगले वर्ष तक सूर्य मंदिर निर्माण का कार्य पूरा हो जाएगा। इस बीच साहिबगंज जिले के गंगा तट पर उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ ही छठ महापर्व संपन्न हो गया।

इससे पहले मंगलवार शाम को  राज्यभर में छठव्रतियों ने  अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया। प्रकृति पर्व छठ के अवसर पर व्रत करने वाले उपासक और श्रद्धालु नदी और तालाबों की किनारे आज दोपहर बाद पहुचे और विधि विधान से पूजा अर्चना की। इस पर्व के मद्देनजर व्यापक रूप से सफाई की गई थी और रास्तों में भी विद्युत सज्जा की गयी थी।

सुरक्षा के मद्देनजर पुलिसकर्मियों को तैनाती की गई थी और श्रद्धालुओं को आने-जाने में असुविधा न हो इसके लिए शहर में बड़े वाहनों के प्रवेश में रोक लगाई थी। इसके साथ ही इनके मार्ग में बदलाव किया गया था।

रांची में हटनिया तालाब, बड़ा तालाब, कांके डैम, धुर्वा डैम, स्वर्ण रेखा नदी तट के अलावे बड़ी संख्या में अन्य तालाबों के किनारे लोगों ने भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया। बुंडू स्थित सूर्य मंदिर तालाब में भी दूर-दूर से आये लोगों ने भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया। जमशेदपुर के सिदगोड़ा स्थित सूर्य मंदिर में मुख्यमंत्री रघुवर दास ने छठव्रतियों ने भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया। यहां दो कृत्रिम तालाबों का निर्माण किया गया है।

मुख्यमंत्री ने छठ घाट से अस्ताचलगामी भास्कर को प्रणाम करते हुए झारखण्ड सहित समस्त देशवासियों की समृद्धि और खुशहाली के लिए प्रार्थना की। स्वच्छता, संयम, सादगी, नियम, नेम और निष्ठा के प्रति समर्पित सभी छठव्रतियों की श्रद्धा में अपनी गहरी आस्था प्रकट करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि छठी मईया सबकी मनोकामना पूरी करें।

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रांची: कांठीटांड़-कांके-विकास तक रिंग रोड 10 साल बाद बन कर हुआ तैयार

NewsCode Jharkhand | 13 November, 2018 1:45 PM
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10 साल बाद छह लेन वाले रिंग रोड फेज-7 का काम पूरा

रांची । करीब 10 साल के इंतजार के बाद रांची रिंग रोड सेक्शन सेवन बन कर तैयार हो गया है। छह लेन वाली 23.575 किमी लंबी इस सड़क पर गाड़ियां भी दौड़ने लगी हैं। यह रिंग रोड रांची-डालटनगंज मुख्य मार्ग (एनएच 75) पर कांठीटांड़ से शुरू होकर कांके रोड होते हुए रांची-रामगढ़ मुख्य मार्ग (एनएच 33)  पर विकास (नेवड़ी) से मिलता है। यानी दो महत्वपूर्ण राष्ट्रीय उच्च पथ एनएच 75 व एनएच 33 को यह जोड़ रहा है।

इस सड़क के बन जाने से बड़ी संख्या में गाड़ियां रांची शहर रातू रोड-बरियातू रोड में प्रवेश नहीं करेंगी, बल्कि रिंग रोड के सहारे निकल जायेंगी। इसका औपचारिक उदघाटन जल्द होगा. इस सड़क का निर्माण आइएलएफएस व पथ निर्माण विभाग की ज्वायंट वेंचर कंपनी झारखंड त्वरित पथ विकास कंपनी लिमिटेड (जेएआरडीसीएल) ने कराया है।

रिंग रोड के सेक्शन थ्री, फोर, फाइव व सिक्स का निर्माण भी इसी कंपनी  के माध्यम से कराया गया है।  रिंग रोड सेक्शन -7 (एक नजर में)  सड़क की लंबाई 23.575 किमी कहां से कहां तक कांठीटांड़ से नेवड़ी सड़क की चौड़ाई  छह लेन (30.5 मीटर) निर्माण पर खर्च 452 करोड़ (लगभग) काम करानेवाली कंपनी आइएलएफएस बड़े पुलों की संख्या 3 छोटे पुलों की संख्या 6 फ्लाइओवर की संख्या 01 अंडर पास की संख्या 7 रेलवे ओवर ब्रिज 01 कलवर्ट की संख्या 53 बस पड़ाव की संख्या 16 इस रोड के बन जाने से खास कर बड़े वाहनों व लंबी दूरी वाली गाड़ियां शहर में नहीं घुसेंगी।

बड़ी गाड़ियां शहर में घुस कर लंबे समय तक जाम में फंसी रहती हैं और ईंधन भी अत्यधिक बर्बाद होता है। अब ऐसा नहीं होगा. शहर की मुख्य सड़कों  पर से थोड़ा ट्रैफिक कम होगा। रिंग रोड के माध्यम से 23.5 किमी की दूरी तय करने में अधिकतम 20 मिनट का ही समय लगेगा, जबकि शहर के अंदर घुस कर इतनी दूरी तय करने में एक घंटे का समय लग रहा था. वहीं बड़े वाहनों के साथ नो इंट्री की भी बाध्यता नहीं रहेगी. वे 24 घंटे चल सकेंगे।

रिंग रोड सेक्शन सेवन का शिलान्यास वर्ष 2008 में हुआ था। इसके बाद इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ। जिस कंपनी को काम मिला था, उसने इसे पूरा नहीं कराया। काम आधा-अधूरा रह गया था। ऐसे में सरकार ने उसका एग्रीमेंट रद्द कर दिया था। इस दौरान लंबे समय तक काम बंद रहा। बाद में इसका काम जेएआरडीसीएल को दिया गया।

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