मक्का मस्जिद केस में फैसला सुनाने के बाद जज रवींद्र रेड्डी ने आखिर क्यों दिया इस्तीफा ?

हैदराबाद | स्वामी असीमानंद सहित मक्का मस्जिद ब्लास्ट के 5 आरोपियों को एनआईए की स्पेशल कोर्ट ने सोमवार को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि एनआईए एक भी आरोप साबित नहीं कर पाई।

11 साल पुराने इस मामले में फैसला सुनाने के चंद घंटों बाद ही एनआईए कोर्ट के जज के रवींद्र रेड्डी ने इस्‍तीफा दे दिया। उन्‍होंने निजी कारणों को इस्‍तीफा देने की वजह बताई है। उन्होंने कहा कि इसका मक्का मस्जिट ब्लास्ट के फैसले से कोई लेना देना नहीं है इसके बावजूद इस्‍तीफे के साथ कयासों का दौर भी शुरू हो गया।

इस बीच, एआइएमआइएम के प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने ट्वीट किया, ‘मक्का मस्जिद विस्फोट के सभी आरोपियों को बरी करने वाले न्यायाधीश का इस्तीफा देना बहुत संदेहपूर्ण है और मैं न्यायाधीश के फैसले से आश्चर्यचकित हूं।’

एक वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी ने बताया कि न्यायाधीश रेड्डी ने मेट्रोपोलिटन सत्र न्यायाधीश को इस्तीफा भेजा… उन्होंने निजी आधार का हवाला दिया है और इसका मक्का मस्जिद विस्फोट मामले के फैसले से कोई लेना देना नहीं है।

अधिकारी ने कहा कि ऐसा लगता है कि रेड्डी ने इस्तीफा देने का फैसला कुछ समय पहले ही कर लिया था। असीमानंद के अलावा देवेंद्र गुप्ता, लोकेश शर्मा, भरत मोहनलाल रतेश्वर उर्फ भरत भाई और राजेंद्र चौधरी को भी बरी किया गया है।

दूसरी तरफ न्यायाधीश रेड्डी के बारे में एक और चौंकाने वाला सच सामने आया है। बताया जा रहा है कि हैदराबाद बंजारा हिल्स के निवासी कृष्णा रेड्डी ने हैदराबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के सामने जज रवींद्र रेड्डी के खिलाफ एक शिकायत की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि जज रेड्डी ने जल्दबाजी में जमीन कब्जे के मामले में एक आरोपी को बेल दी थी। याचिकाकर्ता ने इस मामले में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे।

रेड्डी 2014 से इस केस की सुनवाई कर रहे थे। हैदराबाद में चौथे एडीशनल मेट्रोपोलिटन सेशंस कोर्ट को एनआईए केसों को देखने के लिए अधिकृत किया गया है। रेड्डी तेलंगाना ज्‍यूडिशियल ऑफिसर्स एसोसिएशन के अध्‍यक्ष भी हैं।

2016 में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच न्‍यायिक अधिकारियों के आवंटन के खिलाफ रेड्डी और एक अन्‍य जज वी वारा प्रसाद के नेतृत्‍व में विरोध प्रदर्शन हुआ था। इस कारण इन जजों के खिलाफ अनुशासनात्‍मक कार्रवाई हुई थी और इनको सस्‍पेंड किया गया था।

वी वारा प्रसाद जजों की एसोसिएशन के सेक्रेट्री और रंगारेड्डी जिले के सेशंस जज थे। इन जजों के खिलाफ अनुशासनात्‍मक कार्रवाई होने के बाद बाकी जजों ने इनके समर्थन में इस्‍तीफा दे दिया था। उसके बाद इनका निलंबन खत्‍म हुआ।

बता दें कि मामले की शुरुआती जांच स्थानीय पुलिस ने की थी और फिर इसे सीबीआई को स्थानांतरित कर दिया गया था। इसके बाद 2011 में देश की प्रतिष्ठित आतंकवाद रोधी जांच एजेंसी एनआईए को यह मामला सौंपा गया।

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इस धमाके में दक्षिणपंथी संगठनों से कथित संपर्क रखने वाले 10 लोग आरोपी बनाए गए थे। मामले की सुनवाई के दौरान 226 चश्मदीदों से पूछताछ की गई और करीब 411 दस्तावेज पेश किए गए। हालांकि अभियोजन पक्ष कोई पुख्ता सबूत पेश करने में नाकाम रहा, जिससे उनका जुर्म सिद्ध हो सके।

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