नाइट क्लब का उद्धाटन करने पहुंचे BJP सांसद साक्षी महाराज, लोगों ने उड़ाई खिल्ली

NewsCode | 16 April, 2018 6:42 PM
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लखनऊ। अपने विवादित बयानों से हमेशा सुर्खियां बटरोने वाले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद साक्षी महाराज एक बार फिर चर्चा में हैं। रविवार को साक्षी महाराज लखनऊ में एक नाइट क्लब का उद्घाटन करने पहुंच गए। इस दौरान बीजेपी के कार्यकर्ताओं का विरोध भी उन्हें झेलना पड़ा।

हालांकि, मामले में खुद की खिल्ली उड़ते देख साक्षी महाराज ने अपने बचाव में बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जब उन्हें इस बात की जानकारी हुई तो उन्होंने खुद नाराजगी जाहिर की और उन्हें नाइट क्लब का लाइसेंस भी दिखाने को कहा। साक्षी महाराज ने कहा कि वह सिर्फ सांसद ही नहीं, बल्कि एक साधु भी हैं। साधु इस तरह की चीजों से वैसे भी दूर रहते हैं।

बता दें कि रविवार रात BJP सांसद साक्षी महाराज ने लखनऊ के एक नाइट क्लब ‘लेट्स मीट’ का उदघाटन किया। यह नाइट क्लबब लखनऊ के अलीगंज में है। यह एक नाईट लाउंज बार है। यहां डांस और अल्कोहल का इंतजाम रहेगा। भगवा कपड़ों में उद्घाटन करने पहुंचे साक्षी महाराज का विरोध खुद उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने ही किया। बीजेपी कार्यकर्ताओं ने सांसद (साक्षी महाराज) की शिकायत यूपी के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पाण्डेय से भी की है।

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वहीं इस पर लोगों का कहना है कि भगवा चोला व सिद्धांतों की बात करने वाले यह नेता किसी ना किसी बहाने जनता के सामने अपने असली रुप में आ ही जाते हैं।


इससे पहले पिछले साल यूपी में योगी आदित्यनाथ की सरकार में मंत्री स्वाति सिंह बीयर बार का उद्धाटन कर विवादों में फंस गई थीं। विवाद बढ़ने पर राज्य सरकार ने इस बारे में स्वाति सिंह से स्पष्टीकरण मांग लिया था। बीजेपी विधायक और मंत्री स्वाति सिंह के एक बीयर बार के उदघाटन की तस्वीरें सोशल मीडिया और समाचार चैनलों पर वायरल हो गयीं थीं, जिसके बाद विपक्षी दलों ने योगी सरकार पर निशाना साधा है।

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रांची : एबीवीपी सरकार के बल पर छात्र राजनीति और शैक्षणिक संस्थानों कर रही है कब्ज़ा-वाम दल

NewsCode Jharkhand | 21 September, 2018 7:01 PM
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रांचीएबीवीपी राज्य व केंद्र सरकार के बल पर छात्र राजनीति और शैक्षणिक संस्थानों पर कब्जा करना चाहती है। यह छात्र और शैक्षणिक जगत के हितों के खिलाफ है। इससे छात्र का मूल दायित्व शिक्षण कार्य प्रभावित होता है। शिक्षण कार्य के विकास के लिए दहशत और खुले वातावरण का होना जरूरी है।

उक्त बातें आज एआइएसएफ, एआइवाईएफ, एआइडीएसओ, एसएफआई, डीवाईएफआई आइसा और जेसीएम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित प्रेसवार्ता को अल्बर्ट एक्का चौक  स्थित भाकपा कार्यालय में छात्र-युवा नेता संबोधित कर रहे थे।

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प्रेसवार्ता 19 सितंबर को रांची और जमशेदपुर में वाम छात्र-संगठनों के प्रतिरोध मार्च पर एबीवीपी के गुंडों द्वारा हुए हमले के खिलाफ आयोजित की गयी। यह प्रतिरोध मार्च जेएनयू में एबीवीपी की करारी हार के बाद निकाला गया था। सभी छात्र संगठनों ने एक स्वर में इस हमले की कड़ी निंदा की।

सभी छात्र संगठनों ने एकमत स्वर में कहा कि छात्र संगठनों के देशभक्त होने का सर्टिफिकेट एबीवीपी से लेने आवश्यकता नहीं है। छात्र संगठनों का इतिहास आजादी के आंदोलन से लेकर आजादी के बाद भी है, जो देश की एकता व अखंडता के लिए संघर्ष से जुड़ा है।

नेताओं ने कहा कि एबीवीपी की गुंडागर्दी का विरोध हम अपनी वैचारिकता और राजनैतिक चेतना के आधार पर करेंगे और शिक्षण संस्थाओं से लेकर राज्य के सभी जिलों में एक सशक्त अभियान संचालित करेंगे। इस अभियान के तहत एबीवीपी की आपराधिक कार्रवाइयों का पर्दाफाश किया जायेगा।

साथ ही देश में बढ़ते कट्टरवाद और उन्माद से शिक्षा और रोजगार स्तर पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में छात्र-युवाओं को बतायेंगे। छात्र-युवा नेताओं ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई के जरिये शिक्षा के व्यवसायीकरण और रोजगार के अवसर में हो रही कटौती से छात्रों और नौजवानों का ध्यान भटकाया जाता है।

नेताओं ने कहा कि एबीवीपी के साजिशकर्ता व गुंडों की त्वरित गिरफ्तारी नहीं हुई और पुलिस के वैसे पदाधिकारी जिनकी संलिप्तता इस घटना के साथ थी, उन्हें चिह्नित करते हुए निलंबन किया जाये। साथ ही सीसीटीवी फुटेज को सार्वजनिक करते हुए इस घटना की जवाबदेही रांची जिला एसपी लें।

