लोहरदगा : फिल्म फेस्टिवल का शुभारंभ होगा फीचर फिल्म लोहरदगा से

NewsCode Jharkhand | 24 May, 2018 7:51 AM
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लोहरदगा । पूर्ण रूप से झारखंड में निर्मित फ़िल्म “लोहरदगा” (शुरूआती नाम “मनु का सरेंडर) का पहला प्रदर्शन 25 मई को पहला इंटरनेशनल झारखंड फ़िल्म फेस्टिवल में होने वाली है। “लोहरदगा” फ़िल्म से फेस्टिवल का शुभारंभ किया जाएगा।

फ़िल्म के निर्देशक लाल विजय शाहदेव ने बताया कि ये गर्व की बात है कि जिस फ़िल्म में झारखंड के 100 से भी ज़्यादा कलाकारों ने अभिनय किया है उस फिल्म से झारखंड इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल की शुरुआत हो रही है।

लोहरदगा : फिल्म फेस्टिवल का शुभारंभ होगा फीचर फिल्म लोहरदगा से

इस फ़िल्म में मुख्य रूप से संजय मिश्रा, विजय राज़, अखिलेन्द्र मिश्रा, रवि झांकल, दधि पांडेय, नीतू पांडेय, चारुल मालिक, हंसराज जगताप, सुमीत भोकसे, ऋषि ठाकुर, राकिब अरशद, अशोक गोप, मधु रॉय, पंकज सिन्हा, विनोद सोनी, वर्षा लकड़ा, शिशिर पंडित, ओम प्रकाश, काकाजी, चंदा कुमारी, प्रिया अम्बष्ट और सर्वदमन ने जीवंत अभिनय किया है।

झारखंड के लोहरदगा और आसपास की घटनाओं से प्रेरित इस फ़िल्म में दिखाया गया है कि कैसे एक 20 साल का लड़का मनु सेना में जाना चाहता है और किसी दलाल के चक्कर मे फंसकर नक्सल में नाम लिखवा लेता है।

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शर्त ये होती है कि झूठा नक्सली बनकर समर्पण करने के बाद सरकार की पॉलिसी के मुताबिक नौकरी पक्की। पर क्या होता है जब मनु के साथ 19 नौजवान नक्सल बनकर सरेंडर करते हैं। गरीबी और बेरोजगारी से परेशान होकर कैसे नौजवान भटककर नक्सलियों के ग्रुप में शामिल हो रहे हैं।

फेक सरेंडर करवाकर कई संस्था और बड़े ऑफिसर वाहवाही लूटने के प्रयास में सैकड़ों मासूमों की ज़िंदगी से खिलवाड़ करने में लगे हुए हैं।  यह फ़िल्म एक मिशन है ऐसे ही भटके और फंसे हुए मासूमों की ज़िंदगी बचाने के लिए।

यह एक भावनात्मक थ्रिलर है 

इस फ़िल्म में एक ओर जहां गंभीर सामाजिक मुद्दे को दर्शाया गया है वही मनोरंजन का खासा ध्यान रखा गया है। फ़िल्म की निर्मात्री डॉ. नेहा शांडिलया ने बताया कि फ़िल्म की कहानी दिल को छू लेने वाली है और फ़िल्म की कास्टिंग दर्शकों को बहुत पसंद आनेवाली है।

संजय मिश्रा और विजय राज़ की जोड़ी बहुत ही सफल होने वाली है। सभी कलाकारों ने दिलो जान से अपने अपने किरदारों को जिया है। रोज़ क्वाज़ एंटरटेनमेंट और आकृति एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड के बैनर तले बनी ये फ़िल्म दर्शकों को एक अलग अहसास दिलाएगा।

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लौकी का जूस पीने से हुई महिला की मौत? डॉक्टरों ने कही ये बात

NewsCode | 22 June, 2018 7:11 PM
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पुणे। आपने अक्सर सुना होगा कि लोग खुद को स्लिम ट्रिम रखने के लिए कई तरह के फलों और सब्जियों के जूस का सेवन करते हैं और इनमें से लौकी का जूस भी एक है। आयुर्वेद में भी लौकी के जूस को सेहतमंद बताया गया है।

ऐसा कहा जाता है कि लौकी के जूस का यदि खाली पेट सेवन किया जाए तो इससे डायबिटीज और हृदयरोग जैसी कई बीमारियों से निपटा जा सकता है। लेकिन, पुणे में लौकी का जूस पीने महिला की मौत होने की सनसनीखेज खबर सामने आई। लौकी का जूस पीने से महिला की मौत के बाद लोग सकते में हैं।

पुणे के बानेर इलाके में रहने वाली गौरी शाह मॉर्निंग वॉक के बाद लौका का जूस पिया। जूस पीने के बाद उनके पेट में दर्द हुआ और फिर उल्टी होने लगी है। हालात ज्यादा बिगड़ने के बाद उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। 12 जून को अस्पताल में भर्ती होने के बाद डॉक्टरों ने उनका इलाज किया, लेकिन हालात बिगड़ते ही चले गए और 16 जून को डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

डॉक्टरों का कहना है कभी भी अगर लौकी का जूस कड़वा है तो इसे पीने से परहेज करना चाहिए क्योंकि यह सेहत के लिए घातक साबित हो सकता। जहरीले रसायनों के कारण लौकी में कड़वाहट आती है और इसका असर एक धीमे जहर की तरह होता है जिससे व्यक्ति को बेचैनी, दस्त, और खून की उल्टियां होने लगती हैं।

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आयुर्वेदिक दवाओं की सलाह देने वालों के अनुसार, खाली पेट लौकी का जूस पीने से डायबिटीज, हृदयरोग, पेशाब से संबंधित समस्याओं में लाभ होता है। इसलिए लोग किसी की सलाह पर लौकी का जूस पीने लगते हैं। लेकिन जब लौकी का जूस कड़ुवा हो तो इसे पीने परहेज करना चाहिए नहीं तो घातक साबित हो सकता है।

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देवघर : श्रावणी मेला की तैयारी को लेकर डीआरएम ने जसीडीह स्टेशन का किया दौरा

NewsCode Jharkhand | 22 June, 2018 9:55 PM
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देवघर। विश्‍व प्र‍सिद्ध श्रावणी मेला तैयारी को लेकर आसनसोल रेलवे डिवीजन के डीआरएम पीके मिश्रा सहित अन्‍य अधिकारियों ने जसीडीह स्टेशन का दौरा किया। दौरा के दौरान डीआरएम ने मेला शुरु होने से पहले स्‍टेशन का सौन्‍दर्यीकरण व यात्री सुविधाओं को पूरा कर लेने का आदेश रेलवे अधिकारियों को दिया।

गौरतलब है कि स्‍टेशन सौन्‍दर्यीकरण का काम पहले से चल रहा है तथा मेला आरंभ होने से पहले पूरा कर लिया जाना है। डीआरएम ने पत्रकारों से कहा कि इस दौरा का मकसद मकसद जसीडीह रेलवे स्‍टेशन में श्रावणी मेला को लेकर चल रहे कार्यों का जायजा लेना है।

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उन्‍होंने कहा कि सौन्‍दर्यीकरण का काम मेला शुरु होने से पहले शुरु हुआ था जिसे बहुत जल्‍द पूरा कर लिया जाएगा। जो काम बांकी रह गया है उसे जल्‍द से जल्‍द पूरा करने का निर्देश रेलवे अधिकारियों को दिया गया है। कुछ कार्यों के मेला से पहले पूरा होने पर उन्‍होंने संतोष व्‍यक्‍त किया। डीआरएम ने कहा कि यात्रियों की सुविधा के लिए जसीडीह स्टेशन में एलईडी हाई मास्ट टावर तीन लगाये गए हैं।

फुटओवर ब्रिज रैंप का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है, इससे मेला में आनेवले वयस्‍क लोगों को सुविधा होगी। स्टेशन के बाहरी परिसर का समतलीकरण किया जा रहा है। यह जगह पहले काफी संकरी थी लेकिन समतलीकरण के बादखुला विशाल परिसर यात्रियों को मिलेगा। एक पड़ाव एरिया बनाया जाएगा जिसमें बरसात के समय लगभग 2500 लोग बैठ सकेंगे और आराम कर पाएंगे।

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कोडरमा : खदान में मजदूर के सिर पर गिरा पत्थर का टुकड़ा, मौके पर मौत

NewsCode Jharkhand | 22 June, 2018 9:22 PM
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कोडरमा। जिले के नवलशाही थाना क्षेत्र अन्तर्गत बच्छेडीह पंचायत के जमडीहा मौजा में संचालित पत्थर खदान में कार्यरत मजदूर के सिर पर पत्थर का टुकड़ा धंसकर गिरने से मौके पर उसकी मौत हो गई, जबकि एक अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गया। मृतक की पहचान पवन दास (24 वर्ष) व घायल की पहचान अनिल कुमार दास (28 वर्ष) के रूप में की गई है। दोनों थानाक्षेत्र के जमडीहा के रहनें वाले हैं।

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घटना शुक्रवार की सुबह सात बजे की बताई गई है। जानकारी अनुसार दोनों मजदूर सुबह खदान में पहुंच कर ड्रिल किये गये होल में ब्लास्टिंग के लिए मशाला भरने का कार्य कर रहे थे। इसी दौरान ऊपर करीब पैंतीस से चालीस फिट की ऊँचाई से एक बड़ा पत्थर का हिस्सा सीधा पवन के सिर पर गिर गया जिससे सिर पूरी तरह जख्मी हो गया, जिससे पवन ने मौके पर दम तोड़ दिया, जबकि अनिल गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

घटना के बाद नवलशाही थाना प्रभारी मो शाहीद रजा व एसआई राम कृत प्रसाद मौके पर पहुंच कर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए कोडरमा भेज दिया। तत्पश्चात पुलिस मामले की जांच में जुट गयी।

नहीं था सेफटी का इंतजाम

खदान में कार्यरत मजदरों के सुरक्षा और बचाव के उपाय के इंतजाम नहीं थे। अशोक कुमार गुप्ता और सुरेश चन्द्र साव की उक्त खदान में कार्यरत मजदूरों को न तो खदान संचालक द्वारा सेफटी किट दिये गये थे और ना हीं वहां फस्ट एड की व्यवस्था थी। खदान में बेतरतीब तरीके से कार्य करवाये जा रहे थे और सेफटी नियमों का पूरी तरह उल्लंघन किया जा रहा था। अधिकांश संचालित पत्थर खदानों में यही स्थिति है। जब कोई दुर्घटना होती है तो पत्थर खदान के मालिक या संचालक लाश की सौदेबाजी में जुट जाते हैं और पुलिस को मेल में लेकर मामले को रफा दफा करवा देते है।

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