प्रेस वार्ता में एआइडीएसओ के राज्य उपाध्यक्ष अमर महतो व रीमा बंसरियार, एआइएसएफ के रांची जिला सचिव मेहुल मृगेंद्र व लोकेश आनंद, एआइवाईएफ के अजय कुमार सिंह, इप्टा के उमेश नजीर व फरजाना फारूकी, आइसा के नौरिन अख्तर, एसएफआई के अकरम, डीवाईएफआई के संजय पासवान, जेसीएम के अनिकेत ओहदार, जेसीएस के मीर शहबाज संबोधित कर रहे थे।

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गिरिडीह : या अली या हुसैन के नारों से गूंज उठा इलाका, मुहर्रम पर याद किये गए नवासा-ए-रसूल इमाम हुसैन

NewsCode Jharkhand | 21 September, 2018 7:41 PM
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गिरिडीह। इस्लामिक नए साल की दस तारीख को नवासा-ए-रसूल इमाम हुसैन अपने 72 साथियों और परिवार के साथ मजहब-ए-इस्लाम को बचाने, हक और इंसाफ कोे जिंदा रखने के लिए शहीद हो गए थे।

इमाम हुसैन के शहादत की याद में गिरिडीह में भी मोहर्रम मनाया गया। इस दौरान या अली या हुसैन के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। जिले भर में मुहर्रम पर ताजिया निकाला गया गया और जगह जगह घूम कर गमजदगी का एहतराम किया गया।

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मौके पर जुलूस  की शक्ल में अखाड़ा खेल का प्रदर्शन भी किया गया। शहरी क्षेत्र के बरवाडीह, भण्डारीडीह, पचम्बा आदि क्षेत्रों में सुबह से लेकर शाम तक कई तरह की गतिविधियां संचालित की गई।

इस क्रम में सभी इमामबाड़ों में नजरोनियाज व दुआ की गई। साथ ही कर्बला में फातिहा  की गई।मुहर्रम को लेकर जिले भर में सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम किया गया था । जगह जगह मजिस्ट्रेट के साथ सुरक्षा बल तैनात किए गए थे।

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जुलूस  की वजह से यातायात बाधित न हो इसका भी ध्यान रखा गया था। बताया गया कि हजरत इमाम हुसैन को उस वक्त के मुस्लिम शासक यजीद के सैनिकों ने इराक के कर्बला में घेरकर शहीद कर दिया था।

लिहाजा, 10 मोहर्रम को पैगंबर-ए-इस्लाम के नवासे हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद ताजा हो जाती है। दरअसल, कर्बला की जंग में हजरत इमाम हुसैन की शहादत हर धर्म के लोगों के लिए मिसाल है। यह जंग बताती है कि जुल्म के आगे कभी नहीं झुकना चाहिए, चाहे इसके लिए सिर ही क्यों न कट जाए, लेकिन सच्चाई के लिए बड़े से बड़े जालिम शासक के सामने भी खड़ा हो जाना चाहिए।

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हुसैन हक की आवाज बुलंद करने के लिए ही शहीद हुए थे। बताया गया कि कर्बला के इतिहास को पढ़ने के बाद मालूम होता है कि यह महीना कुर्बानी, गमखारी और भाईचारगी का महीना है, क्योंकि हजरत इमाम हुसैन ने अपनी कुर्बानी देकर पूरी इंसानियत को यह पैगाम दिया है कि अपने हक को माफ करने वाले बनो और दूसरों का हक देने वाले बनो।

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जमशेदपुर : सफाई की बाट जोह रही कचरे से भरी स्वर्णरेखा नदी

NewsCode Jharkhand | 21 September, 2018 7:28 PM
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जमशेदपुर। जमशेदपुर शहर की जीवनरेखा स्वर्णरेखा नदी इन दिनों सफाई की बाट जोह रही है। नदी में चारों तरफ कचरे भरे पड़े हैं। लेकिन इसकी सफाई पर कोई ध्यान नहीं दे रहा।

वैसे पूूरे देश भर में स्‍वच्छता  पखवाड़ा चलाया जा रहा है, लेकिन इस जीवनरेखा  नदी के सफाई पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है।

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वैसे स्वर्णरेखा नदी जमशेदपुर के लिए लाइफ लाइन इसलिए है, क्योंकि पूरे शहर के लिए पानी का एक मात्र साधन यही नदी है, इतना ही नहीं टाटा कंपनी में भी पानी इसी नदी से पहुंचता है।

विसर्जन के बाद मूर्तियों के पड़े अवशेष

इस नदी का हाल इन दिनों खस्ता है। नदी की पानी फिलवक्त नदी का पानी इन दिनों न पीने लायक है और न ही नहाने लायक। पिछले दिनों हुए गणपति विसर्जन के बाद मूर्तियों के अवशेष पड़े हैं और इसकी सफाई की कोई व्यवस्था अब तक नहीं की गई है।

आलम ये हैं की पूरी नदी कचड़े से भर सा गया है। वैसे इन दिनों देश भर में स्वच्छता पखवाड़ा चलाकर साफ सफाई की जा रही है, लेकिन इस प्राणदायिनी नदी पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है।

नदी में आने वाले लोगों के अनुसार नदी का पानी इतना दूषित हो चुुका है कि ये न ही पीने लायक है और न ही नहाने लायक। अब सोचने वाली बात ये है कि जब नदी ही दूषित है, तो फिर स्वच्छता अभियान किस काम का।

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